नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में मोरक्को ने रोमांचक मुकाबले में नीदरलैंड्स को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में जगह बना ली। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर रहीं, जिसके बाद मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। इस जीत के साथ मोरक्को ने टूर्नामेंट में अपना शानदार अभियान जारी रखा, जबकि नीदरलैंड्स का सफर यहीं समाप्त हो गया।
मुकाबले में नीदरलैंड्स ने 72वें मिनट में कोडी गैकपो के गोल की बदौलत बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसा लग रहा था कि टीम जीत दर्ज कर लेगी, लेकिन इंजरी टाइम के 91वें मिनट में इस्सा डियोप ने शानदार गोल दागकर मोरक्को को बराबरी दिला दी। इसके बाद स्टॉपेज टाइम और 30 मिनट के अतिरिक्त समय में दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक पहुंच गया।
पेनल्टी शूटआउट में मोरक्को के सूफियान रहीमी, चेम्सदीन तालबी और इस्माइल सैबारी ने गोल दागकर टीम को 3-2 से जीत दिलाई। वहीं नीदरलैंड्स की ओर से ट्यून कूपमीनर्स और वाउट वेघोर्स्ट ही सफल हो सके। मोरक्को के गोलकीपर और खिलाड़ियों के संयम ने टीम को यादगार जीत दिलाई।
नीदरलैंड्स की टीम इससे पहले लगातार 11 विश्व कप में कम से कम राउंड ऑफ 16 तक पहुंचने में सफल रही थी। पिछले विश्व कप में टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी, लेकिन इस बार उसे शुरुआती नॉकआउट चरण में ही बाहर होना पड़ा। दूसरी ओर, पिछले विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचने वाला मोरक्को एक बार फिर मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है।
अब राउंड ऑफ 16 में मोरक्को का सामना 4 जुलाई को कनाडा से होगा। भारतीय समयानुसार यह मुकाबला रात 10:30 बजे खेला जाएगा। शानदार फॉर्म में चल रही मोरक्को की टीम इस जीत के बाद पूरे आत्मविश्वास के साथ अगले दौर में उतरेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। महाराष्ट्र के पुणे में चल रही 16वीं हॉकी इंडिया राष्ट्रीय जूनियर महिला हॉकी चैंपियनशिप 2026 में झारखंड महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। झारखंड ने अपने दूसरे मुकाबले में हॉकी पंजाब को 3-1 से हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ टीम ने अपने पूल में शीर्ष स्थान हासिल कर अगले दौर में प्रवेश किया। शुरुआती बढ़त के बाद झारखंड ने की शानदार वापसी पंजाब ने मुकाबले की शुरुआत में ही झारखंड पर दबाव बनाया। पहले क्वार्टर के सातवें मिनट में पंजाब की ओर से फील्ड गोल कर 1-0 की बढ़त हासिल की गई। शुरुआती झटके के बावजूद झारखंड की खिलाड़ियों ने धैर्य बनाए रखा और लगातार आक्रामक खेल जारी रखा। मुकाबले के 23वें मिनट में झारखंड की कप्तान रजनी केरकेट्टा ने शानदार फील्ड गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद झारखंड ने मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। पेनाल्टी कॉर्नर को पुष्पा डांग ने गोल में बदला तीसरे क्वार्टर में झारखंड को 36वें मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर मिला। पुष्पा डांग ने इस मौके को गोल में तब्दील कर टीम को 2-1 की बढ़त दिला दी। इसके बाद झारखंड की टीम ने आक्रमण के साथ-साथ डिफेंस पर भी बेहतर नियंत्रण बनाए रखा। पंजाब की खिलाड़ियों ने बराबरी के लिए कई प्रयास किए, लेकिन झारखंड की मजबूत रक्षापंक्ति ने उनके प्रयासों को नाकाम कर दिया। 58वें मिनट में सलोमी नाग ने दागा तीसरा गोल मुकाबले के अंतिम चरण में झारखंड को एक और सफलता मिली। 58वें मिनट में सलोमी नाग ने शानदार फील्ड गोल कर टीम की बढ़त 3-1 कर दी। इसके बाद पंजाब की टीम वापसी नहीं कर सकी और झारखंड ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। झारखंड की डिफेंडर जिरेन सोय को शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। चंडीगढ़ को 6-0 से भी दी थी मात झारखंड ने इससे पहले प्रतियोगिता के अपने पहले मुकाबले में हॉकी चंडीगढ़ को 6-0 से करारी शिकस्त दी थी। लगातार दो जीत के बाद टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उसकी नजर क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करने पर है। हॉकी झारखंड और खेल विभाग के पदाधिकारियों ने टीम को जीत की बधाई देते हुए आगामी मुकाबले के लिए शुभकामनाएं दीं। दबाव में टीम ने दिखाया शानदार खेल हॉकी झारखंड के महासचिव मनोज प्रसाद ने टीम के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने शुरुआती झटके के बाद भी आत्मविश्वास नहीं खोया और एकजुट होकर शानदार वापसी की। उनके मुताबिक, लगातार दो जीत के साथ क्वार्टर फाइनल में पहुंचना टीम के लिए बड़ी उपलब्धि है। झारखंड टीम में ये खिलाड़ी शामिल झारखंड टीम में गंगी बरला, सोनाली तिर्की, सरोज कुमारी, जिरेन सोय, एस्थर होरो, संगीता कुमारी, अनीषा कुल्लू, सलोमी नाग, गुलजन कुमारी, रजनी केरकेट्टा, पुष्पा डांग, अनुप्रिया सोरेंग, रीना कुल्लू, स्वीटी डुंगडुंग, सरोज मुंडरी, सुकरमनी मुंडू, लियोनी हेमरोम और जमुना कुमारी शामिल हैं। टीम के कोच विकास पंत, सहायक कोच अभिषेक कुमार, मैनेजर दिव्या डुंगडुंग और फिजियो स्वीटी खातून हैं।
