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US to Cancel Passports Over Child Support Dues

अमेरिका में ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला, चाइल्ड सपोर्ट नहीं चुकाने वालों के पासपोर्ट होंगे रद्द

surbhi मई 8, 2026 0
US passport and legal documents symbolizing Trump administration’s crackdown on unpaid child support dues
US Passport Rule on Child Support Dues

अमेरिका में Donald Trump प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. अब उन अमेरिकी नागरिकों के पासपोर्ट रद्द किए जाएंगे, जिन पर बच्चों की देखभाल के लिए दिए जाने वाले “चाइल्ड सपोर्ट” का भारी बकाया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि यह कार्रवाई उन लोगों पर केंद्रित होगी जो लंबे समय से भुगतान नहीं कर रहे हैं.

क्या है नया नियम?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिन माता-पिता पर 2,500 डॉलर (करीब 2.36 लाख रुपये) से ज्यादा का चाइल्ड सपोर्ट बकाया है, उनका पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है. यह कार्रवाई अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) के साथ मिलकर की जाएगी.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है और हजारों लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं.

क्या होता है चाइल्ड सपोर्ट?

अमेरिका में तलाक या अलग रहने की स्थिति में अदालत यह तय करती है कि बच्चे की पढ़ाई, इलाज, खाना, कपड़े और दूसरी जरूरतों के लिए माता-पिता में से किसे कितनी आर्थिक सहायता देनी होगी. इसी भुगतान को “चाइल्ड सपोर्ट” कहा जाता है.

अगर कोई अभिभावक लंबे समय तक यह राशि नहीं देता, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी कानून के तहत पासपोर्ट पाने या बनाए रखने के लिए चाइल्ड सपोर्ट से जुड़े दायित्वों का पालन करना जरूरी है. मंत्रालय के मुताबिक:

  • 2,500 डॉलर से ज्यादा बकाया होने पर पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है
  • बकाया चुकाए बिना नया पासपोर्ट जारी नहीं होगा
  • रद्द पासपोर्ट यात्रा के लिए मान्य नहीं रहेगा

सरकार का कहना है कि यह कदम माता-पिता को बच्चों के प्रति अपनी “कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी” निभाने के लिए प्रेरित करेगा.

विदेश में फंसे लोगों के साथ क्या होगा?

अगर किसी व्यक्ति का पासपोर्ट उस समय रद्द किया जाता है जब वह अमेरिका से बाहर हो, तो उसे अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क करना होगा. वहां से उसे केवल अमेरिका लौटने के लिए एक इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्युमेंट दिया जाएगा.

पहले क्या नियम था?

अब तक आमतौर पर यह कार्रवाई केवल तब होती थी जब कोई व्यक्ति अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने की कोशिश करता था. लेकिन नए फैसले के बाद सरकार सीधे सक्रिय होकर ऐसे लोगों के पासपोर्ट रद्द कर सकती है, जिन पर बड़ा बकाया है.

लोगों को क्या सलाह दी गई?

अमेरिकी अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को सलाह दी है कि वे संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर जल्द भुगतान व्यवस्था तय करें, ताकि पासपोर्ट रद्द होने जैसी कार्रवाई से बचा जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम बच्चों के आर्थिक अधिकारों को मजबूत करने और बकाया भुगतान वसूलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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ईरान का दावा- इजरायल बिगाड़ना चाहता है अमेरिका से हुई डील, गालिबाफ बोले- ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद

  तेहरान: ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने दावा किया है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते को सफल नहीं होने देना चाहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस समझौते को लेकर मतभेद मौजूद हैं। स्विट्जरलैंड की यात्रा से लौटने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में गालिबाफ ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए 14 बिंदुओं वाले "इस्लामाबाद समझौते" को लागू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इजरायल इसके रास्ते में बाधा डाल रहा है। 'इजरायल समझौते से घबराया हुआ है' ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि यह समझौता लेबनान में युद्ध समाप्त करने, विस्थापित लोगों की वापसी सुनिश्चित करने और कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाने जैसे प्रावधानों पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल इस समझौते का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि यह उसके और अमेरिका के लिए "हार का दस्तावेज" साबित होगा। गालिबाफ ने कहा कि समझौते पर सहमति बनने के बाद इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं, ताकि समझौते के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो। लेबनान की संप्रभुता पर दिया जोर ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि समझौते के अनुसार लेबनान की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की सरकार के पास होगी और देश की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विस्थापित नागरिकों को अपने घर लौटने का अधिकार मिलना चाहिए और कब्जा किए गए इलाकों से सैन्य बलों की वापसी होनी चाहिए। 'अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी मतभेद' गालिबाफ ने दावा किया कि समझौते को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और उपराष्ट्रपति JD Vance का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। उनके अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों की कुछ गतिविधियां इस समझौते की भावना के अनुरूप नहीं थीं। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं ईरान की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका या इजरायल की ओर से भी इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।  

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  यरुशलम: Benjamin Netanyahu ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इजरायल दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के मामले में किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहेगा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। 'जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी करेंगे कार्रवाई' नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ पहले की गई सैन्य कार्रवाइयों ने इजरायल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया। उन्होंने कहा कि यदि इजरायल की सुरक्षा को फिर से खतरा महसूस हुआ, तो ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा तनाव नेतन्याहू का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और परमाणु मुद्दों पर सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। दोनों पक्ष संघर्षविराम को व्यापक राजनीतिक समझौते में बदलने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में संभावित राहत और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। इजरायल ने दोहराया अपना रुख इजरायल पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह ऐसे किसी भी समझौते से स्वयं को बाध्य नहीं मानेगा, जो उसकी दृष्टि में ईरान की सैन्य या परमाणु क्षमताओं को बढ़ावा देता हो। इजरायली नेतृत्व का कहना है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर वह एकतरफा कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ट्रंप ने संयम बरतने की अपील की वहीं, Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम एशिया में दोबारा सैन्य तनाव बढ़ना किसी के हित में नहीं होगा और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।  

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People walking under the scorching sun in Europe during an intense heatwave as temperatures reach record highs across several countries.
यूरोप में भीषण हीटवेव का कहर: रिकॉर्ड तापमान से जनजीवन प्रभावित, वायरल वीडियो में धूप में पकता दिखा खाना

  पेरिस/लंदन: यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान ने जून महीने के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। असामान्य हीटवेव के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है, जबकि कई स्थानों पर स्कूल बंद करने और लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई है। सोशल मीडिया पर इस बीच ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग धूप में रखे तवे और पैन पर खाना पकाते दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इनके दावों की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकती। जून में ही टूटे गर्मी के रिकॉर्ड आमतौर पर यूरोप में सबसे अधिक गर्मी जुलाई के मध्य या महीने के अंत में पड़ती है, लेकिन इस बार जून के अंत में ही कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। रिपोर्टों के अनुसार: फ्रांस के पश्चिमी हिस्सों में तापमान 39 से 43 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। ब्रिटेन में जून का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड हुआ, जहां तापमान 36.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। स्पेन, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड के कई हिस्सों में भी जून के पुराने तापमान रिकॉर्ड टूट गए। स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा दबाव भीषण गर्मी के कारण कई देशों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। WHO ने जताई चिंता World Health Organization के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने कहा कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। उनके अनुसार: यूरोप में तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है। करीब 15 करोड़ लोग इस समय भीषण गर्मी से प्रभावित हैं। गर्मी के कारण सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। कई स्कूल बंद किए गए हैं और बिजली आपूर्ति पर भी भारी दबाव है। वायरल वीडियो पर क्या है सच्चाई? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि तेज धूप में तवे और पैन पर बिना गैस या चूल्हे के खाना पक रहा है। इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड किया गया। इसलिए ऐसे दावों को सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जलवायु परिवर्तन पर फिर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में लगातार बढ़ती हीटवेव जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों की ओर संकेत करती है। असामान्य तापमान, लंबे समय तक चलने वाली गर्मी और चरम मौसम की घटनाएं आने वाले वर्षों में और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।  

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