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Nims Purja Found Dead on Broad Peak

ब्रॉड पीक हिमस्खलन: 3 दिन बाद मिला निर्मल 'निम्स' पुर्जा का शव, 10 सदस्यीय दल के सभी पर्वतारोहियों की मौत

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Rescue team recovering the body of mountaineer Nirmal 'Nims' Purja after the Broad Peak avalanche.
Nirmal 'Nims' Purja Dies in Broad Peak Avalanche

Broad Peak Avalanche: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन में प्रसिद्ध नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल 'निम्स' पुर्जा का शव हादसे के तीन दिन बाद बरामद कर लिया गया है। इस दुर्घटना में उनके नेतृत्व वाले 10 सदस्यीय पर्वतारोहण दल के सभी सदस्यों की मौत हो गई। खराब मौसम और लगातार हिमस्खलन के खतरे के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला शव

अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) के अनुसार, 43 वर्षीय निर्मल पुर्जा का शव करीब 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला। बचाव दल को उसी क्षेत्र से तीन अन्य शव भी बरामद हुए हैं। अब तक कुल पांच शव निकाले जा चुके हैं, जबकि शेष पर्वतारोहियों के शवों की तलाश जारी है।

खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती

रेस्क्यू टीम शवों को जापानी कैंप तक लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन खराब मौसम, लगातार हिमस्खलन की आशंका और खड़ी बर्फीली ढलानों के कारण अभियान धीमा पड़ गया है। प्रतिकूल मौसम के चलते हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल भी संभव नहीं हो पाया है।

10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय दल हादसे का शिकार

निर्मल पुर्जा के नेतृत्व वाले अभियान में कुल 10 पर्वतारोही शामिल थे। दल में नेपाल के पांच, पाकिस्तान का एक, ओमान का एक, अमेरिका का एक और चीन का एक पर्वतारोही शामिल था।

शनिवार को पुर्जा की कंपनी Elite Exped ने पुष्टि की थी कि हिमस्खलन में अभियान के सभी 10 सदस्यों की मौत हो गई।

पहले चार शवों की हो चुकी थी पहचान

शुक्रवार को बचाव दल ने चार शव बरामद किए थे। इनमें ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल-हार्थी, नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग और अमेरिका की मैलोरी गीस की पहचान की गई थी। इन शवों को स्कार्दू पहुंचाया गया था। अब निर्मल पुर्जा का शव मिलने के बाद मृतकों की पहचान का दायरा और स्पष्ट हो गया है।

कौन थे निर्मल 'निम्स' पुर्जा?

निर्मल पुर्जा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वतारोहियों में गिने जाते थे। उन्होंने 2019 में महज 6 महीने और 6 दिन के भीतर दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनकी इस उपलब्धि ने पर्वतारोहण की दुनिया में नया इतिहास रचा था।

ब्रॉड पीक अभियान उनके उस मिशन का हिस्सा था, जिसके तहत वे 8,000 मीटर से अधिक ऊंची सभी 14 चोटियों पर दूसरी बार सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी करना चाहते थे। हालांकि, यह मिशन भीषण हिमस्खलन की वजह से अधूरा रह गया।

पर्वतारोहण जगत में शोक

निर्मल पुर्जा की मौत से अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय में शोक की लहर है। उन्हें साहस, नेतृत्व और कठिन अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता के लिए जाना जाता था। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रॉड पीक पर हुआ यह हादसा हाल के वर्षों की सबसे दुखद पर्वतारोहण त्रासदियों में से एक है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ग्रीस के एथेंस के पास जंगल की आग बुझाने के दौरान हेलीकॉप्टर हादसा
एथेंस के पास जंगल की आग बुझाते समय दो हेलीकॉप्टर टकराए, दो की मौत

