दुनिया

फ्रांस में बचाए गए 100 से अधिक जानवर।

लपटों के बीच जिंदगी की जंग, फ्रांस में जान जोखिम में डालकर बचाए गए 100 से ज्यादा जानवर

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
फ्रांस गिरोंद जंगल की आग पशु बचाव
फ्रांस वाइल्डफायर एनिमल रेस्क्यू

बोर्डो (फ्रांस)। दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के गिरोंद (Gironde) क्षेत्र में लगी भीषण जंगल की आग के बीच मानवता की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। आग, घने धुएं और लगातार बढ़ते खतरे के बावजूद स्वयंसेवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर 100 से अधिक कुत्तों, बिल्लियों, घोड़ों और अन्य पालतू जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाला। बचाव अभियान अभी भी जारी है।

 

हजारों लोगों को खाली कराने के बीच पीछे छूट गए पालतू जानवर

 

 

भीषण आग के कारण प्रशासन को हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। अचानक हुए पलायन के दौरान कई परिवार अपने पालतू जानवरों को साथ नहीं ले जा सके, जिससे वे आग प्रभावित क्षेत्रों में फंस गए।

 

 

स्वयंसेवकों ने दिखाई बहादुरी

 

 

स्वयंसेवकों ने विशेष वाहनों में पानी, पशु आहार और जरूरी सामान लेकर आग प्रभावित इलाकों में प्रवेश किया। पुलिस की अनुमति से वे उन क्षेत्रों तक पहुंचे, जहां आग गुजर चुकी थी या तेजी से फैल रही थी, और वहां फंसे जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाला।

 

 

मानवता की बनी मिसाल

 

 

बचाव अभियान में शामिल लोगों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना बेजुबान जानवरों की जान बचाने का प्रयास किया। इस मानवीय पहल की व्यापक सराहना हो रही है और इसे हाल के वर्षों में पशु बचाव के सबसे प्रेरणादायक अभियानों में से एक माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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US-ईरान तनाव: डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य कार्रवाई टालने के दावे पर ईरानी मीडिया का तंज, जुबानी जंग तेज

तेहरान, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से टालने के दावे के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय देशों के अनुरोध और संभावित समझौते के चलते हमले टाले गए हैं, लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।   ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने की दिशा में प्रगति हुई है।     हालांकि, ईरान के सरकारी और अर्द्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावे को झूठा बताते हुए उनका मजाक उड़ाया। फार्स न्यूज एजेंसी ने टिप्पणी की कि "ट्रंप की ताकत खत्म हो गई है," जबकि मेहर न्यूज एजेंसी ने कहा कि अमेरिका अपनी धमकियों से पीछे हट रहा है और इसे उपलब्धि की तरह पेश कर रहा है।     ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के सीमित भंडार के कारण वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई से बच रहा है। दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।     गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।     US-ईरान तनाव: ट्रंप के दावे पर ईरानी मीडिया का तंज, जुबानी जंग हुई तेज     तेहरान, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से टालने के दावे के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय देशों के अनुरोध और संभावित समझौते के चलते हमले टाले गए हैं, लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।     ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने की दिशा में प्रगति हुई है।     हालांकि, ईरान के सरकारी और अर्द्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावे को झूठा बताते हुए उनका मजाक उड़ाया। फार्स न्यूज एजेंसी ने टिप्पणी की कि "ट्रंप की ताकत खत्म हो गई है," जबकि मेहर न्यूज एजेंसी ने कहा कि अमेरिका अपनी धमकियों से पीछे हट रहा है और इसे उपलब्धि की तरह पेश कर रहा है।     ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के सीमित भंडार के कारण वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई से बच रहा है। दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।     गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।  

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उफा, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस के अंदर तक बड़ा ड्रोन हमला किया है। यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के अनुसार, उसके लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य के उफा में स्थित तीन प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया। ये हमले यूक्रेन से करीब 1,600 किलोमीटर दूर किए गए।   उफा की तीन रिफाइनरियां बनीं निशाना   यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले में Bashneft-UNPZ, Bashneft-Novoil और Bashneft-Ufaneftekhim रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। ये तीनों रिफाइनरियां उफा के बड़े तेल-प्रसंस्करण परिसर का हिस्सा हैं। यूक्रेन की ओर से दावा किया गया है कि हमले का उद्देश्य रूस की तेल प्रसंस्करण और ईंधन आपूर्ति क्षमता को प्रभावित करना था।   रिफाइनरी में आग लगने की खबर   हमले के बाद उफा में तेल रिफाइनरी क्षेत्र से धुआं उठने और आग लगने की खबरें सामने आईं। स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो और रिपोर्टों में भी औद्योगिक क्षेत्र से धुएं का गुबार दिखाई देने की बात कही गई है। हमले से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।   रूस के अंदर तक पहुंचा यूक्रेन का ड्रोन हमला   इस हमले की खास बात इसकी दूरी है। उफा यूक्रेन से करीब 1,600 किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूर स्थित ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से यूक्रेन की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता एक बार फिर चर्चा में आ गई है।   तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर   रूस की तेल रिफाइनरियां देश की ईंधन आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले होने से तेल प्रसंस्करण, ईंधन उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, तीनों रिफाइनरियों को हुए वास्तविक नुकसान और उनके संचालन पर पड़े असर की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मामले में आगे की जानकारी का इंतजार है।

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SCO Summit 2027: साल 2027 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच पाकिस्तान ने संकेत दिए हैं कि वह सम्मेलन के लिए भारत समेत सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजेगा। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि मेजबान देश होने के नाते पाकिस्तान का दायित्व है कि वह SCO के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन के लिए आमंत्रित करे। उन्होंने कहा कि यह संगठन की निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का हिस्सा है, इसलिए भारत भी आमंत्रित देशों में शामिल होगा। जयशंकर-पाक विदेश मंत्री की मुलाकात पर क्या बोले? मनीला में आसियान (ASEAN) बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच संभावित मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत की ओर से ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं मिली है। पाकिस्तान करेगा मेजबानी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 2027 शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। यह संगठन सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष शीर्ष स्तर की बैठक आयोजित करता है। SCO में कौन-कौन से देश हैं शामिल? SCO के प्रमुख सदस्य देशों में शामिल हैं— भारत पाकिस्तान चीन रूस कजाकिस्तान किर्गिस्तान ताजिकिस्तान उज्बेकिस्तान ईरान बेलारूस 2001 में हुई थी संगठन की स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 15 जून 2001 को चीन की राजधानी बीजिंग में हुई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक सहयोग और आपसी विकास को बढ़ावा देना है। SCO की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (CHS) है, जिसकी अध्यक्षता हर वर्ष सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है। जिस देश के पास अध्यक्षता होती है, वही उस वर्ष शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करता है। अभी भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं हालांकि पाकिस्तान ने भारत को आमंत्रित करने के संकेत दिए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मेलन में शामिल होने या भारतीय प्रतिनिधिमंडल के स्तर को लेकर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में पीएम मोदी की संभावित पाकिस्तान यात्रा को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।  

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US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

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