नई दिल्ली, एजेंसियां। Honor ने 12 अगस्त 2026 को चीन में अपने बहुप्रतीक्षित HONOR Robot Phone को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया। यह स्मार्टफोन अपने अनोखे मोटराइज्ड गिंबल कैमरा सिस्टम के कारण चर्चा में है। फोन के पिछले हिस्से में लगा कैमरा जरूरत के मुताबिक बाहर निकलकर घूम सकता है और AI की मदद से सब्जेक्ट को ट्रैक करते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है।
Robot Phone की सबसे बड़ी खासियत इसका 200MP मुख्य कैमरा है, जिसे एक मोटराइज्ड गिंबल सिस्टम पर लगाया गया है। कैमरा करीब 300 डिग्री तक घूम सकता है और 4-DoF मूवमेंट के जरिए वीडियो शूटिंग के दौरान अलग-अलग दिशाओं में कैमरा एंगल को बदल सकता है। इसमें AI आधारित सब्जेक्ट ट्रैकिंग और अलग-अलग शूटिंग मोड भी मिलते हैं।
फोन में 200MP टेलीफोटो और 50MP अल्ट्रावाइड कैमरा भी दिया गया है। Honor ने कैमरा सिस्टम में प्रोफेशनल सिनेमैटिक कलर और ARRI तकनीक के साथ इंटीग्रेशन पर भी खास जोर दिया है।
परफॉर्मेंस के लिए फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया गया है। इसमें अधिकतम 16GB RAM और 1TB स्टोरेज का विकल्प मिलता है। पावर के लिए 7,060mAh बैटरी दी गई है।
फोन में करीब 6.3 इंच का डिस्प्ले है और इसका वजन लगभग 248 ग्राम बताया गया है। गिंबल कैमरा मैकेनिज्म के कारण फोन सामान्य फ्लैगशिप स्मार्टफोन की तुलना में थोड़ा भारी और मोटा है।
चीन में HONOR Robot Phone की शुरुआती कीमत 9,999 युआन रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में सीधे रूपांतरण पर करीब ₹1.2 लाख के आसपास बैठती है। हालांकि, यह भारतीय लॉन्च कीमत नहीं है।
अभी भारत में इसके लॉन्च की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल इसकी बिक्री चीन तक सीमित बताई गई है। इसलिए इसे भारत में लॉन्च हो चुका फोन बताना सही नहीं होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हैदराबाद, एजेंसियां। जापानी कार निर्माता Honda Cars ने नए व्हीकल प्रोग्राम के विकास के लिए Tata Technologies के साथ साझेदारी की है। इस समझौते के तहत Tata Technologies नए व्हीकल प्लेटफॉर्म का एंड-टू-एंड डेवलपमेंट करेगी। यह पहली बार है जब Honda ने किसी भारतीय इंजीनियरिंग सर्विस कंपनी को पूरे व्हीकल प्लेटफॉर्म के विकास की जिम्मेदारी दी है। कई तरह की पावरट्रेन को सपोर्ट करेगा प्लेटफॉर्म रिपोर्ट के मुताबिक, नया मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म अलग-अलग तरह के वाहन मॉडल्स के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें इंटरनल कंबशन इंजन (ICE), हाइब्रिड और पूरी तरह इलेक्ट्रिक पावरट्रेन जैसी तकनीकों को सपोर्ट करने की क्षमता होने की संभावना है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्लेटफॉर्म पर तैयार होने वाली गाड़ियां किन-किन देशों या बाजारों में बेची जाएंगी। डेवलपमेंट लागत घटाने की कोशिश Honda और Tata Technologies की यह साझेदारी कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी में बदलाव का संकेत मानी जा रही है। इस कदम से Honda को वाहन विकास की लागत कम करने और नए मॉडल्स को तेजी से बाजार में उतारने में मदद मिल सकती है। अब तक Honda अपने प्रमुख व्हीकल प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से खुद विकसित करती रही है या अपने पारंपरिक सप्लायर नेटवर्क का इस्तेमाल करती रही है। ग्लोबल स्तर पर रणनीति बदल रही Honda Honda ऐसे समय में अपनी रणनीति पर दोबारा काम कर रही है, जब कंपनी को लागत और उत्पाद विकास से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने लागत कम करने और विकास क्षमता बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन से जुड़े कुछ योजनाबद्ध कार्यक्रमों को रद्द या टालने के कदम भी उठाए हैं। Tata Technologies के साथ साझेदारी इसी व्यापक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है। भारत में Honda के लिए बढ़ी चुनौती भारत Honda के प्रमुख वैश्विक बाजारों में शामिल है, लेकिन घरेलू बाजार में कंपनी को Maruti Suzuki, Tata Motors और Mahindra जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। Honda की भारतीय प्रोडक्ट रेंज फिलहाल सीमित है और कंपनी अभी देश में कोई बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन नहीं बेच रही है। दूसरी ओर, Tata Motors और Mahindra अपने EV पोर्टफोलियो का तेजी से विस्तार कर रही हैं। 