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Rohit Misses Fourth Straight IPL 2026 Match

MI vs SRH: रोहित शर्मा लगातार चौथे मैच से बाहर, हार्दिक पांड्या के बयान ने बढ़ाई चिंता–क्या खत्म होने की कगार पर है ‘हिटमैन’ का IPL करियर?

surbhi अप्रैल 30, 2026 0
Rohit Sharma sits out as Mumbai Indians face Sunrisers Hyderabad in IPL 2026
Rohit Sharma Misses Fourth Straight IPL Match

मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेले गए अहम मुकाबले से पहले एक बार फिर Rohit Sharma की गैरमौजूदगी ने क्रिकेट फैंस को चिंता में डाल दिया है। आईपीएल 2026 में यह लगातार चौथा मैच है, जब ‘हिटमैन’ मैदान पर नजर नहीं आए।

टीम के कप्तान Hardik Pandya ने टॉस के दौरान रोहित की फिटनेस को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसने उनके जल्द वापसी की उम्मीदों के साथ-साथ सवालों को भी जन्म दे दिया है।

हार्दिक पांड्या का बयान क्या संकेत देता है?

हार्दिक पांड्या ने स्पष्ट कहा कि रोहित शर्मा अभी पूरी तरह मैच फिट नहीं हैं। उन्होंने बताया,
“रोहित कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी उनकी फिटनेस उस स्तर पर नहीं है जहां उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जा सके।”

इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या रोहित की वापसी में अभी और समय लगेगा, या यह चोट उनके आईपीएल भविष्य पर भी असर डाल सकती है।

लगातार चौथे मैच से बाहर ‘हिटमैन’

रोहित शर्मा को यह चोट RCB के खिलाफ मुकाबले में लगी थी, जिसके बाद से वह टीम से बाहर हैं। इस दौरान मुंबई इंडियंस को ओपनिंग में उनकी कमी साफ तौर पर महसूस हो रही है।

टीम की बल्लेबाजी शुरुआत कमजोर नजर आ रही है और मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

इस सीजन में रोहित का प्रदर्शन

चोट लगने से पहले रोहित शर्मा का फॉर्म शानदार रहा था।

  • 4 पारियों में 137 रन
  • औसत: 45.67
  • स्ट्राइक रेट: 165.06
  • सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 78 रन (KKR के खिलाफ)
  • सबसे तेज अर्धशतक: 23 गेंद

उनकी यह फॉर्म दर्शाती है कि वह अभी भी बड़े मैच विनर की भूमिका निभा सकते हैं, बशर्ते वह पूरी तरह फिट हों।

क्या खत्म हो रहा है रोहित शर्मा का IPL करियर?

रोहित शर्मा की उम्र और हालिया चोट को देखते हुए सोशल मीडिया पर उनके आईपीएल भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल फिटनेस का मामला है, करियर के अंत का नहीं।

अब तक रोहित ने आईपीएल में कई यादगार पारियां खेली हैं और मुंबई इंडियंस के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IPL - 225 रन चेज कर जीती दिल्ली, राजस्थान को 7 विकेट से हराया राहुल-निसांका की फिफ्टी, स्टार्क को 3 विकेट

जयपुर, एजेंसियां। दिल्ली कैपिटल्स को IPL के मौजूदा सीजन में लगातार तीन हार के बाद जीत मिली है। टीम ने शुक्रवार को राजस्थान रॉयल्स को 7 विकेट से हराया। जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में दिल्ली ने 226 रन का टारगेट 19.1 ओवर में 3 विकेट पर चेज कर दिया। टॉस जीतकर बैटिंग करते हुए राजस्थान ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 225 रन बनाए। दिल्ली की ओर से ओपनर्स ने 110 रन की साझेदारी की। इस साझेदारी के सहारे दिल्ली ने IPL में अपना सबसे बड़ा रन चेज किया।  राहुल और निसांका ने फिफ्टी लगाई दिल्ली की ओर से केएल राहुल ने 40 बॉल पर 75 रन की पारी खेली। इस पारी में 6 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। राहुल के ओपनिंग पार्टनर पाथुम निसांका ने 33 बॉल पर 6 चौके और 3 छक्के के सहारे 62 रन बनाए। रियान पराग शतक से चूके राज्स्थान के कप्तान रियान पराग ने 90 रन की पारी खेली। 50 बॉल की पारी में रियान ने 8 चौके और 5 छक्के लगाए। उन्होंने ध्रुव जुरेल के साथ शतकीय साझेदारी की। जुरेल ने 42 रन बनाए। आखिरी में डोनोवान फरेरा ने 14 बॉल पर 6 छक्कों के सहारे नाबाद 47 रन बनाए। मिचेल स्टार्क ने 3 विकेट झटके दिल्ली की ओर से सीजन का पहला मैच खेल रहे मिचेल स्टार्क ने 3 विकेट झटके। काइल जैमिसन, अक्षर पटेल और टी नटराजन को एक-एक विकेट मिला।

