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New Birth & Death Certificate Rules Explained

Birth Death Certificate New Rules: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले नियम, 2 साल बाद मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी; फोन से ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

surbhi अगस्त 9, 2026 0
Online birth and death certificate application process through the CRS portal with updated registration rules and digital services.
Birth Death Certificate New Rules 2026

नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बेहद महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज हैं। स्कूल में दाखिले से लेकर सरकारी योजनाओं, पासपोर्ट, संपत्ति और कई अन्य जरूरी कामों में इनकी आवश्यकता पड़ सकती है। अब जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद समय पर रजिस्ट्रेशन कराना और भी जरूरी हो गया है।

नए प्रावधानों के तहत अगर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो साल से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो इसे दर्ज कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी। ऐसे में लोगों के लिए बेहतर है कि वे निर्धारित समय के भीतर ही जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन करा लें।

खास बात यह है कि इसके लिए हर बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना जरूरी नहीं है। कई जगहों पर नागरिक ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाएं राज्य या स्थानीय निकाय के अनुसार अलग हो सकती हैं।

जन्म प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन कैसे करें आवेदन?

जन्म प्रमाण पत्र के लिए नागरिक CRS पोर्टल या अपने क्षेत्र के नगर निगम/स्थानीय निकाय की आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑनलाइन आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. संबंधित CRS पोर्टल या नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  2. General Public Signup/Citizen Login के माध्यम से अकाउंट बनाएं या लॉग-इन करें।
  3. लॉग-इन करने के बाद Birth Registration/Apply Online जैसे विकल्प पर जाएं।
  4. बच्चे का नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान और माता-पिता की जानकारी सावधानी से भरें।
  5. जहां मांगी जाए वहां अस्पताल की बर्थ रिपोर्ट/डिस्चार्ज स्लिप और माता-पिता के पहचान दस्तावेज अपलोड करें।
  6. आवेदन जमा करने के बाद मिलने वाला Application Reference Number सुरक्षित रखें।
  7. कुछ स्थानीय निकायों में आवेदन के बाद दस्तावेजों या रेफरेंस की कॉपी कार्यालय में जमा करनी पड़ सकती है।
  8. आवेदन स्वीकृत होने के बाद उपलब्ध होने पर डिजिटल हस्ताक्षर वाला जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है।

डेथ सर्टिफिकेट के लिए कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी नागरिक संबंधित CRS पोर्टल या नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

इसके लिए सामान्य तौर पर:

  1. पोर्टल पर Citizen Login से लॉग-इन करें।
  2. Death Registration/Apply for Death Certificate विकल्प चुनें।
  3. मृतक की मृत्यु की तारीख, समय, स्थान और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करें।
  4. अस्पताल की डेथ समरी/मृत्यु संबंधी चिकित्सा दस्तावेज और जरूरी पहचान पत्र अपलोड करें।
  5. आवेदन जमा करने के बाद मिलने वाला Reference Number सुरक्षित रखें।
  6. यदि स्थानीय निकाय की ओर से जरूरी हो, तो रेफरेंस की कॉपी और अन्य दस्तावेज कार्यालय में जमा करें।
  7. आवेदन स्वीकृत होने के बाद उपलब्ध होने पर डिजिटल हस्ताक्षर वाला मृत्यु प्रमाण पत्र पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है।

21 दिन के भीतर पंजीकरण कराना बेहतर

जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण समय पर कराना बेहद जरूरी है। सामान्य तौर पर 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने पर प्रक्रिया आसान रहती है। देरी बढ़ने के साथ अतिरिक्त औपचारिकताएं और दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है।

वहीं, दो साल से अधिक देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जैसी अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया लागू हो सकती है। इसलिए परिवारों को सलाह दी जाती है कि बच्चे के जन्म या परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को टालें नहीं।

आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान

ऑनलाइन आवेदन करते समय नाम, जन्म या मृत्यु की तारीख, स्थान और अन्य व्यक्तिगत जानकारी बिल्कुल सही भरें। जानकारी अस्पताल के रिकॉर्ड और संबंधित सरकारी पहचान दस्तावेजों से मिलती-जुलती होनी चाहिए।

यह भी ध्यान रखें कि CRS पोर्टल और स्थानीय निकायों की ऑनलाइन प्रक्रिया हर जगह एक जैसी नहीं हो सकती। इसलिए आवेदन से पहले अपने राज्य, नगर निगम या स्थानीय रजिस्ट्रार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मौजूदा निर्देश जरूर जांच लें।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 25.15 करोड़ से बढ़कर 109.27 करोड़, BharatNet ने भी पकड़ी रफ्तार

