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अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार

अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर
अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुल सार्वजनिक कर्ज 40.047 ट्रिलियन डॉलर दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका का बजट घाटा और कर्ज पर ब्याज खर्च लगातार बढ़ रहा है।

 

एक दशक से भी कम समय में दोगुना हुआ कर्ज

 

 

अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज जनवरी 2017 में करीब 19.95 ट्रिलियन डॉलर था। यानी नौ साल से भी कम समय में यह दोगुने से ज्यादा हो गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर सरकारी खर्च, टैक्स नीतियां और लगातार बढ़ता बजट घाटा कर्ज बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

 

 

ब्याज भुगतान बना बड़ी चिंता

 

 

बढ़ते कर्ज के साथ अमेरिकी सरकार का ब्याज खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 10 महीनों में कर्ज पर ब्याज खर्च मेडिकेयर से अधिक हो गया और यह सोशल सिक्योरिटी के बाद संघीय बजट का दूसरा सबसे बड़ा खर्च बन गया है।

 

 

जुलाई में 432 अरब डॉलर का बजट घाटा

 

 

अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार जुलाई में सरकार का बजट घाटा करीब 432 अरब डॉलर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी खर्च और राजस्व के बीच अंतर इसी तरह बना रहा तो आने वाले वर्षों में कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है।

 

 

बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बढ़ी चिंता

 

 

बढ़ते कर्ज का असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। निवेशक लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड खरीदने के लिए ज्यादा रिटर्न मांग रहे हैं। 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड हाल में कई वर्षों के उच्च स्तर तक पहुंची है, जिससे सरकार की उधारी लागत के साथ-साथ बंधक और अन्य कर्ज की लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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ब्रिटेन में जुलाई 2026 की महंगाई दर बढ़कर 2.9 प्रतिशत हुई
ब्रिटेन में जुलाई की महंगाई बढ़कर 2.9% पहुंची, ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाया घरेलू खर्च का दबाव

लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन में महंगाई दर जुलाई 2026 में बढ़कर 2.9% हो गई, जो जून के 2.6% के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक अधिक है। यह चार महीने का उच्चतम स्तर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महंगाई में इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह गैस और बिजली की कीमतों में तेज वृद्धि रही।   ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाई महंगाई     जुलाई में ब्रिटेन के घरेलू ऊर्जा बिलों पर नियामक Ofgem की नई मूल्य सीमा लागू हुई, जिसके बाद ऊर्जा कीमतों में करीब 13% की बढ़ोतरी हुई। गैस की कीमतों में उछाल का महंगाई पर खास असर पड़ा और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया।     जून के 2.6% से बढ़कर 2.9%     जून में ब्रिटेन की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 2.6% थी। जुलाई में यह बढ़कर 2.9% हो गई। हालांकि, कोर महंगाई 2.6% पर स्थिर रही और सेवाओं की महंगाई थोड़ी घटकर 3.4% रही। वहीं खाद्य और गैर-मादक पेय पदार्थों की महंगाई 1.3% तक कम हुई।     बैंक ऑफ इंग्लैंड के सामने नई चुनौती     महंगाई के 2% लक्ष्य से ऊपर बने रहने के कारण बैंक ऑफ इंग्लैंड के सामने ब्याज दरों को लेकर चुनौती बढ़ गई है। ऊर्जा कीमतों में आगे भी तेजी बनी रहने पर आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।     आम लोगों के खर्च पर बढ़ा दबाव     गैस और बिजली के महंगे होने से ब्रिटेन के परिवारों के घरेलू खर्च और जीवन-यापन की लागत पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव जारी रहा तो महंगाई में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
फ्रांस और ईरान के बीच बढ़ते राजनयिक विवाद और तनाव

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वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भ्रष्टाचार जांच के बीच यूक्रेनी अधिकारी को पद से हटाया
जेलेंस्की ने भ्रष्टाचार के बीच शीर्ष अधिकारी को हटाया, यूक्रेन में सरकारी तंत्र पर बढ़ा दबाव

