नई दिल्ली: मई 2026 सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बेहद अहम महीना साबित हो रहा है। Staff Selection Commission (SSC) से लेकर बैंक, पैरामिलिट्री और राज्य स्तरीय आयोगों तक–कुल मिलाकर 20,697 से ज्यादा पदों पर भर्तियां निकली हैं।
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से कई भर्तियों की अंतिम तारीख बेहद नजदीक है। ऐसे में अगर आपने अभी तक आवेदन नहीं किया है, तो यह मौका हाथ से निकल सकता है।
सरकारी नौकरी में सफलता का पहला और सबसे अहम स्टेप है–समय पर आवेदन। हर साल हजारों उम्मीदवार सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे आखिरी तारीख चूक जाते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल तैयारी ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही फॉर्म भरना भी उतना ही जरूरी है।
पटना के कोचिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक,
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Indian Navy Agniveer Recruitment 2026: देशसेवा का सपना देखने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। भारतीय नौसेना ने अग्निवीर भर्ती 01/2027 और 02/2027 बैच के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में अगर आप इंडियन नेवी का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा अवसर हो सकता है। किन बैचों के लिए हो रही है भर्ती? भारतीय नौसेना की ओर से Agniveer SSR और MR के तहत 01/2027 और 02/2027 बैच के लिए भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही है। आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक है, इसलिए उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन पूरा करने की सलाह दी जाती है। आयु सीमा क्या है? अग्निवीर भर्ती के लिए उम्मीदवारों की जन्म तिथि निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। अलग-अलग बैच के लिए आयु मानदंड नौसेना की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार तय किए गए हैं। आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को विस्तृत नोटिफिकेशन जरूर पढ़ना चाहिए। चयन प्रक्रिया कैसे होगी? इंडियन नेवी अग्निवीर भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों के आधार पर किया जाएगा: 1. लिखित परीक्षा सबसे पहले उम्मीदवारों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) देनी होगी। 2. फिजिकल फिटनेस टेस्ट (PFT) लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा से गुजरना होगा। पुरुष उम्मीदवारों के लिए: 1.6 किलोमीटर दौड़ निर्धारित समय में पूरी करनी होगी। पुश-अप्स और स्क्वाट्स जैसे अन्य शारीरिक मानकों को भी पूरा करना होगा। महिला उम्मीदवारों के लिए: 1.6 किलोमीटर दौड़ स्क्वाट्स और अन्य निर्धारित फिटनेस मानक 3. मेडिकल टेस्ट फिजिकल टेस्ट में सफल उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। 4. मेरिट लिस्ट सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी। आवेदन करते समय किन बातों का रखें ध्यान? सभी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। आवेदन पत्र में दी गई जानकारी सही भरें। फोटो और हस्ताक्षर निर्धारित प्रारूप में अपलोड करें। अंतिम तिथि का इंतजार न करें। भारतीय नौसेना में अग्निवीर के रूप में चयनित युवाओं को देश की सेवा करने के साथ-साथ अनुशासन, प्रशिक्षण और करियर के नए अवसर भी प्राप्त होते हैं।
रांची। झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका है। राज्य सरकार और विभिन्न विभागों द्वारा हजारों पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जा रही है। 10वीं पास, 12वीं पास, स्नातक और तकनीकी योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए 5 बड़े अवसर हैं। 1. JSSC जेल वार्डर (कक्षपाल) भर्ती 2026 झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (JSSC) द्वारा जेल वार्डर (कक्षपाल) के लगभग 1733 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसमें 10वीं पास अभ्यर्थियों को आवेदन का मौका मिलता है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन शामिल है। यह भर्ती राज्य के युवाओं के बीच सबसे चर्चित भर्तियों में शामिल है और बड़ी संख्या में उम्मीदवार इसकी तैयारी कर रहे हैं। 2. JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा जो युवा प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखते हैं उनके लिए JPSC Combined Civil Services Exam सबसे बड़ा अवसर है। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति विभिन्न प्रशासनिक पदों पर की जाती है। स्नातक पास उम्मीदवार इसमें आवेदन कर सकते हैं। बेहतरीन वेतन, प्रतिष्ठा और करियर ग्रोथ के कारण यह झारखंड की सबसे लोकप्रिय सरकारी नौकरियों में गिनी जाती है। 3. झारखंड होमगार्ड भर्ती 2026 झारखंड गृह रक्षा वाहिनी द्वारा विभिन्न जिलों में होमगार्ड भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीण एवं शहरी दोनों श्रेणियों में भर्ती निकाली गई है। कई जिलों में 7वीं और 10वीं पास उम्मीदवारों के लिए भी अवसर उपलब्ध हैं। हालांकि यह नियमित सरकारी नौकरी नहीं बल्कि स्वयंसेवी व्यवस्था है, लेकिन युवाओं के लिए सरकारी सेवा से जुड़ने का अच्छा मौका माना जा रहा है। 