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी का दायरा पिछले 12 वर्षों में तेजी से बढ़ा है। केंद्र सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या मार्च 2014 में 25.15 करोड़ थी, जो बढ़कर मार्च 2026 में 109.27 करोड़ हो गई। यानी इस अवधि में इंटरनेट सब्सक्राइबर आधार में करीब 84.12 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।   12 साल में चार गुना से ज्यादा बढ़े इंटरनेट सब्सक्राइबर   सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2014 में भारत में 25.15 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे। मार्च 2026 तक यह संख्या 109.27 करोड़ पर पहुंच गई। इस तरह 12 वर्षों में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या चार गुना से भी ज्यादा हो गई है। इसी अवधि में देश में टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ। मार्च 2014 में करीब 93.3 करोड़ टेलीफोन कनेक्शन थे, जो मार्च 2026 में बढ़कर 133 करोड़ से अधिक हो गए।   BharatNet से गांवों तक पहुंचा ब्रॉडबैंड   ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने में BharatNet परियोजना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के अनुसार 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सर्विस-रेडी बनाया जा चुका है। इसके अलावा 80,472 से अधिक पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoPs) परिचालन में हैं।   BharatNet का उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों और ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और अन्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिली है।   4G से 5G तक बदला डिजिटल परिदृश्य   पिछले एक दशक से ज्यादा समय में भारत के डिजिटल परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव आया है। 4G नेटवर्क के व्यापक विस्तार के बाद 5G सेवाओं ने मोबाइल इंटरनेट की गति और उपयोग के नए अवसर खोले हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ UPI, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। हालांकि, देश के सभी हिस्सों में समान गुणवत्ता वाली इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।   आंकड़े बताते हैं डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार   मार्च 2014 से मार्च 2026 के बीच इंटरनेट सब्सक्राइबर्स में करीब 84 करोड़ की वृद्धि भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के बड़े विस्तार को दिखाती है। हालांकि, इन आंकड़ों को इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले विशिष्ट लोगों की संख्या के बराबर नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि एक व्यक्ति के पास एक से अधिक इंटरनेट कनेक्शन हो सकते हैं।   कुल मिलाकर, 109.27 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर का आंकड़ा भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार को दर्शाता है, जबकि BharatNet के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

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Online birth and death certificate application process through the CRS portal with updated registration rules and digital services.
Birth Death Certificate New Rules: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले नियम, 2 साल बाद मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी; फोन से ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बेहद महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज हैं। स्कूल में दाखिले से लेकर सरकारी योजनाओं, पासपोर्ट, संपत्ति और कई अन्य जरूरी कामों में इनकी आवश्यकता पड़ सकती है। अब जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद समय पर रजिस्ट्रेशन कराना और भी जरूरी हो गया है। नए प्रावधानों के तहत अगर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो साल से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो इसे दर्ज कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी। ऐसे में लोगों के लिए बेहतर है कि वे निर्धारित समय के भीतर ही जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन करा लें। खास बात यह है कि इसके लिए हर बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना जरूरी नहीं है। कई जगहों पर नागरिक ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाएं राज्य या स्थानीय निकाय के अनुसार अलग हो सकती हैं। जन्म प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन कैसे करें आवेदन? जन्म प्रमाण पत्र के लिए नागरिक CRS पोर्टल या अपने क्षेत्र के नगर निगम/स्थानीय निकाय की आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है: संबंधित CRS पोर्टल या नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। General Public Signup/Citizen Login के माध्यम से अकाउंट बनाएं या लॉग-इन करें। लॉग-इन करने के बाद Birth Registration/Apply Online जैसे विकल्प पर जाएं। बच्चे का नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान और माता-पिता की जानकारी सावधानी से भरें। जहां मांगी जाए वहां अस्पताल की बर्थ रिपोर्ट/डिस्चार्ज स्लिप और माता-पिता के पहचान दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन जमा करने के बाद मिलने वाला Application Reference Number सुरक्षित रखें। कुछ स्थानीय निकायों में आवेदन के बाद दस्तावेजों या रेफरेंस की कॉपी कार्यालय में जमा करनी पड़ सकती है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उपलब्ध होने पर डिजिटल हस्ताक्षर वाला जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है। डेथ सर्टिफिकेट के लिए कैसे करें ऑनलाइन आवेदन? मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी नागरिक संबंधित CRS पोर्टल या नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सामान्य तौर पर: पोर्टल पर Citizen Login से लॉग-इन करें। Death Registration/Apply for Death Certificate विकल्प चुनें। मृतक की मृत्यु की तारीख, समय, स्थान और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करें। अस्पताल की डेथ समरी/मृत्यु संबंधी चिकित्सा दस्तावेज और जरूरी पहचान पत्र अपलोड करें। आवेदन जमा करने के बाद मिलने वाला Reference Number सुरक्षित रखें। यदि स्थानीय निकाय की ओर से जरूरी हो, तो रेफरेंस की कॉपी और अन्य दस्तावेज कार्यालय में जमा करें। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उपलब्ध होने पर डिजिटल हस्ताक्षर वाला मृत्यु प्रमाण पत्र पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है। 21 दिन के भीतर पंजीकरण कराना बेहतर जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण समय पर कराना बेहद जरूरी है। सामान्य तौर पर 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने पर प्रक्रिया आसान रहती है। देरी बढ़ने के साथ अतिरिक्त औपचारिकताएं और दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, दो साल से अधिक देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जैसी अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया लागू हो सकती है। इसलिए परिवारों को सलाह दी जाती है कि बच्चे के जन्म या परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को टालें नहीं। आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान ऑनलाइन आवेदन करते समय नाम, जन्म या मृत्यु की तारीख, स्थान और अन्य व्यक्तिगत जानकारी बिल्कुल सही भरें। जानकारी अस्पताल के रिकॉर्ड और संबंधित सरकारी पहचान दस्तावेजों से मिलती-जुलती होनी चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि CRS पोर्टल और स्थानीय निकायों की ऑनलाइन प्रक्रिया हर जगह एक जैसी नहीं हो सकती। इसलिए आवेदन से पहले अपने राज्य, नगर निगम या स्थानीय रजिस्ट्रार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मौजूदा निर्देश जरूर जांच लें।  

