Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन का सोमवार जितना महत्वपूर्ण माना जाता है, उतना ही धार्मिक महत्व सावन के मंगलवार का भी है। सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत और माता गौरी की पूजा से वैवाहिक जीवन से जुड़ी परेशानियां दूर होने और विवाह में आ रही बाधाओं से मुक्ति मिलने की कामना की जाती है। इस बार 4 अगस्त 2026, सावन के पहले मंगलवार को कई शुभ योगों का संयोग बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, गजकेसरी योग, हंस योग, गुरु आदित्य योग और भद्र राजयोग बनने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे शुभ संयोग में भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमानजी की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक उपाय करना शुभ फलदायी हो सकता है। आइए जानते हैं सावन के पहले मंगलवार पर कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं। सावन के पहले मंगलवार पर बन रहे हैं 7 शुभ योग 4 अगस्त को सावन के पहले मंगलवार के दिन सात शुभ योगों का संयोग बताया गया है। इनमें शामिल हैं: सर्वार्थ सिद्धि योग अमृत सिद्धि योग रवि योग गजकेसरी योग हंस योग गुरु आदित्य योग भद्र राजयोग ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस तरह के शुभ अवसर पर भगवान का स्मरण, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की करें पूजा सावन के पहले मंगलवार को भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। यदि संभव हो तो माता गौरी को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। मंगला गौरी की पूजा विशेष रूप से वैवाहिक सुख और दांपत्य जीवन से जुड़ी कामनाओं के लिए की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता पार्वती की आराधना करने से विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। हनुमानजी को चोला चढ़ाएं सावन के पहले मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन हनुमानजी को चोला अर्पित किया जा सकता है। मान्यता है कि हनुमानजी की श्रद्धापूर्वक पूजा और चोला अर्पित करने से संकटों से मुक्ति और आर्थिक परेशानियों से राहत की कामना की जाती है। बजरंगबाण का करें पाठ इस दिन हनुमानजी के सामने श्रद्धापूर्वक बजरंगबाण का पाठ करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने और नकारात्मकता से दूर रहने की कामना की जाती है। पाठ करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ हनुमानजी का ध्यान करें। विवाह में आ रही बाधाओं के लिए करें यह उपाय यदि विवाह में किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो सावन के पहले मंगलवार को माता पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन पार्वती चालीसा का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख से जोड़ा जाता है। इसलिए मंगला गौरी की आराधना के दौरान सुखी वैवाहिक जीवन और विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। शिवलिंग पर करें जलाभिषेक सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक विशेष महत्व रखता है। सावन के पहले मंगलवार को भी शिवलिंग पर जल अर्पित कर भगवान शिव का ध्यान किया जा सकता है। इसके साथ ही हनुमानजी के सामने घी का दीपक जलाने की परंपरा भी बताई गई है। पूजा के दौरान श्रद्धा और शुद्ध भाव को विशेष महत्व दें। 21 बेलपत्र पर लिखें राम नाम सावन के मंगलवार को एक अन्य धार्मिक उपाय के रूप में 21 बेलपत्र लेकर उन पर चंदन से ‘राम’ नाम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करने की मान्यता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति की कामना की जाती है। इसे वास्तु संबंधी परेशानियों से मुक्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है। सावन के पहले मंगलवार का धार्मिक महत्व सावन का पहला मंगलवार भगवान शिव के साथ माता पार्वती और हनुमानजी की आराधना के लिए विशेष अवसर माना जाता है। एक ओर जहां सावन शिव भक्ति का प्रमुख महीना है, वहीं मंगलवार को मंगला गौरी व्रत और हनुमानजी की पूजा की परंपरा इस दिन को और महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा, मंत्र जाप, व्रत, दान और सेवा जैसे धार्मिक कार्य कर सकते हैं।
