नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई हिस्सों में मानसून की बारिश आफत बन गई है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, बादल फटने और सड़क मार्ग बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, मैदानी इलाकों में भी बारिश और जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। उत्तर-पश्चिम भारत में भारी बारिश का अनुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 20 से 25 अगस्त के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तराखंड में इस दौरान कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 20 और 21 अगस्त को भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 से 22 अगस्त के दौरान भारी बारिश हो सकती है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान तेज हवाओं, गरज-चमक और बिजली गिरने को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जम्मू-कश्मीर में बादल फटा, कई रास्ते प्रभावित जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में भारी बारिश के बीच बादल फटने की घटना सामने आई। हालांकि, इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पहलगाम में तेज बारिश, हवाओं और जलभराव के कारण यन्नर-बटकूट-पहलगाम मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर में 23 अगस्त तक यलो अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। हिमाचल में रेल यातायात प्रभावित हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश के कारण कई जगहों पर मलबा गिरने की घटनाएं हुई हैं। कालका-शिमला रेलखंड पर गुम्मन और कोटी स्टेशनों के बीच पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण रेल यातायात प्रभावित हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण सड़क और रेल संपर्क पर असर पड़ रहा है। उत्तराखंड में पुल टूटा, चीन सीमा से जुड़े गांवों का संपर्क कटा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारी बारिश के बाद धारचूला-तवाघाट हाईवे पर कुलागाड़ के पास पहाड़ी से भारी मलबा और बोल्डर गिरा। इसके कारण करीब 70 मीटर लंबा वैली ब्रिज टूटकर गधेरे में समा गया। पुल टूटने से चीन सीमा से लगे दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। इन क्षेत्रों के 12 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं। मानसरोवर यात्रा के नौवें दल के यात्रियों की वापसी भी प्रभावित हुई है। मध्य भारत में भी बारिश का दौर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 20 से 23 अगस्त तक बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 से 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान है। विदर्भ में 20 से 22 और फिर 24-25 अगस्त को बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ में 21-22 अगस्त को बारिश और कुछ इलाकों में भारी वर्षा की संभावना है। झारखंड, बिहार और ओडिशा में भी बारिश झारखंड में 20-21 अगस्त को छिटपुट बारिश के बाद 22 से 25 अगस्त के बीच बारिश का दौर बढ़ सकता है। बिहार में 21 से 23 अगस्त के बीच भारी बारिश की संभावना है। ओडिशा में 21 से 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान है और कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी अलर्ट अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में 20 से 22 अगस्त तक बारिश जारी रहने की संभावना है। कोंकण और गोवा में 20 से 25 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। तटीय कर्नाटक में भी 20 से 25 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क बाधित होने का खतरा बना रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार को भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग घायल हुए हैं। हादसा चिराग नगर के अशोक नगर स्थित गौसिया चॉल में हुआ, जहां पहाड़ी का एक हिस्सा और मलबा दो से तीन मकानों पर जा गिरा। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। दमकल विभाग, पुलिस, एनडीआरएफ, बीएमसी और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल हादसे में जान गंवाने वालों में तीन बच्चे शामिल हैं। मृतकों की पहचान 14 वर्षीय मोहम्मद समीर अंसारी, 19 वर्षीय साहिल हुसैन अब्दुल काजी, 45 वर्षीय एक अज्ञात व्यक्ति, 2 वर्षीय अबान आरिफ शेख, 4 वर्षीय मनत आरिफ शेख, 27 वर्षीय मर्जिना आरिफ शेख और 27 वर्षीय विकेत रमेश यादव के रूप में हुई है। सात घायलों का अस्पताल में इलाज घायलों को राजावाडी अस्पताल और कुर्ला स्थित बीएमसी के भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के अनुसार सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। राजावाडी अस्पताल में फराना दिलबर खान (28), दिलबर अमानुल्लाह खान (38) और शमीम मुस्लिम खान (26) का इलाज चल रहा है। वहीं सोहेल अंसारी (18), मोहम्मद अंसारी (14), नईमुद्दीन इकबाल खान (28) और साजिद अंसारी (16) को भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एनडीआरएफ समेत कई टीमें मौके पर हादसे के बाद दमकल विभाग, मुंबई पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), एंबुलेंस और बीएमसी के वार्ड कर्मचारियों की टीमें मौके पर तैनात हैं। मलबे में किसी और के फंसे होने की आशंका को देखते हुए खोज और बचाव अभियान जारी है। मुंबई की महापौर रितु तावड़े भी घटनास्थल पर पहुंचीं और उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता महापौर ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के निकटतम परिजन को चार-चार लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं घायलों के इलाज के लिए प्रत्येक को 50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया गया है। भारी बारिश के बीच हुई इस घटना ने मुंबई के पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रशासन की टीमें फिलहाल प्रभावित इलाके में राहत और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में जुटी हैं।