4. JSSC इंटर लेवल एवं मैट्रिक लेवल प्रतियोगिता परीक्षा JSSC समय-समय पर इंटर लेवल और मैट्रिक लेवल प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से विभिन्न विभागों में नियुक्तियां करता है। इसमें क्लर्क, सहायक, स्टेनो, तकनीकी एवं अन्य कई पद शामिल होते हैं। 12वीं पास और मैट्रिक पास युवाओं के लिए यह सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। 5. स्वास्थ्य एवं तकनीकी विभागों में नई भर्तियां झारखंड में AIIMS देवघर, मेडिकल कॉलेज, तकनीकी संस्थानों और विभिन्न विभागों में लगातार नई भर्तियां जारी हैं। नर्सिंग, तकनीकी सहायक, आईटी, प्रशासनिक एवं अन्य पदों पर योग्य उम्मीदवारों के लिए आवेदन के अवसर मिल रहे हैं। यदि आप तकनीकी या प्रोफेशनल डिग्री रखते हैं तो इन विभागों में बेहतर करियर बनाया जा सकता है। युवाओं के लिए सलाह JSSC और JPSC की आधिकारिक वेबसाइट नियमित रूप से चेक करें। भर्ती नोटिफिकेशन आने पर अंतिम तिथि का इंतजार न करें। शारीरिक परीक्षा वाली भर्तियों के लिए अभी से तैयारी शुरू करें। सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। झारखंड में वर्ष 2026 सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। JSSC, JPSC, जेल वार्डर, होमगार्ड और अन्य विभागों में निकल रही भर्तियां हजारों युवाओं को रोजगार का अवसर दे सकती हैं। यदि आप सही रणनीति और नियमित तैयारी के साथ आगे बढ़ते हैं तो सरकारी नौकरी पाने का सपना साकार हो सकता है।
उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2026 की लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून को छह शिफ्टों में आयोजित की जा चुकी है। 32,679 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती में 28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 21 लाख से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। अब परीक्षा समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल संभावित कटऑफ को लेकर उठ रहा है। कई अभ्यर्थी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर (UPSI) 2025 की तरह इस बार कांस्टेबल भर्ती की कटऑफ भी काफी ऊंची जा सकती है। इस विषय पर Careerwill के शिक्षक मोहित शर्मा ने विस्तार से अपनी राय दी है। क्या यूपी पुलिस कांस्टेबल की कटऑफ बहुत हाई जाएगी? मोहित शर्मा के अनुसार, यूपी एसआई भर्ती और कांस्टेबल भर्ती की परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं। उनका कहना है कि यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती की कटऑफ यूपी एसआई 2025 जैसी असामान्य रूप से ऊंची जाने की संभावना कम है। इसके पीछे ये प्रमुख कारण हैं: 1. पदों की संख्या काफी ज्यादा यूपी एसआई भर्ती में केवल 4,543 पद थे, जबकि कांस्टेबल भर्ती में 32,679 पद हैं। ज्यादा रिक्तियों के कारण चयन का दायरा बड़ा रहेगा और अधिक उम्मीदवार अगले चरण तक पहुंच सकेंगे। 2. फिजिकल के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवार होंगे शॉर्टलिस्ट एक्सपर्ट के मुताबिक, शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए लगभग 75,000 से 80,000 अभ्यर्थियों को बुलाया जा सकता है। 3. कांस्टेबल परीक्षा का स्तर अपेक्षाकृत कठिन रहा यूपी एसआई परीक्षा का पेपर अपेक्षाकृत आसान था, जिसके कारण उम्मीदवारों के अंक अधिक आए और कटऑफ भी बढ़ गई। वहीं कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा में मानसिक अभिरुचि, कथन-निष्कर्ष और गणित के प्रश्न लंबे तथा समय लेने वाले थे। इससे औसत प्रयास प्रभावित हुआ और मेरिट संतुलित रहने की संभावना बढ़ गई। मोहित शर्मा का कहना है कि केवल यूपी एसआई 2025 की कटऑफ देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दोनों परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया और रिक्तियों में बड़ा अंतर है। कितना स्कोर माना जा रहा है सुरक्षित? एक्सपर्ट के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार के लगभग 125 प्रश्न सही हैं और कुल अंक 250 से ऊपर बन रहे हैं, तो उसे सुरक्षित स्थिति में माना जा सकता है। ऐसे अभ्यर्थियों को अब लिखित परीक्षा की चिंता छोड़कर अगले चरण यानी: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शारीरिक मानक परीक्षण (PST) शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। यूपी पुलिस फिजिकल टेस्ट के मानक पुरुष अभ्यर्थियों के लिए सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 168 सेमी एसटी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 160 सेमी महिला अभ्यर्थियों के लिए सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 152 सेमी एसटी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 147 सेमी न्यूनतम वजन: 40 किलोग्राम रनिंग टेस्ट पुरुष उम्मीदवार 4.8 किलोमीटर दौड़ समय सीमा: 25 मिनट महिला उम्मीदवार 2.4 किलोमीटर दौड़ समय सीमा: 14 मिनट