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कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने महत्वपूर्ण और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए कई ईरानी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया।

ईरानी ड्रोन हमले की कोशिश नाकाम, कुवैत ने कई ड्रोन हवा में मार गिराए; सैन्य ठिकाने सुरक्षित

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
कुवैत ने ड्रोन मार गिराए
कुवैत की वायु रक्षा कार्रवाई

कुवैत सिटी, एजेंसियां। कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने महत्वपूर्ण और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए कई ईरानी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सभी संदिग्ध ड्रोन समय रहते पहचान लिए गए और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। इस कार्रवाई में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि ड्रोन के मलबे से कुछ स्थानों पर मामूली क्षति हुई है।

 

वायु रक्षा प्रणाली ने तुरंत संभाला मोर्चा

 

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जैसे ही ड्रोन कुवैती हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ते दिखाई दिए, वायु रक्षा इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा गया। इसके बाद रक्षा बलों ने सभी ड्रोन को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि देश के महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठान, सैन्य ठिकाने और रणनीतिक परिसंपत्तियां पूरी तरह सुरक्षित हैं।

 

मध्य पूर्व में बढ़ा सुरक्षा तनाव

 

यह घटना ऐसे समय हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी के कारण देश की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही हाई अलर्ट पर है। हाल के दिनों में क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की आशंकाओं के चलते सुरक्षा उपाय और कड़े किए गए हैं।

 

सतर्कता बढ़ाई, हालात पर नजर

 

कुवैती सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को लगातार निगरानी रखने और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि देश की वायु सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है और भविष्य में किसी भी हमले की कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारत-भूटान विकास सहयोग
भारत-भूटान के बीच ₹4,000 करोड़ की क्रेडिट लाइन, 12 नए विकास प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी

थिम्फू, एजेंसियां। भारत और भूटान ने द्विपक्षीय विकास सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने ₹4,000 करोड़ की रियायती क्रेडिट लाइन के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही भूटान के 13वें पंचवर्षीय योजना के तहत ₹332 करोड़ की लागत वाले 12 नए विकास प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी गई है। दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।   ₹4,000 करोड़ की क्रेडिट लाइन से विकास को मिलेगा बढ़ावा   नई क्रेडिट लाइन का उद्देश्य भूटान में बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े कार्यों को वित्तीय सहायता देना है। भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चल रहे विकास सहयोग में यह समझौता दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।   12 नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च होंगे ₹332 करोड़   भारत और भूटान ने Project Tied Assistance (PTA) के तहत 12 नए विकास प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब ₹332 करोड़ है। दोनों देशों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत पहले से चल रही भारत समर्थित परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की।   स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग   बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई। भारत-भूटान साझेदारी में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। नए समझौतों से इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।   विकास साझेदारी को नई मजबूती   भारत और भूटान के बीच विकास सहयोग दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। 13वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भारत ने भूटान के विकास के लिए करीब ₹10,000 करोड़ की सहायता का प्रावधान किया है। नए प्रोजेक्ट्स और क्रेडिट लाइन से भूटान की विकास योजनाओं को गति मिलने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद है।

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पोलैंड में रूसी मिसाइल गिरने के बाद नाटो अलर्ट
रूसी क्रूज मिसाइल के पोलैंड में गिरने के बाद नाटो अलर्ट, एफ-16 लड़ाकू विमान गश्त पर तैनात

वारसॉ (पोलैंड), एजेंसियां। पोलैंड की सीमा के भीतर रूसी क्रूज मिसाइल गिरने की घटना के बाद नाटो ने तत्काल अपनी वायु सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय कर दी। गठबंधन ने एफ-16 लड़ाकू विमानों को गश्त पर भेजा और पूर्वी यूरोप के हवाई क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी। यह घटना रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।   पोलैंड ने रूस के राजदूत को किया तलब   पोलैंड सरकार ने घटना के बाद रूस के राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने इसे देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने की मांग की। प्रारंभिक जांच के अनुसार, पोलैंड में गिरा हथियार रूस की ख-101 (Kh-101) क्रूज मिसाइल प्रतीत होता है।   नाटो ने बढ़ाई हवाई निगरानी   घटना के तुरंत बाद नाटो ने एफ-16 लड़ाकू विमानों के साथ अन्य हवाई सुरक्षा संसाधनों को भी सक्रिय कर दिया। गठबंधन ने स्पष्ट किया कि सदस्य देशों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और पूर्वी सीमा पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन इसे नाटो की सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।   रूस-यूक्रेन युद्ध का असर नाटो सीमा तक पहुंचा   विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के नाटो सदस्य देशों तक फैलने के बढ़ते जोखिम को दर्शाती है। नाटो ने सभी सदस्य देशों के साथ समन्वय बढ़ाने और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सतर्क रहने का भरोसा दिलाया है। इस बीच पोलैंड ने भी अपनी वायु रक्षा प्रणाली और सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने की घोषणा की है।

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एफ-35बी स्टील्थ लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट ने समय रहते लगाई छलांग; जांच शुरू

सैन डिएगो (अमेरिका), एजेंसियां। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित मरीन कॉर्प्स एयर स्टेशन मिरामार के पास अमेरिकी मरीन कॉर्प्स का अत्याधुनिक एफ-35बी स्टील्थ लड़ाकू विमान प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे से ठीक पहले पायलट ने इजेक्ट कर सुरक्षित बाहर निकलने में सफलता पाई। उसे मामूली चोटों के साथ अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई है।   प्रशिक्षण उड़ान के दौरान हुआ हादसा   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एफ-35बी विमान नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। लैंडिंग की तैयारी के दौरान विमान अचानक नियंत्रण खो बैठा और रनवे के पास जमीन से टकराकर आग की लपटों में घिर गया। दुर्घटना के बाद आसपास की झाड़ियों में भी आग लग गई, जिस पर दमकल कर्मियों ने जल्द ही काबू पा लिया।   दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू   अमेरिकी मरीन कॉर्प्स ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस घटना में पायलट के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने विमान के तकनीकी रिकॉर्ड और उड़ान संबंधी सभी पहलुओं की जांच के निर्देश दिए हैं।   दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल है एफ-35बी   एफ-35बी दुनिया के सबसे उन्नत स्टील्थ लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। यह कम दूरी से उड़ान भरने और ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) लैंडिंग करने में सक्षम है। इस विमान की अनुमानित कीमत करीब 109 मिलियन डॉलर (लगभग 900 करोड़ रुपये) है। हालिया दुर्घटना के बाद अमेरिकी रक्षा एजेंसियां विमान की तकनीकी विश्वसनीयता और सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा कर रही हैं।

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