नई दिल्ली, एजेंसियां। Netflix ने अपने मोबाइल ऐप में बड़ा बदलाव करते हुए नया यूज़र इंटरफ़ेस पेश किया है। इस अपडेट का मकसद स्मार्टफोन पर कंटेंट खोजना और देखना पहले से ज्यादा आसान और तेज़ बनाना है। नया डिज़ाइन खास तौर पर मोबाइल यूज़र्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें कंटेंट को सामने और केंद्र में रखा गया है ताकि यूज़र तुरंत अपनी पसंद का शो या फिल्म चुन सकें।
इस अपडेट की सबसे खास बात ‘Clips’ नाम का नया वर्टिकल वीडियो फीचर है। यह एक पर्सनलाइज़्ड फीड है, जिसमें यूज़र्स को उनकी पसंद के अनुसार फिल्मों, वेब सीरीज़ और स्पेशल शो के छोटे-छोटे प्रीव्यू दिखाए जाते हैं। इसका अनुभव काफी हद तक सोशल मीडिया के शॉर्ट वीडियो जैसा है, जिससे यूज़र आसानी से नया कंटेंट खोज सकते हैं।
‘Clips’ फीचर के तहत यूज़र्स सीधे फीड से ही कंटेंट को “My List” में जोड़ सकते हैं, दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं और अपनी पसंद के अनुसार नए शो एक्सप्लोर कर सकते हैं। यह फीचर यूज़र्स को बिना ऐप में ज्यादा नेविगेट किए ही तेज़ी से कंटेंट चुनने में मदद करता है।
यह नया अपडेट अमेरिका, ब्रिटेन, भारत समेत कई देशों में जारी कर दिया गया है और आने वाले महीनों में इसे दुनिया भर में उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव मोबाइल एक्सपीरियंस को और ज्यादा पर्सनल और एंटरटेनिंग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Netflix ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस प्लेटफॉर्म पर पॉडकास्ट, लाइव प्रोग्रामिंग और जॉनर-आधारित कलेक्शन जैसे फीचर्स भी जोड़े जाएंगे, जिससे यूज़र्स को और ज्यादा वैरायटी और बेहतर अनुभव मिल सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple इस बार अपने पारंपरिक iPhone लॉन्च प्लान में बड़ा बदलाव कर सकती है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी इस साल रेगुलर iPhone 18 लॉन्च नहीं करेगी। इसके बजाय यूजर्स को बेस मॉडल के लिए 2027 तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max तय समय पर सितंबर में लॉन्च किए जा सकते हैं। टेक इंडस्ट्री में चर्चा है कि कंपनी अब चरणबद्ध लॉन्च रणनीति पर काम कर रही है, ताकि पुराने मॉडल्स की बिक्री लंबे समय तक मजबूत बनी रहे और नए फोल्डेबल iPhone को भी बेहतर मार्केट स्पेस मिल सके। आखिर क्यों टल सकता है iPhone 18? रिपोर्ट्स के अनुसार रेगुलर iPhone 18 अब स्प्रिंग 2027 में लॉन्च हो सकता है। इसे कथित तौर पर iPhone 18e और iPhone Air 2 के साथ पेश किया जा सकता है। टिप्स्टर “Fixed Focus Digital” के मुताबिक यह Apple की नई मार्केट स्ट्रैटेजी का हिस्सा हो सकता है। कंपनी चाहती है कि iPhone 17 सीरीज ज्यादा समय तक बाजार में चर्चा में बनी रहे। इससे कंपनी को प्रोडक्शन कॉस्ट कंट्रोल करने और मार्केट शेयर मजबूत रखने में मदद मिल सकती है। फोल्डेबल iPhone लॉन्च भी बन सकता है कारण रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple इस साल अपना पहला फोल्डेबल iPhone लॉन्च कर सकती है, जिसे फिलहाल iPhone Ultra नाम से जोड़ा जा रहा है। अगर कंपनी फोल्डेबल डिवाइस लॉन्च करती है, तो उसका फोकस उसी पर ज्यादा रह सकता है। ऐसे में Apple एक साथ बहुत ज्यादा मॉडल लॉन्च कर यूजर्स को कन्फ्यूज नहीं करना चाहती। माना जा रहा है कि इसी वजह से बेस iPhone 18 को बाद में लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है। सप्लाई चेन और प्रोडक्शन भी