टेक्नोलॉजी

Telegram Restricted Amid NEET Leak Probe

NEET पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा एक्शन, 22 जून तक भारत में Telegram पर अस्थायी रोक

surbhi जून 16, 2026 0
NEET 2026 candidates affected as India temporarily restricts Telegram over exam leak concerns
Telegram Ban During NEET 2026 Crackdown

मेडिकल प्रवेश परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार का सख्त कदम

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और नकल रैकेट पर कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा।

शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि Telegram का इस्तेमाल संगठित गिरोहों द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उम्मीदवारों को धोखा देने और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है।

आईटी कानून के तहत जारी हुआ आदेश

सरकार ने Telegram पर यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून के एक विशेष प्रावधान के तहत लगाया है। यह प्रावधान देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित करने की अनुमति देता है।

सरकारी बयान के मुताबिक यह कदम सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

NEET 2026 पेपर लीक के बाद बढ़ी सख्ती

पिछले महीने NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जब जांच एजेंसियों को प्रश्नपत्र लीक होने के संकेत मिले थे। इस घटना के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।

अब सरकार ने 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

NTA ने बताया क्यों उठाना पड़ा यह कदम

शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली National Testing Agency (NTA) ने कहा कि Telegram का उपयोग कुछ संगठित नकल गिरोहों द्वारा NEET पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों को गुमराह करने और धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।

एजेंसी के अनुसार, प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद अस्थायी प्रतिबंध को "अंतिम विकल्प" के रूप में लागू किया गया।

लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा असर

भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और यहां करोड़ों लोग इस ऐप का उपयोग करते हैं। शिक्षा, व्यवसाय, समाचार, ऑनलाइन समुदाय और व्यक्तिगत संचार के लिए Telegram व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

सरकार ने स्वीकार किया है कि इस कदम से बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी बताया गया है।

टेलीकॉम और टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और टेक प्लेटफॉर्म्स की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां जैसे Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea (Vi) इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया में हैं या नहीं, इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं Google Play Store और Apple App Store की ओर से भी फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

21 जून की परीक्षा पर टिकी निगाहें

अब छात्रों और अभिभावकों की नजर 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा पर है। सरकार का कहना है कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

Telegram पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध हाल के वर्षों में किसी बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के खिलाफ उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका, TCS को 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त नुकसान; कुल देनदारी 220 मिलियन डॉलर पहुंची

ट्रेड सीक्रेट्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services (TCS) को अमेरिका में चल रहे ट्रेड सीक्रेट्स विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की अपील सुनने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद TCS को 70 मिलियन डॉलर (करीब 590 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त एकमुश्त खर्च दर्ज करना पड़ेगा। इस फैसले के बाद मामले में कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी लगभग 220 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। पहली तिमाही में दर्ज होगा विशेष खर्च TCS ने अपने बयान में कहा कि वह वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त "एक्सेप्शनल चार्ज" दर्ज करेगी। इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल होंगे। कंपनी पहले ही इस मामले के लिए 150 मिलियन डॉलर का प्रावधान कर चुकी थी। अब नए प्रावधान के साथ कुल राशि 220 मिलियन डॉलर हो जाएगी। DXC टेक्नोलॉजी के पक्ष में रहा फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 15 जून को DXC Technology के पक्ष में दिए गए 168 मिलियन डॉलर के हर्जाने के फैसले को बरकरार रखा। यह मामला DXC की पूर्ववर्ती कंपनी Computer Sciences Corporation (CSC) द्वारा 2019 में दायर किए गए मुकदमे से जुड़ा है। क्या है पूरा विवाद? मुकदमे के अनुसार, TCS पर आरोप लगाया गया था कि उसने बीमा कंपनी Transamerica के लगभग 2,200 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनके आंतरिक सिस्टम तक पहुंच का उपयोग करते हुए जीवन बीमा प्रबंधन के लिए एक प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म विकसित किया। DXC का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसके ट्रेड सीक्रेट्स और गोपनीय व्यावसायिक जानकारियों का अनुचित इस्तेमाल किया गया। 2023 में जूरी ने लगाया था 210 मिलियन डॉलर का जुर्माना साल 2023 में अमेरिकी जूरी ने TCS को जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स चोरी करने का दोषी मानते हुए 210 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया था। इसमें: 56 मिलियन डॉलर क्षतिपूर्ति (Compensatory Damages) 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) शामिल था। इसके बाद 2025 में अमेरिकी अपीलीय अदालत ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट में क्या थी TCS की दलील? TCS का कहना था कि DXC ने वास्तविक वित्तीय नुकसान साबित नहीं किया है, इसलिए उसे अनुचित लाभ (Unjust Enrichment) के आधार पर हर्जाना नहीं मिलना चाहिए। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि दंडात्मक हर्जाने की राशि अत्यधिक है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया, जिससे निचली अदालतों का फैसला प्रभावी हो गया। मुनाफे पर कितना असर? TCS का जनवरी-मार्च तिमाही का शुद्ध लाभ 137.18 अरब रुपये (लगभग 1.45 अरब डॉलर) रहा था। विश्लेषकों के अनुसार 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति के मुकाबले सीमित प्रभाव डालेगा, लेकिन यह एक बार का बड़ा खर्च जरूर माना जाएगा। निवेशकों की नजर अगले नतीजों पर अब निवेशकों की निगाह TCS के आगामी तिमाही परिणामों पर रहेगी, जहां यह विशेष खर्च कंपनी की आय और लाभ पर असर डालता दिखाई देगा। हालांकि कंपनी का मुख्य व्यवसाय और परिचालन प्रदर्शन फिलहाल मजबूत बना हुआ है।  

