आईपीएल 2026 के 34वें मुकाबले में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब Sai Sudharsan ने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। Gujarat Titans के इस युवा सलामी बल्लेबाज ने Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ खेलते हुए लीग में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का कारनामा किया।
बेंगलुरु के M. Chinnaswamy Stadium में खेले गए इस मुकाबले में सुदर्शन ने 58 गेंदों में 100 रनों की शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 11 चौके और 5 छक्के जड़े और अपनी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई।
साई सुदर्शन ने IPL इतिहास में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो पहले Chris Gayle के नाम था।
गेल ने यह उपलब्धि 2015 में हासिल की थी और अब 11 साल बाद सुदर्शन ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
सुदर्शन, Gujarat Titans के लिए 2000 रन पूरे करने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि टीम के कप्तान Shubman Gill ने हासिल की थी।
24 वर्षीय सुदर्शन ने 2022 में आईपीएल डेब्यू किया था और अब तक 47 मैचों की 47 पारियों में 2028 रन बना चुके हैं।
उन्होंने 2025 सीजन में 759 रन बनाकर ऑरेंज कैप भी अपने नाम की थी।
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात टाइटंस को सुदर्शन और शुभमन गिल ने जबरदस्त शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए 128 रनों की साझेदारी की। हालांकि, सुदर्शन की शानदार पारी के बावजूद मैच Royal Challengers Bengaluru ने 5 विकेट से जीत लिया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने देश में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक करीब ₹36,441 करोड़ के बजट प्रावधान को मंजूरी दी गई है। सरकार का लक्ष्य देश में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए मजबूत ढांचा तैयार करना है। खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण और समर्थन विस्तारित खेलो इंडिया योजना के तहत देशभर में उभरते खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और आधुनिक खेल सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा। योजना का फोकस जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर रहेगा। खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर सरकार इस योजना के माध्यम से खेल मैदानों, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य खेल सुविधाओं के विकास पर ध्यान देगी। ग्रामीण और छोटे शहरों के खिलाड़ियों को भी बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए खेल ढांचे को मजबूत किया जाएगा। ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी को मिलेगा बढ़ावा खेलो इंडिया योजना का विस्तार भारत के खिलाड़ियों को ओलंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके तहत प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विशेषज्ञ कोचिंग और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की सुविधा दी जाएगी। युवाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल केंद्र सरकार का कहना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। विस्तारित खेलो इंडिया योजना से देश में खेल संस्कृति को और मजबूत करने तथा नए खिलाड़ियों को आगे आने का अवसर मिलेगा। भारत को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में कदम विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े बजट के साथ खेलो इंडिया योजना का विस्तार भारत के खेल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना और भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करना है।
भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह तक पहुंच गया है। जर्सी के रंग को लेकर कुछ पूर्व खिलाड़ियों और हॉकी से जुड़े लोगों की आपत्तियों के बीच कप्तान ने साफ कहा है कि टीम का पूरा ध्यान आगामी हॉकी विश्व कप पर होना चाहिए। उन्होंने जर्सी के रंग को लेकर उठ रहे सवालों को अनावश्यक विवाद बताते हुए फैंस से टीम का समर्थन करने की अपील की है। नई जर्सी के रंग को लेकर क्यों मचा विवाद? भारतीय हॉकी टीम लंबे समय से नीले रंग की जर्सी में मैदान पर उतरती रही है। लेकिन आगामी विश्व कप से पहले टीम के लिए नई जर्सी लॉन्च की गई है, जिसका प्रमुख रंग केसरिया है। जर्सी के रंग में बदलाव के बाद सोशल मीडिया और हॉकी जगत में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने भी जर्सी के रंग को लेकर सवाल उठाए। इसी बीच भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हरमनप्रीत सिंह ने कहा- इसे कंट्रोवर्सी क्यों कहा जा रहा? हरमनप्रीत सिंह ने नई जर्सी को लेकर हो रही चर्चा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जर्सी बदलना कोई पहली बार होने वाली बात नहीं है। उनके मुताबिक, टीम के खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ के साथ चर्चा के बाद ही जर्सी को लेकर फैसला किया गया है। कप्तान ने संकेत दिया कि जब टीम के भीतर इस बदलाव को लेकर बातचीत और सहमति हुई है, तो इसे विवाद का रूप देना उचित नहीं है। उनका जोर इस बात पर रहा कि जर्सी का रंग चाहे जो हो, मैदान पर टीम का लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करना और अच्छा प्रदर्शन करना है। 'ब्लू हो या पीला, हम भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं' हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि टीम पहले भी अलग-अलग रंगों की जर्सी में खेल चुकी है। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जर्सी का रंग नहीं, बल्कि भारत के लिए मैदान पर प्रदर्शन करना है। कप्तान ने इस बात पर भी जोर दिया कि टीम विश्व कप खेलने जा रही है और ऐसे समय में खिलाड़ियों को विवादों में उलझाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि फैंस का समर्थन खिलाड़ियों को सकारात्मक ऊर्जा देगा। फैंस से की टीम का समर्थन करने की अपील हरमनप्रीत सिंह ने भारतीय हॉकी फैंस से अपील की कि वे टीम को सकारात्मक संदेश दें और विश्व कप के लिए रवाना होने से पहले खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि टीम टूर्नामेंट में जीतने के इरादे से जा रही है। परिणाम खिलाड़ियों के हाथ में नहीं होता, लेकिन मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और पूरी मेहनत करना उनके नियंत्रण में है। कप्तान के मुताबिक, टीम को भरोसा है कि भारत के करोड़ों हॉकी प्रशंसकों का समर्थन उनके साथ रहेगा। विश्व कप से पहले टीम का फोकस प्रदर्शन पर नई जर्सी को लेकर चल रही बहस के बीच हरमनप्रीत सिंह का संदेश स्पष्ट है कि भारतीय टीम का ध्यान अब विश्व कप में अपने प्रदर्शन पर होना चाहिए। खिलाड़ियों के लिए टूर्नामेंट से पहले सकारात्मक माहौल और देशवासियों का समर्थन महत्वपूर्ण है। जर्सी का रंग आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बना रहता है या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन भारतीय टीम के लिए असली चुनौती विश्व कप के मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब देना होगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह भी यही चाहते हैं कि विवाद से ज्यादा चर्चा टीम के खेल और उसके प्रदर्शन की हो।
ढाका, एजेंसियां। भारत के सितंबर 2026 में प्रस्तावित बांग्लादेश दौरे को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। BCB अध्यक्ष तमीम इकबाल ने बांग्लादेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर भारत के दौरे को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्तर पर बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है। दोनों देशों के बीच छह मैचों की सफेद गेंद वाली श्रृंखला प्रस्तावित है, जिसमें तीन वनडे और तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले शामिल हैं। BCB ने सरकार से भारत के साथ बातचीत की अपील की तमीम इकबाल ने गुरुवार को बांग्लादेश सरकार के अधिकारियों से मुलाकात की और उनसे भारत के संबंधित पक्षों के साथ सरकारी स्तर पर संवाद शुरू करने का आग्रह किया। BCB का मानना है कि सरकार की पहल से दौरे को लेकर बनी अनिश्चितताओं को दूर करने और दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों को सामान्य बनाने में मदद मिल सकती है। सितंबर में होनी है छह मैचों की श्रृंखला भारत और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित दौरे में तीन वनडे और तीन टी20 मुकाबले खेले जाने हैं। यह श्रृंखला पहले अगस्त 2025 में होनी थी, लेकिन दोनों क्रिकेट बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम और अन्य व्यस्तताओं को देखते हुए इसे सितंबर 2026 तक स्थगित करने पर सहमति जताई थी। BCCI ने भी उस समय दौरे को सितंबर 2026 के लिए पुनर्निर्धारित किए जाने की पुष्टि की थी। दौरे को लेकर अभी सरकारी मंजूरी अहम दोनों क्रिकेट बोर्ड सितंबर की संभावित समय-सीमा को लेकर तैयारी कर रहे हैं, लेकिन दौरे को अंतिम रूप देने में दोनों देशों की सरकारी मंजूरी महत्वपूर्ण होगी। हालिया रिपोर्टों के अनुसार BCB भारत के दौरे को लेकर आशावादी है और सरकार की मदद से आवश्यक संवाद को आगे बढ़ाना चाहता है। भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों पर रहेगी नजर भारत का बांग्लादेश दौरा केवल क्रिकेट के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच खेल कूटनीति और संबंधों को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। बांग्लादेश के खेल राज्य मंत्री अमिनुल हक ने भी भारत की मेजबानी को लेकर उम्मीद जताई थी और कहा था कि सरकार खेल कूटनीति को महत्व दे रही है।