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US Court Blocks Trump-Era Voter Database

US Election Controversy: ट्रंप सरकार को अदालत से झटका, वोटर डेटा डेटाबेस को गैर-कानूनी करार

Deepshikha जून 23, 2026 0
US federal court building as a judge strikes down a controversial voter database created under the Trump administration.
US Court Blocks Trump-Era Voter Database

 

वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका लगा है। एक संघीय अदालत ने उस विवादित डेटाबेस को समाप्त करने का आदेश दिया है, जिसमें लाखों अमेरिकी नागरिकों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की गई थी। अदालत ने इसे गैर-कानूनी बताते हुए कहा कि इससे नागरिकों की निजता और मतदान के अधिकार दोनों को खतरा पैदा हुआ है।

अमेरिकी जिला जज स्पार्कल सूकनानन ने अपने फैसले में कहा कि संघीय सरकार ने जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों के गोपनीयता अधिकारों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि जब वोट देने जैसे बुनियादी अधिकार खतरे में हों, तब अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती।

राज्यों द्वारा वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप

अदालत ने कहा कि कई राज्यों ने इस डेटाबेस का इस्तेमाल योग्य अमेरिकी नागरिकों को वोटर सूची से हटाने के लिए किया। जज के अनुसार, सरकार ने नागरिकता संबंधी ऐसे डेटा का उपयोग किया, जिसकी विश्वसनीयता पर पहले से सवाल मौजूद थे।

फैसले में कहा गया कि यह मामला दो बुनियादी संवैधानिक अधिकारों—निजता के अधिकार और मतदान के अधिकार—से जुड़ा है और दोनों की रक्षा करना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है।

क्या है विवादित डेटाबेस?

यह मामला 'सिस्टेमैटिक एलियन वेरिफिकेशन फॉर एंटाइटलमेंट्स' (SAVE) प्रणाली से जुड़ा है, जिसे अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) संचालित करता है। इसका उपयोग नागरिकता और आव्रजन स्थिति की पुष्टि के लिए किया जाता है।

सितंबर 2025 में मतदान अधिकार और गोपनीयता से जुड़े कई संगठनों, जिनका नेतृत्व 'लीग ऑफ वूमेन वोटर्स' कर रहा था, ने इस प्रणाली में किए गए बदलावों को चुनौती देते हुए अदालत में मुकदमा दायर किया था।

ट्रंप के कार्यकारी आदेश से बढ़ा विवाद

मार्च 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत संघीय चुनावों में वोटर पंजीकरण के लिए नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य किया गया था। आदेश में संघीय एजेंसियों को राज्यों के लिए नागरिकता सत्यापन प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया गया था।

ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली में नागरिकता सत्यापन के नियम पर्याप्त रूप से लागू नहीं किए जा रहे हैं।

लीग ऑफ वूमेन वोटर्स की प्रतिक्रिया

फैसले का स्वागत करते हुए 'लीग ऑफ वूमेन वोटर्स' ने कहा कि अदालत ने सरकार की चुनावी प्रक्रिया में गैर-कानूनी हस्तक्षेप की कोशिश को विफल कर दिया है। संगठन के अनुसार, यह डेटाबेस लाखों अमेरिकियों की संवेदनशील जानकारी को एक जगह इकट्ठा कर रहा था, जिससे वे अनुचित जांच और गैर-कानूनी तरीके से वोटर सूची से हटाए जाने के जोखिम का सामना कर सकते थे।

यह फैसला अमेरिका में चुनावी पारदर्शिता, मतदाता अधिकारों और नागरिकों की गोपनीयता को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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ट्रंप प्रशासन की बर्थ टूरिज्म और विदेशी गर्भवती महिलाओं के वीजा पर सख्ती
अमेरिका में ‘बर्थ टूरिज्म’ पर ट्रंप प्रशासन का शिकंजा, विदेशी गर्भवती महिलाओं के वीजा पर सख्ती

