दुनिया

PNS Hangor Raises Bay of Bengal Security Concerns

55 साल बाद बंगाल की खाड़ी में दिख सकती है पाकिस्तान की सबमरीन, PNS हैंगोर से बढ़ी भारत की सामरिक चिंता

Deepshikha जून 18, 2026 0
Pakistan Navy's newly inducted PNS Hangor submarine arrives in Karachi amid discussions over Bay of Bengal deployment.
PNS Hangor Submarine and Pakistan's Bay of Bengal Strategy

 

पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी (PNS Hangor) एक बार फिर बंगाल की खाड़ी को लेकर चर्चा में है। पाकिस्तान नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया बयानों ने संकेत दिए हैं कि इस पनडुब्बी का इस्तेमाल केवल अरब सागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बंगाल की खाड़ी में भी पाकिस्तान अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करेगा।

चीन में निर्मित पाकिस्तान की पहली हैंगोर क्लास पनडुब्बी पिछले सप्ताह कराची पहुंची। इसके बाद पाकिस्तान नौसेना के अधिकारियों ने इसे ‘गेम चेंजर’ करार दिया और कहा कि इस नई क्षमता से पाकिस्तान दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों, विशेषकर बंगाल की खाड़ी, में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम होगा।

श्रीलंका में पाकिस्तानी अधिकारी ने क्या कहा?

कोलंबो स्थित समाचार पोर्टल ‘द मॉर्निंग’ के अनुसार, पनडुब्बी के एस्कॉर्ट बेड़े का नेतृत्व कर रहे पाकिस्तानी कमोडोर उमर फारूक ने कहा कि हैंगोर क्लास पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कुल आठ हैंगोर क्लास पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रहा है।

बंगाल की खाड़ी क्यों है रणनीतिक रूप से अहम?

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां लगभग नगण्य रही हैं। दूसरी ओर यह क्षेत्र भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र है।

भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान का मुख्यालय विशाखापट्टनम में स्थित है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत को इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त प्रदान करते हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और इंडो-पैसिफिक रणनीति का बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

क्या है PNS हैंगोर का इतिहास?

‘हैंगोर’ नाम भारतीय नौसैनिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है। 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हैंगोर ने भारतीय युद्धपोत आईएनएस खुकरी को निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस हमले में 176 भारतीय नौसैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला भी शामिल थे, जिन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

इस घटना के बावजूद पाकिस्तान 1971 का युद्ध हार गया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। अब पाकिस्तान ने अपनी नई पनडुब्बी परियोजना के लिए फिर से ‘हैंगोर’ नाम चुना है।

क्या है हैंगोर क्लास पनडुब्बियों की खासियत?

हैंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान की सबसे बड़ी नौसैनिक आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा हैं। इनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होने की बात कही जाती है, जिससे ये पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं और उन्हें बार-बार सतह पर आकर बैटरी चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती।

इस तकनीक के कारण इन पनडुब्बियों को ट्रैक करना और उनकी गतिविधियों का पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है।

बांग्लादेश से बढ़ती नजदीकियां भी बढ़ा रहीं चिंता

2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंधों में तेजी से सुधार देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुई हैं, व्यापार में वृद्धि हुई है और रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत तेज हुई है।

नवंबर 2025 में पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस सैफ की चट्टोग्राम यात्रा 1971 के बाद पहली ऐसी घटना थी, जब कोई पाकिस्तानी युद्धपोत बांग्लादेश पहुंचा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संस्थागत रूप देने पर भी चर्चा चल रही है।

अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि बांग्लादेश पाकिस्तान को अपने बंदरगाहों या सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति देगा।

भारत की चिंता कितनी बढ़ी?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नई पनडुब्बियां तत्काल तौर पर बंगाल की खाड़ी में शक्ति संतुलन बदलने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन वे भारत के लिए एक अतिरिक्त सामरिक चुनौती जरूर पैदा कर सकती हैं।

भारतीय नौसेना पिछले पांच दशकों में काफी मजबूत हुई है। भारत के पास परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां, दो विमानवाहक पोत और लंबी दूरी की समुद्री निगरानी क्षमताएं मौजूद हैं। भारत अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।

इसके बावजूद पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक क्षमताएं और बांग्लादेश के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए एक नए रणनीतिक समीकरण को जन्म दे सकती हैं। इसी वजह से भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास अपनी समुद्री और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

दुनिया

View more
US President Donald Trump speaks about the Israel-Hezbollah ceasefire amid renewed tensions in the Middle East.
इजरायल-हिजबुल्लाह युद्धविराम के लिए ट्रंप ने इजरायल से की अपील, बोले- 'कभी-कभी शांत होकर सोचना पड़ता है'

  वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि उन्होंने इजरायल से लेबनान में Hezbollah के साथ युद्धविराम बनाए रखने और तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही इजरायल और हिजबुल्लाह ने एक-दूसरे पर नए हमले शुरू कर दिए। एनबीसी न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने बताया कि वह पूरे दिन इजरायली नेतृत्व के संपर्क में रहे और उन्होंने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को समर्थन देने की अपील की। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी सीधे तौर पर इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से बातचीत हुई या नहीं। 'यह सोने पर सुहागा जैसा कदम' इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम को ट्रंप ने सकारात्मक विकास करार देते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, "यह सोने पर सुहागा जैसा है।" ट्रंप का इशारा हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौता ज्ञापन की ओर था, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को कम करना और ईरान के साथ तकनीकी एवं कूटनीतिक वार्ता के लिए नए रास्ते खोलना है। नेतन्याहू के साथ संबंधों पर बोले ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों पर ट्रंप ने कहा, "बीबी के साथ मेरे संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं। बस आपको कभी-कभी शांत होकर अपने दिमाग का इस्तेमाल करना होता है।" ट्रंप के इस बयान को इजरायल से संयम बरतने और सैन्य कार्रवाई को सीमित रखने की अप्रत्यक्ष सलाह के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका, कतर और ईरान की मध्यस्थता से लागू हुआ युद्धविराम सूत्रों के मुताबिक, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच नया युद्धविराम शुक्रवार सुबह लागू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता अमेरिका और Qatar की मध्यस्थता से संभव हुआ, जबकि एक अन्य राजनयिक सूत्र ने बताया कि ईरान ने भी पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों पक्षों के बीच स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे से युद्धविराम प्रभावी करने पर सहमति बनी। इजरायली सेना ने जारी रखी चेतावनी Israel Defense Forces (आईडीएफ) ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी संभावित खतरे या युद्धविराम उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी। आईडीएफ के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा, "हम किसी भी तत्काल खतरे का जवाब देना और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जारी रखेंगे।" इस बयान से संकेत मिलता है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता फिर टली ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भविष्य में स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता में हिस्सा ले सकते हैं। शुक्रवार को प्रस्तावित बैठक स्थगित कर दी गई। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जेडी वेंस भविष्य में इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, जबकि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ अलग से वार्ता प्रयासों में जुटे हैं। स्विस विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित बैठक फिलहाल स्थगित कर दी गई है, लेकिन वार्ता के लिए तैयारियां जारी हैं। अमेरिका-ईरान 14-सूत्रीय समझौते में क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं, जिनमें: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकना 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करना अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी और कुछ प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाना ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन की सुविधा देना ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी वार्ता शुरू करना ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना ईरानी तेल निर्यात के लिए अमेरिकी छूट प्रदान करना ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास कार्यक्रम का खाका तैयार करना पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में बड़ा कदम, लेकिन चुनौतियां बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल-हिजबुल्लाह युद्धविराम और अमेरिका-ईरान समझौता पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। जमीनी स्तर पर जारी सैन्य गतिविधियां और आपसी अविश्वास इस शांति प्रक्रिया के सामने अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
US President Donald Trump unveils a luxury Boeing 747 gifted by Qatar as his temporary Air Force One aircraft.

'दुनिया का सबसे आलीशान विमान': ट्रंप ने कतर से मिले 400 मिलियन डॉलर के बोइंग 747 का किया अनावरण, अस्थायी एयर फोर्स वन के रूप में होगा इस्तेमाल

US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi during a bilateral meeting at the G7 Summit in France.

'मोदी पर फिल्म बनी तो हॉलीवुड को हीरो नहीं मिलेगा', ट्रंप का दिलचस्प बयान; पीएम को बताया महान और सख्त नेता

Firefighters battle a massive blaze at a beachfront resort in the Dominican Republic as tourists are evacuated.

डोमिनिकन रिपब्लिक के बीचफ्रंट रिजॉर्ट में भीषण आग, इटली की महिला पर्यटक की मौत; 1,700 लोग सुरक्षित निकाले गए

Oil storage tanks and crude oil facilities symbolize global supply disruptions caused by the Middle East conflict and energy crisis.
ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर, 115 करोड़ बैरल सप्लाई प्रभावित; रणनीतिक भंडार दशकों के निचले स्तर पर