कीव, एजेंसियां। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भ्रष्टाचार और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के बीच राष्ट्रपति कार्यालय की वरिष्ठ अधिकारी इरीना मुद्रा को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन की भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसियां सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े मामलों की जांच तेज कर रही हैं।   राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारी पर कार्रवाई   इरीना मुद्रा राष्ट्रपति कार्यालय की उप प्रमुख थीं। भ्रष्टाचार-रोधी जांच के तहत उनके आवास की तलाशी भी ली गई थी, हालांकि उन्हें मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच एजेंसियां करीब 3.4 मिलियन डॉलर की कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच कर रही हैं।   रक्षा मंत्रालय में भी बड़ा बदलाव   इससे पहले जेलेंस्की ने रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव को पद से हटाया था। उनकी जगह येवहेनी खमारा को नया रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। संसद ने उनकी नियुक्ति की पुष्टि कर दी है। फेडोरोव ने पद से हटाए जाने के बाद सरकार में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।   भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर उठे सवाल   जेलेंस्की सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। पूर्व रक्षा मंत्री फेडोरोव ने सार्वजनिक रूप से युद्धकाल में चुनाव कराने और शासन व्यवस्था में सुधार की मांग भी की है। इससे यूक्रेन में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।   युद्ध के बीच राजनीतिक संकट गहराया   रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन सरकार में लगातार हो रहे बदलावों और भ्रष्टाचार जांच ने शासन, पारदर्शिता और राजनीतिक स्थिरता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य और आर्थिक सहायता के बीच यूक्रेन के लिए भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
कीव में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमले से रिहायशी इमारतों और अस्पताल को नुकसान

रूस का कीव पर फिर बड़ा मिसाइल हमला, कम से कम 5 लोगों की मौत; अस्पताल और रिहायशी इमारतें भी प्रभावित

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ट्रंप का ईरान पर बड़ा आर्थिक हमला, व्यापार जारी रखने वाले देशों को भी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

Ships use Oman-side route through Strait of Hormuz amid Iran tensions and increased reliance on US naval security
होर्मुज पर ईरान की पकड़ कमजोर? 80% से ज्यादा जहाजों ने बदला रास्ता, अमेरिका की सुरक्षा पर भरोसा

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। शिपिंग डेटा के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में होर्मुज से गुजरने वाले 80 फीसदी से अधिक जहाजों ने ईरान की आपत्ति के बावजूद ओमान की ओर वाले समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर ईरान का प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। हालांकि, इसे ईरान के नियंत्रण के पूरी तरह खत्म होने के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी। ओमान वाले रास्ते का बढ़ता इस्तेमाल सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, केप्लर के शिपिंग डेटा में पिछले दो सप्ताह के दौरान ओमान की तरफ से गुजरने वाले समुद्री मार्ग के इस्तेमाल में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। एक महीने पहले इस वैकल्पिक मार्ग पर लगभग कोई जहाज नहीं चल रहा था। अब बड़ी संख्या में जहाज इसी रास्ते से गुजर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ जहाज अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा पर भरोसा करते हुए इस मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। केप्लर के कच्चे तेल विश्लेषण प्रमुख होमायून फलाकशाही के अनुसार, मौजूदा गतिविधियों से ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान ने होर्मुज जलमार्ग पर कम से कम कुछ हद तक अपना नियंत्रण खोया है। आखिर होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है? होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और ऊर्जा व्यापार के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है। इस मार्ग पर तनाव बढ़ने का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता। तेल की कीमतों, वैश्विक शिपिंग लागत और एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से यहां जहाजों की आवाजाही में कोई भी बड़ा बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। ईरान की आपत्ति के बावजूद क्यों बढ़ी आवाजाही? रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के उत्तरी तट के पास से गुजरने वाले समुद्री मार्ग को लेकर ईरान की आपत्ति रही है। इसके बावजूद अब बड़ी संख्या में जहाज इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सुरक्षा सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा करते हुए जहाज संचालक ईरान की पसंद वाले मार्ग से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या समुद्री मार्ग पर ईरान के प्रभाव को चुनौती मिल रही है। ईरान की कमाई पर भी असर जहाजों के वैकल्पिक रास्ते अपनाने का आर्थिक असर भी ईरान पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने की कोशिश करता था। लेकिन यदि अधिक संख्या में जहाज ईरान की पसंद वाले रास्ते से बचते हैं, तो उसके लिए शुल्क वसूलना और अपने नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, ईरान के वास्तविक राजस्व पर इसका कितना असर पड़ा है, इसका आकलन विस्तृत वित्तीय और शिपिंग आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा। क्या बदल रहा है होर्मुज का शक्ति संतुलन? मौजूदा शिपिंग पैटर्न निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण संकेत है। 80 फीसदी से ज्यादा जहाजों का ओमान की ओर वाले रास्ते का इस्तेमाल करना बताता है कि समुद्री कंपनियां जोखिम कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही हैं। लेकिन होर्मुज पर ईरान का प्रभाव पूरी तरह खत्म हो गया है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा। आने वाले दिनों में जहाजों की आवाजाही, अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा और ईरान की प्रतिक्रिया से तस्वीर ज्यादा साफ होगी।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Bangladesh DGFI delegation visits Pakistan amid growing intelligence ties with ISI and regional security concerns

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0

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