Andy Burnham

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की मुलाकात के दौरान रक्षा सहयोग पर चर्चा
ज़ेलेंस्की का ब्रिटेन दौरा: नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से रक्षा सहयोग पर चर्चा, ड्रोन और मिसाइल सुरक्षा पर बनी सहमति

लंदन, एजेंसियां। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने ब्रिटेन का दौरा कर नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से मुलाकात की। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद किसी विदेशी नेता के साथ यह बर्नहम की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय बैठक थी। दोनों नेताओं ने यूक्रेन की रक्षा क्षमता बढ़ाने, संयुक्त रक्षा उत्पादन और रूस के खिलाफ सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की।   ड्रोन और मिसाइल रक्षा पर विशेष जोर   बैठक में यूक्रेन की सबसे बड़ी जरूरत मानी जा रही ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा पर विशेष चर्चा हुई। ब्रिटेन ने यूक्रेन को अपनी "स्टोन क्लोक" इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक उपलब्ध कराने का फैसला किया है, जिससे यूक्रेनी ड्रोन रूसी एयर डिफेंस सिस्टम से बेहतर तरीके से बच सकेंगे। यह तकनीक अब यूक्रेन में भी तैयार की जा सकेगी।   रक्षा उत्पादन में बढ़ेगा सहयोग   दोनों नेताओं ने ब्रिटेन और यूक्रेन के बीच संयुक्त रक्षा उत्पादन को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रस्तावित योजना के तहत ब्रिटेन में यूक्रेन के लिए ड्रोन निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे युद्ध के दौरान हथियारों और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति तेज हो सकेगी। ज़ेलेंस्की ने इसे यूक्रेन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।   ब्रिटेन ने दोहराया समर्थन   प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ "100 प्रतिशत" खड़ा है और रूस के खिलाफ उसकी सुरक्षा जरूरतों में हर संभव सहयोग जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता और यूरोप की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, इसलिए ब्रिटेन का समर्थन आगे भी जारी रहेगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 28, 2026 0
UK Prime Minister Andy Burnham announces tax cuts for pubs and clubs along with lower bus fares and energy bill relief
अब गुलजार होंगी ब्रिटेन की रातें! नई सरकार का बड़ा ऐलान, पब-कल्ब्स को टैक्स में राहत, बस किराया भी घटेगा

ब्रिटेन में नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने आम लोगों और कारोबारियों को राहत देने वाले कई बड़े फैसलों का ऐलान किया है. सरकार ने देश की नाइट लाइफ, हाई स्ट्रीट इकोनॉमी और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. इन फैसलों का मकसद आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, रोजगार बढ़ाना और लोगों को राहत देना है. पब, क्लब और लाइव म्यूजिक वेन्यू को बड़ी राहत प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने घोषणा की है कि पब्स, क्लब्स और लाइव म्यूजिक वेन्यू के लिए बिजनेस रेट्स (प्रॉपर्टी टैक्स) में 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे लंदन समेत पूरे इंग्लैंड की नाइट इकोनॉमी को नई रफ्तार मिलेगी. लंबे समय से बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव झेल रहे इन कारोबारों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. बिजली बिल और बस किराए पर भी राहत सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बिजली बिल पर वैट (VAT) शून्य प्रतिशत करने का फैसला लिया है. इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को सस्ता बनाने के लिए बस किराए की सीमा 2 पाउंड तय की गई है. जनवरी 2027 से इंग्लैंड में सिंगल बस टिकट भी इसी सीमा के भीतर रहेगा. पहले यह किराया 3 पाउंड तक था. सरकार का कहना है कि इस फैसले से छात्रों, कम आय वाले परिवारों और रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों को फायदा होगा. बेघरों के लिए बनेगा नया आवास कार्यक्रम नई सरकार ने बेघर लोगों के लिए भी बड़ा ऐलान किया है. अगले तीन वर्षों में 340 मिलियन पाउंड के निवेश से 1,200 नए घर बनाए जाएंगे और करीब 3,000 लोगों को सहायता दी जाएगी. सरकार खाली पड़ी सार्वजनिक जमीन का उपयोग कर कम लागत में आवास तैयार करेगी. इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन का सबसे बड़ा सार्वजनिक आवास निर्माण कार्यक्रम बताया जा रहा है. आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर सरकार का कहना है कि इन फैसलों से स्थानीय कारोबार को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और शहरों की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. खासकर नाइट लाइफ से जुड़े उद्योगों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है. पहले भाषण में क्या बोले एंडी बर्नहम? प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट से अपने पहले संबोधन में एंडी बर्नहम ने कहा कि उनकी सरकार राजनीति से ज्यादा समस्याओं के समाधान पर ध्यान देगी. उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय एकजुटता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनकी सरकार ऐसे फैसले लेगी, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें और आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाएं.  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Andy Burnham takes charge as new Prime Minister of Britain
Britain New PM: ब्रिटेन को मिला नया प्रधानमंत्री, जानिए कौन हैं एंडी बर्नहैम जिन्हें मिली देश की कमान

ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल गया है। लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम ने आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद संभाल लिया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की जगह ली, जिन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद पद छोड़ा। इसके बाद राजा ने एंडी बर्नहैम को नई सरकार बनाने का निमंत्रण दिया और उन्होंने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया।  कौन हैं एंडी बर्नहैम? 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम ब्रिटेन की लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वह लंबे समय तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे और इससे पहले स्वास्थ्य, संस्कृति तथा वित्त से जुड़े मंत्रालयों में भी काम कर चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्हें लेबर पार्टी का नया नेता चुना गया, जिसके बाद उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। कीर स्टारमर की जगह संभाली जिम्मेदारी प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले कीर स्टारमर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर विदाई भाषण दिया और फिर बकिंघम पैलेस जाकर किंग चार्ल्स III को अपना इस्तीफा सौंपा। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसके बाद एंडी बर्नहैम को सरकार बनाने का न्योता मिला।  नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां एंडी बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपनी नई कैबिनेट का गठन करना और लेबर पार्टी की गिरती लोकप्रियता को संभालना है। हाल के महीनों में पार्टी को जनसमर्थन में कमी का सामना करना पड़ा है, जबकि दक्षिणपंथी नेता निगेल फराज की पार्टी का प्रभाव बढ़ा है। बर्नहैम ने अपने पहले संबोधन में महंगाई, बेघर लोगों की समस्या और राष्ट्रीय स्थिरता को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करने का संकेत दिया।  दस साल में छठे प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के छठे प्रधानमंत्री बने हैं। राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन लगातार चर्चा का विषय रहा है।  2029 में होंगे अगले आम चुनाव ब्रिटेन में अगला आम चुनाव 2029 में प्रस्तावित है। इसलिए प्रधानमंत्री बदलने का मतलब यह नहीं है कि देश में दोबारा आम चुनाव होंगे। मौजूदा संसद अपना कार्यकाल पूरा करेगी और नई सरकार उसी संसद के भीतर काम करेगी।  भारत ने दी बधाई भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंडी बर्नहैम को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दोनों देशों के संबंध आगे भी मजबूत होंगे।   

kalpana जुलाई 21, 2026 0
UK Prime Minister
ब्रिटेन को मिला नया प्रधानमंत्री, एंडी बर्नहैम ने आधिकारिक तौर पर संभाली देश की कमान

लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन के बाद एंडी बर्नहैम ने आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद की कमान संभाल ली है। उन्होंने किंग चार्ल्स III से मुलाकात के बाद सरकार बनाने का निमंत्रण स्वीकार किया और 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपने पहले संबोधन में देश को राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक सुधार और जनकल्याण पर केंद्रित सरकार देने का वादा किया।   कीर स्टार्मर की जगह संभाली जिम्मेदारी   लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम ने कीर स्टार्मर का स्थान लिया, जिन्होंने आंतरिक राजनीतिक दबाव के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बर्नहैम पिछले कई वर्षों से ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे हैं और अब ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करेंगे।   पहले संबोधन में किए बड़े वादे   प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले भाषण में बर्नहैम ने महंगाई से राहत, बेघर लोगों की समस्या खत्म करने, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और देशभर में आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार "राजनीतिक स्थिरता और लोगों का भरोसा लौटाने" के लिए काम करेगी।   नई कैबिनेट का किया गठन   पद संभालते ही एंडी बर्नहैम ने नई कैबिनेट की घोषणा की। उन्होंने जॉन हीली को चांसलर, एड मिलिबैंड को विदेश मंत्री और यवेट कूपर को स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। कई प्रमुख मंत्रालयों में नए चेहरों को जगह देकर उन्होंने अपनी नई कार्यशैली का संकेत दिया।   पीएम मोदी ने दी बधाई   भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंडी बर्नहैम को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दोनों देशों के संबंध आगे भी मजबूत होते रहेंगे।

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Andy Burnham
ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम का बड़ा ऐलान, डिजिटल ID योजना होगी रद्द

लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने पदभार संभालने से पहले बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए सरकार की प्रस्तावित डिजिटल ID योजना को रद्द करने का ऐलान किया है। बर्नहैम ने कहा कि इस योजना पर होने वाले खर्च को अब आम लोगों को महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत से राहत देने वाली योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। यह फैसला उनके 20 जुलाई को प्रधानमंत्री पद संभालने से पहले सामने आया है।   1.8 अरब पाउंड की योजना होगी बंद   ब्रिटिश सरकार की डिजिटल ID परियोजना पर अगले तीन वर्षों में करीब 1.8 अरब पाउंड खर्च होने का अनुमान था। बर्नहैम की टीम का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में सरकार की प्राथमिकता डिजिटल पहचान प्रणाली नहीं, बल्कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान है।   महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं पर रहेगा फोकस   बर्नहैम ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ऊर्जा बिल कम करने, सार्वजनिक परिवहन को सस्ता बनाने और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से राहत देने वाले कदमों पर अधिक ध्यान देगी। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकताओं का "रीसेट" बताया है।   20 जुलाई को संभालेंगे प्रधानमंत्री पद   लेबर पार्टी के नए नेता चुने जाने के बाद एंडी बर्नहैम 20 जुलाई को आधिकारिक रूप से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। इसके बाद वे नई कैबिनेट का गठन करेंगे और अपनी सरकार के शुरुआती फैसलों की घोषणा करेंगे।   डिजिटल ID पर लंबे समय से जारी था विवाद   ब्रिटेन में प्रस्तावित डिजिटल ID योजना को लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी। समर्थकों का मानना था कि इससे सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी, जबकि आलोचकों ने इसे निजता और नागरिक स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया था। बर्नहैम के फैसले को इस विवादित योजना पर बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
UK Prime Minister
ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव, सोमवार को प्रधानमंत्री पद संभालेंगे एंडी बर्नहैम; नई कैबिनेट पर टिकी नजर

लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन की सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहैम सोमवार को आधिकारिक रूप से यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। शुक्रवार को पार्टी नेतृत्व की औपचारिक घोषणा के बाद अब वह मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की जगह लेंगे। बर्नहैम ने संकेत दिए हैं कि नई सरकार के गठन के साथ ही वह अपनी कैबिनेट का भी ऐलान करेंगे।   सोमवार को होगा सत्ता हस्तांतरण   ब्रिटेन की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सोमवार को कीर स्टारमर अपना इस्तीफा किंग चार्ल्स तृतीय को सौंपेंगे। इसके बाद एंडी बर्नहैम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा और वह प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद आधिकारिक रूप से कार्यभार संभालेंगे।   कैबिनेट गठन पर तेज अटकलें   एंडी बर्नहैम ने कहा है कि उनकी कैबिनेट में पार्टी के सभी वर्गों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रियों के नामों पर अंतिम फैसला अभी किया जा रहा है और पूरी सूची सोमवार को ही घोषित की जाएगी। ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में वित्त मंत्री और गृह मंत्री समेत कई अहम पदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।   'नई राजनीति' का दिया संदेश   लेबर पार्टी के नेता बनने के बाद अपने पहले संबोधन में बर्नहैम ने कहा कि उनकी सरकार देश में "नई राजनीति" की शुरुआत करेगी। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार देने, आर्थिक विकास को गति देने, सामाजिक आवास बढ़ाने और लोगों का राजनीति पर भरोसा बहाल करने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया।   कई चुनौतियों के साथ संभालेंगे जिम्मेदारी   प्रधानमंत्री बनने के बाद एंडी बर्नहैम के सामने धीमी आर्थिक वृद्धि, महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और वैश्विक कूटनीतिक चुनौतियों जैसे कई बड़े मुद्दे होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई कैबिनेट और शुरुआती फैसले उनकी सरकार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
India-UK trade officials discuss bilateral economic cooperation as both countries reaffirm that their strategic partnership will remain strong despite possible political changes in the United Kingdom.
ब्रिटेन में नेतृत्व बदलेगा, लेकिन भारत से रिश्ते नहीं; ट्रेड कमिश्नर हरजिंदर कंग का बड़ा भरोसा

India-UK Relations: ब्रिटेन में संभावित राजनीतिक बदलाव के बावजूद भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के संबंध मजबूत बने रहेंगे। दक्षिण एशिया के लिए ब्रिटेन के ट्रेड कमिश्नर और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के मुख्य वार्ताकार हरजिंदर कंग ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी किसी एक सरकार या प्रधानमंत्री पर निर्भर नहीं है, बल्कि साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक हितों पर आधारित है। नेतृत्व बदलने से नहीं बदलेगा भारत-यूके संबंध न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में हरजिंदर कंग ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। इसके अलावा लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानूनी ढांचा, अंग्रेजी भाषा और ब्रिटेन में रह रहे बड़े भारतीय समुदाय ने इन संबंधों को और मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन होने पर भी भारत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी प्रभावित होने की संभावना नहीं है। एंडी बर्नहैम को बताया भारत का समर्थक हरजिंदर कंग ने कहा कि ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम, जिन्हें भविष्य में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है, भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में एंडी बर्नहैम के साथ उनकी बातचीत हुई थी। बर्नहैम भारत का दौरा कर व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के इच्छुक थे। उनका लक्ष्य ग्रेटर मैनचेस्टर और भारत के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देना है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था पर ब्रिटेन की नजर ट्रेड कमिश्नर ने कहा कि ब्रिटेन के प्रमुख राजनीतिक दल भारत को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक शक्तियों में से एक मानते हैं। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ऐसे में ब्रिटेन भारत के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि चाहे कीर स्टार्मर हों या ऋषि सुनक, सभी नेताओं की सोच भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर सकारात्मक रही है। वर्षों की बातचीत के बाद हुआ FTA हरजिंदर कंग ने स्पष्ट किया कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी वैश्विक व्यापारिक तनाव या अमेरिकी टैरिफ के कारण नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई वर्षों तक चली विस्तृत बातचीत और आपसी सहमति का परिणाम है। उनके मुताबिक, जब दोनों देशों को लगा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, तब इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। आइसक्रीम खाते हुए बनी अंतिम सहमति कंग ने बातचीत का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और उस समय के ब्रिटिश ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने लंदन के एक पार्क में टहलते हुए और आइसक्रीम खाते-खाते अंतिम मुद्दों पर सहमति बनाई। इसके बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर समझौते को अंतिम रूप दिया। CETA लागू होने से दोनों देशों को होंगे बड़े फायदे भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई से लागू हो चुका है। इस समझौते पर जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
High-protein soya stuffed paratha served with yogurt and salad for a healthy weight loss meal.
Weight Loss Diet: प्रोटीन की कमी होगी पूरी, डाइट में शामिल करें हाई-प्रोटीन सोया पराठा, जानें कितनी कैलोरी और हफ्ते में कितनी बार खाएं