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बुधवार तड़के भारी बारिश के बीच घाटकोपर-कुर्ला इलाके में भूस्खलन हुआ। पहाड़ी का एक हिस्सा चॉल पर गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। शुरुआती रिपोर्टों में दो मौतों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर छह बताई गई है। राहत और बचाव अभियान जारी है। तड़के हुआ हादसा भूस्खलन के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। मलबे की चपेट में आए लोगों को निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। भारी बारिश और मलबे के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आने की जानकारी सामने आई है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश प्रशासन और बचाव एजेंसियां मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। शुरुआती घंटों में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। भारी बारिश ने बढ़ाई परेशानी मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच यह हादसा हुआ है। भूस्खलन के बाद स्थानीय प्रशासन ने बचाव कार्य तेज कर दिया है और प्रभावित इलाके में लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मृतकों की संख्या में आगे और बदलाव हो सकता है क्योंकि बचाव अभियान जारी है।
देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। राज्यभर में भूस्खलन के कारण 132 सड़कें बंद हैं, जबकि गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर चेतावनी रेखा के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश, आकाशीय बिजली और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। 132 सड़कें बंद, हाईवे बार-बार हो रहे बाधित राज्य में भूस्खलन और मलबा गिरने से चार राष्ट्रीय राजमार्ग, चार स्टेट हाईवे और कुल 132 सड़कें बंद हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिले चमोली, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ हैं। लोक निर्माण विभाग बंद मार्गों को खोलने में जुटा है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है। गंगा समेत कई नदियां चेतावनी स्तर पर हरिद्वार में गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा पार कर 293.30 मीटर दर्ज किया गया। ऋषिकेश में गंगा चेतावनी स्तर से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन का आरती स्थल जलमग्न हो गया है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी, जबकि चमोली में अलकनंदा, नंदाकिनी और पिंडर नदियां भी चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गई हैं। गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे पर परेशानी उत्तरकाशी जिले में लगातार मलबा और पत्थर गिरने से गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार बंद हो रहे हैं। कई स्थानों पर यात्रियों और कांवड़ियों को जोखिम उठाकर रास्ता पार करना पड़ा। जिले की 13 सड़कें अभी भी बाधित हैं। प्रशासन अलर्ट मोड पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण करने, नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखने और डैम या बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में समय रहते अलर्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी सुरक्षा, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था मजबूत रखने को कहा गया है। भिलंगना में स्कूल बंद, ऑनलाइन पढ़ाई लगातार बारिश और क्षतिग्रस्त मार्गों को देखते हुए टिहरी जिले के भिलंगना विकासखंड में कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
Jammu Kashmir Weather Alert: जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही बारिश के बीच मौसम विभाग (IMD) ने 2 अगस्त तक फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और मडस्लाइड का अलर्ट जारी किया है। खासकर जम्मू संभाग के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। एहतियात के तौर पर डोडा और किश्तवाड़ के कई इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से सतर्क रहने की अपील की है। पहाड़ों पर मंडरा रहा भारी बारिश का खतरा लगातार बारिश से जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ कई स्थानों पर मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी है। संवेदनशील इलाकों में लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है। फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का अलर्ट मौसम विभाग ने 2 अगस्त तक फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और मडस्लाइड की आशंका जताई है। पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित जगहों से दूर रहने तथा प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने को कहा गया है। जम्मू संभाग में सबसे ज्यादा असर जम्मू संभाग के कई जिलों में सुबह और शाम के समय तेज से बहुत तेज बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में कम समय में मूसलाधार बारिश हो सकती है, जिससे जनजीवन और सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका है। कश्मीर घाटी में भी तेज बौछारें कश्मीर घाटी के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। बादल छाए रहने और लगातार बारिश से मौसम सुहावना हो गया है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है। डोडा और किश्तवाड़ में स्कूल बंद लगातार बारिश और फिसलन भरी सड़कों को देखते हुए डोडा और किश्तवाड़ के कई हिस्सों में सरकारी और निजी स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर नजर बारिश के बावजूद फिलहाल जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात जारी