मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच हुई एक कथित ‘सीक्रेट मीटिंग’ ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कभी भी शुरू हो सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने इजरायल में इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में ईरान की सैन्य क्षमताओं, खासकर उसके हथियार निर्माण ढांचे को कमजोर करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
इसी दौरान, इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में ईरान के सैन्य उत्पादन के “महत्वपूर्ण हिस्सों” को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे उसकी रक्षा क्षमता को बड़ा झटका लगेगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 3,500 अमेरिकी सैनिक पहले ही मध्य पूर्व में तैनात किए जा चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के पास किसी भी वक्त सैन्य कार्रवाई का आदेश देने का विकल्प मौजूद है।
इसके साथ ही, अमेरिका का उभयचर हमला जहाज USS Tripoli (LHA-7) भी क्षेत्र में पहुंच चुका है, जो आधुनिक युद्ध क्षमताओं से लैस है और इसमें फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर और बड़ी संख्या में मरीन तैनात हैं।
रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि संभावित सैन्य अभियान पारंपरिक बड़े पैमाने के युद्ध जैसा नहीं होगा। इसके बजाय, इसमें स्पेशल फोर्सेज और पैदल सेना की संयुक्त टीमों द्वारा सीमित और टारगेटेड ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं।
इसका मकसद ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना हो सकता है, बिना पूर्ण युद्ध में उतरे।
अगर यह सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, अभी तक अमेरिका या इजरायल की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में इन रिपोर्ट्स को संभावित रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है, न कि अंतिम निर्णय के रूप में।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल Elon Musk एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनकी स्पेस कंपनी SpaceX, जो इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो SpaceX दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो जाएगी और Tesla को भी पीछे छोड़ सकती है। इस उपलब्धि के साथ ही मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने के बेहद करीब पहुंच सकते हैं। फिलहाल उनकी अनुमानित नेटवर्थ 636 अरब डॉलर से अधिक बताई जा रही है। संघर्ष भरा शुरुआती सफर 28 जून 1971 को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में जन्मे मस्क का जीवन शुरुआत से आसान नहीं रहा। कम उम्र में ही उन्होंने तकनीक के प्रति अपनी रुचि दिखा दी थी। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने Blastar नाम का वीडियो गेम बनाया और उसका कोड 500 डॉलर में बेच दिया। 17 साल की उम्र में वह कनाडा पहुंचे, जहां उन्होंने एक लंबर मिल में बॉयलर रूम क्लीनर की नौकरी की। इस काम के दौरान उन्हें हर घंटे 18 डॉलर मिलते थे, लेकिन काम बेहद जोखिम भरा था-हाइपरथर्मिया से बचने के लिए हर 15 मिनट में पोजीशन बदलनी पड़ती थी। इसके बाद मस्क उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, जहां से उनकी असली उद्यमी यात्रा शुरू हुई। बिजनेस की दुनिया में बड़ा मुकाम मस्क ने साल 1999 में X.com की स्थापना की, जो बाद में PayPal का हिस्सा बनी। 2002 में eBay ने PayPal को 1.5 अरब डॉलर में खरीद लिया। उसी साल उन्होंने SpaceX की स्थापना की, जिसने 2008 में इतिहास रचते हुए पहली निजी कंपनी के तौर पर सैटेलाइट को कक्षा में भेजा। इसके अलावा मस्क Tesla, Neuralink और X (formerly Twitter) जैसी कंपनियों का संचालन कर रहे हैं। स्पेसएक्स IPO: क्या बदल जाएगा खेल? अगर SpaceX का IPO 2 ट्रिलियन डॉलर वैल्यूएशन पर सफल होता है, तो यह वैश्विक बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है। कंपनी सीधे तौर पर Apple, Microsoft, Amazon, Alphabet और NVIDIA जैसी दिग्गज कंपनियों की लीग में शामिल हो जाएगी। मस्क की SpaceX में करीब 43% हिस्सेदारी है, जिससे उनकी संपत्ति में जबरदस्त उछाल आ सकता है। मंगल मिशन का सपना मस्क का सबसे बड़ा लक्ष्य इंसानों को मंगल ग्रह पर बसाना है। SpaceX इसी मिशन पर तेजी से काम कर रही है और लगातार नए-नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रही है। करियर टाइमलाइन (संक्षेप में) 1971: प्रिटोरिया, दक्षिण अफ्रीका में जन्म 1983: Blastar गेम बनाया 1999: X.com की स्थापना 2002: PayPal की बिक्री, SpaceX की शुरुआत 2008: SpaceX ने पहला सैटेलाइट लॉन्च किया 2010: Tesla शेयर बाजार में लिस्ट 2022: Twitter का अधिग्रहण (अब X) 2024: Neuralink का पहला मानव ब्रेन इम्प्लांट
मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने एक और अमेरिकी एयरफोर्स के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का दावा: पायलट के बचने की संभावना कम ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी के अनुसार, देश की सेना के मुख्यालय ‘खतम अल-अंबिया’ के प्रवक्ता ने बताया कि F-35 को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि हादसे में पायलट गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके बचने की संभावना बेहद कम है। ईरान की ओर से कुछ तस्वीरें भी जारी की गई हैं, जिनमें कथित तौर पर विमान के मलबे को दिखाया गया है। अमेरिका की ओर से नहीं हुई पुष्टि हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले भी ईरान ने इसी तरह का दावा किया था, जिसे अमेरिका ने खारिज करते हुए कहा था कि विमान सुरक्षित लैंड कर गया था। कितना खतरनाक है F-35? F-35 Lightning II अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर जेट्स में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘स्टील्थ टेक्नोलॉजी’ है, जिससे यह दुश्मन के रडार से लगभग छिपा रहता है। यह विमान दुश्मन के भारी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने, सटीक हमले करने और मल्टी-रोल मिशन को अंजाम देने में सक्षम है। पहले भी हो चुका है ऐसा दावा ईरान इससे पहले 19 मार्च को भी एक F-35 को मार गिराने का दावा कर चुका है। हालांकि उस समय अमेरिका ने साफ कहा था कि विमान ने सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कर ली थी। ऐसे में इस बार भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और दोनों देशों के दावों के बीच सच्चाई की पुष्टि होना बाकी है। बढ़ सकता है वैश्विक तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ा सकता है। इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक राजनीति और कूटनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र में इस अहम समुद्री मार्ग को खोलने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो लगा दिया, जबकि हैरानी की बात यह रही कि नाटो सदस्य फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। क्या था UN में प्रस्ताव? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इस प्रस्ताव में जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने का भी प्रावधान शामिल था, ताकि तेल सप्लाई बहाल की जा सके। रूस-चीन ने क्यों लगाया वीटो? रूस और चीन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। चीन का कहना है कि सैन्य हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ सकते हैं रूस ने ईरान का समर्थन करते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया दोनों देशों का मानना है कि यह प्रस्ताव अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका की सैन्य रणनीति को समर्थन देता है। फ्रांस का विरोध क्यों चौंकाने वाला? सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध कर दिया। फ्रांस, नाटो का सदस्य होने के बावजूद अमेरिका के रुख से अलग नजर आया। इससे यह संकेत मिला कि पश्चिमी देशों के बीच भी इस मुद्दे पर एकजुटता नहीं है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं ट्रंप की रणनीति पर असर? डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र में सैन्य दबाव बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित करना चाहता है। लेकिन UN में वीटो और सहयोगी देशों के मतभेद से: अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है वैश्विक समर्थन कमजोर होता दिख रहा है कूटनीतिक समाधान और मुश्किल हो सकता है आगे क्या? प्रस्ताव के पास होने की संभावना फिलहाल कम दिख रही है तेल बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है बड़े देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है।