1509 – विजय नगर सम्राज्य के सम्राट के रूप में महाराज कृष्णदेव राय की ताजपोशी हुई।
1549 – फ्रांस ने इंग्लैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1605 – फीनलैंड के शहर ओलू की स्थापना स्वीडन के राजा चार्ल्स नवम ने की।
1609 – वेनिस की सीनेट ने गैलिलियो द्वारा तैयार दूरबीन का निरीक्षण किया।
1700 – डेनमार्क और स्वीडन में शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।
1763 – वर्षों के संघर्ष के बाद अंतत: कैनेडा, पेरिस समझौते के आधार पर फ़्रांस के अधिकार से स्वतंत्र हुआ।
1771 - इंग्लैंड में हॉर्शम में पहला रिकॉर्ड शहर क्रिकेट मैच खेला गया।
1786 – अमेरिकी कांग्रेस ने चांदी के डॉलर और मुद्रा के लिए दसमलव प्रणाली को स्वीकार किया।
1788 - पहली बार 1614 के बाद से, फ्रांस के राजा लुई XVI मई 1789 में पहली बार सम्पदा-सामान्य बैठक बुलाई जाने के लिए सहमत हुए।
1839 - बीटा थिता पिई ऑक्सफ़ोर्ड, ओहियो में स्थापित की गई।
1864 – जेनेवा में रेड क्रॉस की स्थापना हुई।
1876 – थॉमस अल्वा एडिशन ने मिमियोग्राफ का पेटेंट कराया।
1887 - अंतोनियो गज़मैन ब्लैंको वेनेजुएला ने फ्रांस के राष्ट्रपति के रूप में अपनी अवधि पूरा किया।
1899 – ए.टी. मार्शल ने रेफ्रीजरेटर का पेटेंट कराया।
1900 – बोस्टन में पहले डेविस कप श्रृंखला की शरूआत हुई।
1919 – रावलपिंडी की संधि में ब्रिटेन ने अफगानिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी।
1941 – नाज़ी जर्मनी के सैनिकों ने सोवियत संघ पर आक्रमण के तीन महीने बाद लेनिन्ग्राड का परिवेष्टन कर लिया।
1942 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बम्बई (अब मुंबई) सत्र में ‘भारत छोड़ो प्रस्ताव’ पारित किया।
1945 – सोवियत संघ ने द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1945 – अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी टूमैन ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किए।
1947 – पाकिस्तान ने अपने राष्ट्रीय ध्वज को मंजूरी दी।
1950 - फ्लोरेंस चाडविक ने 13 घंटे, 22 मिनट इंग्लिश चैनल में तैरने का रिकॉर्ड बनाया।
1954 – फ़िलीपीन की राजधानी मनीला में दक्षिण पूर्वी एशिया के संयुक्त सुरक्षा समझौते सीटो पर हस्ताक्षर हुए।
1956 – बेल्जियम के मेरीसिनेल्ले की खदान में आग लगने और विस्फोट से 26 श्रमिकों की मौत हुई।
1963 - इंग्लैंड के बकिंघमशायर शहर में ट्रेन डकैती हुई।
1967 – दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के समूह की स्थापना के लिए इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड की बैठक आयोजित की गई।
1967 – आजादी के बाद पहली बार केंद्र सरकार को लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
1973 - दक्षिण कोरियाई राजनीतिज्ञ किम डेए-जुंग को केसीआईए ने टोक्यो में अपहरण किया गया।
1988 – अफगानिस्तान में 9 साल के युद्ध के बाद रूसी सेना की वापसी शुरू हुई।
1988 – ईरान और इराक के बीच आठ वर्षों तक चले संघर्ष के बाद युद्ध विराम की घोषणा की गई।
1990 – इराक़ के तत्कालीन तानाशाह सददाम ने घोषणा की कि उसने कुवैत को 19वें प्रांत के रुप में अपने देश का भाग बना लिया है।
1991 – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तरी और दक्षिण कोरिया की सदस्यता को मंजूरी दी।
1994 – इजरायल और जॉर्डन को जोडने वाले (लिंक) रोड़ खुला।
2002 - ताइवान आज़ाद होने के लिए जनमत संग्रह योजना से पीछे हटा।
2003 - पन्द्रह छोटे देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ में ताइवान की सदस्यता का समर्थन किया।
2007 - एक्सनाना गुसमाओ पूर्वी तिमोर के प्रधानमंत्री बने।
2004 - इटली ने बोफ़ोर्स दलाली मामले के मुख्य आरोपी ओट्टाविया क्वात्रोची को भारत को सौंपने से इन्कार किया।
2004 - जापान ने चीन को पराजित करके एशिया कप फ़ुटबाल जीता।
2013 – पाकिस्तान के क्वेटा में आत्मघाती हमले में 28 लोग मारे गए।
2019 - राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने श्री नानाजी देशमुख (मरणोपरांत), डॉ. भूपेन्द्र कुमार हजारिका (मरणोपरांत) और श्री प्रणब मुखर्जी को ‘भारत रत्न’ अलंकरण प्रदान किए।