है। हालांकि प्रशासन लगातार सड़क की निगरानी कर रहा है ताकि भूस्खलन या पत्थर गिरने जैसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। सांबा में सबसे ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटों में सांबा जिले में 87 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कटरा, उधमपुर और जम्मू में भी अच्छी बारिश हुई है। कई इलाकों में जलभराव और फिसलन की स्थिति बनने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तापमान में आई गिरावट लगातार बारिश के कारण श्रीनगर, जम्मू, पहलगाम, गुलमर्ग समेत कई शहरों के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम ठंडा होने से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन खराब मौसम ने सामान्य जनजीवन प्रभावित किया है। पर्यटकों और यात्रियों के लिए एडवाइजरी प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। साथ ही नदी-नालों, पहाड़ी ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। अगले कुछ दिन रहेंगे चुनौतीपूर्ण मौसम विभाग के अनुसार 5 अगस्त तक जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट पर रखे हुए है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन और चारधाम यात्रा प्रभावित हो गई है। मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच रुद्रप्रयाग जिले में 30 जुलाई को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, निजी और अशासकीय स्कूलों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, भूस्खलन के कारण यमुनोत्री हाईवे कई स्थानों पर मलबा और पत्थर गिरने से फिर बाधित हो गया है। प्रशासन अलर्ट मोड पर, लगातार हो रही निगरानी जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने देर रात तक जिला आपदा परिचालन केंद्र से मौसम की स्थिति, संवेदनशील क्षेत्रों और केदारनाथ यात्रा मार्ग की लगातार निगरानी की। उन्होंने सभी विभागों को अलर्ट मोड में रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों से सतर्क रहने की अपील प्रशासन ने स्थानीय लोगों और चारधाम यात्रियों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और नदी-नालों के किनारे नहीं जाने की अपील की है। लगातार बारिश को देखते हुए आपदा प्रबंधन की टीमें भी पूरी तरह सतर्क हैं। बारिश से चारधाम यात्रा प्रभावित भारी वर्षा के चलते यमुनोत्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होते ही मार्ग से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने का प्रयास किया जाएगा, जबकि संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जम्मू, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। प्रशासन ने आशंका जताई है कि मलबे में दबे लोगों के मिलने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। पुंछ और राजौरी सबसे ज्यादा प्रभावित सबसे अधिक नुकसान पुंछ और राजौरी के पहाड़ी इलाकों में हुआ है, जहां तेज बारिश के कारण कई मकान, सड़कें और पुल बह गए। अचानक आई बाढ़ और पहाड़ों से गिरे मलबे ने कई गांवों का संपर्क भी तोड़ दिया है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए हैं। बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी NDRF, SDRF, सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। मलबे में फंसे लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश के लिए भारी मशीनों और ड्रोन की मदद ली जा रही है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सरकार ने लिया स्थिति का जायजा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल प्रशासन लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित जिलों में राहत सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। भारी बारिश का अलर्ट जारी मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से नदियों-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।
कॉक्स बाजार: बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया। उखिया उपजिले के शरणार्थी कैंप में पहाड़ी ढलान खिसकने से हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) में आठ बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। भारी बारिश बनी हादसे की वजह लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई, जिसके चलते रोहिंग्या कैंप के पास पहाड़ी ढह गई। भूस्खलन की चपेट में कई अस्थायी झोपड़ियां आ गईं, जिससे कैंप में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने परिजनों की तलाश में घटनास्थल पर जुट गए। मलबे से लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान रिफ्यूजी रिलीफ एंड रिपैट्रिएशन कमिश्नर (RRRC) मिजाननुर रहमान ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और राहत टीमों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास जारी है। हादसे में घायल हुए पांच बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अभी भी कई लोगों के लापता होने की सूचना है। प्रशासन ने जारी की चेतावनी पुलिस और प्रशासन ने बताया कि लगातार बारिश के कारण रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। बड़ी संख्या में शरणार्थी पहाड़ी ढलानों पर बनी अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है और निगरानी बढ़ा दी गई है। राहत एजेंसियां सक्रिय हादसे के बाद सरकारी एजेंसियों, संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी संस्थाओं और अन्य राहत संगठनों ने प्रभावित इलाके में राहत कार्य तेज कर दिया है। प्रभावित परिवारों को भोजन, दवाइयां, तिरपाल और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मौसम सामान्य होने तक राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा और जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम तेज किया जाएगा.