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में बच्चों को जन्म देने के उद्देश्य से विदेशियों के आने की प्रथा यानी ‘बर्थ टूरिज्म’ पर कार्रवाई तेज कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने 6 अगस्त को दो नए कार्यकारी आदेश जारी किए, जिनमें जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े नियमों को सीमित करने और बर्थ टूरिज्म पर रोक लगाने के लिए वीजा प्रक्रिया को सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं।   बर्थ टूरिज्म पर वीजा कार्रवाई     अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कुछ विदेशी नागरिक अस्थायी वीजा पर अमेरिका आकर बच्चे को जन्म देते हैं, ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके। ट्रंप प्रशासन ने इस प्रथा को रोकने के लिए वीजा जांच और प्रवर्तन कार्रवाई मजबूत करने का फैसला किया है।   इसके तहत उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, जहां अधिकारियों को लगता है कि अमेरिका आने का प्राथमिक उद्देश्य बच्चे को जन्म देना और उसके जरिए नागरिकता हासिल करना है।   जन्मसिद्ध नागरिकता पर भी नया आदेश     ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों की नागरिकता को लेकर भी नया कार्यकारी आदेश जारी किया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में प्रशासन के पहले व्यापक प्रयास को खारिज कर दिया था।   नए आदेश में प्रशासन ने कुछ विशिष्ट श्रेणियों के मामलों को जन्मसिद्ध नागरिकता के दायरे से बाहर रखने की कोशिश की है। हालांकि, इस कदम को लेकर कानूनी चुनौती की संभावना बनी हुई है और संवैधानिक विशेषज्ञों ने इसे 14वें संशोधन के प्रावधानों से जोड़कर सवाल उठाए हैं।   अवैध इमिग्रेशन पर भी सख्त रुख     ट्रंप प्रशासन पहले से ही अवैध इमिग्रेशन और वीजा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई तेज किए हुए है। बर्थ टूरिज्म के मामले में भी सरकार का ध्यान उन नेटवर्क पर है जो विदेशी नागरिकों को अमेरिका लाकर बच्चे के जन्म और नागरिकता से जुड़े मामलों में मदद करते हैं।   अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अमेरिका में बच्चे को जन्म देना अपने आप में अवैध नहीं है, लेकिन वीजा धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर अमेरिका में प्रवेश करने जैसी गतिविधियां कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती हैं।   अदालतों में पहुंच सकता है मामला     ट्रंप प्रशासन के नए आदेशों को लेकर कानूनी विवाद की संभावना बढ़ गई है। नागरिक अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कार्यकारी आदेश के जरिए जन्मसिद्ध नागरिकता के संवैधानिक अधिकार को सीमित करने की कोशिश अदालत में चुनौती का सामना कर सकती है।   अब इस मामले में अमेरिकी अदालतों का रुख महत्वपूर्ण होगा। यदि नए आदेशों पर कानूनी रोक लगती है तो ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति को एक और बड़ी न्यायिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
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NASA की जेसिका मेयर और अनिल मेनन की ISS स्पेसवॉक
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वॉशिंगटन, एजेंसियां। NASA की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मेयर और भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के बाहर करीब 6 घंटे 27 मिनट की स्पेसवॉक पूरी की। दोनों ने स्टेशन के पावर सिस्टम में बदलाव के लिए जरूरी उपकरण लगाए, जिससे भविष्य में नए रोल-आउट सोलर एरे यानी iROSA स्थापित करने का रास्ता तैयार होगा। NASA के अनुसार यह मेनन की पहली और मेयर की छठी स्पेसवॉक थी।   जेसिका मेयर और अनिल मेनन ने संभाली जिम्मेदारी   जेसिका मेयर और अनिल मेनन ने 6 अगस्त को सुबह 8:33 बजे EDT पर ISS के बाहर स्पेसवॉक शुरू की। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने स्टेशन के 3B पावर चैनल से जुड़े हिस्से पर काम किया। यह मिशन खास तौर पर अनिल मेनन के लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि यह उनकी पहली स्पेसवॉक थी। मेयर इससे पहले पांच बार अंतरिक्ष में बाहर निकलकर काम कर चुकी थीं।   सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की तैयारी   स्पेसवॉक के दौरान दोनों ने भविष्य में लगाए जाने वाले नए रोल-आउट सोलर एरे के लिए जरूरी हार्डवेयर तैयार किया। इसके तहत ब्रैकेट लगाने, केबल की व्यवस्था करने और इन्सुलेशन से जुड़े काम किए गए। नए iROSA सोलर एरे ISS की मौजूदा सौर ऊर्जा प्रणाली को मजबूत करेंगे। NASA के अनुसार इन अपग्रेड से अंतरिक्ष स्टेशन की बिजली क्षमता बढ़ाने और उसके महत्वपूर्ण संचालन को समर्थन देने में मदद मिलेगी।   अनिल मेनन की पहली स्पेसवॉक बनी खास उपलब्धि   भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन के लिए यह मिशन विशेष उपलब्धि है। पहली बार उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर निकलकर सीधे तकनीकी कार्य किया। वहीं, जेसिका मेयर की यह छठी स्पेसवॉक रही। दोनों की इस गतिविधि के साथ ISS के सभी आठ पावर चैनलों के लिए सोलर एरे अपग्रेड से जुड़ा हार्डवेयर लगाने का काम पूरा हो गया है।   ISS के भविष्य के मिशनों के लिए अहम कदम   NASA के मुताबिक यह काम अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ISS पर किए जा रहे ऐसे तकनीकी प्रयोग और रखरखाव कार्य लंबे समय के अंतरिक्ष अभियानों के लिए जरूरी अनुभव उपलब्ध कराते हैं। NASA ने अगस्त में आगे भी स्पेसवॉक की योजना बनाई है, जिनमें ISS के रखरखाव और पावर सिस्टम से जुड़े अन्य कार्य किए जाएंगे।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
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थाईलैंड के स्कूल में 14 वर्षीय छात्र की गोलीबारी की घटना
थाईलैंड के स्कूल में 14 वर्षीय छात्र की गोलीबारी, 7 लोगों की मौत; 23 घायल

