नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के उस्मानपुर इलाके में रविवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में मकान की छत गिरने से पति-पत्नी की मौत हो गई। हादसे के समय दंपति का नौ वर्षीय बेटा भी घर में मौजूद था, लेकिन वह सुरक्षित बच गया। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान 32 वर्षीय टिंकू और उनकी 30 वर्षीय पत्नी उर्मिला के रूप में हुई है। रात करीब 10:31 बजे गावड़ी एक्सटेंशन स्थित हंसराज डेयरी के पास एक मकान की छत गिरने की सूचना मिलने पर दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
स्थानीय लोगों ने दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले ही दोनों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि करीब 120 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाली ग्राउंड प्लस फर्स्ट फ्लोर इमारत की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे दंपति मलबे में दब गए। हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है।
पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि छत गिरने के पीछे निर्माण संबंधी खामी, जर्जर भवन या कोई अन्य वजह जिम्मेदार थी।
दिल्ली के उस्मानपुर में दर्दनाक हादसा, मकान की छत गिरने से पति-पत्नी की मौत; बेटा सुरक्षित बचा
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के उस्मानपुर इलाके में रविवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में मकान की छत गिरने से पति-पत्नी की मौत हो गई। हादसे के समय दंपति का नौ वर्षीय बेटा भी घर में मौजूद था, लेकिन वह सुरक्षित बच गया। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान 32 वर्षीय टिंकू और उनकी 30 वर्षीय पत्नी उर्मिला के रूप में हुई है। रात करीब 10:31 बजे गावड़ी एक्सटेंशन स्थित हंसराज डेयरी के पास एक मकान की छत गिरने की सूचना मिलने पर दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
स्थानीय लोगों ने दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले ही दोनों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि करीब 120 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाली ग्राउंड प्लस फर्स्ट फ्लोर इमारत की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे दंपति मलबे में दब गए। हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है।
पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि छत गिरने के पीछे निर्माण संबंधी खामी, जर्जर भवन या कोई अन्य वजह जिम्मेदार थी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Iran-US Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाली एक बड़े सैन्य अभियान को फिलहाल रोक दिया है और अब दोनों देशों के बीच 3 अगस्त से कूटनीतिक बातचीत शुरू होगी। ट्रंप ने कहा कि यदि यह हमला होता, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य अभियान साबित हो सकता था। उन्होंने कहा कि युद्ध के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देकर बड़े पैमाने पर तबाही टालने की कोशिश की गई है। 'युद्ध नहीं, बातचीत को दिया मौका' एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सोमवार दोपहर से वार्ता शुरू होगी। हालांकि उन्होंने किसी संभावित समझौते की समयसीमा बताने से इनकार किया। ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई की योजना फिलहाल स्थगित कर दी गई है और अब विवाद का समाधान कूटनीतिक बातचीत के जरिए निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह वार्ता 3 अगस्त की दोपहर से शुरू होगी। मैं किसी और युद्ध के बजाय बातचीत के जरिए समाधान चाहता हूं।" 'हमला होता तो भारी तबाही होती' अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि प्रस्तावित सैन्य अभियान बेहद व्यापक था और यदि उसे मंजूरी मिलती, तो ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उनके मुताबिक, युद्ध के बाद हालात सामान्य होने में वर्षों लग सकते हैं, इसलिए कूटनीति बेहतर विकल्प है। ट्रंप ने कहा कि यदि बातचीत सफल रहती है, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकेगी और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। सऊदी अरब भी बातचीत के पक्ष में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान सैन्य कार्रवाई नहीं चाहता था और सऊदी अरब भी वार्ता के पक्ष में है। उनके अनुसार, क्षेत्रीय देशों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए जल्द किसी समझौते तक पहुंचा जा सकता है। ईरान ने मांगा और समय ट्रंप ने बताया कि ईरान और कुछ अन्य मध्य-पूर्वी देशों ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। उनके अनुसार, संभावित समझौते का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पैदा हुई चिंताओं का समाधान निकालना है। क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर पिछले कई महीनों से अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। ऐसे में प्रस्तावित वार्ता को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि बातचीत से क्या ठोस परिणाम निकलेंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
Assam Floods: असम के शिवसागर जिले में आई भीषण बाढ़ के बीच कुछ स्थानीय लोगों ने साहस और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सभी का दिल जीत लिया। जब चारों ओर पानी ही पानी था और सरकारी मदद पहुंचने में समय लग रहा था, तब गांव के लोगों ने अपनी सिर्फ छह देसी नावों के सहारे पांच गांवों के 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने घंटों तक लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया। कुछ ही घंटों में बाढ़ ने बदले हालात 19 जुलाई को शिवसागर जिले में लगातार बारिश के बाद आई बाढ़ ने कुछ ही घंटों में कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। घर, सड़कें और खेत जलमग्न हो गए। कई परिवार अपने घरों की छतों, पेड़ों और ऊंचे स्थानों पर फंस गए। ऐसे समय में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने खुद ही राहत अभियान की जिम्मेदारी संभाल ली। रेस्क्यू अभियान में शामिल चौहान चौधरी ने बताया कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा, "हमने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। हमारे पास