2019 - विश्व तीरंदाजी ने भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआइ) को अपने दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने के लिए निलंबित कर दिया ।
2019 - राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2019 को मंजूरी दी।
2020 - श्री गिरीश चंद्र मुर्मू ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के रूप में पदभार संभाला।
2020 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी स्मृति और दर्शन समिति में, राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र- स्वच्छ भारत मिशन पर एक संवाद एवं अनुभव केंद्र का उद्घाटन किया।
2021 - तोक्यो ओलंपिक खेलों का समापन हुआ।
2022 - राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर मेले में भगदड़ से 3 महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई , कई घायल।
2022 - राज्यसभा ने उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को विदाई दी।
2022 - इस्रायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी।
2022 - भारतीय सेना ने हिम ड्रोन-ए-थॉन कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
2022 - 22 गोल्ड, 16 सिल्वर और 23 ब्रान्ज मेडल* के साथ भारत ने किया कामनवेल्थ गेम्स 2022 का सुखद समापन।
2023 - न्यायमूर्ति तालापत्र ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के 33वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
2023 - संसद ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2023 को राज्यसभा की मंजूरी के साथ पारित कर दिया।
2023 - राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग विधेयक 2023 को संसद की मंजूरी मिली व विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ।
2023 - केरल समान नागरिक संहिता के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाला पहला राज्य बना।
2023 - भारत-वियतनाम संयुक्त व्यापार उप-आयोग (जेटीएससी) की पांचवीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई।
1904 - त्रिभुवन नारायण सिंह - भारतीय राजनेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे।
1908 - सिद्धेश्वरी देवी - शास्त्रीय संगीत गायिका।
1915 - भीष्म साहनी, भारतीय लेखक।
1921 - वुलिमिरि रामालिंगस्वामी, भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक।
1940 – अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित क्रिकेटर दिलीप नारायण सरदेसाई का गोवा के मडगांव में जन्म हुआ।
1941 - लता देसाई - गुजरात की एक डॉक्टर जिन्होंने 1980 में अपने पति डॉ. अनिल देसाई और कुछ दोस्तों के साथ मिलकर सोसाइटी फॉर एजुकेशन वेलफेयर की स्थापना की।
1942 - पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह खुल्लर।
1948 - कपिल सिब्बल - प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ।
1949 - प्रसन्न आचार्य - बारहवीं और तेरहवीं लोकसभा के सदस्य।
1952 - रामचंद्र सुधाकर राव - एक पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी।
1955 - राजीव महर्षि भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा संयुक्त राष्ट्र में बॉर्ड ऑफ ऑडिटर के अध्यक्ष बने।
1975 - जन बार्ला - भारत के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (2019) बने।
1994 - साइखोम मीराबाई चानू एक भारतीय भारोत्तोलन खिलाड़ी (ओलंपिक एथलीट)।
1948 – जर्मनी के संगीतकार रिचर्ड एश्ट्रोविस का निधन हुआ।
2000 - सिधवनहल्ली निजलिंगप्पा एक वरिष्ठ कांग्रेसी राजनेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री थे।
2017 - ग्लेन ट्रैविस कैंपबेल एक अमेरिकी गायक, गिटारवादक, गीतकार, टेलीविजन होस्ट औरु अभिनेता थे।
2020 - पूर्व कांग्रेस नेता और तेलंगाना से आठ बार सांसद रहे नंदी येलैया (85) का निधन हुआ।
2021 - बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अनुपम श्याम (63) का लंबी बीमारी के बाद मुम्बई में निधन हुआ।
2023 - स्पेनिश प्रोफ़ेशनल रोड रेसिंग साइकिल चालक