रुद्राक्ष धारण करने के नियम: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में रुद्राक्ष का संबंध भी भगवान शिव से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि श्रावण मास में रुद्राक्ष धारण करना विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, धार्मिक परंपराओं के अनुसार रुद्राक्ष पहनने से पहले उसकी सही विधि और कुछ जरूरी नियमों का पालन करना चाहिए। ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष के अलग-अलग मुख और प्रकार बताए गए हैं और प्रत्येक का अपना अलग महत्व माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा के साथ रुद्राक्ष धारण करने से सकारात्मकता बढ़ती है और मन को शांति मिल सकती है। सावन में रुद्राक्ष क्यों धारण किया जाता है? श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। धार्मिक कथाओं और शिवपुराण से जुड़ी मान्यताओं में रुद्राक्ष को भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न बताया गया है। इसी वजह से रुद्राक्ष को शिवजी से विशेष रूप से जुड़ा हुआ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में शिव आराधना और रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिल सकता है। इसे सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति से भी जोड़ा जाता है। रुद्राक्ष के अलग-अलग मुख बताए गए हैं और उनके महत्व भी अलग माने जाते हैं। इनमें एक मुखी रुद्राक्ष को विशेष और शक्तिशाली माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग रुद्राक्ष धारण करने की विधि और मंत्र भी अलग हो सकते हैं। रुद्राक्ष कैसे धारण करें? धार्मिक परंपरा के अनुसार सामान्य रूप से रुद्राक्ष धारण करने के लिए इन बातों का ध्यान रखा जाता है: सावन का महीना रुद्राक्ष धारण करने के लिए शुभ माना जाता है। सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन रुद्राक्ष धारण करना विशेष शुभ माना जाता है। सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। रुद्राक्ष को गंगाजल से शुद्ध करने की परंपरा है। इसके बाद रुद्राक्ष को हाथ में लेकर भगवान शिव का ध्यान करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करने की मान्यता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार शिवजी से संबंधित अन्य मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। इसके बाद रुद्राक्ष को धागे में पिरोकर गले या हाथ में धारण किया जा सकता है। ध्यान रखें कि अलग-अलग मुखी रुद्राक्ष के लिए अलग विधि, मंत्र और धारण करने के नियम बताए जाते हैं। रुद्राक्ष धारण करने के जरूरी नियम रुद्राक्ष को लेकर धार्मिक मान्यताओं में कुछ सावधानियां भी बताई गई हैं। यदि आप इसे धारण करते हैं तो इन बातों का ध्यान रखने की परंपरा है: 1. सोते समय रुद्राक्ष उतार दें मान्यता के अनुसार रात में सोते समय रुद्राक्ष उतार देना चाहिए। सुबह स्नान करने से पहले भी इसे अलग रखने की सलाह दी जाती है। 2. स्नान के बाद दोबारा धारण करें सुबह स्नान और पूजा-पाठ करने के बाद रुद्राक्ष को दोबारा धारण करने की परंपरा है। इसे धार्मिक रूप से रुद्राक्ष की पवित्रता बनाए रखने से जोड़ा जाता है। 3. किसी दूसरे व्यक्ति का रुद्राक्ष न पहनें मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष व्यक्तिगत रूप से धारण किया जाना चाहिए। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति का रुद्राक्ष अपने गले में पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी तरह अपना रुद्राक्ष भी किसी दूसरे व्यक्ति को पहनने के लिए न देने की परंपरा है। 4. सात्विक जीवनशैली अपनाएं धार्मिक मान्यताओं में रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को मांस और मदिरा से दूर रहने तथा अनैतिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे सात्विक जीवनशैली और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा को महत्व दिया जाता है। रुद्राक्ष धारण करते समय सबसे जरूरी बात रुद्राक्ष केवल एक धार्मिक आस्था से जुड़ी वस्तु नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए भगवान शिव की भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक भी है। इसलिए इसे धारण करते समय श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी धार्मिक परंपरा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही, यह समझना जरूरी है कि रुद्राक्ष से जुड़े लाभ और प्रभाव मुख्य रूप से धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सा या स्वास्थ्य उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