बड़ी वजह? कुछ रिपोर्ट्स में ग्लोबल सप्लाई चेन को भी इस फैसले की अहम वजह बताया गया है। कहा जा रहा है कि Apple iPhone 17 की प्रोडक्शन लाइफ बढ़ाना चाहती है ताकि मिड और प्रीमियम सेगमेंट में इसकी बिक्री लंबे समय तक मजबूत बनी रहे। टेक वेबसाइट्स के मुताबिक कंपनी इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क और मार्केट पकड़ मजबूत करने में कर सकती है। हालांकि कुछ लीक्स में यह भी कहा गया है कि बेस iPhone 18 में कुछ कम प्रीमियम कंपोनेंट्स देखने को मिल सकते हैं। iPhone 17 की जबरदस्त बिक्री का असर? रिसर्च फर्म्स की रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 17 2026 की पहली तिमाही में दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले स्मार्टफोन्स में शामिल रहा। वहीं iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की बिक्री भी काफी मजबूत रही। ऐसे में माना जा रहा है कि Apple फिलहाल iPhone 17 सीरीज की लोकप्रियता का पूरा फायदा उठाना चाहती है और नए बेस मॉडल को जल्दी लॉन्च करने के बजाय मौजूदा डिवाइसेज की बिक्री को और समय देना चाहती है। टेक इंडस्ट्री में क्या बदल सकता है? अगर ये रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो यह पहली बार होगा जब Apple अपने पारंपरिक सितंबर लॉन्च साइकल को तोड़ेगी। इससे पूरी स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है। भविष्य में दूसरी कंपनियां भी फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स को अलग-अलग चरणों में लॉन्च करने की रणनीति अपना सकती हैं। हालांकि फिलहाल Apple ने इन रिपोर्ट्स पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन लगातार सामने आ रही लीक्स और रिपोर्ट्स ने टेक जगत में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Netflix ने अपने मोबाइल ऐप में बड़ा बदलाव करते हुए नया यूज़र इंटरफ़ेस पेश किया है। इस अपडेट का मकसद स्मार्टफोन पर कंटेंट खोजना और देखना पहले से ज्यादा आसान और तेज़ बनाना है। नया डिज़ाइन खास तौर पर मोबाइल यूज़र्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें कंटेंट को सामने और केंद्र में रखा गया है ताकि यूज़र तुरंत अपनी पसंद का शो या फिल्म चुन सकें। ‘Clips’ फीचर: अब शॉर्ट वीडियो में मिलेगा कंटेंट का स्वाद इस अपडेट की सबसे खास बात ‘Clips’ नाम का नया वर्टिकल वीडियो फीचर है। यह एक पर्सनलाइज़्ड फीड है, जिसमें यूज़र्स को उनकी पसंद के अनुसार फिल्मों, वेब सीरीज़ और स्पेशल शो के छोटे-छोटे प्रीव्यू दिखाए जाते हैं। इसका अनुभव काफी हद तक सोशल मीडिया के शॉर्ट वीडियो जैसा है, जिससे यूज़र आसानी से नया कंटेंट खोज सकते हैं। एड, शेयर और एक्सप्लोर—तीन बड़े ऑप्शन ‘Clips’ फीचर के तहत यूज़र्स सीधे फीड से ही कंटेंट को “My List” में जोड़ सकते हैं, दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं और अपनी पसंद के अनुसार नए शो एक्सप्लोर कर सकते हैं। यह फीचर यूज़र्स को बिना ऐप में ज्यादा नेविगेट किए ही तेज़ी से कंटेंट चुनने में मदद करता है। कई देशों में शुरू, जल्द होगा ग्लोबल रोलआउट यह नया अपडेट अमेरिका, ब्रिटेन, भारत समेत कई देशों में जारी कर दिया गया है और आने वाले महीनों में इसे दुनिया भर में उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव मोबाइल एक्सपीरियंस को और ज्यादा पर्सनल और एंटरटेनिंग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भविष्य में और भी नए फीचर्स Netflix ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस प्लेटफॉर्म पर पॉडकास्ट, लाइव प्रोग्रामिंग और जॉनर-आधारित कलेक्शन जैसे फीचर्स भी जोड़े जाएंगे, जिससे यूज़र्स को और ज्यादा वैरायटी और बेहतर अनुभव मिल सके।
