टेक्नोलॉजी

FBI Warns Over Kali365 Attack

Telegram के जरिए फैल रहा नया साइबर खतरा, FBI ने Microsoft 365 यूजर्स के लिए जारी की चेतावनी

surbhi जून 17, 2026 0
Cybersecurity warning graphic highlighting Telegram-based phishing attacks targeting Microsoft 365 users.
FBI Warns Microsoft 365 Users About Kali365 Threat

डिजिटल दुनिया में साइबर हमलों के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब एक नया खतरा सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का कारण बन गया है। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने “Kali365” नाम के एक खतरनाक फिशिंग प्लेटफॉर्म को लेकर चेतावनी जारी की है। यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से Microsoft 365 यूजर्स को निशाना बना रहा है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह पारंपरिक मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सुरक्षा को भी बायपास करने में सक्षम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस हमले को अंजाम देने के लिए किसी व्यक्ति का साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ होना भी जरूरी नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह तैयार फिशिंग टूल्स के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है।

क्या है Kali365?

Kali365 एक “फिशिंग-एज-ए-सर्विस” (PhaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसे साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। यह सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर काम करता है और हमलावरों को फिशिंग अभियान चलाने के लिए तैयार टूल्स उपलब्ध कराता है।

इस प्लेटफॉर्म में कई उन्नत सुविधाएं शामिल हैं, जैसे:

  • एआई आधारित ईमेल टेम्पलेट्स
  • ऑटोमेटेड फिशिंग कैंपेन
  • रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम
  • संभावित शिकारों की निगरानी

इन सुविधाओं की मदद से साइबर हमले पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी और आसान हो गए हैं।

कैसे काम करता है यह हमला?

Kali365 पारंपरिक फिशिंग तकनीकों से थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। यूजर्स को ऐसा ईमेल भेजा जाता है जो किसी भरोसेमंद क्लाउड सर्विस या डॉक्यूमेंट शेयरिंग प्लेटफॉर्म जैसा दिखाई देता है।

ईमेल में एक डिवाइस कोड दिया जाता है और यूजर को Microsoft लॉगिन पेज पर जाकर उसे दर्ज करने के लिए कहा जाता है। जब यूजर ऐसा करता है, तो वह अनजाने में हमलावर के डिवाइस को अपने अकाउंट तक पहुंच की अनुमति दे देता है।

इसके बाद हमलावर OAuth टोकन हासिल कर लेते हैं और Outlook, Teams, OneDrive जैसी सेवाओं तक पहुंच बना सकते हैं, वह भी बिना दोबारा पासवर्ड या MFA की आवश्यकता के।

MFA होने के बावजूद क्यों खतरनाक है यह हमला?

आमतौर पर लोग मानते हैं कि मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन उनके अकाउंट को पूरी तरह सुरक्षित बना देता है, लेकिन Kali365 सीधे पासवर्ड चुराने की बजाय OAuth टोकन को निशाना बनाता है।

इसी कारण कई मामलों में पासवर्ड बदलने के बाद भी हमलावर अकाउंट तक पहुंच बनाए रख सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे हमलों की पहचान करना पारंपरिक फिशिंग की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकता है।

FBI ने यूजर्स को क्या सलाह दी?

FBI ने Microsoft 365 उपयोगकर्ताओं और संगठनों को अपनी सुरक्षा सेटिंग्स की समीक्षा करने की सलाह दी है। एजेंसी ने कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सिफारिश की है:

  • डिवाइस कोड आधारित ऑथेंटिकेशन को सीमित करें।
  • Conditional Access Policy लागू करें।
  • लॉगिन गतिविधियों की नियमित निगरानी करें।
  • संदिग्ध ईमेल और अनजान डिवाइस लॉगिन पर नजर रखें।
  • असामान्य अकाउंट गतिविधियों को तुरंत जांचें।

विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और नियमित सुरक्षा ऑडिट ही ऐसे हमलों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

