दुनिया

Hezbollah Emerges as Israel’s Biggest Threat

1.5 लाख रॉकेट और सीमा पर मौजूदगी-हिज्बुल्लाह क्यों बना सबसे बड़ा खतरा

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Hezbollah fighters with rockets near Israel-Lebanon border highlighting rising Middle East security tensions.
Hezbollah Threat to Israel

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हिज्बुल्लाह को लेकर इज़रायल का रुख लगातार आक्रामक होता जा रहा है। इजरायल और ईरान के बीच हालिया युद्धविराम के बावजूद, लेबनान में इज़रायली हमले तेज हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हिज्बुल्लाह की बढ़ती सैन्य क्षमता और उसकी रणनीतिक स्थिति है, जो इज़रायल के लिए तत्काल और गंभीर खतरा बन चुकी है।

सबसे अहम पहलू भौगोलिक निकटता है। जहां ईरान इज़रायल से काफी दूरी पर स्थित है, वहीं हिज्बुल्लाह सीधे उत्तरी सीमा से सटा हुआ है। इसका मतलब है कि किसी भी हमले की स्थिति में इज़रायल के पास प्रतिक्रिया के लिए बेहद कम समय होता है। यही वजह है कि इज़रायल इसे “तत्काल खतरे” के रूप में देखता है।

हिज्बुल्लाह की सैन्य ताकत भी चिंता का बड़ा कारण है। अनुमान है कि उसके पास 1.2 लाख से लेकर 2 लाख तक रॉकेट और मिसाइलों का जखीरा है। इतनी बड़ी संख्या में हथियार किसी भी समय बड़े पैमाने पर हमले की क्षमता देते हैं। इसके अलावा, संगठन की रणनीति भी अलग है-यह एक साथ सैकड़ों रॉकेट और ड्रोन दागकर इज़रायल की रक्षा प्रणाली पर दबाव बनाता है।

इज़रायल का आयरन डोम सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम है, लेकिन बड़ी संख्या में छोटे रॉकेट और ड्रोन हमलों से यह सिस्टम भी चुनौती में आ जाता है। यही कारण है कि हिज्बुल्लाह की “सैचुरेशन अटैक” रणनीति इज़रायल के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गई है।

इसके अलावा, हिज्बुल्लाह की “रदवान फोर्स” जैसी विशेष यूनिट इज़रायल के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा करती है। यह यूनिट सीमा पार घुसपैठ और बंधक बनाने जैसे ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बल उत्तरी इज़रायल में घुसपैठ की क्षमता भी दिखा चुका है।

हिज्बुल्लाह की एक और ताकत उसकी सटीक निर्देशित मिसाइलें हैं, जो बिजली संयंत्र, सैन्य ठिकानों और अन्य अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकती हैं। इससे इज़रायल के रणनीतिक ढांचे को सीधा खतरा पैदा होता है।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हिज्बुल्लाह को ईरान की “पहली रक्षा पंक्ति” माना जाता है। यदि भविष्य में इज़रायल ईरान पर सीधा हमला करता है, तो हिज्बुल्लाह जवाबी कार्रवाई के लिए तुरंत सक्रिय हो सकता है। इससे इज़रायल को एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध का खतरा झेलना पड़ सकता है।

इन सभी कारणों से स्पष्ट है कि इज़रायल के लिए हिज्बुल्लाह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक बहु-आयामी सुरक्षा चुनौती बन चुका है जो उसे ईरान से भी अधिक खतरनाक नजर आता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नेपाल ने भारतीय ₹200 और ₹500 के नोटों पर दी बड़ी राहत, अब ₹25,000 तक नकदी ले जाने की अनुमति

काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल सरकार ने भारतीय नागरिकों, नेपाली नागरिकों और सीमा पार यात्रा करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने भारतीय ₹200 और ₹500 के नोटों को लेकर नियमों में ढील देते हुए अब प्रति व्यक्ति ₹25,000 तक भारतीय मुद्रा नेपाल लाने और वहां से बाहर ले जाने की अनुमति दे दी है। यह सुविधा 9 नवंबर 2016 के बाद जारी किए गए ₹200 और ₹500 के नोटों पर लागू होगी।   व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा   नेपाल सरकार के इस फैसले से भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले लोगों, व्यापारियों, पर्यटकों और नेपाल में काम करने वाले भारतीयों को बड़ी सुविधा मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों से उच्च मूल्य के भारतीय नोटों पर लगी पाबंदियों के कारण सीमा पार लेनदेन और यात्रा के दौरान लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। नए नियम लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और रोजमर्रा के आर्थिक लेनदेन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।   2016 के बाद जारी नोटों पर ही लागू होगी व्यवस्था   नेपाल राष्ट्र बैंक ने स्पष्ट किया है कि केवल 9 नवंबर 2016 के बाद जारी भारतीय ₹200 और ₹500 के नोट ही इस व्यवस्था के तहत मान्य होंगे। प्रत्येक व्यक्ति अधिकतम ₹25,000 तक की भारतीय मुद्रा अपने साथ नेपाल ला या ले जा सकेगा। इससे पहले उच्च मूल्य के भारतीय नोटों को लेकर कड़े प्रतिबंध लागू थे, जिनमें अब महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।   भारत-नेपाल आर्थिक संबंधों को मिलेगी मजबूती   विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और सीमा पार आवागमन को नई गति मिलेगी। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण हर दिन बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में भारतीय मुद्रा से जुड़े नियमों में यह ढील सीमा क्षेत्रों के व्यापारियों, पर्यटकों और आम नागरिकों के लिए राहत भरा कदम मानी जा रही है।