पटना। बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग (BPSSC) ने बिहार पुलिस रेडियो (वायरलेस) में सहायक अवर निरीक्षक (तकनीकी) भर्ती 2026 की प्रारंभिक लिखित परीक्षा स्थगित कर दी है। यह परीक्षा 5 अगस्त 2026 को आयोजित होनी थी, लेकिन आयोग ने अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए इसे फिलहाल टाल दिया है। जल्द जारी होगी नई परीक्षा तिथि आयोग ने अपने आधिकारिक नोटिस में कहा है कि परीक्षा की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से BPSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें, ताकि परीक्षा से जुड़ी किसी भी नई सूचना से अपडेट रह सकें। 22 पदों पर होनी है भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत बिहार पुलिस रेडियो संगठन में सहायक अवर निरीक्षक (तकनीकी) के कुल 22 पद भरे जाएंगे। इनमें सामान्य वर्ग के लिए 8, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 2, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 3, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 1, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए 4, पिछड़ा वर्ग (BC) के लिए 3 और पिछड़ा वर्ग महिला (BC Female) के लिए 1 पद आरक्षित है। तीन चरणों में होगी चयन प्रक्रिया भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में प्रारंभिक लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें सामान्य ज्ञान और तकनीकी विषयों से 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके बाद मुख्य परीक्षा होगी, जिसमें सामान्य भाषा ज्ञान और तकनीकी विषय का पेपर शामिल रहेगा। अंतिम चरण में शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) आयोजित की जाएगी, जिसमें दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और गोला फेंक जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। शारीरिक मानकों का रखना होगा ध्यान भर्ती के लिए पुरुष अभ्यर्थियों की न्यूनतम ऊंचाई सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के लिए 165 सेंटीमीटर तथा SC/ST और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 160 सेंटीमीटर निर्धारित है। महिला अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 155 सेंटीमीटर और न्यूनतम वजन 48 किलोग्राम रखा गया है। पुरुष उम्मीदवारों के लिए निर्धारित सीने का माप भी अनिवार्य होगा। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे नई परीक्षा तिथि घोषित होने तक आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और किसी भी अफवाह से बचें।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा, व्रत और अभिषेक करने से भक्त को पुण्य और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। सावन व्रत महात्म्य में अलग-अलग व्रतों, पूजा विधियों और उनके महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। सावन व्रत कथा के अध्याय-3 में सनत्कुमार भगवान शिव से श्रावण मास के व्रतों का विस्तार से वर्णन करने का आग्रह करते हैं। इसके जवाब में भगवान शिव नक्त व्रत, संकल्प, अभिषेक, लक्ष पूजा और उद्यापन सहित विभिन्न धार्मिक विधियों का महत्व बताते हैं। नक्त व्रत क्या है और इसका क्या महत्व है? कथा के अनुसार भगवान शिव बताते हैं कि जो व्यक्ति सावन के महीने में नियमपूर्वक नक्त व्रत करता है, उसे पूरे वर्ष नक्त व्रत करने के समान फल प्राप्त होता है। नक्त व्रत में भोजन के समय को लेकर गृहस्थ और यति के लिए अलग-अलग नियम बताए गए हैं। गृहस्थ व्यक्ति रात्रि में नक्त भोजन करता है, जबकि यति के लिए सूर्यास्त के आसपास निर्धारित समय में भोजन का विधान बताया गया है। संध्या काल को विशेष रूप से संयम और साधना का समय माना गया है। इस दौरान भोजन, निद्रा, मैथुन और स्वाध्याय जैसे कार्यों से विरत रहने की बात कही गई है। कथा में यह भी कहा गया है कि व्यक्ति को अपनी स्थिति और अधिकार के अनुसार नक्त व्रत का पालन करना चाहिए। सावन में व्रत के लिए करें संकल्प धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में नक्त व्रत शुरू करने से पहले श्रद्धालु को संकल्प लेना चाहिए कि वह नियमित स्नान करेगा, ब्रह्मचर्य का पालन करेगा, निर्धारित समय पर नक्त भोजन करेगा, भूमि पर