कोलंबो, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज से पहले खेले जा रहे अभ्यास मैच के दौरान भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपने फुटबॉल कौशल से मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों और दर्शकों का ध्यान खींच लिया। क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के लिए मशहूर पंत अभ्यास सत्र के दौरान फुटबॉल खेलते नजर आए।
भारत और श्रीलंका के खिलाड़ियों के बीच अभ्यास मैच से पहले और उसके दौरान खिलाड़ियों ने हल्के-फुल्के अंदाज में फुटबॉल का भी आनंद लिया। इसी दौरान ऋषभ पंत ने गेंद पर शानदार नियंत्रण दिखाया और अपने फुटबॉल कौशल से साथी खिलाड़ियों का मनोरंजन किया। पंत का यह अंदाज सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। क्रिकेट प्रशंसकों ने उनके फुटबॉल कौशल की तारीफ करते हुए वीडियो और तस्वीरों को साझा किया।
भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले अभ्यास मैच भारतीय टीम के लिए परिस्थितियों को समझने का अहम मौका है। श्रीलंका की परिस्थितियों में बल्लेबाजों और गेंदबाजों को खुद को ढालने के लिए टीम प्रबंधन इस मुकाबले को महत्वपूर्ण मान रहा है। ऋषभ पंत भी टीम इंडिया के महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल हैं। विकेट के पीछे उनकी भूमिका के साथ-साथ मध्यक्रम में उनकी बल्लेबाजी टीम के लिए काफी अहम रहने वाली है।
ऋषभ पंत की फिटनेस भारतीय टीम के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में अभ्यास मैच और ट्रेनिंग के दौरान उनका सक्रिय नजर आना टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।पंत अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं और टेस्ट क्रिकेट में भी कई बार मैच का रुख बदलने वाली पारियां खेल चुके हैं। श्रीलंका के खिलाफ आगामी मुकाबलों में भी उनसे इसी तरह के प्रभावशाली प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
अभ्यास मैच के दौरान पंत का फुटबॉल खेलते हुए अंदाज प्रशंसकों को काफी पसंद आया। मैदान पर क्रिकेट से अलग उनका यह रूप देखने के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं।
हालांकि, भारतीय टीम के लिए असली चुनौती आगामी टेस्ट मुकाबलों में होगी। अभ्यास मैच के बाद टीम इंडिया का फोकस टेस्ट सीरीज में बेहतर प्रदर्शन करने और श्रीलंका की परिस्थितियों में मजबूत शुरुआत करने पर रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
जोहान्सबर्ग, एजेंसियां। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज कागिसो रबाडा ने 2027 वनडे विश्व कप को लेकर अपनी टीम की तैयारियों और घरेलू मैदान पर खेलने के दबाव पर बड़ा बयान दिया है। रबाडा का मानना है कि अपने देश में विश्व कप खेलना टीम के लिए अतिरिक्त दबाव नहीं, बल्कि एक तरह की आजादी और आत्मविश्वास का अनुभव होगा। दक्षिण अफ्रीका 2027 विश्व कप की मेजबानी जिम्बाब्वे और नामीबिया के साथ करेगा। घरेलू मैदान का दबाव महसूस नहीं करते रबाडा रबाडा ने कहा कि घरेलू मैदान पर खेलने को लेकर वह किसी अतिरिक्त दबाव को महसूस नहीं करते। उनके मुताबिक टीम के लिए यह अपने प्रशंसकों के सामने खेलने और घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने का शानदार अवसर होगा। उन्होंने घरेलू विश्व कप को 'किले की रक्षा' करने जैसा बताया। रबाडा के अनुसार टीम का ध्यान दबाव के बारे में सोचने के बजाय दक्षिण अफ्रीका के बैज का प्रतिनिधित्व करने और अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलने पर होना चाहिए। पहली बार विश्व कप जीतने पर नजर दक्षिण अफ्रीका ने वनडे विश्व कप में अब तक चार बार सेमीफाइनल तक का सफर तय किया है, लेकिन टीम कभी फाइनल में जगह नहीं बना सकी। ऐसे में 2027 का टूर्नामेंट उसके लिए इतिहास बदलने का बड़ा मौका होगा। रबाडा का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका ने हाल के वर्षों में बड़े मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता दिखाई है। टीम अब नॉकआउट मुकाबलों में उस आखिरी कदम को पार कर पहली बार वनडे विश्व कप खिताब जीतना चाहेगी। वसीम अकरम के प्रदर्शन से प्रेरणा रबाडा ने विश्व कप के ऐतिहासिक गेंदबाजी प्रदर्शनों में से एक का भी जिक्र किया। उन्होंने 1992 विश्व कप फाइनल में पाकिस्तान के वसीम अकरम के शानदार प्रदर्शन को याद किया और बताया कि ऐसे प्रदर्शन बड़े मुकाबलों में प्रभाव छोड़ने की प्रेरणा देते हैं। रबाडा खुद 2019 