High Protein Soya Paratha Recipe: अगर आप वजन घटाने के दौरान ऐसा नाश्ता या मील ढूंढ रहे हैं जो लंबे समय तक पेट भरा रखे और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद करे, तो हाई-प्रोटीन सोया पराठा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ इसे वेट लॉस प्लान में शामिल किया जा सकता है। वेट लॉस डाइट में क्यों शामिल करें हाई-प्रोटीन सोया पराठा? वजन घटाने के दौरान अक्सर लोग स्वाद और पोषण के बीच संतुलन नहीं बना पाते। ऐसे में सोया पराठा एक हेल्दी विकल्प बन सकता है। सोया प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है, जबकि गेहूं का आटा जटिल कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbohydrates) प्रदान करता है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार भूख लगने और अनहेल्दी स्नैकिंग की संभावना कम हो सकती है। आवश्यक सामग्री 1 कप सोया चंक्स (उबले और दरदरे पिसे हुए) 1 कप गेहूं या मल्टीग्रेन आटा 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) 1–2 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट ½ छोटा चम्मच हल्दी ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच गरम मसाला ½ छोटा चम्मच अजवाइन हरा धनिया नमक स्वादानुसार 1–2 छोटा चम्मच तेल या घी (सेकने के लिए) बनाने की विधि सबसे पहले सोया चंक्स को 10 मिनट तक गर्म पानी में भिगोकर उसका अतिरिक्त पानी निचोड़ लें और दरदरा पीस लें। पैन में थोड़ा तेल गर्म करके अजवाइन, अदरक-लहसुन, हरी मिर्च और प्याज भूनें। अब इसमें सोया और सभी मसाले डालकर 3–4 मिनट तक पकाएं और आखिर में हरा धनिया मिलाएं। गेहूं के आटे का नरम आटा गूंथें। लोई बनाकर उसमें तैयार स्टफिंग भरें और हल्के हाथ से पराठा बेल लें। नॉन-स्टिक तवे पर कम तेल या घी में दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लें। प्रति पराठा अनुमानित पोषण कैलोरी: 220–260 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 24–28 ग्राम फैट: 5–7 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम वजन घटाने में कैसे मदद कर सकता है? हाई प्रोटीन होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। फाइबर अनहेल्दी स्नैकिंग और ओवरईटिंग को कम करने में सहायक हो सकता है। प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद करता है, खासकर जब आप कैलोरी नियंत्रित डाइट ले रहे हों। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ यह वजन प्रबंधन में उपयोगी विकल्प बन सकता है। डाइट में कब और कितनी बार खाएं? सबसे अच्छा समय: नाश्ता या दोपहर का भोजन हफ्ते में: 2–4 दिन तक शामिल किया जा सकता है। बेहतर संतुलन के लिए इसे दही, सलाद या हरी चटनी के साथ खाएं। ध्यान दें: केवल एक रेसिपी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी है। यदि आपको थायरॉयड, किडनी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अधिक प्रोटीन वाली डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।  

anmol जुलाई 15, 2026 0
British Prime Minister Keir Starmer announces his resignation amid Labour Party leadership uncertainty in London.
ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, नए प्रधानमंत्री के चयन तक संभालेंगे पद