शयन करेगा और सभी प्राणियों के प्रति दया का भाव रखेगा। कथा में भगवान शिव कहते हैं कि इस प्रकार नियमपूर्वक नक्त व्रत करने वाला व्यक्ति उन्हें अत्यंत प्रिय होता है। सावन में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व सावन में भगवान शिव का अभिषेक करना विशेष पुण्यकारी माना गया है। कथा में प्रतिदिन रुद्र मंत्र के साथ अभिषेक करने का उल्लेख मिलता है। अतिरुद्र, महारुद्र अथवा रुद्र मंत्र के माध्यम से भगवान शिव का अभिषेक करने की बात कही गई है। भगवान शिव को जलधारा प्रिय मानी गई है, इसलिए सावन में श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की धार्मिक परंपरा विशेष महत्व रखती है। प्रिय वस्तु का त्याग और दान सावन व्रत कथा में त्याग और दान को भी विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता के अनुसार व्यक्ति को अपने लिए अत्यंत प्रिय किसी भोजन या सुख-सुविधा की वस्तु का संकल्पपूर्वक त्याग करके उसे योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करना चाहिए। कथा में कहा गया है कि सावन में किसी प्रिय वस्तु का त्याग करने से उसका पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। सकाम भाव से किया गया त्याग मनोकामना पूर्ति और निष्काम भाव से किया गया त्याग आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना गया है। लक्ष पूजा का क्या है विधान? सावन व्रत कथा में लक्ष पूजा का भी विस्तृत वर्णन मिलता है। अलग-अलग कामनाओं के लिए अलग-अलग पूजन सामग्री का उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार: शांति और समृद्धि की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को बड़ी संख्या में बेलपत्र या दूर्वा से शिव पूजा करनी चाहिए। आयु की कामना के लिए चंपा के पुष्पों से पूजा का विधान बताया गया है। विद्या की कामना रखने वालों के लिए मल्लिका या चमेली के पुष्पों से पूजा का उल्लेख है। शिव और विष्णु की प्रसन्नता के लिए तुलसी दल अर्पित करने की बात कही गई है। संतान की कामना के लिए विशेष पत्तियों से शिव और विष्णु पूजन का उल्लेख मिलता है। बुरे सपनों की शांति के लिए धान्य से पूजा करना शुभ बताया गया है। इसके अलावा रंगोली या रंगवल्ली के माध्यम से कमल, स्वस्तिक और चक्र जैसे शुभ प्रतीक बनाकर भगवान की पूजा करने की परंपरा का भी वर्णन मिलता है। लक्ष पूजा के बाद कैसे करें उद्यापन? कथा में लक्ष पूजा के बाद विधिपूर्वक उद्यापन करने का विधान बताया गया है। इसके लिए मंडप का निर्माण, वेदिका की स्थापना और पुण्याहवाचन के बाद आचार्य का वरण करने की बात कही गई है। रात्रि में गीत, वाद्य, नृत्य और वेद, शास्त्र तथा पुराणों के पाठ के साथ जागरण करने का विधान बताया गया है। इसके बाद वेदिका पर शिवलिंग और चावल से कैलास का प्रतीक बनाने, पंचपल्लवयुक्त कलश स्थापित करने तथा उस पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। पंचामृत, धूप, दीप और नैवेद्य से पूजा के बाद रात्रि जागरण किया जाता है। अगले दिन स्नान के बाद निर्धारित विधि से हवन और पूर्णाहुति की जाती है। ब्राह्मण पूजन और दान का महत्व उद्यापन के बाद आचार्य और अन्य ब्राह्मणों का पूजन करके उन्हें दक्षिणा देने की बात कथा में कही गई है। जिस सामग्री से लक्ष पूजा की गई हो, उसके दान का भी विधान बताया गया है। दीप पूजा करने वाले व्यक्ति के लिए दीपदान का उल्लेख मिलता है। इसके बाद भगवान शिव से अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगने और ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा बताई गई है। सावन में त्याग और पूजा से मिलता है विशेष फल कथा के अनुसार सावन महीने में श्रद्धा से किया गया त्याग और भगवान शिव की पूजा विशेष फल प्रदान करती है। किसी प्रिय वस्तु का त्याग करने पर उसके पुण्यफल में वृद्धि होने की मान्यता है। रुद्राभिषेक, पंचामृत अभिषेक, भूमि पर शयन और ब्रह्मचर्य पालन को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया है। सावन व्रत कथा अध्याय-3 का मूल संदेश यही है कि भगवान शिव की आराधना केवल बाहरी पूजा तक सीमित नहीं है। संयम, त्याग, दया, अनुशासन, दान और श्रद्धा भी शिव भक्ति के महत्वपूर्ण अंग माने गए हैं।
