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Salt Injury Hits RCB

IPL 2026: RCB को झटका, चोटिल उंगली के स्कैन के लिए इंग्लैंड लौटे Phil Salt, Bethell को मिलेगा लंबा मौका

surbhi मई 4, 2026 0
Phil Salt injured finger during IPL match as RCB faces setback in 2026 season
Phil Salt Injury IPL 2026 RCB

नई दिल्ली: Indian Premier League 2026 के बीचों-बीच Royal Challengers Bengaluru को बड़ा झटका लगा है। टीम के इन-फॉर्म ओपनर Phil Salt उंगली की चोट के कारण स्कैन के लिए इंग्लैंड लौट गए हैं, जिससे वह पिछले तीन मुकाबलों से बाहर चल रहे हैं।

कैसे लगी चोट?

जानकारी के मुताबिक, Phil Salt को यह चोट 18 अप्रैल को Delhi Capitals के खिलाफ मैच के दौरान लगी थी। फील्डिंग करते हुए बाउंड्री बचाने के प्रयास में उन्होंने डाइव लगाई, जिसमें उनके बाएं हाथ की उंगली चोटिल हो गई।

हालांकि फ्रेंचाइजी ने आधिकारिक तौर पर चोट की प्रकृति का खुलासा नहीं किया है, लेकिन मामला गंभीर माना जा रहा है, इसलिए उन्हें स्कैन के लिए वापस भेजा गया।

शानदार फॉर्म में थे Salt

चोट से पहले Salt जबरदस्त फॉर्म में थे। उन्होंने 6 पारियों में 202 रन बनाए, वो भी 168.33 के स्ट्राइक रेट के साथ। ऐसे में उनका टीम से बाहर होना RCB के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

Bethell को मिला मौका

Salt की गैरमौजूदगी में Jacob Bethell को टॉप ऑर्डर में मौका दिया गया है। वह Virat Kohli के साथ ओपनिंग कर रहे हैं।

हालांकि Bethell अब तक खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं (3 पारियों में 39 रन), लेकिन Salt की अनुपस्थिति में उन्हें और मौके मिलने तय हैं। टीम के पास Jordan Cox भी एक अतिरिक्त बल्लेबाज के रूप में मौजूद हैं।

वापसी की उम्मीद बरकरार

RCB और खिलाड़ी दोनों को उम्मीद है कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं है और Salt इस महीने के भीतर टीम से जुड़ सकते हैं। अगर चोट लंबी चलती है, तो टीम IPL नियमों के तहत रिप्लेसमेंट साइन कर सकती है, लेकिन फिलहाल फ्रेंचाइजी उन्हें पूरा समय देना चाहती है।

टीम का माहौल और आगे की चुनौती

Salt ने पहले Mo Bobat, Andy Flower और Dinesh Karthik के साथ टीम के माहौल की तारीफ की थी और IPL में अपने फॉर्म को दोबारा हासिल किया था।

अब RCB अपने खिताब की रक्षा करने के मिशन में है और Salt की फिटनेस टीम के लिए अहम होगी।

ब्रेक के बाद अगला मुकाबला

RCB फिलहाल मैचों के बीच छह दिन के ब्रेक पर है। टीम का अगला मुकाबला Lucknow Super Giants के खिलाफ होना है, जो टीम के लिए काफी अहम रहेगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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KKR के क्रिकेटर रामनदीप सिंह ने टीवी अभिनेत्री चार्ली चौहान से रचाई शादी, पंजाबी रीति-रिवाज से हुआ विवाह