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ईरान से खतरे के बीच NATO सम्मेलन में ट्रंप ने बदला विमान, सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट के बाद लिया गया फैसला

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी महीने तुर्किये में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन से लौटते समय अपना विमान बदल दिया था। अब सामने आई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह फैसला ईरान और उसके समर्थित प्रॉक्सी समूहों से मिले विश्वसनीय सुरक्षा खतरे के बाद लिया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को राष्ट्रपति के विमान को निशाना बनाए जाने की आशंका की जानकारी मिली थी, जिसके बाद सीक्रेट सर्विस ने तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करते हुए ट्रंप को नए विमान की जगह पुराने Air Force One से रवाना होने की सलाह दी।   मिसाइल हमले की आशंका के बाद बदली गई रणनीति   रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप तुर्किये के अंकारा में NATO सम्मेलन में कतर की ओर से उपहार में मिले नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे। हालांकि वापसी से पहले अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली कि ईरान समर्थित समूह राष्ट्रपति के विमान पर मिसाइल हमला करने की योजना बना सकते हैं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जोखिम को देखते हुए ट्रंप को पुराने Air Force One से रवाना कराया। बाद में ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस पर उन्होंने फिर नए विमान में सवार होकर अमेरिका की यात्रा पूरी की।   व्हाइट हाउस ने सुरक्षा अपग्रेड की पुष्टि की   व्हाइट हाउस ने बाद में बताया कि कतर से मिले नए Air Force One में अतिरिक्त सुरक्षा उन्नयन (अपग्रेड) किए जाएंगे और कुछ समय के लिए ट्रंप पुराने Air Force One का उपयोग करेंगे। हालांकि ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि विमान बदलने का फैसला सुरक्षा कारणों से नहीं था, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से खतरे की आशंका बनी हुई है। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और नए विमान की सुरक्षा क्षमताओं को लेकर अमेरिका में नई बहस शुरू हो गई है।

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सेंट पीटर्सबर्ग में यूक्रेनी ड्रोन हमले से बड़े गोदाम में भीषण आग, रूस ने कहा— लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाया गया निशाना

मॉस्को/सेंट पीटर्सबर्ग, एजेंसियां। रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के पास यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद एक बड़े गोदाम में भीषण आग लग गई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, हमला लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी वाइल्डबेरीज़ (Wildberries) के विशाल वेयरहाउस पर हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया।   ड्रोन हमले के बाद धधका वेयरहाउस   लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर ने बताया कि यूक्रेनी ड्रोन के हमले के तुरंत बाद गोदाम में आग भड़क उठी। दमकल की कई टीमें घंटों तक आग बुझाने में जुटी रहीं। सुरक्षा कारणों से आसपास के इलाके को खाली कराया गया और हवाई सुरक्षा प्रणाली को अलर्ट पर रखा गया।   लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को निशाना बनाने का आरोप   रूसी प्रशासन का आरोप है कि यूक्रेन अब केवल ऊर्जा प्रतिष्ठानों ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और सप्लाई नेटवर्क को भी निशाना बना रहा है। वाइल्डबेरीज़ रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों में से एक है और उसका वेयरहाउस देशभर में सामान की आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।   यूक्रेन की रणनीति में बदलाव   विश्लेषकों का मानना है कि हाल के सप्ताहों में यूक्रेन ने रूस के भीतर गहराई तक ड्रोन हमले बढ़ाए हैं। इन हमलों का उद्देश्य रूस की आपूर्ति व्यवस्था और युद्ध से जुड़े लॉजिस्टिक्स ढांचे को प्रभावित करना बताया जा रहा है। हालांकि यूक्रेन ने इस विशेष हमले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।   तीसरी बार बना निशाना   रिपोर्टों के अनुसार, यह एक सप्ताह के भीतर वाइल्डबेरीज़ के गोदामों पर तीसरा बड़ा हमला है। लगातार हो रहे हमलों से कंपनी के परिचालन और हजारों छोटे कारोबारियों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।   क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई   हमले के बाद सेंट पीटर्सबर्ग और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि कई अन्य यूक्रेनी ड्रोन को भी हवाई रक्षा प्रणाली ने मार गिराया, जबकि घटना की विस्तृत जांच जारी है।  

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