ब्रे़डी, एजेंसियां। अफगानिस्तान ने बारिश से प्रभावित दूसरे वनडे में आयरलैंड को 92 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ अफगानिस्तान ने पांच मैचों की वनडे सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। मुकाबले में अफगानिस्तान के स्टार लेग स्पिनर राशिद खान ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट झटके और आयरलैंड की पारी को तहस-नहस कर दिया।
बारिश के कारण मुकाबला 47-47 ओवर का कर दिया गया था। टॉस जीतकर आयरलैंड ने पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन अफगानिस्तान के बल्लेबाजों ने मजबूत स्कोर खड़ा किया।
अफगानिस्तान ने 47 ओवर में 8 विकेट पर 299 रन बनाए। इब्राहिम जादरान ने 84 रन की शानदार पारी खेली, जबकि सेदिकुल्लाह अटल ने 45 रन बनाए। कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी 36 रन बनाकर नाबाद रहे।
300 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी आयरलैंड की टीम एक समय मुकाबले में अच्छी स्थिति में थी। कैड कार्माइकल ने 62 रन और एंडी बालबर्नी ने 36 रन बनाए।
इसके बाद राशिद खान ने आयरलैंड की बल्लेबाजी पर ऐसा शिकंजा कसा कि पूरी टीम 207 रन पर ऑलआउट हो गई। राशिद ने सिर्फ 34 रन देकर 6 विकेट लिए। उनकी गेंदबाजी के सामने आयरलैंड के बल्लेबाज टिक नहीं सके।
आयरलैंड की पारी 33.4 ओवर में 207 रन पर सिमट गई और अफगानिस्तान ने मुकाबला 92 रन से अपने नाम कर लिया। राशिद खान के 6/34 के प्रदर्शन ने उन्हें मैच का सबसे बड़ा स्टार बना दिया।
इस मुकाबले से पहले सीरीज का पहला वनडे बारिश के कारण बिना टॉस के रद्द हो गया था। ऐसे में दूसरे मैच की जीत के बाद अफगानिस्तान ने पांच मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है।
अफगानिस्तान की टीम अब सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करने के इरादे से अगले मुकाबले में उतरेगी। वहीं आयरलैंड के सामने वापसी की चुनौती होगी। राशिद खान की मौजूदा फॉर्म अफगानिस्तान के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कोलंबो, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका क्रिकेट XI के बीच तीन दिवसीय अभ्यास मैच के दूसरे दिन श्रीलंका XI ने 90 ओवर में 8 विकेट पर 363 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी शुरू कर दी है। ताजा स्कोर के अनुसार भारत 2.4 ओवर में 8 रन पर एक विकेट गंवा चुका है। जायसवाल जल्दी आउट, पडिक्कल ने संभाली पारी भारत की पारी की शुरुआत यशस्वी जायसवाल और के एल राहुल ने की। हालांकि जायसवाल पारी की शुरुआत में ही बिना खाता खोले आउट हो गए। उन्हें लाहिरू कुमारा ने 0.2 ओवर में आउट किया। इसके बाद बल्लेबाजी करने देवदत्त पडिक्कल आयें और 8 रन बनाकर नाबाद हैं। उनके साथ केएल राहुल बल्लेबाजी कर रहे हैं। श्रीलंका XI ने 363 रन पर घोषित की पारी इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट XI ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 90 ओवर में 363/8 का स्कोर बनाया और पारी घोषित कर दी। टीम की ओर से कई बल्लेबाजों ने उपयोगी पारियां खेलीं और भारतीय गेंदबाजों को काफी मेहनत करनी पड़ी। भारत की ओर से रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार ने दो-दो विकेट लिए। इन स्पिनरों ने अंतिम सत्र में भारत को वापसी दिलाई। शुभमन गिल की फिटनेस पर भी नजर भारतीय कप्तान शुभमन गिल उंगली में चोट के कारण अभ्यास मैच में नहीं खेल रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में केएल राहुल टीम की कप्तानी कर रहे हैं। गिल की चोट पर भारतीय टीम की मेडिकल टीम नजर रख रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने खुलासा किया है कि अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने पूर्व भारतीय बल्लेबाज और कमेंटेटर संजय मांजरेकर से काफी समय तक बातचीत क्यों नहीं की। अश्विन ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती दौरे के बाद मांजरेकर की उनकी फिटनेस को लेकर की गई आलोचना से वह काफी आहत और नाराज हुए थे। हालांकि, बाद में यही आलोचना उनके करियर में बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हुई। फिटनेस पर सवाल उठने से नाराज हुए थे अश्विन अश्विन ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद संजय मांजरेकर ने उनकी फिटनेस पर सवाल उठाए थे। मांजरेकर का मानना था कि फिटनेस की कमी का असर अश्विन की गेंदबाजी और फील्डिंग पर पड़ रहा था। अश्विन ने स्वीकार किया कि उस समय मांजरेकर की टिप्पणी उन्हें बिल्कुल अच्छी नहीं लगी। वह काफी गुस्सा हुए और उन्हें बुरा भी लगा। इसी वजह से उन्होंने मांजरेकर से बातचीत करना लगभग बंद कर दिया था। आलोचना को बनाया प्रेरणा हालांकि, समय के साथ अश्विन ने उस आलोचना को अलग नजरिए से देखना शुरू किया। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया और खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश की। अश्विन के मुताबिक, मांजरेकर की टिप्पणी ने उन्हें अपनी कमजोरियों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। इस तरह जो बात शुरुआत में उन्हें चोट पहुंचाने वाली लगी थी, वही आगे चलकर उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। अश्विन का शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर रविचंद्रन अश्विन ने दिसंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। उन्होंने भारत के लिए 106 टेस्ट मैचों में 537 विकेट हासिल किए और टेस्ट क्रिकेट में भारत के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में अपना करियर समाप्त किया। उनसे आगे केवल अनिल कुंबले हैं, जिनके नाम 619 टेस्ट विकेट हैं। अश्विन ने अपने करियर में गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारतीय टीम के सबसे सफल स्पिन गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई। अब पुरानी बात को अलग नजरिए से देखते हैं अश्विन के ताजा खुलासे से यह भी पता चलता है कि करियर के दौरान मिलने वाली कड़ी आलोचना हमेशा नकारात्मक नहीं होती। कई बार वही आलोचना खिलाड़ी को अपनी कमियों पर काम करने और बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है। मांजरेकर की टिप्पणी से उस समय नाराज हुए अश्विन ने बाद में उसी अनुभव को अपने करियर के लिए उपयोगी माना। यही वजह है कि वर्षों बाद उन्होंने इस घटना को खुलकर साझा किया।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपने गृह राज्य उत्तराखंड में बसने की इच्छा जताई है। श्रीलंका दौरे पर मौजूद पंत ने देर रात सोशल मीडिया के जरिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से अपना बेस उत्तराखंड शिफ्ट करना चाहते हैं और वहां अपना पहला घर बनाना चाहते हैं, लेकिन पिछले करीब तीन वर्षों से जमीन तलाशने के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली है। पंत ने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए अपनी परेशानी साझा की और कहा कि उन्हें रहने के लिए बड़ी और सुविधाजनक जगह की तलाश है। उन्होंने उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने पहाड़ी लोगों के बीच वापस लौटना चाहते हैं और राज्य के विकास में योगदान देना चाहते हैं। पंत ने CM धामी से क्या कहा? ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमीन खरीदने की प्रक्रिया में मदद करने की अपील की। उन्होंने बताया कि वह काफी समय से उत्तराखंड में जमीन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उचित जगह और स्पष्ट प्रक्रिया के अभाव में उन्हें परेशानी हो रही है। पंत ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह उत्तराखंड से बहुत प्यार करते हैं और दिल्ली से अपना बेस अपने गृह राज्य में स्थानांतरित करना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मार्गदर्शन और सहायता देने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि वह अपने राज्य में वापस लौटकर अपने पहाड़ी लोगों के बीच रहना चाहते हैं और उत्तराखंड के विकास में भी अपना योगदान देना चाहते हैं। 'सरकार से मुफ्त जमीन नहीं चाहिए' ऋषभ पंत ने अपनी अगली पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार से किसी तरह की मुफ्त जमीन या विशेष उपहार नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अनुमति देती है तो वह सरकारी तय दरों के अनुसार जमीन खरीदना चाहते हैं। पंत ने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी तरह का उपहार मिलना निश्चित रूप से उनके लिए खुशी की बात होगी, लेकिन उनकी इच्छा है कि वह सरकार की निर्धारित दरों पर जमीन खरीदें और वहां अपना पहला घर बना सकें। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है और इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से इसमें मदद करने का अनुरोध किया है। उत्तराखंड से पंत का पुराना जुड़ाव ऋषभ पंत का जन्म हरिद्वार जिले के रुड़की में हुआ था और उनका उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव रहा है। क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने के बाद भी वह अपने गृह राज्य से जुड़े मुद्दों और लोगों के प्रति अपना लगाव जाहिर करते रहे हैं। अब उत्तराखंड में अपना घर बनाने की उनकी इच्छा ने उनके प्रशंसकों के बीच भी चर्चा पैदा कर दी है। पंत का कहना है कि वह अपने राज्य में रहकर वहां के लोगों और विकास से जुड़ना चाहते हैं। श्रीलंका दौरे पर हैं पंत पंत इस समय भारतीय टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर हैं। टीम को 15 अगस्त से दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। इससे पहले भारतीय टीम अभ्यास मुकाबला खेल रही है। अभ्यास मैच के दौरान पंत ने शुरुआत में विकेटकीपिंग की, लेकिन श्रीलंका की गर्म और उमस भरी परिस्थितियों में खिलाड़ियों के वर्कलोड को मैनेज करने के लिए बाद में ध्रुव जुरेल ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली। क्रिकेट के मैदान से दूर पंत की जमीन और घर से जुड़ी अपील अब चर्चा का विषय बन गई है। देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस अनुरोध पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।