सिर्फ छह नावें थीं। जिनके घर टूट गए थे या जो पानी में फंस गए थे, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। पांच गांवों से 1,000 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला गया।" पहले परिवार को बचाया, फिर दूसरों की मदद में जुट गए रेस्क्यू टीम के सदस्य कनहैया चौधरी ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जब वह घर का सामान निकालने लौटे, तो लगातार मदद के फोन आने लगे। उन्होंने कहा, "उस वक्त लगा कि सामान बाद में भी मिल जाएगा, लेकिन अगर लोगों को नहीं बचाया तो बहुत देर हो जाएगी। इसके बाद हम लगातार नाव लेकर अलग-अलग गांवों में लोगों को निकालने निकल पड़े।" रात एक बजे तक बिना रुके चलता रहा अभियान रेस्क्यू में शामिल राजकुमार राजबीर ने बताया कि उनकी टीम रात करीब एक बजे तक बिना खाना और पानी के लगातार लोगों को बचाती रही। रास्ते में किसी ने पानी पिलाया, फिर अगली सुबह दोबारा नाव लेकर राहत अभियान शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उस समय किसी ने अपनी थकान या भूख की परवाह नहीं की, सभी का एक ही उद्देश्य था—ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाना। 'अपनी जान चली जाती तो भी मंजूर था' रेस्क्यू टीम के सदस्य मोहन चौधरी ने कहा कि हालात बेहद खतरनाक थे, लेकिन उस समय अपनी सुरक्षा से ज्यादा लोगों की जान बचाना जरूरी था। उन्होंने कहा, "हमें लगा कि हमारी जान भी जा सकती है, लेकिन उस समय लोगों को बचाना ज्यादा जरूरी था।" वहीं मिथु चौधरी ने बताया कि 19 जुलाई की सुबह चार बजे से पानी बढ़ना शुरू हुआ और दोपहर तक उनके घर में घुस गया। परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद उन्होंने भी दूसरे गांवों में फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू कर दिया। असम में अब तक 82 लोगों की मौत असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य में बाढ़ से अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है। 31 जुलाई तक की रिपोर्ट के मुताबिक पांच जिलों के 1.92 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है और कई गांव अब भी जलमग्न हैं। राहत कार्यों में आगे आए कई संगठन राज्य में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। सरकारी एजेंसियों के साथ कई सामाजिक और निजी संस्थाएं भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आई हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहत कार्यों में सहयोग के लिए रिलायंस फाउंडेशन की सराहना की, जिसने मुख्यमंत्री राहत कोष में 21 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। स्थानीय लोगों का यह साहसिक प्रयास दिखाता है कि आपदा की घड़ी में सामुदायिक एकजुटता और मानवता सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है। छह छोटी नावों से शुरू हुआ यह अभियान आज असम बाढ़ के सबसे प्रेरणादायक उदाहरणों में गिना जा रहा है।
Abhijit Deepke News: कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अमेरिका में अपनी पढ़ाई के खर्च को लेकर उठ रहे सवालों पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी उच्च शिक्षा का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी से मिली स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के जरिए पूरा हुआ था। उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें विदेश में पढ़ाई के लिए परिवार की अज्ञात संपत्ति या आर्थिक स्रोत का इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही थी। RTI एक्टिविस्ट की शिकायत के बाद सामने आई सफाई दरअसल, सूरत के रहने वाले RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार और कई अन्य सरकारी विभागों को शिकायत भेजकर अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की थी। शिकायत में कहा गया था कि अमेरिका में हुई उनकी पढ़ाई के खर्च और उसके वित्तीय स्रोत की जांच की जानी चाहिए। अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की आर्थिक स्थिति की भी जांच की मांग की है। भगवानराव दीपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 'स्कॉलरशिप और लोन से हुई पढ़ाई' वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कहा कि उनकी पढ़ाई पूरी तरह वैध तरीके से हुई और इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय से आर्थिक सहायता मिली थी। उन्होंने कहा, "मेरी पढ़ाई का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी की ओर से मिली स्कॉलरशिप से पूरा हुआ था। इसके अलावा मैंने एजुकेशन लोन भी लिया था, जिसे अब मुझे चुकाना है।" दीपके ने कहा कि उनकी शिक्षा को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और बिना किसी सबूत के उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। परिवार की संपत्ति को लेकर भी उठे सवाल शिकायत में अभिजीत दीपके के परिवार की आय और संपत्ति की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विदेश में उच्च शिक्षा के लिए बड़ी रकम खर्च होती है, इसलिए इसके स्रोत की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में अब तक संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। CJP की फंडिंग पर भी दिया जवाब इंटरव्यू के दौरान अभिजीत दीपके ने अपनी पार्टी कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) की फंडिंग को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी बड़े उद्योगपति या कॉर्पोरेट फंडिंग पर निर्भर नहीं रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी क्राउडफंडिंग मॉडल अपनाएगी, जिसमें आम नागरिक स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग करेंगे। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की पूरी फंडिंग प्रक्रिया पारदर्शी होगी और हर आर्थिक योगदान का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा। राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा अभिजीत दीपके की सफाई ऐसे समय आई है जब उनकी पार्टी लगातार चर्चा में बनी हुई है। अमेरिका में पढ़ाई के खर्च और पार्टी की फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। हालांकि, दीपके का कहना है कि उनकी शिक्षा और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर फैलाए जा रहे सभी भ्रम का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा।