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Holder Catch Controversy Rocks GT vs RCB Match

IPL 2026 में विवादित कैच पर बवाल: होल्डर का कैच ‘आउट या नॉट आउट’? एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल

surbhi मई 1, 2026 0
Jason Holder takes controversial catch against RCB during IPL 2026 clash in Ahmedabad
Jason Holder Controversial Catch IPL 2026

अहमदाबाद में खेले गए Indian Premier League 2026 के मुकाबले में Gujarat Titans और Royal Challengers Bangalore के बीच एक बड़ा विवाद देखने को मिला। मैच के दौरान Jason Holder द्वारा लिया गया कैच चर्चा का केंद्र बन गया, जिस पर अब क्रिकेट एक्सपर्ट्स भी सवाल उठा रहे हैं।

क्या सच में क्लीन कैच था?
यह घटना उस समय हुई जब Rajat Patidar बल्लेबाजी कर रहे थे। Jason Holder ने दौड़ते हुए शानदार डाइव लगाकर कैच पकड़ा, लेकिन रिप्ले में ऐसा लगा कि स्लाइड करते वक्त गेंद जमीन को छू गई थी।

RCB खेमे ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया, जिसमें Virat Kohli सबसे आगे नजर आए। खिलाड़ियों ने अंपायर से दोबारा जांच की मांग भी की।

टीवी अंपायर ने दिया ‘आउट’ का फैसला
टीवी अंपायर Abhijit Bhattacharya ने रिप्ले देखने के बाद फैसला सुनाया कि Jason Holder ने गेंद पर पर्याप्त नियंत्रण बना लिया था, इसलिए Rajat Patidar को आउट दिया गया। इस फैसले के बाद RCB का स्कोर 79/3 हो गया।

एक्सपर्ट्स की राय: ‘नॉट आउट’ होना चाहिए था
मैच के बाद विश्लेषण के दौरान Ian Bishop और Abhinav Mukund ने इस फैसले पर असहमति जताई।

इयान बिशप का कहना था कि कैच लेते वक्त सिर्फ गेंद पर नियंत्रण ही नहीं, बल्कि शरीर पर नियंत्रण भी जरूरी होता है। उनके अनुसार, जब होल्डर स्लाइड कर रहे थे, तब पूरी तरह नियंत्रण में नहीं थे और इस दौरान गेंद के जमीन से छूने की आशंका थी।

वहीं अभिनव मुकुंद ने साफ कहा, “अगर गेंद जमीन को छूती है, तो वह कैच नहीं माना जाना चाहिए। जो रिप्ले हमने देखा, उसमें साफ लग रहा था कि गेंद जमीन से टकराई।”

क्या कहते हैं क्रिकेट के नियम?
Marylebone Cricket Club के नियमों के अनुसार, कैच तभी वैध माना जाता है जब फील्डर गेंद और अपने शरीर दोनों पर पूरा नियंत्रण बनाए रखे और गेंद जमीन को छूने से पहले पूरी तरह नियंत्रित हो।

इसी नियम की व्याख्या को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है–क्या होल्डर ने गेंद पर पूरा नियंत्रण बना लिया था या नहीं?

मैच पर असर
इस विवादित फैसले के बाद मैच का रुख पूरी तरह बदल गया। Royal Challengers Bangalore 155 रन पर सिमट गई, जिसे Gujarat Titans ने आसानी से हासिल कर लिया।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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क्रिकेट की दुनिया में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। यूरोप में पहली बार लॉन्च हो रही European T20 Premier League को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है। इस लीग में कई दिग्गज खिलाड़ियों ने टीमों में निवेश किया है, जिनमें दक्षिण अफ्रीका के स्टार Faf du Plessis, Jonty Rhodes और Heinrich Klaasen शामिल हैं। रॉटरडैम टीम के को-ओनर बने तीन दिग्गज Faf du Plessis, Jonty Rhodes और Heinrich Klaasen ने मिलकर ETPL की रॉटरडैम फ्रेंचाइजी को खरीदा है। यह छह टीमों की लीग होगी, जिसमें कुल 33 मैच खेले जाएंगे। टूर्नामेंट 26 अगस्त से 20 सितंबर तक आयरलैंड, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स में आयोजित होगा। खास बात यह है कि Faf du Plessis और Heinrich Klaasen सिर्फ मालिक ही नहीं, बल्कि टीम के लिए खेलते भी नजर आएंगे। डु प्लेसिस टीम की कप्तानी भी संभालेंगे। ‘ग्लोबल लीग के साथ जुड़ना था लक्ष्य’ Faf du Plessis ने कहा कि एक ‘सर्किट प्लेयर’ के तौर पर वह दुनिया की बेहतरीन T20 लीग्स के साथ जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को “नई लीग को बनाने और यूरोप में क्रिकेट को बढ़ाने का शानदार मौका” बताया। वहीं Heinrich Klaasen ने इसे “आसान बिजनेस फैसला” करार दिया। उनका कहना है कि इतने बड़े नामों के साथ जुड़ना एक शानदार अवसर है, जिसे छोड़ना भविष्य में पछतावे का कारण बन सकता था। अन्य बड़े नाम भी जुड़े ETPL में कई और दिग्गज खिलाड़ी भी टीम मालिकों के रूप में शामिल हैं। Steve Waugh एम्स्टर्डम टीम से जुड़े हैं, जबकि Glenn Maxwell बेलफास्ट फ्रेंचाइजी के को-ओनर हैं। Chris Gayle भी ग्लासगो टीम से जुड़े हैं। यूरोप में क्रिकेट को बढ़ावा देने का लक्ष्य Jonty Rhodes ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ चार हफ्तों का टूर्नामेंट खेलना नहीं है, बल्कि यूरोप में क्रिकेट के पूरे इकोसिस्टम को विकसित करना है। उन्होंने जर्मनी, इटली और फ्रांस जैसे देशों में क्रिकेट के बढ़ते क्रेज का भी जिक्र किया। नई लीग, नई चुनौती हालांकि यूरोप में क्रिकेट अभी मुख्य खेल नहीं है, लेकिन ETPL इसे लोकप्रिय बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। Faf du Plessis का मानना है कि अगर लीग का प्रोडक्ट मजबूत होगा, तो दर्शक खुद आकर्षित होंगे और धीरे-धीरे फैनबेस भी बढ़ेगा।  

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मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेले गए अहम मुकाबले से पहले एक बार फिर Rohit Sharma की गैरमौजूदगी ने क्रिकेट फैंस को चिंता में डाल दिया है। आईपीएल 2026 में यह लगातार चौथा मैच है, जब ‘हिटमैन’ मैदान पर नजर नहीं आए। टीम के कप्तान Hardik Pandya ने टॉस के दौरान रोहित की फिटनेस को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसने उनके जल्द वापसी की उम्मीदों के साथ-साथ सवालों को भी जन्म दे दिया है। हार्दिक पांड्या का बयान क्या संकेत देता है? हार्दिक पांड्या ने स्पष्ट कहा कि रोहित शर्मा अभी पूरी तरह मैच फिट नहीं हैं। उन्होंने बताया, “रोहित कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी उनकी फिटनेस उस स्तर पर नहीं है जहां उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जा सके।” इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या रोहित की वापसी में अभी और समय लगेगा, या यह चोट उनके आईपीएल भविष्य पर भी असर डाल सकती है। लगातार चौथे मैच से बाहर ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा को यह चोट RCB के खिलाफ मुकाबले में लगी थी, जिसके बाद से वह टीम से बाहर हैं। इस दौरान मुंबई इंडियंस को ओपनिंग में उनकी कमी साफ तौर पर महसूस हो रही है। टीम की बल्लेबाजी शुरुआत कमजोर नजर आ रही है और मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। इस सीजन में रोहित का प्रदर्शन चोट लगने से पहले रोहित शर्मा का फॉर्म शानदार रहा था। 4 पारियों में 137 रन औसत: 45.67 स्ट्राइक रेट: 165.06 सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 78 रन (KKR के खिलाफ) सबसे तेज अर्धशतक: 23 गेंद उनकी यह फॉर्म दर्शाती है कि वह अभी भी बड़े मैच विनर की भूमिका निभा सकते हैं, बशर्ते वह पूरी तरह फिट हों। क्या खत्म हो रहा है रोहित शर्मा का IPL करियर? रोहित शर्मा की उम्र और हालिया चोट को देखते हुए सोशल मीडिया पर उनके आईपीएल भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल फिटनेस का मामला है, करियर के अंत का नहीं। अब तक रोहित ने आईपीएल में कई यादगार पारियां खेली हैं और मुंबई इंडियंस के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे हैं।  

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Indian Premier League 2026 में Rajasthan Royals के लिए एक बड़ा मैच विनर उभरकर सामने आया है। Shubham Dubey ने पंजाब किंग्स के खिलाफ बेहद दबाव भरे मुकाबले में शानदार पारी खेलकर अपनी टीम को जीत दिलाई और यह साबित किया कि वह मुश्किल परिस्थितियों के खिलाड़ी हैं। नंबर 6 पर आकर पलटा मैच जब राजस्थान को जीत के लिए 36 गेंदों में 72 रन की जरूरत थी, तब शुभम दुबे को नंबर 6 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया–वो भी Ravindra Jadeja और Dasun Shanaka जैसे खिलाड़ियों से पहले। दुबे ने इस चुनौती को बखूबी निभाते हुए सिर्फ 12 गेंदों में नाबाद 31 रन बनाए और मैच का रुख बदल दिया। Ferreira के साथ मैच जिताऊ साझेदारी उन्होंने Donovan Ferreira के साथ मिलकर 32 गेंदों में 77 रन की अहम साझेदारी की। इस साझेदारी ने न सिर्फ दबाव कम किया, बल्कि राजस्थान को जीत की राह पर ला खड़ा किया। संगकारा ने बताया ‘एक्सेप्शनल’ टीम के हेड कोच Kumar Sangakkara ने दुबे की तारीफ करते हुए कहा कि इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर खेलना सबसे मुश्किल होता है, क्योंकि खिलाड़ी को पहले से पता नहीं होता कि उसे मौका मिलेगा या नहीं। ऐसे में मानसिक रूप से तैयार रहना ही असली चुनौती होती है–और दुबे इसमें सफल रहे। छोटे टूर्नामेंट से IPL तक का सफर 31 वर्षीय शुभम दुबे का सफर संघर्ष से भरा रहा है। उन्होंने विदर्भ के बापुना कप जैसे छोटे टूर्नामेंट्स से पहचान बनाई और फिर Syed Mushtaq Ali Trophy 2023-24 में 73.66 की औसत और 187+ स्ट्राइक रेट के साथ शानदार प्रदर्शन किया। RR का भरोसा और दुबे का प्रदर्शन राजस्थान ने IPL 2024 में उन्हें 5.8 करोड़ रुपये में खरीदा था, हालांकि पहले सीजन में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। बाद में टीम ने उन्हें रिलीज कर दोबारा खरीदा, लेकिन भरोसा कायम रखा। अब IPL 2026 में दुबे ने लगातार दो मैचों में दमदार प्रदर्शन किया– लखनऊ के खिलाफ 19* (11 गेंद) पंजाब के खिलाफ 31* (12 गेंद) एक्सपर्ट्स ने भी सराहा पूर्व क्रिकेटर Abhinav Mukund और Piyush Chawla ने भी माना कि दुबे जैसे खिलाड़ी के लिए यह रोल बेहद कठिन होता है, जहां 10-12 गेंदों में 25-30 रन बनाने का दबाव होता है। लेकिन दुबे ने अपनी काबिलियत से साबित कर दिया कि वह गेम को कंट्रोल करना जानते हैं।  

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युद्ध रोकने को ईरान का नया प्रस्ताव, लेकिन ट्रंप खुश नहीं; परमाणु मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

surbhi अप्रैल 28, 2026 0

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