  नई दिल्ली/वर्साय: ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष और मध्य-पूर्व में कई महीनों तक बनी अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरे संकट में डाल दिया है। एनालिटिक्स फर्म केपलर (Kpler) की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के लगभग चार महीनों के दौरान वैश्विक बाजार से करीब 115 करोड़ बैरल (1.15 बिलियन बैरल) तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के दौरान मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में भारी बाधा आई, जिसके कारण दुनिया भर के रणनीतिक (Strategic) और वाणिज्यिक (Commercial) तेल भंडार तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक भंडार से करीब 19 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है। रणनीतिक तेल भंडार कई दशकों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) से जुड़े देशों के रणनीतिक तेल भंडार 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, अमेरिका का आपातकालीन तेल भंडार भी कई दशकों के निचले स्तर पर बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्साय में आयोजित जी7 बैठक के दौरान कहा कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता, तो अमेरिकी तेल भंडार पर गंभीर दबाव पड़ सकता था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भंडार कुछ ही हफ्तों में समाप्त होने की स्थिति तक पहुंच सकते थे। युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में राहत अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के दोबारा खुलने की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिली है। युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में गिरावट के बावजूद सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। सप्लाई चेन बहाली में लग सकते हैं कई महीने ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी तेल आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हो सकती। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, टैंकरों की उपलब्धता, उत्पादन बढ़ाने और लॉजिस्टिक नेटवर्क को फिर से पटरी पर लाने में कई महीने लग सकते हैं। RBC कैपिटल मार्केट्स की ऊर्जा विशेषज्ञ हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि बाजार जरूरत से ज्यादा आशावादी नजर आ रहा है। उनके अनुसार, संकट पूरी तरह समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी क्योंकि तेल आपूर्ति तंत्र के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। OPEC उत्पादन बढ़ा सकता है इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे हैटफील्ड का मानना है कि आर्थिक दबाव का सामना कर रहे कई OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में हो सकते हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस रणनीतिकार विकास द्विवेदी का कहना है कि युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद था, जिससे बाजार पूरी तरह अस्थिर नहीं हुआ। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान गायब हुई 115 करोड़ बैरल तेल आपूर्ति की भरपाई आसान नहीं होगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि दुनिया मांग से प्रतिदिन 50 लाख बैरल अधिक तेल का उत्पादन भी करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक वर्ष लग सकता है। दुनिया में रोजाना 10.3 करोड़ बैरल तेल उत्पादन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा अकेले देता है। इसके बाद सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक का स्थान है। ये पांच देश मिलकर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रमुख उत्पादक देशों में किसी भी प्रकार का युद्ध, प्रतिबंध या उत्पादन संकट सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni responds to claims by US President Donald Trump after the G7 Summit controversy.

ट्रंप के कथित दावे पर जॉर्जिया मेलोनी का पलटवार, बोलीं- इटली मिन्नतें नहीं करता

Smoke rises over southern Lebanon after Israeli airstrikes as Hezbollah and Israeli forces exchange attacks amid escalating regional tensions.

Israel-Hezbollah Conflict: लेबनान में इजरायली हमले तेज, 18 लोगों की मौत; ईरान-अमेरिका वार्ता टली

Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif and US President Donald Trump amid discussions surrounding the US-Iran peace agreement and Islamabad's diplomatic role.

ईरान-अमेरिका समझौते का श्रेय लेने की पाकिस्तान की कोशिश पर फिरा पानी, ट्रंप के कदम से शहबाज सरकार को झटका

PM MODI Mahabharat Painting
PM मोदी ने फ्रांस दौरे में मैक्रों को भेंट की कलमकारी महाभारत पेंटिंग, ब्रिजिट को दिया पोचमपल्ली स्टोल

पेरिस, एजेंसियां। फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति  इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से भारतीय कला, परंपरा और हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया।   कलमकारी महाभारत पेंटिंग बनी मुख्य आकर्षण पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों को आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी शैली में बनी महाभारत पेंटिंग भेंट की। यह कलाकृति लगभग छह महीने की मेहनत से तैयार की गई है, जिसमें महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को विस्तार से दर्शाया गया है। पेंटिंग में धर्म, न्याय, साहस और नैतिक निर्णय जैसे मूल्यों को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया भगवद्गीता का संदेश भी प्रमुख रूप से शामिल है, जो कर्तव्य और आत्मसंयम का मार्ग दिखाता है।   ब्रिजिट मैक्रों को मिला पोचमपल्ली सिल्क स्टोल राष्ट्रपति मैक्रों की पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को तेलंगाना का प्रसिद्ध पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार में दिया गया। यह हाथ से बुना हुआ स्टोल पारंपरिक इकत रेजिस्ट-डाइंग तकनीक से तैयार किया जाता है और अपनी ज्यामितीय व पुष्पीय डिजाइनों के लिए जाना जाता है। यह स्टोल भारतीय वस्त्र परंपरा और आधुनिक कलात्मकता का सुंदर संगम माना जाता है।   सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा भारतीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक वस्तुओं के जरिए यह उपहार न केवल कला का प्रदर्शन हैं, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपने विदेशी दौरों में अक्सर इस तरह के पारंपरिक उपहार भेंट करते हैं, जिससे भारतीय कारीगरों और उनकी कला को वैश्विक पहचान मिल सके।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Greater Manchester Mayor Andy Burnham celebrates victory in the Makerfield by-election, intensifying pressure on UK Prime Minister Keir Starmer.

ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी पर संकट! मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहैम की जीत से बढ़ी सियासी हलचल

The iconic Boeing VC-25A aircraft known as Air Force One retires after serving multiple US presidents for 35 years.

आसमान के सिकंदर ‘एयरफोर्स वन’ का सफर खत्म, 35 साल की ऐतिहासिक सेवा के बाद रिटायर हुआ विमान SAM 29000

Smoke rises over southern Lebanon after Israeli airstrikes as US-Iran peace talks in Switzerland are postponed.

US-ईरान शांति वार्ता को बड़ा झटका, जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा रद्द; इजरायली हमलों में लेबनान में 16 लोगों की मौत

0 Comments

Top week

Abhishek Banerjee addressing media as he writes to Lok Sabha Speaker seeking recognition of TMC as a unified party.
राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?