नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने खुलासा किया है कि अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने पूर्व भारतीय बल्लेबाज और कमेंटेटर संजय मांजरेकर से काफी समय तक बातचीत क्यों नहीं की। अश्विन ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती दौरे के बाद मांजरेकर की उनकी फिटनेस को लेकर की गई आलोचना से वह काफी आहत और नाराज हुए थे। हालांकि, बाद में यही आलोचना उनके करियर में बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हुई।
अश्विन ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद संजय मांजरेकर ने उनकी फिटनेस पर सवाल उठाए थे। मांजरेकर का मानना था कि फिटनेस की कमी का असर अश्विन की गेंदबाजी और फील्डिंग पर पड़ रहा था।
अश्विन ने स्वीकार किया कि उस समय मांजरेकर की टिप्पणी उन्हें बिल्कुल अच्छी नहीं लगी। वह काफी गुस्सा हुए और उन्हें बुरा भी लगा। इसी वजह से उन्होंने मांजरेकर से बातचीत करना लगभग बंद कर दिया था।
हालांकि, समय के साथ अश्विन ने उस आलोचना को अलग नजरिए से देखना शुरू किया। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया और खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश की।
अश्विन के मुताबिक, मांजरेकर की टिप्पणी ने उन्हें अपनी कमजोरियों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। इस तरह जो बात शुरुआत में उन्हें चोट पहुंचाने वाली लगी थी, वही आगे चलकर उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
रविचंद्रन अश्विन ने दिसंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। उन्होंने भारत के लिए 106 टेस्ट मैचों में 537 विकेट हासिल किए और टेस्ट क्रिकेट में भारत के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में अपना करियर समाप्त किया। उनसे आगे केवल अनिल कुंबले हैं, जिनके नाम 619 टेस्ट विकेट हैं।
अश्विन ने अपने करियर में गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारतीय टीम के सबसे सफल स्पिन गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई।
अश्विन के ताजा खुलासे से यह भी पता चलता है कि करियर के दौरान मिलने वाली कड़ी आलोचना हमेशा नकारात्मक नहीं होती। कई बार वही आलोचना खिलाड़ी को अपनी कमियों पर काम करने और बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है।
मांजरेकर की टिप्पणी से उस समय नाराज हुए अश्विन ने बाद में उसी अनुभव को अपने करियर के लिए उपयोगी माना। यही वजह है कि वर्षों बाद उन्होंने इस घटना को खुलकर साझा किया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने आगामी विश्व कप में खेलने की अपनी संभावनाओं को लेकर बेबाक प्रतिक्रिया दी है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके धवन ने संकेत दिया कि अब भारतीय टीम में वापसी का फैसला उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर के इस चरण को स्वीकार करते हुए मौजूदा खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं पर ध्यान देने की बात कही। विश्व कप में वापसी पर क्या बोले धवन? शिखर धवन से जब आगामी विश्व कप में खेलने की संभावना को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ किया कि वह अब चयन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं। भारतीय टीम में वापसी तभी संभव होगी, जब चयनकर्ता और टीम प्रबंधन उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त समझें। धवन ने अपने जवाब में यह भी संकेत दिया कि वह वर्तमान समय में अपने करियर के अगले चरण का आनंद ले रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से ले चुके हैं संन्यास शिखर धवन ने 24 अगस्त 2024 को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। उन्होंने भारत के लिए 34 टेस्ट, 167 वनडे और 68 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। वनडे क्रिकेट में धवन का प्रदर्शन खास तौर पर शानदार रहा। उन्होंने भारत के लिए 6,793 रन बनाए और कई बड़े टूर्नामेंट में टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। ICC टूर्नामेंट में रहा शानदार रिकॉर्ड धवन को ICC टूर्नामेंट का विशेषज्ञ बल्लेबाज भी माना जाता रहा है। 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में वह भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे थे और टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने थे। विश्व कप में भी उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। 