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5.9 Earthquake Hits Flores After 53 Deaths

53 मौतों के बाद फिर कांपी इंडोनेशिया की धरती, फ्लोरेस में 5.9 तीव्रता का भूकंप; आफ्टरशॉक्स से दहशत

surbhi अगस्त 17, 2026 0
Rescue teams respond after a 5.9 magnitude earthquake strikes Indonesia’s Flores following a deadly 7.7 quake
Flores Indonesia Earthquake 5.9 Magnitude

फ्लोरेस: इंडोनेशिया के भूकंप प्रभावित फ्लोरेस क्षेत्र में सोमवार को एक बार फिर धरती कांप उठी। रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह झटका ऐसे समय आया है जब इलाका अभी 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप से उबर भी नहीं पाया है। उस भूकंप में अब तक 53 लोगों की मौत की खबर है।

लगातार आ रहे झटकों ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई इलाकों में लोग घरों के भीतर जाने से डर रहे हैं और खुले स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।

करीब 10 किलोमीटर की गहराई में आया भूकंप

जर्मनी के भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र यानी GFZ के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को आया 5.9 तीव्रता का भूकंप जमीन के करीब 10 किलोमीटर नीचे था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मुख्य झटके के बाद भी क्षेत्र में कई छोटे भूकंपीय झटके महसूस किए गए।

कम गहराई पर आने वाले भूकंप कई बार सतह पर अधिक तेज महसूस हो सकते हैं। ऐसे में पहले से प्रभावित इलाकों में क्षतिग्रस्त इमारतों और कमजोर ढांचों को लेकर खतरा और बढ़ जाता है।

15 अगस्त के 7.7 तीव्रता के भूकंप ने मचाई थी तबाही

फ्लोरेस क्षेत्र में 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। रविवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 53 हो गई थी। भूकंप का केंद्र पूर्वी नूसा तेंगारा प्रांत में एंडे से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बताया गया था और इसकी गहराई भी लगभग 10 किलोमीटर थी।

मुख्य भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा रहे हैं। इनमें 6 से अधिक तीव्रता वाले झटके भी शामिल बताए गए हैं। इससे पहले से प्रभावित लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।

राहत और बचाव अभियान के सामने नई चुनौती

भूकंप से प्रभावित कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इसके कारण राहत एवं बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। रेस्क्यू टीमें क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण कर रही हैं और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास जारी है।

सबसे बड़ी चुनौती उन इमारतों को लेकर है जो पहले ही 7.7 तीव्रता के भूकंप से कमजोर हो चुकी हैं। नए झटकों के कारण इनके और क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है।

लगातार झटकों ने बढ़ाई लोगों की चिंता

फ्लोरेस में लगातार महसूस हो रहे भूकंप के झटकों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राहत कार्यों के बीच आफ्टरशॉक्स ने प्रशासन और बचाव दलों के सामने भी अतिरिक्त चुनौती खड़ी कर दी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे और शेख हसीना प्रत्यर्पण का मुद्दा
बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के भारत दौरे पर सस्पेंस, शेख हसीना के प्रत्यर्पण से रिश्तों में खिंचाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भारत-बांग्लादेश संबंधों में बड़ी चुनौती बना हुआ है।   भारत ने बातचीत से समाधान की जताई उम्मीद     भारत में बांग्लादेश के हाईकमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इनका समाधान बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा जल्द होगा।   उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश दो संप्रभु देश हैं और दोनों के अपने हित और तर्क हैं। ऐसे में आपसी सम्मान और संवाद के जरिए संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश होनी चाहिए।   ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हो सकती है मुलाकात     12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तारिक रहमान के भारत आने की संभावना है। हालांकि, अभी यात्रा को लेकर अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है।   बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने भी कहा कि दोनों देशों के अधिकारी कई हफ्तों से संपर्क में हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यात्रा के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना जरूरी है।   शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर बनी हुई है असहमति     भारत और बांग्लादेश के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक शेख हसीना का प्रत्यर्पण है। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना भारत आ गई थीं।   इसके बाद बांग्लादेश ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के मामले में हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। भारत की ओर से कहा गया है कि प्रत्यर्पण अनुरोध की जांच लागू कानूनों और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।   हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम से भी बढ़ा तनाव     5 अगस्त को नई दिल्ली से शेख हसीना के एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। बांग्लादेश ने इस कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे वहां की भावनाएं आहत हुई हैं और द्विपक्षीय संबंध सुधारने की कोशिशों पर असर पड़ सकता है।   भारत ने स्पष्ट किया कि हसीना के इस मीडिया कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और कार्यक्रम में बांग्लादेश सरकार को लेकर कही गई बातों का वह समर्थन नहीं करता।   संबंध सुधारने पर भारत का जोर     बांग्लादेश के हाईकमिश्नर ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा लक्ष्य लोगों की गरिमा, सम्मान और बेहतर संबंध सुनिश्चित करना होना चाहिए। ऐसे में अब निगाहें प्रधानमंत्री तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे और दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
रूस-यूक्रेन युद्ध में लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल स्टील फैक्ट्री पर हमला

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PoK में सिंधु नदी पर डायमर-भाशा बांध से बौद्ध विरासत पर संकट, पाकिस्तान-चीन परियोजना को लेकर बढ़ी चिंता

इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में सिंधु नदी पर निर्माणाधीन डायमर-भाशा बांध एक बार फिर विवादों में है। परियोजना को लेकर पर्यावरण और जल विशेषज्ञों के साथ-साथ पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े जानकार भी चिंता जता रहे हैं। आशंका है कि बांध के जलाशय से क्षेत्र में मौजूद हजारों साल पुराने बौद्ध शिलालेख और अन्य पुरातात्विक अवशेष प्रभावित हो सकते हैं। यह क्षेत्र प्राचीन सिल्क रूट का अहम हिस्सा रहा है। सदियों तक इस मार्ग के जरिए भारत, चीन, मध्य एशिया और फारस के बीच व्यापार के साथ धर्म, संस्कृति और विचारों का भी आदान-प्रदान हुआ। ऊपरी सिंधु घाटी में आज भी इस ऐतिहासिक संपर्क के प्रमाण के रूप में बड़ी संख्या में चट्टानी शिलालेख, बौद्ध प्रतीक और पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं। बांध से हजारों साल पुरानी विरासत को खतरा डायमर-भाशा बांध के निर्माण से बनने वाले जलाशय के दायरे में सिंधु नदी के किनारे स्थित कई ऐतिहासिक स्थल आने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, क्षेत्र में मौजूद कई प्राचीन शिलालेख पानी में डूब सकते हैं। इनमें ब्राह्मी और तिब्बती समेत विभिन्न प्राचीन लिपियों के प्रमाण मिलते हैं। ये शिलालेख केवल धार्मिक इतिहास की जानकारी नहीं देते, बल्कि दक्षिण एशिया में प्राचीन व्यापार, यात्राओं और सांस्कृतिक संपर्कों को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अगर इन स्थलों को संरक्षित नहीं किया गया तो एक बड़ी ऐतिहासिक विरासत हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है। तक्षशिला को लेकर भी उठे संरक्षण के सवाल पाकिस्तान की प्राचीन बौद्ध विरासत पर चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब तक्षशिला जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रसिद्ध और अपेक्षाकृत आसानी से पहुंच वाले ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में चुनौतियां मौजूद हैं, तो गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे दुर्गम क्षेत्र में मौजूद प्राचीन अवशेषों को सुरक्षित रखना और भी बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि डायमर-भाशा परियोजना को लेकर विशेषज्ञ विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। पर्यावरण पर भी विशेषज्ञों की चिंता विशेषज्ञों के मुताबिक सिंधु नदी पाकिस्तान के लिए केवल जल संसाधन नहीं, बल्कि कृषि, पारिस्थितिकी और ऐतिहासिक विरासत का भी आधार है। नदी के प्रवाह में बड़े बदलाव से निचले क्षेत्रों की खेती और स्थानीय पर्यावरण प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा बांध परियोजना की लागत और दीर्घकालिक आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर भी कुछ विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज जैसी तकनीकों के तेजी से विस्तार के दौर में बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का गंभीर मूल्यांकन जरूरी है। भारत क्यों कर रहा है विरोध? डायमर-भाशा बांध को लेकर भारत का विरोध केवल पर्यावरण और विरासत से जुड़ा नहीं है। भारत गिलगित-बाल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से संबंधित अपना क्षेत्र मानता है और इस क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे निर्माण कार्यों को संप्रभुता से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानता है। चीन की भागीदारी वाली परियोजनाओं को लेकर भी भारत लगातार आपत्ति दर्ज कराता रहा है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में पाकिस्तान या किसी तीसरे देश द्वारा कराया जा रहा निर्माण स्वीकार्य नहीं है। विकास बनाम विरासत की बड़ी बहस डायमर-भाशा बांध अब केवल एक जलविद्युत परियोजना नहीं रह गया है। इसके साथ ऊर्जा जरूरत, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय हित, पुरातात्विक विरासत और क्षेत्रीय राजनीति जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं। बांध के समर्थक इसे पाकिस्तान की जल और ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि किसी भी विकास परियोजना की कीमत हजारों साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत को खत्म करके नहीं चुकाई जानी चाहिए।  

surbhi अगस्त 17, 2026 0
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Qatar
कतर ने ईरान के तीन पायलटों को हिरासत में लेने के दावे को बताया भ्रामक

दोहा, एजेंसियां। कतर ने ईरान के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि कतर ने मार्च में लापता हुए तीन ईरानी सैन्य पायलटों को हिरासत में ले रखा है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसी खबरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं।   ईरान ने तीन पायलटों को पकड़े जाने का लगाया आरोप   ईरान के सशस्त्र बलों के लापता कर्मियों की तलाश से जुड़ी समिति के प्रमुख मोहम्मद बाघेरजादेह ने दावा किया था कि मार्च में दो ईरानी Su-24 विमानों के गिराए जाने के बाद तीन पायलटों को कतर की सेना ने जिंदा पकड़ लिया था। ईरानी पक्ष के मुताबिक, ये तीनों करीब छह महीने से कतर के कब्जे में हैं।   कतर ने बताया अपना पक्ष   कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि ईरानी विमानों ने कतर के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई थी। कतर के मुताबिक, बाद में खोज एवं बचाव दल ने एक पायलट के अवशेष बरामद किए और उनके हस्तांतरण के लिए ईरान से संपर्क किया।   क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ा विवाद   यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच तनाव पहले से बना हुआ है। कतर ने कहा है कि उसने ईरान को घटना की जांच और खोज-बचाव अभियान की जानकारी लेने के लिए एक टीम भेजने का निमंत्रण भी दिया था, लेकिन उसके अनुसार ईरान की ओर से अब तक इसका जवाब नहीं मिला है।

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
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