साइबर अपराध का नया बिजनेस मॉडल बन रहा है PhaaS

Kali365 का मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि साइबर अपराध अब एक संगठित उद्योग का रूप ले रहा है। “Phishing-as-a-Service” मॉडल के तहत जटिल हैकिंग टूल्स को आसान सब्सक्रिप्शन सेवाओं में बदला जा रहा है।

इससे कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी बड़े स्तर पर साइबर हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पहचान आधारित साइबर हमलों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Apple showcases advanced Siri AI features in iOS 27 with personalized assistance capabilities
iOS 27 में Siri AI का बड़ा बदलाव: अब बनेगी आपकी डिजिटल पर्सनल असिस्टेंट, जानिए सभी नए फीचर्स

Apple ने Siri को पूरी तरह बदला, AI चैटबॉट्स को देगी टक्कर Apple ने iOS 27 के साथ अपनी वर्चुअल असिस्टेंट Siri को पूरी तरह नया रूप दिया है। अब "Siri AI" पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट, समझदार और उपयोगी हो गई है। कंपनी का दावा है कि नई Siri न सिर्फ सवालों के जवाब देगी, बल्कि आपकी ईमेल, मैसेज, फोटो, फाइल्स और अन्य ऐप्स की जानकारी समझकर व्यक्तिगत सहायता भी प्रदान करेगी। Apple के अनुसार, Siri AI अब ChatGPT और Claude जैसे लोकप्रिय AI चैटबॉट्स को टक्कर देने में सक्षम होगी। आपकी निजी जानकारी को समझेगी Siri नई Siri की सबसे बड़ी खासियत "पर्सनल कॉन्टेक्स्ट अंडरस्टैंडिंग" है। अब Siri आपकी अनुमति के साथ: ईमेल खोज सकेगी मैसेज पढ़कर जानकारी निकाल सकेगी फोटो और वीडियो ढूंढ सकेगी नोट्स और दस्तावेज़ खोज सकेगी कैलेंडर और रिमाइंडर से जानकारी ले सकेगी उदाहरण के लिए आप पूछ सकते हैं: पिछले सप्ताह भाई ने कौन-सी फिल्म देखने को कहा था? मेरी फ्लाइट का कन्फर्मेशन नंबर क्या है? कल मुझे कौन-कौन से काम करने हैं? पिछले महीने मकान मालिक ने जो लीज भेजी थी, उसे ढूंढो। इंटरनेट से भी देगी जवाब Siri अब केवल फोन के डेटा तक सीमित नहीं रहेगी। यह वेब सर्च करके ताजा जानकारी भी उपलब्ध करा सकेगी। इससे उपयोगकर्ता: यात्रा की योजना बना सकेंगे रेसिपी खोज सकेंगे खेल स्कोर जान सकेंगे होमवर्क और रिसर्च में मदद ले सकेंगे DIY और गार्डनिंग टिप्स प्राप्त कर सकेंगे स्क्रीन पर क्या है, यह भी समझेगी Siri नई "ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस" सुविधा Siri को स्क्रीन पर मौजूद कंटेंट समझने की क्षमता देती है। अब आप किसी फोटो, चार्ट, डॉक्यूमेंट या वेबसाइट को देखते हुए पूछ सकते हैं: यह फोटो कहां की है? इस दस्तावेज़ का सारांश बताओ। यह ग्राफ क्या दिखा रहा है? इस मेन्यू का अनुवाद करो। Siri स्क्रीन पर दिख रही जानकारी को पढ़कर उसी संदर्भ में जवाब दे सकेगी। ऐप्स में आपके लिए काम भी करेगी नई "App Actions" तकनीक Siri को ऐप्स के भीतर कार्य करने की क्षमता देती है। अब Siri से कहा जा सकता है: इस ईमेल का जवाब लिखो। आज की सभी तस्वीरें किसी दोस्त को भेज दो। मंगलवार शाम 3 बजे की मीटिंग कैलेंडर में जोड़ो। दोपहर 2 बजे