फेडरिको मार्टिन बहामोंटेस (95) का निधन हुआ।
2023 - प्रसिद्ध कलाकार, क्यूरेटर और कला कार्यकर्ता लिब्बी न्यूमैन (100) का निधन हो गया हुआ।
2023 - अमेरिकी संगीतकार सिक्सटो रोड्रिग्ज़ (81) का निधन हुआ।
मुनि श्री निस्वार्थसागर जी मुनि दीक्षा ( जैन , श्रावण शुक्ल चतुर्थी )।
मेला तीज (जयपुर का दूसरा दिन)।
त्रिभुवन नारायण सिंह जयन्ती।
श्री वुलिमिरि रामालिंग स्वामी जयन्ती।
श्री दिलीप नारायण सरदेसाई जयन्ती।
श्री सिधवनहल्ली निजलिंगप्पा पुण्य दिवस।
कृपया ध्यान दें
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चंबा, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार सुबह एक भीषण बस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास एक बस अचानक पहाड़ी से नीचे सड़क पर जा गिरी। हादसा इतना गंभीर था कि बस के चालक और परिचालक समेत 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल बताए जा रहे हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस-प्रशासन को सूचना दी। घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त बस से बाहर निकाला गया और उपचार के लिए सिविल अस्पताल तीसा भेजा गया। तीसा-बैरागढ़ रोड पर चालुज मोड़ के पास हादसा प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बस बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही थी। इसी दौरान चालुज मोड़ के पास वह अचानक अनियंत्रित होकर पहाड़ी से नीचे सड़क पर जा गिरी। दुर्घटनाग्रस्त बस शर्मा बस कंपनी की बताई जा रही है। बस का नंबर HP73A-2101 है। हादसे के समय बस में करीब 15 से 20 लोग सवार होने की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना के बाद बस की स्थिति देखकर हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। तस्वीरों में बस के चारों पहिए ऊपर की ओर दिखाई दे रहे हैं, जबकि उसकी छत सड़क से लगी हुई थी। 7 लोगों की मौत, चालक और परिचालक भी शामिल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में चार पुरुषों और तीन महिलाओं की मौत हुई है। मृतकों में बस चालक रूप सिंह और परिचालक तेज सिंह भी शामिल हैं। मृतकों की पहचान जगदेव शर्मा (50), देस राज (35), तेज सिंह (39), जगदेई (24), हरदेई (43), नीलम (34) और रूप सिंह (35) के रूप में हुई है। 11 लोग घायल हादसे में घायल हुए 11 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। घायलों में बच्चे भी शामिल हैं। घायलों की पहचान कर्ण सिंह उर्फ साहिल (18), सुष्मिता (32), प्रियंका (5), हर्षु (4), पानो देवी (41), काव्या (11), धन्नी (40), धर्मों देवी (62), अप्रित मंगल (11), नेहा (10) और विजय कुमार (34) के रूप में बताई गई है। घायलों को अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से घायलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने शुरू की जांच हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव अभियान चलाकर बस में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। तीसा थाना के एडिशनल एसएचओ अनुभव शर्मा ने हादसे की पुष्टि की है। दुर्घटना आखिर किस वजह से हुई, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल चंबा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाएं अक्सर गंभीर रूप ले लेती हैं। तीखे मोड़, संकरी सड़कें, ढलान और मौसम संबंधी परिस्थितियां वाहन चालकों के लिए चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे में इस हादसे के बाद एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा, सड़क की स्थिति और यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्य और घायलों के इलाज पर है। हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक और रणनीतिक खींचतान के बीच भारत ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार के अनुसार, सर्वे ऑफ इंडिया के अपडेटेड मैप में अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को आधिकारिक तौर पर मानकीकृत नाम और पहचान दी गई है। इनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती गांव, पहाड़ी दर्रे, एक ग्लेशियल झील और युद्ध से जुड़े स्मारक शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के नाम बदलकर उन्हें अपने नक्शे और आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल करने की कोशिश करता रहा है। भारत ने चीन की इस नीति का लगातार विरोध किया है और अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है। 