नोंथबुरी, एजेंसियां। थाईलैंड के नोंथबुरी प्रांत में एक 14 वर्षीय छात्र ने शुक्रवार को गोलीबारी कर दी। घटना डेब्सिरिन नोंथबुरी स्कूल में हुई। इससे पहले छात्र ने अपने दादा-दादी के घर पर भी गोलीबारी की थी। पूरे घटनाक्रम में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 23 लोग घायल हुए। बाद में आरोपी किशोर ने खुद को गोली मार ली।   स्कूल पहुंचकर की गोलीबारी   रिपोर्ट के मुताबिक, 14 वर्षीय छात्र ने अपने दादा की बंदूक का इस्तेमाल किया। उसने पहले घर पर अपने दादा-दादी को गोली मारी और इसके बाद स्कूल पहुंचकर शिक्षकों और छात्रों पर गोलियां चलाईं। स्कूल में हुई गोलीबारी में पांच स्कूल कर्मचारियों समेत कई लोग इसकी चपेट में आए। पुलिस के अनुसार आरोपी ने कम से कम 26 गोलियां चलाईं। घटनास्थल से अतिरिक्त गोलियां भी बरामद की गईं।   आरोपी ने खुद को भी मारी गोली   गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने स्कूल को घेर लिया। पुलिस कार्रवाई के बीच आरोपी ने खुद को गोली मार ली। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार घटना में घायल हुए लोगों में कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।   हमले की वजह की जांच जारी   प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक किशोर को पढ़ाई से जुड़े तनाव का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, अधिकारियों ने हमले के पीछे की पूरी वजह को लेकर जांच जारी रखी है। घटना के बाद थाईलैंड में हथियारों की उपलब्धता और बंदूक नियंत्रण कानूनों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने घटना पर दुख जताते हुए हथियार नियंत्रण से जुड़े नियमों को और सख्त करने की बात कही है।   थाईलैंड में बढ़ी सुरक्षा चिंता   यह घटना थाईलैंड में हाल के वर्षों में हुई गंभीर गोलीबारी की घटनाओं में शामिल हो गई है। स्कूल में हुई गोलीबारी ने बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब हथियार आरोपी तक कैसे पहुंचा और हमले की पूरी योजना किस तरह बनाई गई, इसकी जांच कर रही है। मामले में आगे और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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