कंपनियों के लिए AWS की बड़ी पेशकश दुनिया की दिग्गज क्लाउड कंपनी Amazon Web Services (AWS) ने व्यवसायों के लिए दो नए एजेंटिक AI टूल लॉन्च किए हैं। इन टूल्स का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाना और सप्लाई चेन में आने वाली चुनौतियों से निपटना है। Amazon ने अपने विशाल रिटेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से मिले अनुभव का इस्तेमाल कर इन उत्पादों को तैयार किया है। AI लेगा नौकरी के इंटरव्यू AWS का नया टूल Connect Talent कंपनियों को उम्मीदवारों के इंटरव्यू लेने में मदद करेगा। उम्मीदवार दिन या रात किसी भी समय इंटरव्यू शेड्यूल कर सकते हैं। यह AI आधारित सिस्टम वॉयस के जरिए सवाल पूछेगा और उम्मीदवार के जवाबों के आधार पर आगे के प्रश्न तय करेगा। सबसे खास बात यह है कि भर्ती करने वालों को उम्मीदवार का नाम, रिज्यूमे या अन्य पहचान संबंधी जानकारी नहीं दिखाई जाएगी। उन्हें केवल स्कोर, क्षमता का मूल्यांकन और इंटरव्यू ट्रांसक्रिप्ट मिलेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी। यह टूल खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती होती है। सप्लाई चेन की समस्याओं का AI समाधान AWS ने दूसरा टूल Connect Decisions पेश किया है, जो सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को पहचानने और उनका समाधान सुझाने में सक्षम है। यह प्लेटफॉर्म 25 से अधिक उन्नत सप्लाई चेन मॉडलों का उपयोग करता है। यदि किसी सप्लायर की डिलीवरी में देरी होती है या अचानक ऑर्डर बढ़ जाते हैं, तो यह AI तुरंत समस्या का विश्लेषण करेगा, प्राथमिकता तय करेगा और संभावित समाधान बताएगा। साथ ही, हर विकल्प की लागत और उसके प्रभाव का भी अनुमान देगा। AWS के अनुसार, Wells Vehicle Electronics और TVS Motors जैसी कंपनियां पहले से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। Amazon Connect परिवार का हिस्सा ये दोनों नए उत्पाद AWS के विस्तारित Amazon Connect प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं। कंपनी ने इसे चार प्रमुख बिजनेस एप्लिकेशन के रूप में पेश किया है। Amazon Connect का मूल संपर्क केंद्र प्लेटफॉर्म 2017 में लॉन्च किया गया था। आज इसका उपयोग State Farm, Air Canada और U.S. Bank जैसी बड़ी कंपनियां कर रही हैं। इसके अलावा, AWS ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए Amazon Connect Health भी पेश किया है। Amazon के अनुभव का फायदा Amazon का सप्लाई नेटवर्क 40 करोड़ से अधिक उत्पादों को संभालता है। वहीं, हालिया पीक सीजन में कंपनी ने 2.5 लाख मौसमी कर्मचारियों की भर्ती की थी। AWS का कहना है कि इन्हीं विशाल परिचालन अनुभवों के आधार पर इन AI टूल्स को विकसित किया गया है। भविष्य की दिशा AWS की वरिष्ठ उपाध्यक्ष Colleen Aubrey ने इस लॉन्च को "Day Zero" बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से कंपनी इस दिशा में काम कर रही थी। उनका मानना है कि किसी एक छोटे कार्य को ऑटोमेट करने के बजाय पूरे बिजनेस फंक्शन को AI से संचालित करने के लिए विशेष उत्पादों की जरूरत होती है। इन नए AI समाधानों के साथ AWS ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे व्यवसायों के संचालन का हिस्सा बन चुका है।