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आज के डिजिटल दौर में WhatsApp हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग अलर्ट से लेकर निजी बातचीत तक, लगभग हर जरूरी जानकारी इसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहती है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp अकाउंट हैक हो जाए, तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion and Strategic Operations) यूनिट के जॉइंट सीपी रजनीश गुप्ता ने एक वीडियो के जरिए हैक हुए WhatsApp अकाउंट को वापस पाने का तरीका बताया है। क्यों जरूरी है ##21# कोड? दिल्ली पुलिस के अनुसार, अगर किसी हैकर ने कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग के जरिए आपके OTP अपने डिवाइस पर प्राप्त करने की व्यवस्था कर रखी है, तो सबसे पहले उस फॉरवर्डिंग को बंद करना जरूरी है। इसके लिए अपने फोन में: ##21# डायल करने की सलाह दी गई है। यह USSD कोड कई मामलों में सक्रिय कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग्स को बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अलग-अलग ऑपरेटर और डिवाइस के अनुसार इसका प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए इसे सुरक्षा के अतिरिक्त कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। WhatsApp अकाउंट वापस पाने के लिए अपनाएं ये स्टेप्स 1. सबसे पहले ##21# डायल करें इससे संभावित कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग बंद हो सकती है और OTP गलत व्यक्ति तक पहुंचने का खतरा कम हो सकता है। 2. Meta के शिकायत फॉर्म पर जाएं WhatsApp सपोर्ट फॉर्म खोलें। 3. "Are you a law enforcement officer?" पर "No" चुनें 4. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें देश के कोड के साथ अपना WhatsApp नंबर दो बार भरें। 5. "My account has been hacked" विकल्प चुनें 6. समस्या का विवरण लिखें बताएं कि आपका अकाउंट हैक हो गया है और आप लॉगिन नहीं कर पा रहे हैं। 7. अपना नाम और ईमेल आईडी भरें 8. Electronic Signature में अपना नाम दर्ज कर फॉर्म सबमिट करें इसके बाद क्या होगा? फॉर्म सबमिट करने के बाद Meta आपकी शिकायत की समीक्षा करेगा। सत्यापन पूरा होने पर हैकर के डिवाइस से आपका WhatsApp अकाउंट लॉगआउट किया जा सकता है। इसके बाद आप OTP की मदद से दोबारा अपने अकाउंट में लॉगिन कर सकेंगे। Facebook और Instagram के लिए भी उपलब्ध है सुविधा अगर आपका Facebook या Instagram अकाउंट हैक हो गया है, तो Meta इन प्लेटफॉर्म्स के लिए भी अलग रिकवरी फॉर्म उपलब्ध कराता है। सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान WhatsApp में टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर ऑन करें। किसी के साथ OTP साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत सतर्क हो जाएं। अपने ईमेल अकाउंट की सुरक्षा भी मजबूत रखें।