surbhi अगस्त 9, 2026 0
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JBL Live Buds 4 और Live Beam 4 भारत में लॉन्च, ₹24,999 कीमत में मिलेंगे स्मार्ट फीचर्स

नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑडियो ब्रांड JBL ने भारत में अपने नए प्रीमियम ट्रू वायरलेस ईयरबड्स JBL Live Buds 4 और JBL Live Beam 4 लॉन्च कर दिए हैं। दोनों मॉडल को 6 अगस्त 2026 को भारतीय बाजार में पेश किया गया। कंपनी ने इनमें बेहतर एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन (ANC), Hi-Res Audio और नए Smart Charging Case जैसे फीचर्स दिए हैं। दोनों ईयरबड्स की कीमत ₹24,999 रखी गई है।   दोनों ईयरबड्स में 10mm ड्राइवर और ANC   JBL Live Buds 4 और Live Beam 4 दोनों में 10mm डायनेमिक ड्राइवर दिए गए हैं। कंपनी ने बेहतर साउंड क्वालिटी के साथ Hi-Res Audio सपोर्ट दिया है। दोनों मॉडल में True Adaptive Noise Cancelling तकनीक भी मिलती है, जो आसपास के शोर को कम करने में मदद करती है।   दोनों मॉडल के डिजाइन में अंतर है। Live Buds 4 कॉम्पैक्ट बड्स डिजाइन के साथ आते हैं, जबकि Live Beam 4 में स्टेम डिजाइन दिया गया है। यानी उपयोगकर्ता अपनी पसंद और कानों में फिट के हिसाब से मॉडल चुन सकते हैं।   Smart Charging Case बना बड़ा आकर्षण   नए JBL Live 4 सीरीज की सबसे खास खूबियों में Smart Charging Case शामिल है। इसमें बड़ा डिस्प्ले दिया गया है, जिसके जरिए यूजर स्मार्टफोन निकाले बिना कई जरूरी कंट्रोल और जानकारी देख सकता है। JBL ने इसके साथ Smart OS 3.0 भी पेश किया है। कंपनी के अनुसार इससे चार्जिंग केस के जरिए ईयरबड्स के कुछ फीचर्स को सीधे नियंत्रित और कस्टमाइज किया जा सकता है।   कॉलिंग के लिए AI आधारित नॉइज रिडक्शन   कॉलिंग अनुभव बेहतर बनाने के लिए दोनों ईयरबड्स में छह माइक्रोफोन का सेटअप दिया गया है। साथ ही AI आधारित नॉइज-रिडक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसका उद्देश्य आसपास के शोर को कम करके आवाज को ज्यादा स्पष्ट बनाना है। यह फीचर खास तौर पर भीड़भाड़ वाली जगहों, यात्रा के दौरान या बाहर से कॉल करने वाले यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकता है।   40 घंटे तक बैटरी और ₹24,999 कीमत   JBL के अनुसार Live 4 सीरीज में 40 घंटे तक की कुल बैटरी लाइफ मिल सकती है। दोनों ईयरबड्स भारत में ₹24,999 की कीमत पर उपलब्ध कराए गए हैं और कंपनी की वेबसाइट सहित प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदे जा सकते हैं।

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