रांची। झारखंड में पिछले कई दिनों से जारी बारिश का दौर अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है, लेकिन आज 20 अगस्त को भी राज्य के कई हिस्सों में बादल, बारिश, गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति बनी रह सकती है। मौसम केंद्र रांची के अनुसार, सुबह के समय कई स्थानों पर बारिश होगी, जबकि बाद में बारिश की गतिविधि में कमी आने और कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश होने की संभावना है। छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने 20 अगस्त की सुबह 8:30 बजे तक गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा में भारी बारिश की संभावना जतायी है। इसके अलावा झारखंड के सभी 24 जिलों में गरज-चमक और वज्रपात का खतरा बना रहेगा। इस दौरान करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। रांची में भी छाए रहेंगे बादल राजधानी रांची में आज दिनभर बादल छाए रहने और बारिश होने के आसार हैं। सुबह बारिश के बाद इसकी तीव्रता में कमी आ सकती है। हालांकि, गरज-चमक और वज्रपात से पूरी तरह राहत मिलने की संभावना नहीं है। रांची का अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। झारखंड में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश ताजा बारिश के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में अब तक सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं राजधानी रांची में बारिश सामान्य से 7 फीसदी अधिक दर्ज की गयी है। कुछ जिलों में बारिश सामान्य से काफी ज्यादा रही है। पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 48 फीसदी, सिमडेगा में 8 फीसदी, सरायकेला-खरसावां में 9 फीसदी और पूर्वी सिंहभूम में 1 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गयी है। बुधवार को रांची में 0.6 मिमी बारिश हुई, जबकि लोहरदगा में 18 मिमी और मेदिनीनगर में 4 मिमी बारिश दर्ज की गयी। 24 जिलों में ऐसा रहेगा मौसम रांची, खूंटी, हजारीबाग और रामगढ़ में बादल और बारिश के साथ गरज-वज्रपात की संभावना है। गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, लातेहार, पलामू और गढ़वा में सुबह भारी बारिश हो सकती है। चतरा, कोडरमा, बोकारो, धनबाद और गिरिडीह में बादल छाए रहने के साथ छिटपुट बारिश के आसार हैं। देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज में भी बादल और हल्की से छिटपुट बारिश हो सकती है। पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम में बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की संभावना बनी हुई है। आगे कमजोर पड़ेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 20 अगस्त की सुबह के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आ सकती है। 20 से 21 अगस्त के दौरान कई जगहों पर बारिश छिटपुट रहने की संभावना है, लेकिन गरज-चमक और वज्रपात का खतरा बना रहेगा। 20 से 23 अगस्त तक आंधी-तूफान और वज्रपात को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी गयी है। मौसम विभाग ने लोगों से वज्रपात के दौरान खुले मैदान, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास नहीं रहने की अपील की है।
रांची। झारखंड में लंबे समय से जारी भीषण गर्मी और लू से अब लोगों को राहत मिलने वाली है। राज्य में कई दिनों से तेज धूप और बढ़ते तापमान ने जनजीवन को प्रभावित किया था, लेकिन अब मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 25 अप्रैल से राज्य में बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी और धीरे-धीरे मौसम ठंडा होने लगेगा। पारा 43 डिग्री के पार, कई जिलों में रिकॉर्ड गर्मी पिछले 24 घंटों में पलामू में अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे अधिक रहा। वहीं बोकारो में 43.5 डिग्री और जमशेदपुर में 41 डिग्री से ऊपर तापमान पहुंच गया। राजधानी रांची में भी पारा करीब 40 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे लोगों को दिनभर गर्म हवाओं और उमस का सामना करना पड़ा। 5 दिनों तक मौसम रहेगा अस्थिर मौसम विभाग ने 25 से 30 अप्रैल तक झारखंड के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। 26 से 28 अप्रैल के बीच संताल परगना, मध्य और दक्षिणी झारखंड में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है, जिसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान हवा की रफ्तार तेज रहने की संभावना है और कई जगहों पर आंधी भी चल सकती है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह 29 और 30 अप्रैल को राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले में न रहने, पेड़ों के नीचे शरण न लेने और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। हालांकि इस बदलाव से तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन आंधी-तूफान और वज्रपात को देखते हुए सतर्क रहना बेहद जरूरी होगा।