की मीटिंग गुरुवार पर शिफ्ट कर दो। यह सुविधा Apple और थर्ड-पार्टी ऐप्स दोनों में काम करेगी। नया इंटरफेस और अलग Siri ऐप iOS 27 में Siri का नया इंटरफेस दिया गया है। Dynamic Island से एक्सेस टाइप और वॉइस दोनों विकल्प फोटो और डॉक्यूमेंट अपलोड करने की सुविधा बातचीत का इतिहास देखने के लिए अलग Siri ऐप पुराने चैट सर्च और पिन करने का विकल्प अब उपयोगकर्ता Siri के साथ लंबी बातचीत भी जारी रख सकेंगे। अब हर जगह कर सकेंगे AI लेखन iOS 27 में "Write with Siri" फीचर भी शामिल किया गया है। इसकी मदद से Siri: ईमेल ड्राफ्ट कर सकती है टेक्स्ट को प्रोफेशनल बना सकती है पैराग्राफ तैयार कर सकती है व्याकरण और स्पेलिंग सुधार सकती है टोन बदल सकती है यह सुविधा लगभग हर उस जगह उपलब्ध होगी जहां उपयोगकर्ता टाइपिंग करते हैं। Apple और Google की साझेदारी से तैयार हुए AI मॉडल Apple ने बताया है कि iOS 27 में इस्तेमाल किए जा रहे नए AI मॉडल उसके अपने Foundation Models हैं, जिन्हें विकसित करने में Google की Gemini तकनीक से भी मदद ली गई है। यह AI सिस्टम Spotlight Index और App Toolbox के साथ मिलकर काम करता है, जिससे Siri को अलग-अलग ऐप्स और डेटा स्रोतों तक पहुंच मिलती है। नई Siri आवाज को भी कर सकेंगे कस्टमाइज iPhone 17 Pro और iPhone Air जैसे नए डिवाइसों पर Siri की आवाज को कस्टमाइज करने का विकल्प मिलेगा। यूजर: बोलने की गति बदल सकेंगे आवाज की अभिव्यक्ति नियंत्रित कर सकेंगे बेहतर डिक्टेशन और वॉइस रिकग्निशन का लाभ उठा सकेंगे प्राइवेसी पर Apple का बड़ा दावा Apple का कहना है कि Siri AI का अधिकांश काम डिवाइस पर ही होगा। जहां क्लाउड प्रोसेसिंग की जरूरत होगी, वहां Private Cloud Compute तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के अनुसार उपयोगकर्ताओं का डेटा Apple या किसी तीसरे पक्ष के लिए उपलब्ध नहीं होगा। किन डिवाइसों में मिलेगी Siri AI? नई Siri AI केवल उन डिवाइसों में उपलब्ध होगी जो Apple Intelligence को सपोर्ट करते हैं। इनमें शामिल हैं: iPhone 15 Pro और उसके बाद के मॉडल iPadOS 27 सपोर्टेड iPad macOS Golden Gate वाले Mac visionOS 27 डिवाइस watchOS 27 समर्थित Apple Watch किन देशों में नहीं मिलेगी सुविधा? Apple ने स्पष्ट किया है कि लॉन्च के समय Siri AI: यूरोपीय संघ (EU) में iPhone और iPad पर उपलब्ध नहीं होगी चीन में उपलब्ध नहीं होगी हालांकि Mac उपयोगकर्ताओं को EU में यह सुविधा मिलेगी। निष्कर्ष iOS 27 के साथ Apple ने Siri को केवल वॉइस असिस्टेंट से आगे बढ़ाकर एक पूर्ण AI सहायक में बदल दिया है। व्यक्तिगत जानकारी समझने, ऐप्स में काम करने, वेब सर्च करने और कंटेंट लिखने जैसी क्षमताओं के साथ Siri अब Apple इकोसिस्टम का सबसे बड़ा AI अपग्रेड मानी जा रही है।  

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Anthropic suspends Claude Fable 5 AI model after US government raises national security and jailbreak concerns
Anthropic पर अमेरिकी सरकार की सख्ती, नया AI मॉडल अस्थायी रूप से बंद

