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Indian Student Dies After US Graduation

अमेरिका में भारतीय छात्र की मौत, ग्रेजुएशन के अगले दिन 26 वर्षीय युवक को आया हार्ट अटैक

surbhi मई 9, 2026 0
Indian student Mohammed Kumail Sheikh dies of cardiac arrest a day after graduating in California
Indian Student Dies After Graduation in US

अमेरिका के कैलिफोर्निया में पढ़ाई कर रहे 26 वर्षीय भारतीय छात्र मोहम्मद कुमेल शेख का ग्रेजुएशन के एक दिन बाद कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। इस घटना से उनके दोस्तों और परिवार में शोक की लहर है। कुमेल ने एक दिन पहले ही गोल्डन गेट यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद कुमेल शेख आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि उन्हें नींद में ही हार्ट अटैक आया, जिसके कारण उनकी मौत हो गई।

ग्रेजुएशन का जश्न, अगले दिन मातम

कुमेल के दोस्त और फंडरेजर अभियान के आयोजक रवि तेजा नन्नापनेनी ने बताया कि एक दिन पहले ही सभी ने उनके साथ ग्रेजुएशन वॉक का जश्न मनाया था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह उनके साथ आखिरी मुलाकात होगी।

उन्होंने लिखा कि मोहम्मद बड़े सपने लेकर अमेरिका आए थे और अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। उनके अचानक निधन से उन्हें जानने वाले सभी लोग सदमे में हैं।

पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए जुटाई जा रही मदद

दोस्तों ने कुमेल के पार्थिव शरीर को भारत भेजने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ऑनलाइन फंडरेजर शुरू किया है। अपील में कहा गया है कि उनका परिवार निम्न-मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि से आता है और पहले से शिक्षा ऋण के बोझ से जूझ रहा है।

दोस्तों का कहना है कि आर्थिक मदद से परिवार को अचानक आए खर्चों और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सहारा मिल सकेगा।

दोस्तों ने बताया दयालु और मददगार इंसान

रवि तेजा ने कुमेल को बेहद विनम्र, दयालु और मददगार व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा अपने दोस्तों के साथ खड़े रहते थे और हर किसी की मदद करने के लिए तैयार रहते थे।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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सोफी एडेनोट और अनिल मेनन ISS से स्पेसवॉक की तैयारी करते हुए
Spacewalk 2026: ESA की सोफी एडेनोट NASA के अनिल मेनन के साथ करेंगी स्पेसवॉक