2 फीसदी से नीचे पहुंचा मार्केट शेयर भारत में Honda का बाजार हिस्सा एक दशक से अधिक समय पहले के करीब 7 फीसदी के स्तर से घटकर अब 2 फीसदी से भी नीचे आ गया है। ऐसे में नए प्लेटफॉर्म पर Tata Technologies के साथ साझेदारी कंपनी के लिए भविष्य के मॉडल्स और नई पावरट्रेन तकनीकों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। यह साझेदारी Honda को भारत सहित अन्य बाजारों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और लागत प्रभावी वाहन तैयार करने में मदद कर सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Honor ने 12 अगस्त 2026 को चीन में अपने बहुप्रतीक्षित HONOR Robot Phone को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया। यह स्मार्टफोन अपने अनोखे मोटराइज्ड गिंबल कैमरा सिस्टम के कारण चर्चा में है। फोन के पिछले हिस्से में लगा कैमरा जरूरत के मुताबिक बाहर निकलकर घूम सकता है और AI की मदद से सब्जेक्ट को ट्रैक करते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है। 200MP का रोबोटिक गिंबल कैमरा Robot Phone की सबसे बड़ी खासियत इसका 200MP मुख्य कैमरा है, जिसे एक मोटराइज्ड गिंबल सिस्टम पर लगाया गया है। कैमरा करीब 300 डिग्री तक घूम सकता है और 4-DoF मूवमेंट के जरिए वीडियो शूटिंग के दौरान अलग-अलग दिशाओं में कैमरा एंगल को बदल सकता है। इसमें AI आधारित सब्जेक्ट ट्रैकिंग और अलग-अलग शूटिंग मोड भी मिलते हैं। फोन में 200MP टेलीफोटो और 50MP अल्ट्रावाइड कैमरा भी दिया गया है। Honor ने कैमरा सिस्टम में प्रोफेशनल सिनेमैटिक कलर और ARRI तकनीक के साथ इंटीग्रेशन पर भी खास जोर दिया है। Snapdragon चिप और 7,060mAh बैटरी परफॉर्मेंस के लिए फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया गया है। इसमें अधिकतम 16GB RAM और 1TB स्टोरेज का विकल्प मिलता है। पावर के लिए 7,060mAh बैटरी दी गई है। फोन में करीब 6.3 इंच का डिस्प्ले है और इसका वजन लगभग 248 ग्राम बताया गया है। गिंबल कैमरा मैकेनिज्म के कारण फोन सामान्य फ्लैगशिप स्मार्टफोन की तुलना में थोड़ा भारी और मोटा है। कीमत और भारत में लॉन्च की स्थिति चीन में HONOR Robot Phone की शुरुआती कीमत 9,999 युआन रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में सीधे रूपांतरण पर करीब ₹1.2 लाख के आसपास बैठती है। हालांकि, यह भारतीय लॉन्च कीमत नहीं है। अभी भारत में इसके लॉन्च की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल इसकी बिक्री चीन तक सीमित बताई गई है। इसलिए इसे भारत में लॉन्च हो चुका फोन बताना सही नहीं होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के स्मार्टफोन बाजार में 2026 की दूसरी तिमाही में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। IDC के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट सालाना आधार पर 11.1% घटकर करीब 3.32 करोड़ यूनिट रह गया। यह गिरावट मुख्य रूप से मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों, महंगे कंपोनेंट और स्मार्टफोन की बढ़ती औसत कीमत से जुड़ी बताई जा रही है। महंगे हुए स्मार्टफोन, बजट सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर ग्लोबल मेमोरी चिप की कमी के कारण RAM और स्टोरेज जैसे कंपोनेंट की लागत बढ़ी है। कंपनियों ने बढ़ी लागत का एक हिस्सा ग्राहकों पर डाला, जिससे खासकर एंट्री-लेवल और बजट स्मार्टफोन महंगे हुए। IDC के अनुसार, दूसरी तिमाही में भारत में स्मार्टफोन का औसत बिक्री मूल्य रिकॉर्ड 315 डॉलर तक पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 14.4% ज्यादा है। Vivo, Oppo, Xiaomi और Realme को झटका महंगे होते फोन का सबसे ज्यादा असर चीनी कंपनियों के बजट और मिड-रेंज मॉडल पर पड़ा। दूसरी तिमाही में Vivo की शिपमेंट 13%, Realme की 14.2%, Xiaomi की 10% और Oppo की 8.5% घटने की जानकारी सामने आई है। इसके उलट Samsung और Apple ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार Samsung की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 16.4% और Apple की 8.5% हो गई। ग्राहक महंगे 5G फोन से 4G की ओर लौटे महंगे 5G स्मार्टफोन के कारण बजट ग्राहकों में एक दिलचस्प बदलाव भी देखने को मिला है। IDC के आंकड़ों के अनुसार, दूसरी तिमाही में 4G स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 11.1% तक पहुंच गई, जो पहली तिमाही में 5.8% थी। Counterpoint के अनुसार भी Q2 में 4G शिपमेंट में तिमाही आधार पर करीब 40% वृद्धि हुई। ऑनलाइन बिक्री में भी दबाव रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऑनलाइन स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 19.8% गिरावट आई, जबकि ऑफलाइन चैनल में गिरावट लगभग 3.6% रही। दूसरी छमाही में भी चुनौती बढ़ने की आशंका मेमोरी चिप की कीमतों और महंगे उपकरणों का दबाव आने वाले महीनों में भी बना रह सकता है। IDC के आंकड़ों के आधार पर कुछ रिपोर्टों में 2026 की दूसरी छमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट में 15% से अधिक गिरावट की आशंका जताई गई है।