Sawan Vrat Katha Chapter 2: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और साधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान शिवभक्त भगवान शिव का अभिषेक, पूजन, जप और व्रत करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस महीने में श्रद्धा के साथ किए गए पूजा-पाठ और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। सावन व्रत कथा के दूसरे अध्याय में भगवान शिव सनत्कुमार को इस महीने में किए जाने वाले व्रत, पूजा, जप, संयम और अलग-अलग तिथियों के धार्मिक महत्व के बारे में बताते हैं। साथ ही सप्ताह के अलग-अलग दिनों में किए जाने वाले व्रतों का भी उल्लेख मिलता है। सावन में व्रत और रुद्राभिषेक का महत्व कथा के अनुसार भगवान शिव सनत्कुमार से कहते हैं कि श्रावण मास में व्यक्ति को अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए। पूरे महीने नियमित रूप से शिव पूजा और रुद्राभिषेक करने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यता में इस महीने में भगवान शिव को फूल, फल, धान्य और बेलपत्र आदि अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। पंचामृत से अभिषेक, शिव मंत्रों का जाप, प्रदक्षिणा, नमस्कार और वेदों का पाठ भी सावन की साधना का हिस्सा माना गया है। कथा में संयमित जीवन जीने, सत्य बोलने, ब्रह्मचर्य का पालन करने और सात्विक भोजन करने पर भी जोर दिया गया है। फलाहार या हविष्य अन्न ग्रहण करने तथा भूमि पर सोने जैसी कठोर साधनाओं का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि, आधुनिक समय में किसी भी कठिन व्रत या खान-पान के कठोर नियम को अपनाने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। सावन में शिव मंत्र और धार्मिक पाठ सावन मास में शिव के षडक्षर मंत्र और गायत्री मंत्र का जाप करने की बात कथा में कही गई है। भगवान शिव की प्रदक्षिणा, नमस्कार और वेद-पाठ को भी पुण्यकारी बताया गया है। पुरुषसूक्त के पाठ को विशेष फलदायी माना गया है। इसी तरह ग्रह यज्ञ, होम और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को भी सावन में महत्वपूर्ण बताया गया है। कथा के अनुसार सावन ऐसा महीना है जो सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति चाहने वाले भक्तों के लिए कामना-सिद्धि और निष्काम साधना करने वालों के लिए मोक्ष की दिशा में सहायक माना गया है। सप्ताह के किस दिन कौन-सा व्रत? सावन व्रत कथा के दूसरे अध्याय में सप्ताह के अलग-अलग दिनों से जुड़े व्रतों का भी उल्लेख किया गया है। रविवार: सूर्य व्रत सोमवार: भगवान शिव की पूजा और नक्त भोजन मंगलवार: मंगलगौरी व्रत बुधवार: बुध से संबंधित व्रत गुरुवार: बृहस्पति व्रत शुक्रवार: जीवन्ती व्रत शनिवार: हनुमान और नृसिंह व्रत कथा में श्रावण के प्रथम सोमवार से शुरू होने वाले 'रोटक' नामक व्रत का भी उल्लेख मिलता है, जिसे इच्छित फल प्रदान करने वाला बताया गया है। सावन की तिथियों में कौन-से व्रत? सावन के शुक्ल पक्ष की अलग-अलग तिथियों के लिए कथा में कई व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का वर्णन मिलता है। द्वितीया: औदुम्बर व्रत तृतीया: गौरी व्रत चतुर्थी: दूर्वा गणपति या विनायकी चतुर्थी पंचमी: नाग पूजा षष्ठी: सूपौदन व्रत सप्तमी: शीतला व्रत अष्टमी/चतुर्दशी: देवी का पवित्रारोपण व्रत नवमी: नक्त व्रत दशमी: आशा व्रत एकादशी: दोनों पक्षों की एकादशी का विशेष महत्व शुक्ल द्वादशी: भगवान विष्णु का पवित्रारोपण व्रत पूर्णिमा: कई धार्मिक कर्मों और अनुष्ठानों का उल्लेख कथा में श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी और पंचमी को मानवकल्पादि व्रत का भी उल्लेख मिलता है। सावन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का भी महत्व कथा के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के पूर्णावतार का उल्लेख मिलता है। इसलिए इस दिन व्रत और उत्सव मनाने की बात कही गई है। श्रावण अमावस्या को पिठोरा व्रत का उल्लेख मिलता है। इस दिन कुश ग्रहण और वृषभ पूजन की परंपरा भी कथा में बताई गई है। तिथि के अनुसार किस देवता की पूजा करें? कथा में शुक्ल पक्ष की तिथियों के अलग-अलग देवताओं का भी उल्लेख किया गया है। प्रतिपदा: अग्नि द्वितीया: ब्रह्मा तृतीया: गौरी चतुर्थी: गणपति पंचमी: नाग षष्ठी: कार्तिकेय सप्तमी: सूर्य अष्टमी: शिव नवमी: दुर्गा दशमी: यम एकादशी: विश्वेदेव द्वादशी: विष्णु त्रयोदशी: कामदेव चतुर्दशी: शिव पूर्णिमा: चंद्रमा अमावस्या: पितर धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस तिथि के जो देवता माने गए हैं, उस