डार्विन, एजेंसियां। बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को डार्विन के मैरारा ओवल में खेले गए पहले टेस्ट में 9 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया। यह बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलियाई धरती पर पहली टेस्ट जीत है। चार दिन में खत्म हुए मुकाबले में बांग्लादेश ने 57 रन का मामूली लक्ष्य सिर्फ एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में 284 रन पर सिमटा बांग्लादेश ने पहली पारी में 426 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया पर 228 रन की बड़ी बढ़त हासिल की थी। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में कैमरन ग्रीन ने 104 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 284 रन पर ऑलआउट हो गई और बांग्लादेश के सामने केवल 57 रन का लक्ष्य आया। मीराज और हसन महमूद रहे जीत के हीरो बांग्लादेश की ऐतिहासिक जीत में हसन महमूद और मेहदी हसन मीराज की गेंदबाजी ने अहम भूमिका निभाई। हसन महमूद ने मैच में कुल 9 विकेट लिए और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। मीराज ने दूसरी पारी में 5 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं पहली पारी में तंजिद हसन ने 101 रन बनाकर बांग्लादेश के लिए ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर ऐतिहासिक शतक लगाया था। कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने भी 84 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। 57 रन का लक्ष्य 14.2 ओवर में हासिल ऑस्ट्रेलिया के 284 रन पर सिमटने के बाद बांग्लादेश को जीत के लिए सिर्फ 57 रन चाहिए थे। लक्ष्य का पीछा करते हुए मोमिनुल हक ने विजयी रन बनाया। बांग्लादेश ने 14.2 ओवर में 57/1 बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ बांग्लादेश ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। दूसरा टेस्ट 22 अगस्त से मैके में खेला जाएगा। कमिंस ने माना- बांग्लादेश ने हर विभाग में पछाड़ा हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने माना कि उनकी टीम को बांग्लादेश ने खेल के लगभग हर विभाग में पछाड़ दिया। उन्होंने टीम की बल्लेबाजी की समीक्षा और दूसरे टेस्ट से पहले संभावित बदलावों के संकेत भी दिए हैं।
डार्विन, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड ने बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन में खेले जा रहे पहले टेस्ट में शानदार गेंदबाजी करते हुए टेस्ट क्रिकेट में 300 विकेट पूरे कर लिए। हेजलवुड ने बांग्लादेश की पहली पारी में 6 विकेट लेकर 89 रन दिए और इस दौरान अपने करियर का 300वां टेस्ट विकेट हासिल किया। 76वें टेस्ट में हासिल की बड़ी उपलब्धि हेजलवुड ने अपने 76वें टेस्ट मैच में 300 विकेट का आंकड़ा छुआ। बांग्लादेश की पहली पारी में उन्होंने कुल छह बल्लेबाजों को आउट किया। उनका 300वां विकेट एबादत हुसैन का रहा, जिसके साथ ही वह ऑस्ट्रेलिया के चुनिंदा गेंदबाजों के क्लब में शामिल हो गए। यह हेजलवुड का टेस्ट क्रिकेट में 14वां पांच विकेट हॉल भी रहा। चोट के कारण लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट से दूर रहने के बाद वापसी करते हुए उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। 300 विकेट लेने वाले ऑस्ट्रेलिया के नौवें गेंदबाज हेजलवुड टेस्ट क्रिकेट में 300 विकेट लेने वाले ऑस्ट्रेलिया के नौवें गेंदबाज बन गए हैं। वह इस उपलब्धि को हासिल करने वाले ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के खास समूह में शामिल हो गए हैं। उनसे पहले नाथन लियोन, पैट कमिंस और मिशेल स्टार्क भी 300 से ज्यादा टेस्ट विकेट हासिल कर चुके हैं। खास बात यह है कि अब ऑस्ट्रेलिया के पास एक ही समय में चार ऐसे गेंदबाज हैं, जो 300 टेस्ट विकेट का आंकड़ा पार कर चुके हैं। बांग्लादेश की मजबूत बल्लेबाजी के बावजूद हेजलवुड का जलवा हेजलवुड के 6/89 के शानदार प्रदर्शन के बावजूद बांग्लादेश ने पहली पारी में 426 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। बांग्लादेश ने इसके बाद ऑस्ट्रेलिया पर 228 रन की पहली पारी की बढ़त हासिल कर ली। बांग्लादेश की ओर से तंजीद हसन के शतक और निचले क्रम के उपयोगी योगदान ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। वहीं हेजलवुड ऑस्ट्रेलिया के सबसे प्रभावी गेंदबाज रहे। ऑस्ट्रेलिया के लिए मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण हेजलवुड की व्यक्तिगत उपलब्धि के बावजूद डार्विन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया मुश्किल स्थिति में पहुंच गया। बांग्लादेश की पहली पारी के जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी में भी शुरुआती विकेट गंवाए। तीसरे दिन के स्टंप्स तक ऑस्ट्रेलिया 161/4 था और अभी भी बांग्लादेश से 67 रन पीछे था।