रांची। झारखंड में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि कुछ इलाकों में पारा 43 डिग्री तक रिकॉर्ड किया गया है। तेज धूप, लू और गर्म हवाओं के कारण दिन के साथ-साथ रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है। 24 अप्रैल से मौसम बदलेगा मिजाज मौसम विभाग के अनुसार, 24 अप्रैल से राज्य के मौसम में बदलाव शुरू होने की संभावना है। 24 और 25 अप्रैल को कई इलाकों में तेज आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जिससे अचानक मौसम बदल सकता है। 26–28 अप्रैल के बीच तेज बारिश के आसार मौसम विभाग का अनुमान है कि 26 और 27 अप्रैल को बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। वहीं 28 अप्रैल तक राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश और ठंडी हवाएं चलने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलेगी। अलर्ट: आंधी और बिजली गिरने का खतरा बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने चेतावनी भी जारी की है। तेज आंधी, बिजली गिरने और तूफान से नुकसान हो सकता है। लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें और पेड़ों के नीचे खड़े न हों, ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके। तापमान में होगी गिरावट बारिश और बादलों के प्रभाव से 26 से 28 अप्रैल के बीच तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। इससे भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है।
रांची। झारखंड में मौसम एक साथ दो अलग दिशाओं में बढ़ता दिख रहा है। राज्य के कुछ हिस्सों में तापमान तेजी से चढ़ रहा है, जबकि दूसरे इलाकों में मौसम विभाग ने खराब मौसम को लेकर सतर्क किया है। तापमान का दबाव बढ़ा, कई शहर गर्मी की चपेट में दिन के तापमान में बढ़ोतरी साफ तौर पर महसूस की जा रही है। डाल्टनगंज में पारा सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, वहीं कोल्हान क्षेत्र के शहरों में भी गर्मी का असर तेज हुआ है। राजधानी रांची अपेक्षाकृत थोड़ी राहत में है, लेकिन यहां भी तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। मौसम का ग्राफ रहेगा अस्थिर मौसम विभाग के संकेत बताते हैं कि यह बढ़ती गर्मी लगातार नहीं रहने वाली। पहले तापमान में हल्की बढ़त होगी, फिर गिरावट दर्ज की जाएगी और उसके बाद दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है। यानी आने वाले दिनों में मौसम स्थिर रहने के बजाय लगातार बदलता रहेगा। राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग चेतावनी मध्य झारखंड के कई जिलों में गरज के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं उत्तर-पूर्वी हिस्सों में ओलावृष्टि को लेकर खास अलर्ट जारी किया गया है, जिससे फसलों और आम जनजीवन पर असर पड़ सकता है। तेज हवाएं और वज्रपात बढ़ा सकते हैं जोखिम मौसम के इस बदलाव के साथ तेज हवाओं का दौर भी जुड़ सकता है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। विभाग ने खास तारीख को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में भी रहेगा असर मौसम का यह पैटर्न अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में बादल, बारिश और गर्जन की गतिविधियां जारी रहने के संकेत हैं, जबकि राजधानी और आसपास के इलाकों में भी मौसम पूरी तरह साफ रहने की संभावना नहीं है।
रांची। झारखंड में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राज्य के कई इलाकों में गरज के साथ तेज बारिश हो रही है, वहीं कुछ जगहों पर वज्रपात की घटनाएं भी सामने आई हैं। खराब मौसम के चलते अब तक आकाशीय बिजली गिरने से छह लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। तापमान में गिरावट लगातार हो रही बारिश का सीधा असर तापमान पर देखने को मिला है। दिन का तापमान सामान्य से करीब 5 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है, जबकि रात के तापमान में भी लगभग 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली है। रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी पिछले एक सप्ताह से राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग के अनुसार इसकी मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ है, जिसका प्रभाव पूरे झारखंड में देखने को मिल रहा है। सोमवार को भी राजधानी रांची समेत कई जिलों में गरज और बारिश की संभावना जताई गई है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुसार मौसम विभाग के मुताबिक 24 मार्च से मौसम साफ होने लगेगा और बारिश का दौर थम जाएगा। इसके बाद तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है और गर्मी फिर से अपना असर दिखा सकती है। अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 25 और 26 मार्च को आंशिक बादल छाए रहेंगे, जबकि तापमान धीरे-धीरे 30 से 34 डिग्री के बीच पहुंच सकता है। हालांकि मौसम ज्यादा दिनों तक स्थिर नहीं रहेगा। 27 और 28 मार्च को एक बार फिर मौसम बदलने के संकेत हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही गरज के साथ बारिश और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि पिछले सात वर्षों में मार्च महीने में इतनी बारिश और ठंड पहली बार दर्ज की गई है, जो इसे एक असामान्य मौसमीय घटना बनाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।