टेक्नोलॉजी

गूगल ने $10 मिलियन में Spirit Airlines का डेटा खरीदा

गूगल ने 10 मिलियन डॉलर में खरीटा स्पिरिट एयरलाइंस का डेटा, AI मॉडल ट्रेनिंग में होगा इस्तेमाल

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
गूगल द्वारा स्पिरिट एयरलाइंस का डेटा खरीदने की खबर
Google ने Spirit Airlines का डेटा AI ट्रेनिंग के लिए खरीदा

नई दिल्ली, एजेंसियां। गूगल ने दिवालिया हो चुकी अमेरिकी एयरलाइन स्पिरिट एयरलाइंस के आंतरिक कारोबारी डेटा को 10 मिलियन डॉलर में खरीदने के लिए बोली जीती है। इस डेटा का इस्तेमाल गूगल अपने उत्पादों को बेहतर बनाने और AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए कर सकता है। हालांकि, सौदे को अंतिम मंजूरी अभी अमेरिकी दिवालियापन अदालत से मिलनी बाकी है।

 

100 मिलियन ईमेल और 500 मिलियन Teams संदेश शामिल

 

 

गूगल के इस डेटा पैकेज में स्पिरिट एयरलाइंस के करीब 10 करोड़ कर्मचारी ईमेल और लगभग 50 करोड़ Microsoft Teams संदेश शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा कंपनी की आंतरिक फाइलें, कैलेंडर, स्प्रेडशीट, संचालन संबंधी रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर कोड भी डेटा पैकेज का हिस्सा हैं।

 

 

AI मॉडल को मिलेगा वास्तविक कारोबारी डेटा

 

 

गूगल ने कहा है कि उसने एंटरप्राइज डेटा का एक हिस्सा हासिल किया है, जो उसके उत्पादों और AI मॉडल को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकता है। इस सौदे से गूगल को वास्तविक दुनिया में किसी बड़े कारोबारी संगठन के संचालन, प्रक्रियाओं और समस्याओं से जुड़े विशाल डेटा का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।

 

 

व्यक्तिगत जानकारी हटाने की शर्त

 

 

डेटा की खरीद को लेकर गोपनीयता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार, गूगल को दिया जाने वाला डेटा व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी हटाने के बाद उपलब्ध कराया जाएगा। ग्राहक की पहचान से जुड़ी कई जानकारियां और कुछ संवेदनशील रिकॉर्ड सौदे से बाहर रखे गए हैं।

 

 

सौदे पर उठे गोपनीयता के सवाल

 

 