नई दिल्ली, एजेंसियां। यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) की एस्ट्रोनॉट सोफी एडेनोट 18 अगस्त को अंतरिक्ष में एक खास उपलब्धि हासिल करने जा रही हैं। वह NASA के एस्ट्रोनॉट अनिल मेनन के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर स्पेसवॉक करेंगी। इसके साथ ही सोफी एडेनोट स्पेसवॉक करने वाली पहली फ्रेंच महिला बन जाएंगी। दोनों अंतरिक्ष यात्री करीब 6.5 घंटे तक चलने वाली इस एक्स्ट्रावेहिकुलर एक्टिविटी (EVA) के लिए ISS से बाहर निकलेंगे। स्पेसवॉक के दौरान वे स्टेशन के एक महत्वपूर्ण संचार उपकरण पर काम करेंगे।   18 अगस्त को होगा स्पेसवॉक     NASA के अनुसार, सोफी एडेनोट और अनिल मेनन 18 अगस्त को करीब 18:05 बजे IST पर स्पेसवॉक शुरू करेंगे। इसकी लाइव कवरेज इससे पहले शुरू हो जाएगी।   स्पेसवॉक के दौरान दोनों एस्ट्रोनॉट ऑर्बिटल कॉम्प्लेक्स पर लगे स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना NASA के लिए महत्वपूर्ण कम्युनिकेशन लिंक है। इसके जरिए अंतरिक्ष स्टेशन और ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर के बीच हाई-स्पीड डेटा कम्युनिकेशन होता है।   सोफी एडेनोट के लिए ऐतिहासिक मौका     इस स्पेसवॉक के साथ सोफी एडेनोट अंतरिक्ष में स्पेसवॉक करने वाली पहली फ्रेंच महिला बनने जा रही हैं। हालांकि, वह स्पेसवॉक करने वाली पहली फ्रेंच नागरिक नहीं होंगी। यह उपलब्धि फ्रांस के जीन-लूप क्रेटियन के नाम है, जिन्होंने 1988 में सोवियत अंतरिक्ष स्टेशन मीर के बाहर स्पेसवॉक किया था।   सोफी एडेनोट SpaceX के Crew-12 मिशन का हिस्सा हैं और फरवरी में ISS पहुंची थीं।   अनिल मेनन की होगी दूसरी स्पेसवॉक     NASA के एस्ट्रोनॉट अनिल मेनन के लिए यह दूसरी स्पेसवॉक होगी। इससे पहले उन्होंने 6 अगस्त को NASA की एस्ट्रोनॉट जेसिका मीर के साथ स्पेसवॉक किया था।   पहली EVA के दौरान मेनन के स्पेससूट में लगे कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर से अप्रत्याशित डेटा रीडिंग मिली थी। हालांकि, स्पेससूट उतारने के बाद सेंसर सामान्य हो गया। NASA ने सुरक्षा जांच के लिए उनकी दूसरी स्पेसवॉक को कुछ दिनों के लिए टाल दिया था।   कहां और कितने बजे देखें लाइव?     इस ऐतिहासिक स्पेसवॉक की लाइव स्ट्रीमिंग NASA और ESA के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की जाएगी। ESA WebTV और ESA के YouTube चैनल पर भी इसका प्रसारण उपलब्ध रहेगा।   लाइव कवरेज 18 अगस्त को शाम करीब 4:30 बजे IST से शुरू होगी, जबकि दोनों एस्ट्रोनॉट लगभग शाम 6:05 बजे IST पर ISS से बाहर निकलकर स्पेसवॉक शुरू करेंगे। 18 अगस्त की यह गतिविधि ISS के इतिहास में 282वीं स्पेसवॉक होगी। यह मिशन अंतरिक्ष स्टेशन के संचार सिस्टम को बनाए रखने और भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी काम का हिस्सा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
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इमरान खान की सेहत पर पूर्व राष्ट्रपति अल्वी चिंतित, मेडिकल रिपोर्ट को बताया गंभीर; स्वतंत्र डॉक्टरों से जांच की मांग

इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान के जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने मंगलवार को दावा किया कि इमरान खान की मेडिकल रिपोर्ट चिंताजनक है। उन्होंने खान की बेचैनी, तनाव, दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को लेकर चिंता जताते हुए स्वतंत्र चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज कराने की मांग की है।   मेडिकल रिपोर्ट को बताया चिंताजनक   आरिफ अल्वी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई विशेषज्ञों के साथ खान की मेडिकल रिपोर्ट देखी है।   अल्वी के मुताबिक, रिपोर्ट में बेचैनी और तनाव का बढ़ा हुआ स्तर, दिल की धड़कन से जुड़ी शिकायत और हाई ब्लड प्रेशर जैसे मुद्दे चिंता का कारण हैं। उन्होंने कहा कि खान लंबे समय से जेल में हैं और अकेले रहने का उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।   हार्ट रेट को लेकर भी चिंता   पूर्व राष्ट्रपति ने इमरान खान की हार्ट रेट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि खान की हार्ट रेट 54 बीट प्रति मिनट बताई गई है। अल्वी का कहना है कि यह संख्या सामान्य मानी जा सकती है, लेकिन खान के सामान्य स्तर की तुलना में इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।   उन्होंने खान को 24 घंटे होल्टर मॉनिटर लगाने और ब्लड प्रेशर की नियमित निगरानी की जरूरत बताई। इसके अलावा उन्होंने डॉक्टरों से जरूरत के अनुसार कई कार्डियक टेस्ट कराने की सलाह दी।   कई मेडिकल टेस्ट कराने की मांग   आरिफ अल्वी ने इमरान खान के स्वास्थ्य की विस्तृत जांच के लिए कई टेस्ट सुझाए हैं। इनमें स्ट्रेस टेस्ट, इकोकार्डियोग्राम, कार्डियक एमआरआई, कार्डियक आर्टरी कैल्शियम स्कैन और कार्डियक CT एंजियोग्राम शामिल हैं।   उन्होंने कहा कि खान की स्थिति का स्वतंत्र डॉक्टरों के पैनल से मूल्यांकन कराया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए।   परिवार और वकीलों की पहुंच को लेकर भी सवाल   इमरान खान के परिवार की ओर से भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति और उनसे मुलाकात की अनुमति को लेकर चिंता जताई गई है। उनके बेटों सुलेमान खान और कासिम खान ने दावा किया है कि परिवार, डॉक्टरों और वकीलों को लंबे समय से उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई है। परिवार का कहना है कि उन्हें इमरान खान की ताजा स्वास्थ्य स्थिति की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है।   2023 से जेल में हैं इमरान खान   इमरान खान 2023 से जेल में हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई है। खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) लगातार आरोप लगाती रही है कि उनके खिलाफ मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और उनका उद्देश्य उनकी राजनीतिक वापसी को रोकना है। इमरान खान के समर्थक उनकी और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। फिलहाल इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के बयान के बाद राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पाकिस्तानी प्रशासन उनकी स्वास्थ्य जांच और इलाज को लेकर क्या कदम उठाता है।

