टोक्यो, एजेंसियां। जापान के पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड भारी बारिश ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। चिबा प्रांत में मूसलाधार बारिश के कारण सड़कें और रेलवे लाइनें जलमग्न हो गईं, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है।
टोक्यो से सटे चिबा प्रांत के कई इलाकों में 24 घंटे के भीतर 360 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर रिकॉर्ड बारिश के कारण सड़कें पानी में डूब गईं और घरों में भी पानी घुस गया। प्रशासन ने बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।
भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। राहत और बचाव अभियान में जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जवानों को भी लगाया गया है।
बारिश का असर हवाई और रेल यातायात पर भी पड़ा है। नारिता एयरपोर्ट पर करीब 7,000 यात्री फंस गए, जबकि परिवहन सेवाएं बाधित होने के कारण कई यात्रियों को रात एयरपोर्ट या अस्थायी राहत केंद्रों में गुजारनी पड़ी।
भारी बारिश के कारण चिबा में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। शुक्रवार सुबह तक 22,000 से ज्यादा घरों में बिजली नहीं थी। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
टोक्यो, एजेंसियां। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विवादित कुरील द्वीप समूह के दौरे को लेकर जापान ने रूस के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। जापान लंबे समय से दक्षिणी कुरील द्वीपों पर अपना दावा करता रहा है और इन्हें नॉर्दर्न टेरिटरीज कहता है। रूस इन द्वीपों पर अपना प्रशासनिक नियंत्रण रखता है। इस विवाद के कारण दोनों देशों के बीच संबंधों में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। पुतिन के दौरे पर जापान ने जताई आपत्ति जापानी सरकार ने पुतिन के कुरील द्वीप दौरे को लेकर रूस के समक्ष राजनयिक माध्यम से विरोध दर्ज कराया। टोक्यो का कहना है कि इन द्वीपों पर जापान का संप्रभु दावा है और वहां रूसी राष्ट्रपति की यात्रा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जापान और रूस के बीच यह क्षेत्रीय विवाद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चला आ रहा है। खासकर इटुरुप, कुनाशिर, शिकोटान और हाबोमाई द्वीपों को लेकर दोनों देशों के दावे आमने-सामने हैं। कुरील विवाद क्यों है इतना अहम? कुरील द्वीप जापान के उत्तरी हिस्से और रूस के सुदूर पूर्व के बीच स्थित हैं। इनका सामरिक महत्व काफी ज्यादा है। यहां से प्रशांत महासागर और ओखोत्स्क सागर के बीच समुद्री मार्गों पर नजर रखना संभव है। जापान इन द्वीपों को अपना उत्तरी क्षेत्र मानता है, जबकि रूस का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन पर उसका अधिकार स्थापित हुआ था। रूस-जापान रिश्तों पर फिर बढ़ सकता है तनाव पुतिन का दौरा ऐसे समय हुआ है जब रूस और जापान के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद जापान ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं और पश्चिमी देशों के साथ मिलकर मॉस्को पर दबाव बढ़ाया है। कुरील द्वीपों को लेकर नया विवाद दोनों देशों के बीच पहले से कमजोर हो चुके राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को और प्रभावित कर सकता है। शांति संधि का मुद्दा भी अटका कुरील द्वीप विवाद के कारण रूस और जापान अब तक द्वितीय विश्व युद्ध की औपचारिक शांति संधि पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लंबे समय तक बातचीत होती रही, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रस्तावित नई दिल्ली दौरे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है। हालांकि, अभी उनकी भारत यात्रा की अंतिम तारीख तय नहीं हुई है। बांग्लादेश सरकार के अनुसार, यात्रा का कार्यक्रम प्रधानमंत्री की उपलब्धता और दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति पर निर्भर करेगा। भारत ने द्विपक्षीय दौरे के लिए दिया निमंत्रण भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा उन्हें सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में BIMSTEC के अध्यक्ष के तौर पर शामिल होने का निमंत्रण भी मिला है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी पुष्टि की है। द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने पर जोर भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बीच हाल में हुई मुलाकात में दोनों देशों के आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। तारिक रहमान ने भारत के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया है। शेख हसीना का मुद्दा बना अहम दोनों देशों के रिश्तों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में रहना और उनके प्रत्यर्पण की बांग्लादेश की मांग सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है। ढाका लगातार इस मामले में भारत से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद जता रहा है। हालिया बातचीत में भारत की ओर से हसीना को भारत की जमीन से राजनीतिक गतिविधियां करने की अनुमति दिए जाने को लेकर भी बांग्लादेश ने आपत्ति जताई है। अभी यात्रा को लेकर अंतिम फैसला बाकी बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा है कि भारत यात्रा को लेकर सरकार सकारात्मक है, लेकिन अभी कुछ भी अंतिम नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दौरे की तारीख दोनों देशों के बीच चर्चा और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय होगी।
मॉस्को, एजेंसियां। रूस, जो दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में शामिल है, अब घरेलू ईंधन की कमी को पूरा करने के लिए पहली बार भारत से पेट्रोल आयात कर रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों से रूस की कई तेल रिफाइनरियों का संचालन प्रभावित हुआ है, जिसके बाद घरेलू बाजार में पेट्रोल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। 5 अगस्त को पहुंची भारत से पहली खेप Kpler के आंकड़ों के अनुसार, भारत से पेट्रोल की पहली खेप 5 अगस्त 2026 को रूस पहुंची। यह पेट्रोल भारत की Nayara Energy से भेजा गया था। रूस के लिए यह कदम इसलिए खास है क्योंकि वह सामान्य परिस्थितियों में पेट्रोल का बड़ा निर्यातक रहा है। यूक्रेनी हमलों से रिफाइनिंग क्षमता पर असर यूक्रेन ने हाल के दिनों में रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले तेज किए हैं। 11 अगस्त को रूस की Orsk रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद वहां रिफाइनिंग गतिविधियां रुकने की जानकारी भी सामने आई। इस रिफाइनरी की क्षमता करीब 1.15 लाख बैरल प्रतिदिन है। रूस ने पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर लगाई रोक घरेलू बाजार में ईंधन की कमी को देखते हुए रूस ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध भी लगाया है। रिपोर्टों के अनुसार, देश के कई क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी और ईंधन आपूर्ति संबंधी प्रतिबंध सामने आए हैं। ऐसे समय में भारत से पेट्रोल खरीदना रूस के लिए एक असामान्य लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर? भारत लंबे समय से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है और उसे अपनी रिफाइनरियों में पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों में बदलता है। अब रूस का भारत से तैयार पेट्रोल खरीदना वैश्विक ऊर्जा व्यापार में एक दिलचस्प बदलाव है। इससे यह भी पता चलता है कि यूक्रेन के हमलों का असर रूस की रिफाइनिंग और घरेलू ईंधन आपूर्ति तक पहुंच गया है।