स्पिरिट एयरलाइंस के फ्लाइट अटेंडेंट्स के संगठन ने डेटा बिक्री पर आपत्ति जताई है। इसी कारण अदालत में होने वाली सुनवाई को आगे बढ़ाकर 9 सितंबर 2026 कर दिया गया है। इससे गूगल की 10 मिलियन डॉलर वाली डील को फिलहाल अंतिम मंजूरी मिलने में देरी हुई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल CERT-In ने Google Chrome के डेस्कटॉप यूजर्स के लिए हाई-सीवियरिटी सुरक्षा चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने Chrome में कई सुरक्षा कमजोरियों की पहचान की है, जिनका फायदा उठाकर दूर बैठे हमलावर सिस्टम में मनमाना कोड चला सकते हैं, संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बना सकते हैं या सिस्टम को बाधित कर सकते हैं।   Windows, macOS और Linux यूजर्स प्रभावित     CERT-In की चेतावनी Windows, macOS और Linux पर चलने वाले Google Chrome के डेस्कटॉप संस्करणों से संबंधित है। रिपोर्ट के अनुसार, कमजोरियां Chrome के V8 JavaScript इंजन, TabStrip, HTML, Extensions और Blink जैसे अलग-अलग घटकों में मौजूद हैं।   इनमें कुछ use-after-free प्रकार की कमजोरियां शामिल हैं। ऐसी खामियों का सफलतापूर्वक फायदा उठाया जाने पर हमलावर प्रभावित कंप्यूटर पर मनमाना कोड चला सकता है या सिस्टम में बाधा पैदा कर सकता है।   फर्जी वेबसाइट के जरिए हो सकता है हमला     साइबर अपराधी किसी यूजर को विशेष रूप से तैयार किए गए वेबपेज या लिंक पर जाने के लिए प्रेरित कर इन कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं। सफल हमले की स्थिति में सिस्टम पर अनधिकृत नियंत्रण और डेटा चोरी का जोखिम पैदा हो सकता है।   CERT-In की सलाह ऐसे समय आई है जब एजेंसी ने 14 अगस्त 2026 को Google Chrome for Desktop में कई कमजोरियों के लिए अलग Vulnerability Note भी जारी किया है।   Chrome यूजर्स तुरंत करें अपडेट     सुरक्षित रहने के लिए यूजर्स को Google Chrome का नवीनतम उपलब्ध सुरक्षा अपडेट तुरंत इंस्टॉल करने की सलाह दी गई है। Chrome में जाकर Settings → About Chrome खोलें और उपलब्ध अपडेट को इंस्टॉल करें। अपडेट पूरा होने के बाद ब्राउजर को Relaunch करना जरूरी है।   यूजर्स को अनजान वेबसाइट, संदिग्ध लिंक और ईमेल में आए संदिग्ध अटैचमेंट खोलने से भी बचना चाहिए।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। Infinix Hot 70 Pro 5G को लेकर सामने आई लीक रिपोर्ट्स ने स्मार्टफोन बाजार में हलचल बढ़ा दी है। फोन में MediaTek Dimensity 7100 5G चिपसेट, 144Hz डिस्प्ले, 50MP कैमरा और 6000mAh बैटरी जैसे फीचर्स मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, भारत में लॉन्च की आधिकारिक तारीख और कीमत की पुष्टि अभी कंपनी ने नहीं की है।    144Hz डिस्प्ले और Dimensity 7100 चिपसेट   लीक्स के अनुसार, Infinix Hot 70 Pro 5G में 6.76 इंच का डिस्प्ले मिल सकता है, जिसका रिफ्रेश रेट 144Hz होगा। फोन में MediaTek Dimensity 7100 5G प्रोसेसर दिए जाने की बात कही गई है। इसके साथ 8GB तक रैम और 256GB स्टोरेज का विकल्प मिलने की जानकारी भी सामने आई है।    50MP कैमरा और 6000mAh बैटरी   कैमरा सेटअप में 50MP का मुख्य रियर कैमरा मिलने की उम्मीद है। कुछ रिपोर्टों में Sony IMX882 सेंसर का भी जिक्र किया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 8MP फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। फोन में 6000mAh बैटरी और 45W फास्ट चार्जिंग मिलने की जानकारी है।    Active Matrix Cube से अलग होगा डिजाइन   फोन की सबसे खास खूबियों में से एक इसका रियर डिजाइन बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें Active Matrix Cube नाम का रियर LED सिस्टम मिल सकता है, जो नोटिफिकेशन और अलग-अलग गतिविधियों के अनुसार रोशनी दिखाएगा। यह फीचर Infinix के डिजाइन को सामान्य बजट 5G स्मार्टफोन से अलग बना सकता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। Apple के आगामी iPhone 18 को लेकर नई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। कंपनी के अगले आईफोन में 12GB RAM दिए जाने की संभावना है, जो iPhone 17 के 8GB RAM से काफी ज्यादा होगी। इस अतिरिक्त RAM का प्रमुख उद्देश्य डिवाइस पर ज्यादा शक्तिशाली AI मॉडल और एडवांस्ड Siri को बेहतर तरीके से चलाना बताया जा रहा है।   एडवांस्ड Siri के लिए 12GB RAM अहम   रिपोर्ट के मुताबिक Apple के नए AI सिस्टम को ज्यादा मेमोरी की जरूरत होगी। खासतौर पर Siri के ऑन-डिवाइस AI फीचर्स के लिए 12GB यूनिफाइड मेमोरी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। इससे Siri को ज्यादा जटिल सवाल समझने, व्यक्तिगत संदर्भ के आधार पर जवाब देने और कुछ AI कार्यों को सीधे फोन पर प्रोसेस करने में मदद मिल सकती है।   iPhone 18 की लॉन्च टाइमलाइन बदली   ताजा रिपोर्टों के अनुसार Apple इस बार iPhone लॉन्च रणनीति में बदलाव कर सकता है। iPhone 18 Pro सीरीज सितंबर 2026 में आ सकती है, जबकि स्टैंडर्ड iPhone 18 को 2027 की शुरुआत तक टाला जा सकता है। हालांकि Apple ने अभी आधिकारिक लॉन्च तारीख की घोषणा नहीं की है।   कीमत में बड़ी बढ़ोतरी नहीं होने की उम्मीद   कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि RAM को 8GB से बढ़ाकर 12GB करने के बावजूद Apple स्टैंडर्ड iPhone 18 की शुरुआती कीमत में बड़ी बढ़ोतरी नहीं कर सकता है। हालांकि, यह जानकारी अभी रिपोर्ट और विश्लेषकों के अनुमानों पर आधारित है।

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