एथेंस। यूरोप में जारी भीषण जंगल की आग के बीच ग्रीस की राजधानी एथेंस के पास रविवार को बड़ा हादसा हो गया। पश्चिमी अटिका क्षेत्र में आग बुझाने के अभियान के दौरान दो फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर हवा में ही आपस में टकरा गए। टक्कर के बाद एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार दो कर्मियों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया। ग्रीस के राष्ट्रीय प्रसारक ईआरटी के अनुसार, हादसा पसाथा तटीय क्षेत्र के पास हुआ, जहां दोनों बेल हेलीकॉप्टर जंगल की आग बुझाने के मिशन पर तैनात थे। मृतकों में एक ग्रीस और एक डेनमार्क का नागरिक शामिल है, जबकि बचाए गए कर्मियों में एक ग्रीस और एक ब्रिटेन का नागरिक है।   तेज हवाओं ने बढ़ाई चुनौती     अधिकारियों के मुताबिक, तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही थी, जिससे राहत और बचाव अभियान प्रभावित हुआ। कई बार हेलीकॉप्टर समुद्र से पानी भरने तक नहीं पहुंच सके। आग पश्चिमी अटिका के जंगलों से होते हुए मेगारा शहर के औद्योगिक क्षेत्र तक फैल गई, जिसके बाद कई गांवों को खाली कराने के आदेश जारी किए गए। प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता पोर्टो जर्मेनो तटीय इलाके को लेकर बनी हुई है।     हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया     आग सबसे पहले शुक्रवार को एगियोस वासिलियोस इलाके में लगी थी और देखते ही देखते आसपास के पहाड़ी जंगलों तक फैल गई। शुक्रवार को 254 लोगों और शनिवार को 12 लोगों को समुद्र के रास्ते सुरक्षित निकाला गया। धुएं और आग के कारण कई सड़कें भी बंद करनी पड़ीं। इससे पहले इसी सप्ताह ग्रीस में आग बुझाने के दौरान तीन दमकलकर्मियों की भी मौत हो चुकी है।     फ्रांस और स्पेन भी आग की चपेट में     यूरोप के अन्य देशों में भी जंगल की आग का संकट बना हुआ है। फ्रांस के गिरोंद क्षेत्र में पिछले 10 दिनों में करीब 420 वर्ग किलोमीटर जंगल जल चुके हैं, जिसके चलते लगभग 2.24 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। वहीं, वार क्षेत्र में भी आग के कारण 2,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। दूसरी ओर, स्पेन में आग की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है, लेकिन दमकलकर्मी अब भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।     जलवायु परिवर्तन बना बड़ी वजह     विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान, लंबे सूखे और तेज हवाओं के कारण यूरोप में जंगल की आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने ऐसी आपदाओं की आवृत्ति और गंभीरता दोनों को बढ़ा दिया है। यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी के अनुसार, 2025 यूरोप के इतिहास में जंगल की आग के लिहाज से सबसे विनाशकारी वर्षों में से एक रहा, जिसमें 10 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र आग की चपेट में आ गया था।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
इंडोनेशिया के यात्री जहाज में लगी भीषण आग

इंडोनेशिया में यात्री जहाज में भीषण आग, 5 की मौत; 41 लोग अब भी लापता

Pakistan Information Minister Ataullah Tarar addresses media while alleging a US-backed anti-Pakistan propaganda campaign.

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पेरू में यूरोपीय पर्यटकों को ले जा रहा विमान दुर्घटनाग्रस्त, 13 लोगों की मौत; नाज्का लाइन्स की सैर पर निकला था विमान

Firefighting helicopters collide while battling a massive wildfire near Psatha, Greece.
ग्रीस में जंगल की आग बुझाने के दौरान दो हेलीकॉप्टर टकराए, 2 क्रू सुरक्षित; 2 लापता, बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Greece Fire Helicopter Crash: ग्रीस की राजधानी एथेंस के पश्चिम में स्थित पसाथा (Psatha) इलाके में जंगल की आग बुझाने के दौरान रविवार को बड़ा हादसा हो गया। आग बुझाने में लगे दो फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर हवा में आपस में टकरा गए। दुर्घटना के बाद दो क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दो अन्य अब भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। आग बुझाने के दौरान हुआ हादसा ग्रीस के फायर सर्विस विभाग के मुताबिक, दोनों हेलीकॉप्टर जंगल की भीषण आग पर काबू पाने के अभियान में लगे थे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक हेलीकॉप्टर आग की लपटों में घिर गया और उसके मलबे के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए। दोनों हेलीकॉप्टरों में कुल चार क्रू मेंबर सवार थे। राहत दलों को घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भेज दिया गया। हादसे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दो क्रू सुरक्षित, दो की तलाश जारी अधिकारियों के अनुसार, दूसरे हेलीकॉप्टर से टकराने वाले विमान में सवार दोनों क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहीं दूसरे हेलीकॉप्टर के दोनों सदस्य अभी भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए हेलीकॉप्टरों, नौकाओं और विशेष बचाव दलों की मदद से सर्च ऑपरेशन जारी है। तेज हवाओं ने बढ़ाई चुनौती ग्रीस इस समय कई इलाकों में भीषण जंगल की आग से जूझ रहा है। तेज हवाओं और भीषण गर्मी के कारण आग तेजी से फैल रही है। प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने कहा कि देश के लिए आने वाले दिन बेहद कठिन रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही है, जिससे आग पर काबू पाना और हवाई अभियान चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब हवाएं इतनी तेज होती हैं तो उपलब्ध विमान और हेलीकॉप्टर भी सुरक्षित तरीके से उड़ान नहीं भर सकते। उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियों में प्रकृति की ताकत इंसानी तैयारियों पर भारी पड़ जाती है। सैकड़ों दमकलकर्मी मोर्चे पर फायर विभाग के अनुसार, एथेंस से करीब 70 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम स्थित पोर्टो जर्मेनो क्षेत्र में लगी आग पर काबू पाने के लिए लगभग 500 दमकलकर्मी, कई हेलीकॉप्टर, विमान और भारी मशीनरी तैनात की गई है। इसके अलावा उत्तरी पेलोपोनीज के ऐजियालिया क्षेत्र में लगी दूसरी बड़ी आग को बुझाने के लिए भी करीब 100 दमकलकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। 6,500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जलकर खाक प्रारंभिक आकलन के अनुसार, कोरिंथ की खाड़ी और पोर्टो जर्मेनो के आसपास लगी आग में अब तक 6,500 हेक्टेयर (करीब 16,000 एकड़) से अधिक जंगल और कृषि भूमि जल चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि आग की चपेट में आकर 100 से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस और रोमानिया ने भी अपने अग्निशमन दल और संसाधन ग्रीस भेजे हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि हालांकि हवाओं की रफ्तार पहले की तुलना में कुछ कम हुई है, लेकिन सूखी वनस्पति और ऊंचे तापमान के कारण आग फैलने का खतरा अभी भी बना हुआ है।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
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Rescue team recovering the body of mountaineer Nirmal 'Nims' Purja after the Broad Peak avalanche.
ब्रॉड पीक हिमस्खलन: 3 दिन बाद मिला निर्मल 'निम्स' पुर्जा का शव, 10 सदस्यीय दल के सभी पर्वतारोहियों की मौत