दिन उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करनी चाहिए। अगस्त्य उदय और सूर्य पूजा का उल्लेख कथा में सावन मास के दौरान अगस्त्य के उदय से जुड़ी धार्मिक मान्यता का भी वर्णन किया गया है। इसमें अगस्त्य उदय से पहले अर्घ्य देने की परंपरा बताई गई है। सावन में सूर्य को 'गभस्ति' नाम से संबोधित करते हुए उनकी पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है। इससे यह संकेत मिलता है कि सावन की धार्मिक साधना केवल शिव आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दौरान विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा का भी विधान बताया गया है। सावन में किन चीजों का त्याग बताया गया है? कथा में चार महीनों से जुड़ी कुछ खाद्य वस्तुओं के त्याग की परंपरा बताई गई है। श्रावण: शाक का त्याग भाद्रपद: दही का त्याग आश्विन: दूध का त्याग कार्तिक: दाल का त्याग धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि व्यक्ति चारों महीनों में इनका त्याग नहीं कर पाता, तो केवल सावन में बताए गए त्याग का पालन करने को भी विशेष महत्व दिया गया है। सावन में भगवान शिव और विष्णु की भक्ति कथा के अंत में भगवान शिव सनत्कुमार से कहते हैं कि श्रावण मास के व्रत और धार्मिक नियमों की पूरी महिमा का वर्णन करना संभव नहीं है। भगवान शिव और भगवान विष्णु की एकता पर भी जोर दिया गया है। धार्मिक दृष्टि से दोनों के बीच भेद न करने और भक्ति भाव से साधना करने का संदेश दिया गया है। इस प्रकार सावन व्रत कथा का दूसरा अध्याय व्रत, संयम, पूजा, जप, दान और श्रद्धा के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने का संदेश देता है।
नई दिल्ली: भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। वर्ष 2026 में सावन मास के दौरान चार सोमवार व्रत पड़ रहे हैं, जिनका धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार पर विशेष पूजा और कुछ खास सामग्री अर्पित करने से विभिन्न ग्रहों की शुभता बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है। सावन सोमवार का धार्मिक महत्व सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की विशेष आराधना के लिए समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने, शिवलिंग का जलाभिषेक करने और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। कहा जाता है कि— अविवाहित युवाओं को योग्य जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है। विवाहित दंपतियों के वैवाहिक जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। सावन 2026 के चार सोमवार की तिथियां पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026 दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026 तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026 चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026 चारों सोमवार पर ग्रहों को मजबूत करने के उपाय पहला सोमवार – 3 अगस्त 2026 शिवलिंग पर दूध और चावल अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे शुक्र और चंद्र ग्रह की शुभता बढ़ती है तथा मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। दूसरा सोमवार – 10 अगस्त 2026 भगवान शिव को लाल मसूर की दाल और गुड़ अर्पित करें। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और कर्ज से राहत मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तीसरा सोमवार – 17 अगस्त 2026 इस दिन हरी मूंग और गेहूं अर्पित करें। माना जाता है कि इससे बुध और सूर्य ग्रह मजबूत होते हैं तथा बुद्धि, आत्मविश्वास और कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। चौथा सोमवार – 24 अगस्त 2026 शिवलिंग पर अरहर या चने की दाल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे गुरु ग्रह की शुभता बढ़ती है और भाग्योदय के योग मजबूत होते हैं। सावन में शिवलिंग जलाभिषेक की सही विधि सावन सोमवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का विधिपूर्वक अभिषेक करें। पूजा के दौरान— शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। अंत में पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं। बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद पुष्प और भस्म अर्पित करें। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें। शिव चालीसा का पाठ करें। कपूर से आरती कर फल या मिठाई का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के चारों सोमवार श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इससे आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होने की मान्यता है। हालांकि, ग्रहों पर प्रभाव और अन्य धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
