वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण पहला कदम बताया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने ‘ट्रुथ सोशल’ अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह इस बात से बहुत खुश हैं कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने आखिरकार रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
उन्होंने कहा कि यह समझौता दिखाता है कि मध्य पूर्व किस तरह एकजुट हो रहा है और क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा के लिए अधिक प्रभावी तरीके से कदम उठा रहे हैं। ट्रंप ने इसे “बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण पहला कदम” बताया।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को सऊदी अरब के मक्का में सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे।
समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके अलावा सैन्य समन्वय बढ़ाने, संयुक्त सामरिक अभ्यास करने और रक्षा तकनीक तथा सैन्य औद्योगिक क्षमताओं में सहयोग का प्रावधान किया गया है।
यह रक्षा समझौता ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हुई हैं। हालांकि, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य किसी सैन्य या सांप्रदायिक गुट का गठन करना नहीं है।
समझौते के तहत तीनों देशों ने ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने तथा कूटनीतिक समाधान की कोशिशों में मदद करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस सुरक्षा व्यवस्था के विस्तार की संभावना के भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिस्र का इस व्यवस्था में शामिल होना संभव है और भविष्य में अन्य देश भी इसका हिस्सा बन सकते हैं।
एर्दोगन के मुताबिक, समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है और यह क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
फ्लोरेस: इंडोनेशिया के भूकंप प्रभावित फ्लोरेस क्षेत्र में सोमवार को एक बार फिर धरती कांप उठी। रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह झटका ऐसे समय आया है जब इलाका अभी 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप से उबर भी नहीं पाया है। उस भूकंप में अब तक 53 लोगों की मौत की खबर है। लगातार आ रहे झटकों ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई इलाकों में लोग घरों के भीतर जाने से डर रहे हैं और खुले स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। करीब 10 किलोमीटर की गहराई में आया भूकंप जर्मनी के भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र यानी GFZ के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को आया 5.9 तीव्रता का भूकंप जमीन के करीब 10 किलोमीटर नीचे था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मुख्य झटके के बाद भी क्षेत्र में कई छोटे भूकंपीय झटके महसूस किए गए। कम गहराई पर आने वाले भूकंप कई बार सतह पर अधिक तेज महसूस हो सकते हैं। ऐसे में पहले से प्रभावित इलाकों में क्षतिग्रस्त इमारतों और कमजोर ढांचों को लेकर खतरा और बढ़ जाता है। 15 अगस्त के 7.7 तीव्रता के भूकंप ने मचाई थी तबाही फ्लोरेस क्षेत्र में 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। रविवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 53 हो गई थी। भूकंप का केंद्र पूर्वी नूसा तेंगारा प्रांत में एंडे से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बताया गया था और इसकी गहराई भी लगभग 10 किलोमीटर थी। मुख्य भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा रहे हैं। इनमें 6 से अधिक तीव्रता वाले झटके भी शामिल बताए गए हैं। इससे पहले से प्रभावित लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। राहत और बचाव अभियान के सामने नई चुनौती भूकंप से प्रभावित कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इसके कारण राहत एवं बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। रेस्क्यू टीमें क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण कर रही हैं और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास जारी है। सबसे बड़ी चुनौती उन इमारतों को लेकर है जो पहले ही 7.7 तीव्रता के भूकंप से कमजोर हो चुकी हैं। नए झटकों के कारण इनके और क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। लगातार झटकों ने बढ़ाई लोगों की चिंता फ्लोरेस में लगातार महसूस हो रहे भूकंप के झटकों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राहत कार्यों के बीच आफ्टरशॉक्स ने प्रशासन और बचाव दलों के सामने भी अतिरिक्त चुनौती खड़ी कर दी है।
जकार्ता, एजेंसियां। इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। भूकंप का केंद्र फ्लोरेस द्वीप के पास पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में बताया गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में कम से कम 51 लोगों की मौत और 110 से अधिक लोग घायल हुए हैं। करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कई इलाकों में भारी तबाही भूकंप के कारण बड़ी संख्या में मकान और सार्वजनिक इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गईं, जिससे राहत और बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। 1,300 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। सुनामी की चेतावनी के बाद बढ़ी दहशत भूकंप के बाद प्रशासन ने कुछ इलाकों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की थी, जिसे बाद में हटा लिया गया। इसके बावजूद समुद्र में छोटी सुनामी लहरें दर्ज की गईं। मुख्य भूकंप के बाद 300 से अधिक आफ्टरशॉक भी दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में दहशत बनी हुई है। हजारों लोगों ने छोड़े घर लगातार झटकों और इमारतों के क्षतिग्रस्त होने के कारण हजारों लोग अपने घरों से निकलकर अस्थायी शिविरों में पहुंच गए हैं। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत अभियान में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण यहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं।
बीजिंग, एजेंसियां। चीन के घरेलू स्तर पर विकसित COMAC C919 यात्री विमान ने गुरुवार को अपनी दूसरी अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उड़ान पूरी कर ली। एयर चाइना का C919 बीजिंग से मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुंचा। इससे एक दिन पहले 12 अगस्त को इसी विमान ने पहली नियमित अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उड़ान पूरी की थी। बीजिंग से उलानबटार पहुंचा C919 एयर चाइना की उड़ान CA723 ने गुरुवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:36 बजे बीजिंग से उड़ान भरी और लगभग 1 घंटे 41 मिनट बाद उलानबटार में उतरी। फ्लाइट-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार विमान शाम करीब 5:17 बजे मंगोलिया पहुंचा। C919 की पहली अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उड़ान भी इसी बीजिंग-उलानबटार मार्ग पर 12 अगस्त को हुई थी। एयर चाइना इस रूट पर C919 को नियमित रूप से संचालित करने की योजना बना रही है। बोइंग और एयरबस को चुनौती देने की कोशिश C919 को चीन की सरकारी विमान निर्माता कंपनी COMAC ने विकसित किया है। यह एक नैरो-बॉडी यात्री विमान है, जिसकी क्षमता करीब 174 यात्रियों तक है। इसका आकार और श्रेणी बोइंग 737 और एयरबस A320 जैसे विमानों के समान है। चीन लंबे समय से अपने घरेलू यात्री विमान उद्योग को मजबूत करने और वैश्विक विमानन बाजार में बोइंग तथा एयरबस पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय नियमित उड़ान शुरू होना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश का पहला बड़ा कदम C919 वर्ष 2023 से चीन में घरेलू व्यावसायिक उड़ानें संचालित कर रहा है, लेकिन 12 अगस्त 2026 की उड़ान पहली नियमित अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक सेवा थी। इसके बाद दूसरी अंतरराष्ट्रीय उड़ान पूरी होना विमान के विदेशी परिचालन की दिशा में शुरुआती निरंतरता को दर्शाता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बोइंग और एयरबस को चुनौती देने के लिए COMAC को अभी कई बाधाओं का सामना करना है। C919 को अभी अमेरिका और यूरोप के विमानन नियामकों से व्यापक प्रमाणन नहीं मिला है, जिससे पश्चिमी बाजारों में इसकी पहुंच सीमित बनी हुई है। चीन के एविएशन उद्योग के लिए अहम उपलब्धि C919 की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को चीन के लिए केवल एक नई रूट सेवा के तौर पर नहीं, बल्कि घरेलू विमान निर्माण उद्योग की वैश्विक पहचान बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। एयर चाइना, चाइना ईस्टर्न और चाइना सदर्न के C919 विमानों ने अब तक दर्जनों घरेलू मार्गों पर परिचालन किया है और लाखों यात्रियों को सेवाएं दी हैं।