  लंदन: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि नए प्रधानमंत्री के चयन तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। इसके साथ ही स्टार्मर ने लेबर पार्टी के नेता पद से भी इस्तीफा दे दिया है। गिरती लोकप्रियता और बढ़ते दबाव के बीच लिया फैसला जुलाई 2024 में लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाकर सत्ता में लाने वाले कीर स्टार्मर पिछले दो वर्षों से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद पर थे। उनके कार्यकाल के दौरान सरकार और लेबर पार्टी दोनों की लोकप्रियता में लगातार गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती राजनीतिक चुनौतियों और पार्टी के भीतर असंतोष के बीच उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया है। एंडी बर्नहैम की जीत बनी टर्निंग पॉइंट राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल ही में हुए एक विशेष चुनाव में स्टार्मर के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले एंडी बर्नहैम की जीत ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए। ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम सोमवार को सांसद के रूप में शपथ लेने वाले हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें सर्वसम्मति से लेबर पार्टी का नया नेता चुना जाएगा या पार्टी के भीतर नेतृत्व के लिए मुकाबला होगा। वेस स्ट्रीटिंग भी ठोक सकते हैं दावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, जिन्होंने पिछले महीने अपने पद से इस्तीफा दिया था, उन्होंने भी संकेत दिए हैं कि यदि लेबर पार्टी में नेतृत्व चुनाव होता है तो वह भी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकते हैं। इससे पार्टी में नेतृत्व की दौड़ और दिलचस्प होने की संभावना है। पिछले कई दिनों से लग रही थीं अटकलें कीर स्टार्मर के इस्तीफे को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल रही थीं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की थी। वहीं, मंत्री पीटर काइल ने रविवार को कहा था कि स्टार्मर राजनीतिक परिस्थितियों, चुनौतियों और अवसरों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। नए नेतृत्व की ओर बढ़ेगी लेबर पार्टी स्टार्मर के इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी नए नेतृत्व की तलाश में जुटेगी। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा और पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ेगी। फिलहाल, कीर स्टार्मर नए नेता और प्रधानमंत्री के चयन तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Greater Manchester Mayor Andy Burnham celebrates victory in the Makerfield by-election, intensifying pressure on UK Prime Minister Keir Starmer.
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी पर संकट! मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहैम की जीत से बढ़ी सियासी हलचल

  ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर ब्रिटिश संसद में वापसी कर ली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत प्रधानमंत्री स्टार्मर के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है। मेकरफील्ड उपचुनाव ने बदला राजनीतिक समीकरण शुक्रवार सुबह घोषित नतीजों में एंडी बर्नहैम ने दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी के उम्मीदवार को भारी अंतर से पराजित कर संसद में प्रवेश किया। उनकी जीत को केवल एक उपचुनाव की सफलता नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के भीतर संभावित नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिटेन के नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने के लिए संसद का सदस्य होना आवश्यक है। ऐसे में मेकरफील्ड उपचुनाव बर्नहैम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। बर्नहैम बोले- यह बदलाव की रात है जीत के बाद एंडी बर्नहैम ने कहा कि देश की राजनीति अपने उद्देश्य के अनुरूप काम नहीं कर रही है और जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा, "हर कोई महसूस कर सकता है कि हमारा देश वहां नहीं है, जहां उसे होना चाहिए था। आज की रात एक नए बदलाव की शुरुआत हो सकती है। यह एक ऐसी राजनीति की शुरुआत है, जो एकता और उम्मीद पर आधारित होगी।" बर्नहैम ने अपनी जीत को देश की राजनीति के लिए "टर्निंग पॉइंट" करार दिया। क्यों बढ़ी कीर स्टार्मर की मुश्किलें? साल 2024 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने 14 वर्षों बाद भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। सरकार बनने के बाद से उनकी लोकप्रियता में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को कई क्षेत्रों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि विपक्षी दलों ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की। इससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि एंडी बर्नहैम को पार्टी के एक प्रभावशाली वर्ग द्वारा संभावित वैकल्पिक नेता के रूप में देखा जा रहा है। क्या आने वाला है 'लीडरशिप चैलेंज'? बर्नहैम की संसद में वापसी के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही पार्टी नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की स्थिति और कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लेबर पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति ब्रिटेन की राजनीति को नए दौर में ले जा सकती है और आने वाले दिनों में सत्ताधारी दल के अंदर नेतृत्व संघर्ष तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ब्रिटेन की राजनीति में बढ़ी अनिश्चितता एंडी बर्नहैम की जीत ने ब्रिटिश राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपनी गिरती लोकप्रियता और चुनावी झटकों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बर्नहैम का उभार लेबर पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन बदलने की क्षमता रखता है। आने वाले सप्ताह ब्रिटेन की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं और यह स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या लेबर पार्टी अपने वर्तमान नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेगी या फिर देश को एक नए प्रधानमंत्री की ओर ले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0