सुरक्षा चिंताओं के बीच Claude Fable 5 पर रोक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने नए और अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Fable 5 को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कंपनी का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद यह कदम उठाना पड़ा। यह फैसला मॉडल के सार्वजनिक लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। Anthropic ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि उसे निर्देश दिया गया है कि विदेशी नागरिकों की Claude Fable 5 और Mythos 5 तक पहुंच तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। कंपनी के अनुसार नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दोनों सेवाओं को सभी ग्राहकों के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। क्या है सरकार की चिंता? Anthropic के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने किसी विशेष खतरे की सार्वजनिक रूप से पहचान नहीं की है। हालांकि कंपनी का कहना है कि सरकार को ऐसी तकनीक की जानकारी मिली है जिसके जरिए Claude Fable 5 की सुरक्षा सीमाओं को बायपास या “जेलब्रेक” किया जा सकता है। जेलब्रेकिंग वह प्रक्रिया है जिसमें किसी सॉफ्टवेयर या सिस्टम पर लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों को पार कर अतिरिक्त क्षमताओं तक पहुंच हासिल की जाती है। इससे साइबर हमलों या संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ सकता है। कंपनी का दावा है कि जिन कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाया गया है, वे पहले से ज्ञात और अपेक्षाकृत मामूली थीं तथा अन्य सार्वजनिक AI मॉडल भी उन्हें पहचानने में सक्षम हैं। लॉन्च से पहले ही चर्चा में था मॉडल Claude Fable 5 को Anthropic ने अपने अब तक के सबसे शक्तिशाली AI मॉडलों में से एक बताया था। सार्वजनिक रिलीज से पहले अप्रैल में इसे सीमित संस्थाओं के लिए परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन हेतु उपलब्ध कराया गया था। कंपनी ने उस समय कहा था कि मॉडल की क्षमताएं इतनी उन्नत हैं कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय न हों तो इसका दुरुपयोग कंप्यूटर सिस्टम में घुसपैठ या साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से इसके लॉन्च को लेकर तकनीकी, वित्तीय और सरकारी क्षेत्रों में बहस भी छिड़ गई थी। कुछ आलोचकों ने कंपनी के “बहुत शक्तिशाली” होने वाले दावों को मार्केटिंग रणनीति करार दिया था, जबकि समर्थकों का मानना था कि उन्नत AI मॉडलों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जांच आवश्यक है। ट्रम्प प्रशासन और Anthropic के बीच बढ़ा विवाद Anthropic हाल के महीनों में अमेरिकी प्रशासन के साथ टकराव को लेकर भी चर्चा में रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कंपनी की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा विभाग के तत्कालीन प्रमुख Pete Hegseth ने Anthropic को “सप्लाई चेन रिस्क” घोषित किया था। यह एक गंभीर श्रेणी मानी जाती है, जिसके तहत किसी तकनीक या सेवा को सरकारी उपयोग के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता। अदालत में जारी है कानूनी लड़ाई इस फैसले के खिलाफ Anthropic ने अमेरिकी रक्षा विभाग पर मुकदमा दायर किया है। मामले की सुनवाई के दौरान एक अमेरिकी न्यायाधीश ने आदेश दिया कि विवाद के अंतिम निपटारे तक रक्षा विभाग का प्रतिबंध लागू नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि अमेरिकी सरकारी एजेंसियां और सेना से जुड़े संगठन फिलहाल Anthropic की सेवाओं का उपयोग जारी रख सकते हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। AI उद्योग के लिए बड़ा संकेत Claude Fable 5 पर लगी यह अस्थायी रोक AI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। जैसे-जैसे AI मॉडल अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नियामकीय नियंत्रण को लेकर सरकारों की निगरानी भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन्नत AI प्रणालियों के लिए सख्त सुरक्षा मानकों और सरकारी समीक्षा प्रक्रियाओं की मांग और तेज हो सकती है।  

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