Broad Peak Avalanche: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन में प्रसिद्ध नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल 'निम्स' पुर्जा का शव हादसे के तीन दिन बाद बरामद कर लिया गया है। इस दुर्घटना में उनके नेतृत्व वाले 10 सदस्यीय पर्वतारोहण दल के सभी सदस्यों की मौत हो गई। खराब मौसम और लगातार हिमस्खलन के खतरे के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला शव अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) के अनुसार, 43 वर्षीय निर्मल पुर्जा का शव करीब 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला। बचाव दल को उसी क्षेत्र से तीन अन्य शव भी बरामद हुए हैं। अब तक कुल पांच शव निकाले जा चुके हैं, जबकि शेष पर्वतारोहियों के शवों की तलाश जारी है। खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती रेस्क्यू टीम शवों को जापानी कैंप तक लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन खराब मौसम, लगातार हिमस्खलन की आशंका और खड़ी बर्फीली ढलानों के कारण अभियान धीमा पड़ गया है। प्रतिकूल मौसम के चलते हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल भी संभव नहीं हो पाया है। 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय दल हादसे का शिकार निर्मल पुर्जा के नेतृत्व वाले अभियान में कुल 10 पर्वतारोही शामिल थे। दल में नेपाल के पांच, पाकिस्तान का एक, ओमान का एक, अमेरिका का एक और चीन का एक पर्वतारोही शामिल था। शनिवार को पुर्जा की कंपनी Elite Exped ने पुष्टि की थी कि हिमस्खलन में अभियान के सभी 10 सदस्यों की मौत हो गई। पहले चार शवों की हो चुकी थी पहचान शुक्रवार को बचाव दल ने चार शव बरामद किए थे। इनमें ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल-हार्थी, नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग और अमेरिका की मैलोरी गीस की पहचान की गई थी। इन शवों को स्कार्दू पहुंचाया गया था। अब निर्मल पुर्जा का शव मिलने के बाद मृतकों की पहचान का दायरा और स्पष्ट हो गया है। कौन थे निर्मल 'निम्स' पुर्जा? निर्मल पुर्जा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वतारोहियों में गिने जाते थे। उन्होंने 2019 में महज 6 महीने और 6 दिन के भीतर दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनकी इस उपलब्धि ने पर्वतारोहण की दुनिया में नया इतिहास रचा था। ब्रॉड पीक अभियान उनके उस मिशन का हिस्सा था, जिसके तहत वे 8,000 मीटर से अधिक ऊंची सभी 14 चोटियों पर दूसरी बार सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी करना चाहते थे। हालांकि, यह मिशन भीषण हिमस्खलन की वजह से अधूरा रह गया। पर्वतारोहण जगत में शोक निर्मल पुर्जा की मौत से अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय में शोक की लहर है। उन्हें साहस, नेतृत्व और कठिन अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता के लिए जाना जाता था। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रॉड पीक पर हुआ यह हादसा हाल के वर्षों की सबसे दुखद पर्वतारोहण त्रासदियों में से एक है।  

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