2015 विश्व कप में धवन ने शानदार बल्लेबाजी की थी और भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब युवाओं पर है नजर धवन के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर होने के बाद भारतीय टीम में शीर्ष क्रम में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को लगातार मौके मिले हैं। ऐसे में आगामी विश्व कप के लिए भी टीम चयन में युवा और मौजूदा फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। धवन के लिए अब भारतीय टीम में वापसी से ज्यादा उनके क्रिकेट अनुभव को नई पीढ़ी के साथ साझा करना महत्वपूर्ण हो सकता है। उनका ताजा बयान भी इसी बदलाव की ओर संकेत करता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) 2026 के 14वें सीजन का आगाज 7 अगस्त से हो गया है। इस बार टूर्नामेंट में पहली बार 7 टीमें हिस्सा ले रही हैं और कुल 39 मुकाबले खेले जाएंगे। फाइनल 20 सितंबर को बारबाडोस में होगा। पहली बार सात टीमें लेंगी हिस्सा CPL 2026 में एंटीगुआ एंड बारबुडा फाल्कन्स, बारबाडोस ट्राइडेंट्स, गुयाना अमेजन वॉरियर्स, जमैका किंग्समेन, सेंट लूसिया किंग्स, सेंट किट्स एंड नेविस पैट्रियट्स और ट्रिनबागो नाइट राइडर्स मैदान में हैं। इस सीजन में जमैका किंग्समेन नई टीम के तौर पर शामिल हुई है। वहीं ट्रिनबागो नाइट राइडर्स गत चैंपियन के रूप में खिताब बचाने उतर रही है। भारत में कहां देख पाएंगे CPL 2026? भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए CPL 2026 के टीवी प्रसारण अधिकार JioStar के पास हैं। वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारतीय उपमहाद्वीप के दर्शक FanCode और YouTube के जरिए मुकाबले देख सकेंगे। CPL के ज्यादातर मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे या 5:30 बजे शुरू होंगे। कुछ मुकाबले देर रात 2:30 बजे भी शुरू होंगे, जबकि 6 सितंबर के डबल-हेडर का एक मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से खेला जाएगा। 20 सितंबर को बारबाडोस में होगा फाइनल CPL 2026 का लीग चरण सितंबर के मध्य तक चलेगा। इसके बाद प्लेऑफ मुकाबले होंगे और 20 सितंबर को बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल में फाइनल खेला जाएगा। इस बार पहली बार CPL का फाइनल बारबाडोस में आयोजित किया जा रहा है। सात टीमों के बीच होने वाली इस टी20 लीग में कैरेबियाई क्रिकेट के साथ-साथ दुनियाभर के कई प्रमुख टी20 खिलाड़ी नजर आएंगे। भारत में भी क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस टूर्नामेंट पर रहेगी।
कोलंबो, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच तीन दिवसीय अभ्यास मैच का दूसरा दिन शनिवार को खेला जा रहा है। कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मुकाबले में भारतीय टीम की नजर अभ्यास के साथ-साथ कप्तान शुभमन गिल की फिटनेस पर भी है। गिल दाहिनी हाथ की अनामिका में चोट के कारण पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे थे। उनकी स्थिति पर BCCI की मेडिकल टीम नजर रख रही है। पहले दिन श्रीलंका XI ने बनाए 363 रन श्रीलंका क्रिकेट XI ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और पहले दिन 90 ओवर में 363/8 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। श्रीलंकाई टीम की ओर से निशान फर्नांडो और रविंदु रसनथा ने अर्धशतक लगाए, जबकि सोनल दिनूषा ने भी पचासा जड़ा। भारत की ओर से स्पिनरों ने आखिरी सत्र में वापसी कराई। रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार ने दो-दो विकेट लिए, जबकि गुरनूर बराड़ को एक सफलता मिली। शुभमन गिल की चोट पर बनी नजर भारतीय टेस्ट टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल को गुरुवार के अभ्यास सत्र के दौरान दाहिनी अनामिका में चोट लगी थी। इसी वजह से वह अभ्यास मैच के पहले दिन नहीं खेले। गिल की गैरमौजूदगी में केएल राहुल ने टॉस के समय भारतीय टीम की कप्तानी संभाली। फिलहाल गिल की दूसरे दिन वापसी को लेकर आधिकारिक रूप से कोई अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में उनकी फिटनेस पर भारतीय टीम प्रबंधन और प्रशंसकों की नजर बनी हुई है। टेस्ट सीरीज से पहले अहम अभ्यास यह अभ्यास मैच भारत की आगामी दो टेस्ट मैचों की श्रीलंका सीरीज की तैयारी का अहम हिस्सा है। भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में शुरू होना है। अभ्यास मैच में भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों को श्रीलंकाई परिस्थितियों में खुद को ढालने का मौका मिल रहा है। खास तौर पर स्पिन के खिलाफ बल्लेबाजी और श्रीलंका की पिचों पर गेंदबाजी भारतीय टीम की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।