27 जगहों की आधिकारिक पहचान क्यों महत्वपूर्ण? गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन जगहों के नाम अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किए गए हैं। सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र में इनकी पहचान दर्ज करने का उद्देश्य स्थानों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्टता बनाए रखना है। सरकार के इस कदम को केवल नामकरण की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में किसी क्षेत्र की आधिकारिक पहचान और उसका मानचित्रण रणनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इन 27 स्थानों में कई ऐसे इलाके हैं, जिनका भारत-चीन सीमा विवाद और 1962 के युद्ध के इतिहास से सीधा संबंध रहा है। लोंगजू, माजा और बिसा जैसे सीमावर्ती गांव भी शामिल अपर सुबनसिरी जिले के तीन सीमावर्ती गांवों लोंगजू, माजा और बिसा को भी आधिकारिक पहचान दी गई है। ये क्षेत्र भारत-चीन सीमा के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। इसी क्षेत्र में जो ला, रिजा ला और पुकुर ला जैसे पहाड़ी दर्रे भी शामिल हैं। तवांग जिले में स्थित थाग ला दर्रा भी इस सूची का हिस्सा है। थाग ला का संबंध 1962 के भारत-चीन युद्ध से रहा है। लोंगजू भी सीमा विवाद के शुरुआती संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है। इसलिए इन स्थानों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र में स्पष्ट पहचान मिलना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 1962 के युद्ध की याद दिलाते हैं ये स्थान अरुणाचल प्रदेश के कई स्थान भारत-चीन युद्ध के इतिहास से जुड़े हुए हैं। तवांग का जसवंत गढ़ राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की स्मृति से जुड़ा है, जिन्हें 1962 के युद्ध के दौरान उनके साहस के लिए याद किया जाता है। अपर सुबनसिरी में शेर-ए-थापा मेमोरियल भी इसी संघर्ष की स्मृति से जुड़ा है। हवलदार शेर थापा ने रियो ब्रिज क्षेत्र में चीनी सेना का मुकाबला किया था। थाग ला दर्रा भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसी क्षेत्र से नमका चू घाटी का इलाका जुड़ा है, जहां 1962 के संघर्ष के दौरान भारत और चीन की सेनाओं के बीच गंभीर सैन्य टकराव हुआ था। कौन-कौन से इलाके सूची में हैं? 27 आधिकारिक रूप से पहचाने गए स्थानों में विभिन्न जिलों के इलाके शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से: अपर सुबनसिरी: लोंगजू, माजा, बिसा, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, जो ला, रिजा ला और पुकुर ला तवांग: थाग ला और जसवंत गढ़ अंजाव: बारा कुंडन, छोटा कुंडन और धन बारी चांगलांग: प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, टेरिटनगर और रामनगर वेस्ट कामेंग: सागर, पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी लोहित: शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलांग नगर इनके अलावा सूची में सम्भो सरोवर नाम की एक ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियल झील और युद्ध से जुड़े स्मारक भी शामिल हैं। चीन ने अप्रैल में बदले थे 23 जगहों के नाम भारत का यह कदम चीन की उस नीति की पृष्ठभूमि में आया है, जिसके तहत बीजिंग समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थानों के नाम बदलकर उन्हें अपने आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल करता रहा है। अप्रैल में चीन ने अरुणाचल प्रदेश की 23 जगहों के लिए नए चीनी नाम घोषित किए थे। चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिण तिब्बत' के रूप में दावा करता रहा है, जबकि भारत उसके इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। भारत