बोर्डो (फ्रांस)। दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के गिरोंद (Gironde) क्षेत्र में लगी भीषण जंगल की आग के बीच मानवता की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। आग, घने धुएं और लगातार बढ़ते खतरे के बावजूद स्वयंसेवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर 100 से अधिक कुत्तों, बिल्लियों, घोड़ों और अन्य पालतू जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाला। बचाव अभियान अभी भी जारी है।
भीषण आग के कारण प्रशासन को हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। अचानक हुए पलायन के दौरान कई परिवार अपने पालतू जानवरों को साथ नहीं ले जा सके, जिससे वे आग प्रभावित क्षेत्रों में फंस गए।
स्वयंसेवकों ने विशेष वाहनों में पानी, पशु आहार और जरूरी सामान लेकर आग प्रभावित इलाकों में प्रवेश किया। पुलिस की अनुमति से वे उन क्षेत्रों तक पहुंचे, जहां आग गुजर चुकी थी या तेजी से फैल रही थी, और वहां फंसे जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
बचाव अभियान में शामिल लोगों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना बेजुबान जानवरों की जान बचाने का प्रयास किया। इस मानवीय पहल की व्यापक सराहना हो रही है और इसे हाल के वर्षों में पशु बचाव के सबसे प्रेरणादायक अभियानों में से एक माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Pakistan-US Relations: पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान के खिलाफ संगठित दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसका संबंध अमेरिका से था और जिसे कथित तौर पर पाकिस्तान विरोधी डिजिटल प्रचार के लिए विदेश से भुगतान किया जा रहा था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो संदेश में तरार ने कहा कि कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया गया व्यक्ति डिजिटल मार्केटिंग सेवाएं प्रदान करता था और प्रारंभिक जांच में उसके अमेरिका से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। 'अमेरिका से हो रही थी पेमेंट' अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी को अमेरिका से भुगतान किया जा रहा था। उनके मुताबिक पूछताछ में यह भी पता चला कि वह कथित 'बॉट फार्म' के जरिए सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चला रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नेटवर्क के माध्यम से पाकिस्तान सरकार, सेना, सेना प्रमुख, सरकारी संस्थानों और विभिन्न सरकारी विभागों के खिलाफ भ्रामक और नकारात्मक सामग्री सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही थी। सरकार और सेना को निशाना बनाने का आरोप पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि कथित अभियान का उद्देश्य केवल सरकार की आलोचना करना नहीं था, बल्कि देश की संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर करना भी था। उन्होंने दावा किया कि इस सामग्री को अमेरिका से संचालित नेटवर्क के जरिए बड़े स्तर पर वायरल किया जा रहा था। हालांकि, तरार ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज, जांच रिपोर्ट या अन्य ठोस सबूत पेश नहीं किए। वहीं अमेरिका की ओर से भी इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों के बीच नया विवाद यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के वर्षों में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार की चर्चा रही है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक सहयोग को लेकर कई स्तरों पर बातचीत होती रही है। ऐसे माहौल में पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा अमेरिका पर पाकिस्तान विरोधी प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाना दोनों देशों के रिश्तों में नई बहस को जन्म दे सकता है। फिलहाल यह मामला पाकिस्तान के दावों तक सीमित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
Hormuz Strait: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में समुद्री यातायात को लेकर चल रही बातचीत अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि दोनों देशों के बीच वार्ता अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, रविवार (2 अगस्त) को कैबिनेट बैठक के बाद अराघची ने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और समझौते की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। जलडमरूमध्य बंद करने पर नहीं, नए मार्ग पर हो रही चर्चा ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी प्रसारक IRIB से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह वार्ता होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद या दोबारा खोलने से जुड़ी नहीं है। उन्होंने बताया कि ईरान और ओमान 'ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (Traffic Separation Scheme)' के तहत जहाजों की आवाजाही के लिए नए समुद्री मार्ग तय करने पर काम कर रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य समुद्री यातायात को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है, साथ ही दोनों देशों के संप्रभु अधिकारों और ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा का भी संरक्षण सुनिश्चित करना है। सुरक्षा को लेकर ईरान का सख्त रुख इस बीच ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद एब्न अल-रेजा ने कहा कि तेहरान किसी भी बाहरी खतरे को हल्के में नहीं लेता। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हम न तो हैरान होंगे और न ही चुपचाप बैठे रहेंगे। हर धमकी को हम अपनी सैन्य तैयारी और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखते हैं।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि फिलहाल ईरान पर नए सैन्य हमले की योजना नहीं है और बातचीत को प्राथमिकता दी जाएगी। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ा रणनीतिक महत्व विशेषज्ञों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अपनी रणनीतिक मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। पिछले महीनों में अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर कई सैन्य कार्रवाई की थी। अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि इन हमलों का उद्देश्य व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था। जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में ईरान और ओमान के बीच समुद्री यातायात को लेकर होने वाला संभावित समझौता न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Pakistan Swat Suicide Attack: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में रविवार को एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ। काबल पुलिस स्टेशन के बाहर आतंकवाद विरोधी जनसभा के दौरान एक फिदायीन हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया। इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में पुलिसकर्मी और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस स्टेशन के बाहर खुद को उड़ाया पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब काबल पुलिस स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग आतंकवाद के खिलाफ आयोजित रैली में शामिल थे। स्वात के जिला पुलिस अधिकारी (DPO) उमर खान ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने एक संदिग्ध व्यक्ति को पुलिस स्टेशन के प्रवेश द्वार पर रोककर उसकी तलाशी लेने की कोशिश की। इसी दौरान उसने अपने शरीर पर बंधे विस्फोटकों में धमाका कर दिया। आतंकवाद विरोधी रैली के दौरान मचा हड़कंप रविवार को स्वात घाटी में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के विरोध में सैकड़ों लोग काबल चौक पर एकत्र हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रैली का अंतिम वक्ता मंच से संबोधित कर रहा था, तभी जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। 14 मौतों की पुष्टि, दो घायलों की हालत गंभीर स्वात पुलिस के प्रवक्ता नासिर इकबाल करीमी ने 14 लोगों की मौत की पुष्टि की है। रेस्क्यू 1122 के अनुसार, नौ शवों को सैदु शरीफ केंद्रीय अस्पताल और पांच शवों को काबल अस्पताल भेजा गया है। घायलों में दो की हालत गंभीर बनी हुई है। फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस और फोरेंसिक टीम घटनास्थल से सबूत जुटाने में लगी हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर उठाए सवाल रैली में शामिल लोगों ने स्वात में लगातार बढ़ रही उग्रवादी गतिविधियों को लेकर सरकार की आलोचना की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सुरक्षा एजेंसियां आम नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, जबकि आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है। राष्ट्रपति जरदारी ने की निंदा पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "आतंकवादी शांति, राष्ट्रीय एकता और राज्य व्यवस्था को कमजोर करने के अपने नापाक मंसूबों में कभी सफल नहीं होंगे।" खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भी घटना की निंदा करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। पाकिस्तान में बढ़ रही आतंकी घटनाएं यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में हांगू जिले में एक पुलिस चौकी पर हुए हमले में नौ पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी, जबकि पेशावर-इस्लामाबाद मोटरवे पर हुए IED विस्फोट में दो पुलिसकर्मी घायल हुए थे। Pakistan Institute for Conflict and Security Studies (PICSS) के अनुसार, जुलाई महीने में केवल खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में 154 लोगों की मौत हुई, जबकि जून में यह संख्या 75 थी। यानी एक महीने में आतंकी हिंसा से होने वाली मौतों में करीब 105 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।