12 जुलाई को रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत, प्रदोष काल में करें भगवान शिव की पूजा Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई, रविवार को पड़ रहा है। रविवार के दिन होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत या भानु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 जुलाई 2026, सुबह 02:04 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 12 जुलाई 2026, रात 10:29 बजे प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 07:22 बजे से रात 09:24 बजे तक प्रदोष व्रत की पूजा विधि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें तथा भगवान शिव के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। दिनभर श्रद्धा के साथ व्रत रखें। अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार निराहार या फलाहार रह सकते हैं। इस दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। शाम को प्रदोष काल से पहले स्नान कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव की पूजा आरंभ करें। शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें और फिर चंदन, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प तथा अक्षत अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें तथा कपूर या दीपक से भगवान शिव की आरती करें। पूजा पूर्ण होने के बाद प्रसाद वितरित करें और विधि अनुसार व्रत का पारण करें। रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति के जीवन से अनेक बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता यह भी है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है तथा यश, सम्मान, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। नोट: व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक विश्वासों और पंचांग पर आधारित हैं। श्रद्धालु स्थानीय परंपरा या अपने पुरोहित की सलाह के अनुसार भी पूजा कर सकते हैं।
आज 15 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र अवसर है, क्योंकि आज बुध प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित होता है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को किया जाने वाला प्रदोष व्रत जब बुधवार को पड़ता है, तो इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन शिव परिवार की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, आज त्रयोदशी तिथि रात 10:31 बजे तक रहेगी। वहीं पूजा के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल माना गया है, जो आज शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा अत्यंत शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य की राय ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति की बुद्धि, वाणी और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। यह व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है और जीवन में सफलता के नए द्वार खोलता है। भगवान शिव की कृपा से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रदोष काल में करें ये प्रभावी उपाय शिवलिंग का गंगाजल, दूध, शहद, घी और पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग और हरी मूंग दाल अर्पित करें। श्रद्धा भाव से शिव चालीसा का पाठ करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में सच्चे मन से अपनी इच्छाएं भगवान के सामने रखें। इन उपायों को करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और सच्चे मन से प्रदोष व्रत करते हैं, भगवान शिव उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यह व्रत जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करता है। ऐसे में, यदि आप भी भगवान शिव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो आज प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा अवश्य करें। यह दिन आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।