का कहना है कि किसी स्थान का काल्पनिक नाम बदल देने से जमीन पर उसकी वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। नई दिल्ली लगातार यह दोहराती रही है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत का संदेश: नाम बदलने से जमीन की हकीकत नहीं बदलती अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को भारतीय आधिकारिक मानचित्र में मानकीकृत नाम देना इसी व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका संदेश यह है कि चीन द्वारा किसी भारतीय क्षेत्र या स्थान का नाम बदलने से उस क्षेत्र की संप्रभुता या प्रशासनिक स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सीमा विवाद के बीच नक्शों और आधिकारिक दस्तावेजों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि दोनों देश अपने-अपने दावों को ऐतिहासिक रिकॉर्ड, मानचित्र और प्रशासनिक नियंत्रण के आधार पर पेश करते रहे हैं। भारत के लिए यह कदम विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश के कई सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संचार और सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ स्थानीय क्षेत्रों की स्पष्ट प्रशासनिक पहचान भी रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है। आगे क्या? भारत-चीन सीमा विवाद का अंतिम समाधान केवल स्थानों के नाम बदलने या नए नक्शे जारी करने से नहीं होगा। वास्तविक चुनौती सीमा पर स्थिरता बनाए रखने, दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक संवाद जारी रखने तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मतभेदों का समाधान तलाशने की है। फिलहाल 27 स्थानों को भारतीय आधिकारिक मानचित्र में पहचान देने का कदम यह जरूर दिखाता है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत अपने प्रशासनिक और कूटनीतिक दावे को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं छोड़ना चाहता। चीन की ओर से नाम बदलने की कोशिशों के जवाब में भारत का रुख साफ है—किसी स्थान का नाम बदलने से उसकी भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक नियंत्रण या वास्तविकता नहीं बदलती।
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले से मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। कोतवाली क्षेत्र के रांगतोली गांव में एक गोशाला के पास नवजात शिशु लावारिस हालत में मिला। उसके मुंह में रबर ठूंसी हुई थी। समय रहते ग्रामीणों और पुलिस की मदद से नवजात को अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उसकी जान बच गई। फिलहाल बच्चे का इलाज चल रहा है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। महिला की नजर पड़ी, ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह एक महिला गोशाला की ओर जा रही थी, तभी उसकी नजर नवजात पर पड़ी। महिला ने तुरंत ग्राम प्रधान संतोष गुसाईं और ग्राम प्रहरी को सूचना दी। इसके बाद ग्राम प्रधान ने मौके पर पहुंचकर पुलिस को घटना की जानकारी दी। मुंह में ठूंसी थी रबर, सांसें चलती मिलीं ग्राम प्रधान के अनुसार, जब वे मौके पर पहुंचे तो नवजात के मुंह में बाल बांधने वाली रबर ठूंसी हुई थी। रबर निकालने पर पता चला कि बच्चे की सांसें चल रही हैं। इसके बाद पुलिस ने तत्काल नवजात को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे बाल कल्याण समिति (CWC) की निगरानी में बेस अस्पताल श्रीकोट रेफर कर दिया गया। ग्रामीणों में आक्रोश, कड़ी कार्रवाई की मांग घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों और स्थानीय महिलाओं ने इस घटना को बेहद अमानवीय बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि किसी नवजात को इस तरह असहाय अवस्था में छोड़ना गंभीर अपराध है। पुलिस ने शुरू की जांच पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और नवजात को वहां छोड़ने वाले व्यक्ति या लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। आसपास के क्षेत्र के लोगों से पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।