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अहमदाबाद में खेले गए Indian Premier League 2026 के रोमांचक मुकाबले में Gujarat Titans ने Royal Challengers Bangalore को 4 विकेट से हराकर शानदार जीत दर्ज की। मैच के बाद कप्तान Shubman Gill ने टीम के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को 155 रन पर रोकना इस जीत की सबसे बड़ी कुंजी रही। RCB की बल्लेबाजी रही फीकी, पहली बार ऑल आउट टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी Royal Challengers Bangalore की टीम मेजबान गेंदबाजों के सामने टिक नहीं पाई और 19.2 ओवर में 155 रन पर सिमट गई। यह इस सीजन में RCB का पहला ऑल आउट था, जो टीम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। गिल और बटलर ने दिलाई तेज शुरुआत लक्ष्य का पीछा करने उतरी Gujarat Titans को कप्तान Shubman Gill (18 गेंदों में 43 रन) और Jos Buttler (19 गेंदों में 39 रन) ने तेज और मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पावरप्ले में ही मैच का रुख तय कर दिया। अंत में Rahul Tewatia की नाबाद 27 रन की उपयोगी पारी की बदौलत टीम ने 15.5 ओवर में 6 विकेट खोकर 158 रन बनाते हुए लक्ष्य हासिल कर लिया। गिल बोले–टीम ने की शानदार वापसी मैच के बाद Shubman Gill ने कहा, “ऐसे विकेट पर Royal Challengers Bangalore जैसी मजबूत टीम को 155 रन पर रोकना बड़ी उपलब्धि है। हमारी फील्डिंग पूरे टूर्नामेंट में हमेशा अच्छी नहीं रही, लेकिन दूसरे ओवर के बाद टीम की ऊर्जा शानदार रही और हमने जबरदस्त वापसी की।” बल्लेबाजी में आत्मविश्वास दिखा अपनी बल्लेबाजी को लेकर गिल ने कहा कि शुरुआत में उन्हें थोड़ी किस्मत का साथ मिला, लेकिन इसके बाद वह पूरी तरह आत्मविश्वास में आ गए। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य गेंदबाजों पर दबाव बनाना था और उसी रणनीति ने टीम को जीत दिलाई। गिल ने Rahul Tewatia की तारीफ करते हुए उन्हें टीम का अहम खिलाड़ी बताया और कहा कि उन्होंने मैच को शानदार अंदाज में खत्म किया, भले ही बीच में कुछ विकेट जल्दी गिर गए थे।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) 2026 में Riyan Parag एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान पराग का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट (वेपिंग) करते नजर आए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया है।   भारत में ई-सिगरेट पर है पूर्ण प्रतिबंध भारत सरकार ने E-Cigarettes (Prohibition) Act 2019 के तहत ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, वितरण और उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया हुआ है। इस कानून के अनुसार पहली बार दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल या एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।   बीसीसीआई कर सकता है कार्रवाई सूत्रों के अनुसार, Board of Control for Cricket in India इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों का मानना है कि कैमरों की मौजूदगी में इस तरह की हरकत करना गैर-जिम्मेदाराना है। हालांकि कई खिलाड़ी निजी तौर पर वेपिंग करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से ऐसा करना नियमों और छवि दोनों के लिहाज से गलत माना जा रहा है।   ड्रेसिंग रूम की निजता पर भी बहस इस घटना के बाद ड्रेसिंग रूम में कैमरों की मौजूदगी पर भी सवाल उठे हैं। बताया गया कि पहले भी खिलाड़ियों ने लाइव प्रसारण के दौरान निजता को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, कैमरों के संचालन का फैसला प्रसारक के हाथ में होता है।   आगे क्या होगा? अब सभी की नजरें बीसीसीआई के फैसले पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि पराग के खिलाफ केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है या कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ती है। यह मामला खिलाड़ियों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक व्यवहार पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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