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डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच संभावित बातचीत
किम जोंग उन पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- ‘हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध, उन्होंने मेरे प्रस्ताव का सकारात्मक जवाब दिया’

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि किम जोंग उन ने उनके हालिया संपर्क के प्रयासों का सकारात्मक जवाब दिया है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किम की ओर से क्या संदेश आया है या दोनों देशों के बीच बातचीत किस स्तर पर पहुंची है।   ट्रंप ने किम के साथ रिश्तों को बताया ‘बहुत अच्छा’   ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि किम जोंग उन ने उनके बातचीत के प्रस्ताव का जवाब क्यों नहीं दिया। ट्रंप ने जवाब दिया कि किम ने जवाब दिया है। जब उनसे बातचीत की स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामला “बहुत सकारात्मक” है। ट्रंप ने किम के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि किम ने उनके साथ हमेशा सम्मानजनक व्यवहार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह किम को समझते हैं और किम भी उन्हें समझते हैं।   दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास घटाने का ऐलान   ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती का आदेश दिया है। ट्रंप ने इन अभ्यासों को महंगा और उत्तर कोरिया के लिए अनावश्यक रूप से उकसाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान ‘गैर-खतरनाक और सम्मानजनक’ रहा है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि सैन्य अभ्यासों में कमी का फैसला उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने और कूटनीतिक बातचीत के लिए माहौल बनाने में मदद कर सकता है।   क्या फिर होगी ट्रंप-किम मुलाकात?   ट्रंप और किम जोंग उन की पहली मुलाकात 2018 में सिंगापुर में हुई थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच 2019 में भी मुलाकात हुई थी। ट्रंप अब अपने दूसरे कार्यकाल में एक बार फिर किम के साथ सीधे संवाद शुरू करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, उत्तर कोरिया की ओर से ट्रंप के ताजा प्रस्ताव पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने भी मंगलवार को ट्रंप के संपर्क प्रयास का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।   अमेरिका-दक्षिण कोरिया रिश्तों पर भी असर   ट्रंप के फैसले से दक्षिण कोरिया के साथ अमेरिका के सुरक्षा संबंधों को लेकर भी बहस तेज हो गई है। दक्षिण कोरिया ने उम्मीद जताई है कि ट्रंप और किम के बीच व्यक्तिगत संबंध भविष्य में अमेरिका-उत्तर कोरिया वार्ता दोबारा शुरू कराने में मदद कर सकते हैं। वहीं अमेरिकी सांसदों और कुछ विशेषज्ञों ने सैन्य अभ्यास घटाने के फैसले पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
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