और 2023 वनडे विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका का हिस्सा रह चुके हैं। अब 2027 में घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का मौका उनके करियर के महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका के पास इतिहास बदलने का मौका 2027 वनडे विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में आयोजित किया जाएगा। घरेलू परिस्थितियों और हाल के वर्षों में टीम के लगातार बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए दक्षिण अफ्रीका को खिताब के मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। रबाडा और दक्षिण अफ्रीकी टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती सेमीफाइनल की बाधा पार कर पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने और फिर खिताब जीतने की होगी। घरेलू मैदान पर होने वाला यह विश्व कप टीम के लिए अपनी पुरानी नाकामी को पीछे छोड़ने का बड़ा अवसर बन सकता है।
एंटीगुआ, एजेंसियां। दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज को 2027 वनडे विश्व कप से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम अब टूर्नामेंट के लिए सीधे क्वालीफाई नहीं कर पाएगी और उसे क्वालीफायर मुकाबलों के जरिए विश्व कप में जगह बनाने की चुनौती का सामना करना होगा। अफगानिस्तान के आयरलैंड के खिलाफ जीत दर्ज कर सीधे क्वालीफाई करने के बाद वेस्टइंडीज की सीधे प्रवेश की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई। लगातार तीसरी बार क्वालीफायर का रास्ता वेस्टइंडीज के लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक है। टीम लगातार तीसरे वनडे विश्व कप में सीधे क्वालीफिकेशन हासिल करने में नाकाम रही है। 2019 विश्व कप के लिए भी उसे क्वालीफायर का रास्ता अपनाना पड़ा था, जबकि 2023 विश्व कप में टीम क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट से आगे नहीं बढ़ सकी थी। वेस्टइंडीज कभी वनडे क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में गिनी जाती थी और उसने 1975 तथा 1979 में विश्व कप खिताब जीता था। ऐसे में लगातार तीसरी बार सीधे क्वालीफाई करने से चूकना टीम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अफगानिस्तान की जीत ने बदला समीकरण अफगानिस्तान ने आयरलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए महत्वपूर्ण जीत हासिल की। इस जीत के साथ अफगानिस्तान ने 2027 विश्व कप में अपनी जगह पक्की कर ली और वेस्टइंडीज के लिए सीधे क्वालीफिकेशन का रास्ता बंद हो गया। वेस्टइंडीज की मौजूदा वनडे रैंकिंग और क्वालीफिकेशन समीकरणों में अफगानिस्तान की स्थिति बेहतर होने के कारण अब कैरेबियाई टीम के पास सीधे प्रवेश का रास्ता नहीं बचा है। भारत के खिलाफ सीरीज पर भी नजर वेस्टइंडीज के लिए आगे की वनडे सीरीज महत्वपूर्ण होगी। टीम को न केवल अपनी रैंकिंग और प्रदर्शन सुधारने की जरूरत होगी, बल्कि विश्व कप में जगह बनाने के लिए क्वालीफायर में भी मजबूत प्रदर्शन करना पड़ेगा। भारत के खिलाफ आगामी मुकाबले वेस्टइंडीज के लिए अपनी वनडे टीम को मजबूत करने और खिलाड़ियों को बड़े टूर्नामेंट से पहले तैयार करने का महत्वपूर्ण मौका होंगे। 2027 विश्व कप में जगह बनाने के लिए कड़ी चुनौती 2027 वनडे विश्व कप की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया करेंगे। वेस्टइंडीज अब सीधे प्रवेश के बजाय क्वालीफायर के जरिए टूर्नामेंट में जगह बनाने की कोशिश करेगा।हालांकि, वेस्टइंडीज के पास अभी विश्व कप में पहुंचने का रास्ता खुला है, लेकिन टीम को क्वालीफायर में किसी भी गलती से बचना होगा। दो बार की चैंपियन टीम के लिए अब चुनौती सिर्फ विश्व कप में पहुंचने की नहीं, बल्कि अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस हासिल करने की भी है।
नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज 15 अगस्त से शुरू होने जा रही है। पहला मुकाबला गाले में खेला जाएगा, जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में प्रस्तावित है। करीब नौ साल बाद भारतीय टीम श्रीलंका में टेस्ट सीरीज खेलने उतरेगी। सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम के सामने प्लेइंग XI को लेकर कई सवाल हैं। चोटों और टीम संयोजन के बीच कुछ खिलाड़ियों के लिए अंतिम एकादश में जगह बनाना आसान नहीं होगा। ऐसे में चार खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्हें दोनों टेस्ट में बेंच पर बैठना पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला टीम प्रबंधन परिस्थितियों, पिच और खिलाड़ियों की फिटनेस को देखकर करेगा। 1. सरफराज खान साई सुदर्शन के चोटिल होकर सीरीज से बाहर होने के बाद सरफराज खान को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। लेकिन सरफराज के सामने सबसे बड़ी चुनौती मध्यक्रम में जगह बनाने की होगी। अभ्यास मैच में देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाया, जिससे टीम प्रबंधन के सामने उनका दावा मजबूत हुआ है। हालांकि सरफराज को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी आसान नहीं होगा। पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भी श्रीलंका की स्पिन मददगार परिस्थितियों में सरफराज को मौका दिए जाने की वकालत की है। इसलिए सरफराज के लिए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन दोनों टेस्ट में लगातार खेलने का रास्ता चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है। 2. सारांश जैन सारांश जैन टीम के प्रमुख ऑफ स्पिन विकल्पों में शामिल हैं। श्रीलंका की परिस्थितियों को देखते हुए एक अतिरिक्त स्पिनर की भूमिका अहम हो सकती है, लेकिन प्लेइंग XI में जगह बनाने के लिए उन्हें रविंद्र जडेजा और अन्य स्पिन विकल्पों से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। अभ्यास मैच में सारांश जैन विकेट हासिल नहीं कर सके। दूसरी ओर मानव सुथार ने अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया। ऐसे में टीम प्रबंधन बाएं हाथ के स्पिन विकल्प के साथ जाने का फैसला कर सकता है। अगर परिस्थितियां टीम को अतिरिक्त ऑफ स्पिनर खिलाने के लिए मजबूर नहीं करतीं, तो सारांश को बाहर बैठना पड़ सकता है। 3. गुरनूर बरार गुरनूर बरार के लिए चुनौती टीम के तेज गेंदबाजी संयोजन से जुड़ी है। श्रीलंका की परिस्थितियां आम तौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं और ऐसे में भारत के लिए तीन या चार तेज गेंदबाजों के साथ उतरना जरूरी नहीं होगा। जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति के बावजूद भारत के पास मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे विकल्प हैं। बुमराह चोट के कारण सीरीज से बाहर हैं, जबकि उनकी जगह औकिब नबी को टीम में शामिल किया गया है। गुरनूर ने अभी भारत के लिए टेस्ट डेब्यू नहीं किया है। ऐसे में टीम प्रबंधन अनुभव और परिस्थितियों को प्राथमिकता देता है तो उन्हें दोनों मुकाबलों में मौका मिलना मुश्किल हो सकता है। 4. औकिब नबी जसप्रीत बुमराह की जगह टीम में शामिल किए गए औकिब नबी के लिए भी प्लेइंग XI में जगह बनाना आसान नहीं होगा। अभ्यास मैच में उन्हें पहली पारी में गेंदबाजी का पर्याप्त मौका नहीं मिला, जबकि दूसरी पारी में मिले ओवरों में वह बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ सके। भारत के पास तेज गेंदबाजी में सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा के विकल्प मौजूद हैं। वहीं स्पिन विभाग में रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव और अन्य विकल्प टीम संयोजन को अलग दिशा दे सकते हैं। इसलिए बुमराह के स्थान पर टीम में शामिल होने के बावजूद नबी को तुरंत अंतिम एकादश में जगह मिलेगी, यह तय नहीं है। भारत के लिए स्पिन बनाम पेस का होगा बड़ा सवाल श्रीलंका दौरे पर भारतीय टीम के चयन में सबसे महत्वपूर्ण सवाल गेंदबाजी संयोजन का हो सकता है। गाले और कोलंबो की परिस्थितियां मैच आगे बढ़ने के साथ स्पिन गेंदबाजों को मदद दे सकती हैं। ऐसे में भारत एक से अधिक विशेषज्ञ स्पिनर खिलाने पर विचार कर सकता है। दूसरी ओर, तेज गेंदबाजों की भूमिका नई गेंद और शुरुआती परिस्थितियों में महत्वपूर्ण रहेगी। कप्तान शुभमन गिल और कोचिंग स्टाफ को बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच सही संतुलन बनाना होगा। चोटों ने बदला टीम का समीकरण सीरीज से पहले भारत को कई चोटों से भी जूझना पड़ा है। साई सुदर्शन के बाहर होने के बाद सरफराज की वापसी हुई है, जबकि जसप्रीत बुमराह भी टेस्ट सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। शुभमन गिल भी अभ्यास मैच के दौरान चोटिल हुए थे, हालांकि बाद में उन्होंने बल्लेबाजी की और टीम प्रबंधन ने उनकी उपलब्धता को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। ऐसे में सीरीज के दोनों टेस्ट के बीच टीम संयोजन में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।