ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश में ऊर्जा संकट एक बार फिर गंभीर होता दिख रहा है। ईंधन और गैस आपूर्ति पर दबाव के बीच बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। सरकार के सामने बढ़ती मांग के साथ बिजली और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने की चुनौती है।
बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था प्राकृतिक गैस पर काफी निर्भर है। गैस की उपलब्धता में कमी आने पर बिजली संयंत्रों के संचालन पर सीधा असर पड़ता है। इसके चलते कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को संतुलित करने के लिए कटौती का सहारा लेना पड़ सकता है।
ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश के लिए तेल और अन्य ईंधन की नियमित आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर आयात पर पड़ सकता है।
सरकार की कोशिश है कि बिजली संयंत्रों को जरूरी ईंधन उपलब्ध कराया जाए और घरेलू उपभोक्ताओं के साथ उद्योगों की जरूरतों को भी पूरा किया जा सके।
ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी बड़ी बाधा का असर बांग्लादेश के औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ सकता है। खासकर कपड़ा और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए लगातार बिजली आपूर्ति महत्वपूर्ण है। बिजली कटौती बढ़ने पर उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
बांग्लादेश सरकार के सामने एक तरफ बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और दूसरी तरफ ईंधन आयात का खर्च नियंत्रित रखने की चुनौती है। आने वाले दिनों में गैस और ईंधन की उपलब्धता यह तय करेगी कि ऊर्जा संकट कितना गंभीर रूप लेता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
बीजिंग, एजेंसियां। चीन के घरेलू स्तर पर विकसित COMAC C919 यात्री विमान ने गुरुवार को अपनी दूसरी अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उड़ान पूरी कर ली। एयर चाइना का C919 बीजिंग से मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुंचा। इससे एक दिन पहले 12 अगस्त को इसी विमान ने पहली नियमित अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उड़ान पूरी की थी। बीजिंग से उलानबटार पहुंचा C919 एयर चाइना की उड़ान CA723 ने गुरुवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:36 बजे बीजिंग से उड़ान भरी और लगभग 1 घंटे 41 मिनट बाद उलानबटार में उतरी। फ्लाइट-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार विमान शाम करीब 5:17 बजे मंगोलिया पहुंचा। C919 की पहली अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उड़ान भी इसी बीजिंग-उलानबटार मार्ग पर 12 अगस्त को हुई थी। एयर चाइना इस रूट पर C919 को नियमित रूप से संचालित करने की योजना बना रही है। बोइंग और एयरबस को चुनौती देने की कोशिश C919 को चीन की सरकारी विमान निर्माता कंपनी COMAC ने विकसित किया है। यह एक नैरो-बॉडी यात्री विमान है, जिसकी क्षमता करीब 174 यात्रियों तक है। इसका आकार और श्रेणी बोइंग 737 और एयरबस A320 जैसे विमानों के समान है। चीन लंबे समय से अपने घरेलू यात्री विमान उद्योग को मजबूत करने और वैश्विक विमानन बाजार में बोइंग तथा एयरबस पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय नियमित उड़ान शुरू होना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश का पहला बड़ा कदम C919 वर्ष 2023 से चीन में घरेलू व्यावसायिक उड़ानें संचालित कर रहा है, लेकिन 12 अगस्त 2026 की उड़ान पहली नियमित अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक सेवा थी। इसके बाद दूसरी अंतरराष्ट्रीय उड़ान पूरी होना विमान के विदेशी परिचालन की दिशा में शुरुआती निरंतरता को दर्शाता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बोइंग और एयरबस को चुनौती देने के लिए COMAC को अभी कई बाधाओं का सामना करना है। C919 को अभी अमेरिका और यूरोप के विमानन नियामकों से व्यापक प्रमाणन नहीं मिला है, जिससे पश्चिमी बाजारों में इसकी पहुंच सीमित बनी हुई है। चीन के एविएशन उद्योग के लिए अहम उपलब्धि C919 की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को चीन के लिए केवल एक नई रूट सेवा के तौर पर नहीं, बल्कि घरेलू विमान निर्माण उद्योग की वैश्विक पहचान बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। एयर चाइना, चाइना ईस्टर्न और चाइना सदर्न के C919 विमानों ने अब तक दर्जनों घरेलू मार्गों पर परिचालन किया है और लाखों यात्रियों को सेवाएं दी हैं।
लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन में इस साल गर्मी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। गुरुवार को पश्चिमी लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसे मौसम विभाग ने 2026 का अब तक का सबसे गर्म दिन बताया है। यह इस साल जून में दर्ज 38°C के पिछले उच्चतम तापमान से भी अधिक है। पांचवीं हीटवेव ने बढ़ाई मुश्किल ब्रिटेन इस साल की पांचवीं हीटवेव की चपेट में है। मौसम विभाग ने इंग्लैंड के बड़े हिस्से के लिए अत्यधिक गर्मी को लेकर एम्बर चेतावनी जारी की है। इस दौरान देश में 36°C या उससे अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। पिछले रिकॉर्ड को छोड़ा पीछे क्यू गार्डन्स में दर्ज 38.1°C तापमान ने इस साल के पिछले 38°C के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, यह ब्रिटेन के अगस्त महीने के 38.5°C के सर्वकालिक रिकॉर्ड से अभी थोड़ा कम है, जो अगस्त 2003 में दर्ज किया गया था। भीषण गर्मी के बीच जंगलों में आग अत्यधिक गर्मी और लंबे समय से जारी शुष्क परिस्थितियों के बीच ब्रिटेन के कई हिस्सों में जंगलों और घास के मैदानों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। वेस्ट मिडलैंड्स में आग से कई घर प्रभावित हुए और कुछ लोगों तथा दमकलकर्मियों को अस्पताल ले जाना पड़ा। सूखे ने बढ़ाई चिंता हीटवेव के साथ ब्रिटेन में सूखे की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। इंग्लैंड के करीब तीन-चौथाई हिस्से में सूखे की स्थिति बताई गई है। अधिकारियों के सामने पानी की उपलब्धता और आग की घटनाओं से निपटने की चुनौती भी बढ़ रही है।
टोक्यो, एजेंसियां। जापान के पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड भारी बारिश ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। चिबा प्रांत में मूसलाधार बारिश के कारण सड़कें और रेलवे लाइनें जलमग्न हो गईं, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है। चिबा में बारिश ने मचाई तबाही टोक्यो से सटे चिबा प्रांत के कई इलाकों में 24 घंटे के भीतर 360 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर रिकॉर्ड बारिश के कारण सड़कें पानी में डूब गईं और घरों में भी पानी घुस गया। प्रशासन ने बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। 4 लोगों की मौत, एक लापता भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। राहत और बचाव अभियान में जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जवानों को भी लगाया गया है। 7 हजार यात्री नारिता एयरपोर्ट पर फंसे बारिश का असर हवाई और रेल यातायात पर भी पड़ा है। नारिता एयरपोर्ट पर करीब 7,000 यात्री फंस गए, जबकि परिवहन सेवाएं बाधित होने के कारण कई यात्रियों को रात एयरपोर्ट या अस्थायी राहत केंद्रों में गुजारनी पड़ी। हजारों घरों की बिजली गुल भारी बारिश के कारण चिबा में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। शुक्रवार सुबह तक 22,000 से ज्यादा घरों में बिजली नहीं थी। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है।