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Elon Musk discusses AI-driven future economy after his wealth surpasses one trillion dollars
दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बने एलन मस्क, बोले- भविष्य में पैसे की अहमियत खत्म हो सकती है

स्पेसएक्स IPO के बाद एलन मस्क की संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के पार दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेक उद्यमी Elon Musk ने एक नया इतिहास रच दिया है। स्पेसएक्स के बहुचर्चित आईपीओ (IPO) के बाद उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की ओर बढ़ गए हैं। हालांकि अपनी रिकॉर्ड संपत्ति को लेकर चर्चा के बीच मस्क का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने दावा किया है कि भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब पैसे की मौजूदा अहमियत खत्म हो जाएगी। AI और रोबोट बदल देंगे दुनिया की अर्थव्यवस्था 2026 एबंडेंस समिट के दौरान बातचीत में मस्क ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत रोबोटिक्स मानव समाज को एक ऐसे दौर में ले जा सकते हैं, जहां वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन इतना अधिक होगा कि पारंपरिक आर्थिक मॉडल बदल जाएंगे। मस्क के अनुसार, AI आधारित मशीनें इतनी बड़ी मात्रा में काम कर सकेंगी कि इंसानों के लिए पारंपरिक नौकरियों की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोगों को केवल न्यूनतम आय नहीं, बल्कि "यूनिवर्सल हाई इनकम" (UHI) जैसी व्यवस्था मिल सकती है। “पैसे की प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी” बातचीत के दौरान मस्क ने कहा कि भविष्य में पैसे का महत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। उनका मानना है कि जब AI और रोबोट लगभग हर वस्तु और सेवा को सस्ती और आसानी से उपलब्ध करा देंगे, तब लोगों की जीवनशैली बेहतर होगी और आर्थिक संसाधनों का वितरण अलग तरीके से होगा। मस्क के इस बयान पर मंच पर मौजूद उद्यमी Peter Diamandis ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि जैसे ही आप ट्रिलियनेयर बन रहे हैं, उसी समय पैसा कम महत्वपूर्ण हो रहा है? इस पर मस्क ने हंसते हुए जवाब दिया, "हां, लगभग ऐसा ही है।" यूनिवर्सल हाई इनकम क्या है? मस्क ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) से आगे बढ़कर यूनिवर्सल हाई इनकम (UHI) की अवधारणा पेश की। उनका कहना है कि AI के कारण उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और लोगों को केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करने के बजाय उच्च जीवन स्तर का लाभ मिल सकेगा। इस मॉडल में स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ और सस्ती हो सकती हैं। भविष्य में सबसे मूल्यवान क्या होगा? मस्क के अनुसार भविष्य की अर्थव्यवस्था में केवल मुद्रा नहीं, बल्कि ऊर्जा और भौतिक संसाधन सबसे महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI सिस्टम डॉलर या अन्य मुद्राओं की परवाह नहीं करेंगे। उनके लिए असली महत्व बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, फैक्ट्रियों और कच्चे माल जैसे संसाधनों का होगा। सरल शब्दों में कहें तो भविष्य में आर्थिक ताकत का निर्धारण बैंक बैलेंस से ज्यादा ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी क्षमता और संसाधनों पर नियंत्रण से हो सकता है। विशेषज्ञों के बीच बहस तेज मस्क के इस दृष्टिकोण को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे तकनीकी प्रगति की स्वाभाविक दिशा मानते हैं, जबकि कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूरी तरह से "पैसारहित" अर्थव्यवस्था की कल्पना अभी काफी दूर की बात है। फिलहाल इतना तय है कि AI और रोबोटिक्स के बढ़ते प्रभाव ने भविष्य की नौकरियों, आय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।  

surbhi जून 13, 2026 0
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