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और योगिनी एकादशी व्रत कथा का श्रद्धा के साथ पाठ करने से पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। मान्यता है कि इस एकादशी की महिमा का वर्णन स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को किया था। योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व सनातन परंपरा में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास, भजन-कीर्तन और व्रत कथा का पाठ करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित का अवसर प्रदान करता है और व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। योगिनी एकादशी व्रत कथा हेम माली की भूल बनी संकट का कारण पौराणिक कथा के अनुसार, अलकापुरी के राजा कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी दैनिक पूजा के लिए हेम माली नामक सेवक मानसरोवर से ताजे फूल लाया करता था। हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन वह फूल लेकर लौट तो आया, लेकिन पूजा स्थल पहुंचने के बजाय अपनी पत्नी के साथ समय बिताने में इतना मग्न हो गया कि भगवान शिव की पूजा के लिए समय पर फूल नहीं पहुंचा सका। कुबेर के श्राप से बदल गई किस्मत जब पूजा का समय बीतने लगा और फूल नहीं पहुंचे, तो कुबेर ने कारण का पता लगाया। उन्हें जब हेम माली की लापरवाही का पता चला तो वे क्रोधित हो गए और उसे श्राप दे दिया कि वह स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर जाएगा, कुष्ठ रोग से पीड़ित होगा और पत्नी के वियोग का दुख सहेगा। श्राप के प्रभाव से हेम माली तत्काल स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर रोगग्रस्त हो गया और वह अपनी पत्नी से भी अलग हो गया। वह लंबे समय तक जंगलों में दुख और कष्ट भरा जीवन बिताने लगा। महर्षि मार्कण्डेय ने बताया मुक्ति का मार्ग भटकते-भटकते एक दिन हेम माली महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा और अपनी पूरी व्यथा सुनाई। महर्षि ने उसे सलाह दी कि वह आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करे और भगवान विष्णु की आराधना करे। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। व्रत के प्रभाव से मिला नया जीवन हेम माली ने महर्षि के निर्देशानुसार पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। उसने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और रात्रि जागरण भी किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया। उसे अपना दिव्य स्वरूप वापस प्राप्त हुआ और वह पुनः स्वर्ग लौटकर अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ सुखपूर्वक जीवन बिताने लगा। क्या संदेश देती है यह कथा? योगिनी एकादशी की कथा यह संदेश देती है कि जीवन में कर्तव्य, अनुशासन और ईश्वर भक्ति का विशेष महत्व है। यदि व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार कर सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करे, तो उसे अपने कर्मों का प्रायशित करने और जीवन में नई शुरुआत करने का अवसर मिल सकता है। धार्मिक सूचना: यह लेख पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं पर आधारित है। आस्था और विश्वास व्यक्तिगत विषय हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सोमवार (6 जुलाई) को भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराना मुंबई-पुणे हाईवे दोनों को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया। प्रशासन ने अगली सूचना तक दोनों शहरों के बीच यात्रा न करने की सलाह दी है। दोनों प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह बंद पुलिस द्वारा जारी ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार, लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराने हाईवे पर दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यदि उनकी यात्रा जरूरी नहीं है, तो फिलहाल उसे स्थगित कर दें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। बाढ़ और जलभराव से हालात गंभीर अधिकारियों के मुताबिक, मावल और ताम्हिणी घाट क्षेत्र में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इससे मुंबई और पुणे को जोड़ने वाले वैकल्पिक मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक कंक्रीट का खंभा गिरने के बाद 'कनेक्टिंग लिंक' और 'मिसिंग लिंक' के बीच का हिस्सा भी यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं, पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर कई स्थानों पर घुटनों तक पानी भर जाने के कारण वहां भी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। भूस्खलन के बाद राहत-बचाव अभियान जारी पुलिस ने बताया कि लोहगढ़ किले के पास पाटन गांव में भूस्खलन की घटना सामने आई है। सूचना मिली है कि एक परिवार मलबे में फंस गया है, जिसके बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर अभियान चला रहे हैं। पुणे में स्कूल बंद लगातार खराब मौसम को देखते हुए पुणे जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। 'मिसिंग लिंक' परियोजना भी प्रभावित अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के खोपोली-कुसगांव के पास 'मिसिंग लिंक' परियोजना की सुरंग-2 के बाहर भूस्खलन हुआ, जिससे एक्सप्रेसवे पर यातायात बाधित हो गया। गौरतलब है कि करीब 13 किलोमीटर लंबा 'मिसिंग लिंक' बाईपास दो महीने पहले ही शुरू किया गया था। इस परियोजना से मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय लगभग 25 से 30 मिनट कम हो गया था। प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक मुंबई-पुणे मार्ग पर यात्रा से बचें। साथ ही, यात्रा करने से पहले ट्रैफिक और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट अवश्य जांच लें। लगातार बारिश को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं निगरानी का काम जारी है।
देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित हो गया है। चमोली जिले में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरने के कारण हाईवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर यात्रियों और चारधाम यात्रियों को फिलहाल आगे बढ़ने से बचने की सलाह दी है। भूस्खलन के बाद रोका गया यातायात प्रशासन के अनुसार, पातालगंगा-लांगसी सुरंग के पास हुए भूस्खलन के कारण सड़क पर मलबा जमा हो गया, जिससे बदरीनाथ हाईवे पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। पुलिस ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया है और मार्ग साफ होने तक इंतजार करने को कहा है। मलबा हटाने का कार्य जारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सीमा सड़क संगठन (BRO) और स्थानीय प्रशासन की टीमें जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने पर जल्द से जल्द मार्ग को फिर से खोलने का प्रयास किया जाएगा। बारिश के चलते बढ़ा खतरा मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की आधिकारिक जानकारी जरूर प्राप्त करें तथा अनावश्यक यात्रा से बचें। चारधाम यात्रियों को जारी की गई एडवाइजरी चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही यातायात बहाल किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।