चंडीगढ़, एजेंसियां। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के ऑलराउंडर रामनदीप सिंह ने टीवी अभिनेत्री चार्ली चौहान से शादी कर ली है। दोनों ने एक निजी समारोह में पंजाबी रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए। शादी की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट और टीवी जगत के प्रशंसक नवविवाहित जोड़े को बधाई दे रहे हैं।   चार्ली चौहान बनीं रामनदीप की जीवनसाथी   चार्ली चौहान टेलीविजन की जानी-पहचानी अभिनेत्री हैं और उन्हें ‘कैसी ये यारियां’ जैसे लोकप्रिय शो से पहचान मिली। वहीं रामनदीप सिंह भारतीय क्रिकेट में अपनी ऑलराउंड क्षमता के लिए जाने जाते हैं और आईपीएल में KKR का हिस्सा रहे हैं। दोनों ने अपने निजी रिश्ते को काफी हद तक सार्वजनिक चर्चा से दूर रखा। शादी समारोह में चार्ली चौहान पारंपरिक लाल रंग के लहंगे में नजर आईं, जबकि रामनदीप सिंह ने पगड़ी और पारंपरिक शेरवानी पहनी। समारोह में पंजाबी परंपराओं की झलक देखने को मिली।   क्रिकेट और टीवी जगत के लोग हुए शामिल   रामनदीप और चार्ली की शादी में परिवार और करीबी दोस्तों के अलावा क्रिकेट जगत से भी कई लोग शामिल हुए। रिपोर्टों के अनुसार अर्शदीप सिंह, नमन धीर और अश्विनी कुमार समेत कुछ क्रिकेटरों ने समारोह में शिरकत की। शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। प्रशंसक दोनों को नए जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।   निजी समारोह में हुई शादी   रामनदीप सिंह और चार्ली चौहान की शादी को काफी निजी रखा गया। समारोह में करीबी लोगों की मौजूदगी रही और दोनों ने पारंपरिक पंजाबी अंदाज में विवाह की रस्में पूरी कीं। शादी की खबर सामने आने के बाद दोनों के प्रशंसकों के बीच यह मनोरंजन और क्रिकेट जगत की चर्चित खबर बन गई है।

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FIFA World Cup में मेसी की जान को खतरा! बम धमकी का पुलिस डोजियर में दावा

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान मैदान पर रोमांचक मुकाबलों के बीच खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई चुनौतियां आईं। एक रिपोर्ट में पुलिस डोजियर के हवाले से दावा किया गया है कि अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को कथित तौर पर बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों, अधिकारियों और उनके परिवारों को निशाना बनाने वाली कई धमकियां सामने आई थीं। इनमें मेसी के खिलाफ मिली धमकियों को गंभीर बताया गया है।   मेसी को निशाना बनाने की कथित धमकी     पुलिस डोजियर के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अधिकारियों को फोन कर दावा किया था कि वह दो अन्य लोगों के साथ डलास के एक स्टेडियम की ओर जा रहा है। उसके पास कथित तौर पर घरेलू विस्फोटक और AR-15 राइफल होने की बात कही गई थी।   उस व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों और दोनों टीमों के खिलाड़ियों को निशाना बनाने की बात कही और कथित तौर पर विशेष रूप से मेसी का नाम लिया।   सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ी सुरक्षा     मेसी को लेकर एक अन्य कथित धमकी अर्जेंटीना और मिस्र के बीच 7 जुलाई को खेले गए मुकाबले से जुड़ी बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में स्टेडियम में घुसकर मेसी को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी।   इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। स्टेडियम में विस्फोटक विशेषज्ञों, डॉग हैंडलर्स और K-9 यूनिट की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया। एक अन्य कॉल में स्टेडियम के कूड़ेदानों में विस्फोटक रखे होने का दावा भी किया गया था।   रोनाल्डो की सुरक्षा को लेकर भी घटनाएं     विश्व कप के दौरान सिर्फ मेसी ही नहीं, पुर्तगाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो को लेकर भी सुरक्षा संबंधी घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 जून को फीफा के एक कर्मचारी ने अधिकारियों को सूचना दी थी कि एक व्यक्ति रोनाल्डो के ठिकाने की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।   इसके बाद ह्यूस्टन पुलिस ने उस होटल से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जहां रोनाल्डो और पुर्तगाल की टीम ठहरी थी। टोरंटो में भी एक व्यक्ति को रोनाल्डो के साथ लिफ्ट में जाने की कोशिश के बाद हिरासत में लिया गया। उसने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह सिर्फ रोनाल्डो के साथ सेल्फी लेना चाहता था।   रेफरी को मिले हजारों धमकी भरे संदेश     विश्व कप के दौरान फ्रांस के रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर को भी कथित तौर पर 6,000 से अधिक धमकी भरे WhatsApp संदेश मिले। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एफबीआई और इंटरनेशनल पुलिस को-ऑपरेशन से जुड़े संयुक्त नेटवर्क ने काम किया।   सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद संबंधी अलर्ट, खिलाड़ियों की स्टॉकिंग और हिंसा की धमकियों पर नजर रख रही थीं। इन घटनाओं ने एक बार फिर दिखाया कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा मैदान के बाहर भी बड़ी चुनौती बनी रहती है।

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French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
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भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

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