रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच CBI से कराने की मांग को लेकर जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है।
प्रार्थी बसंत प्रसाद की ओर से दाखिल याचिका में खास तौर पर 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में परीक्षा में बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार और पैसे लेकर पद दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि इससे योग्य और मेधावी अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ा है।
हालांकि, अधिवक्ता अमर्त्य के मुताबिक याचिका अभी दाखिल हुई है। हाईकोर्ट की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होती है या नहीं।
याचिका में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है। प्रार्थी ने TDPL के माध्यम से आयोजित JPSC और JSSC की सभी परीक्षाओं की CBI जांच कराने की मांग की है, ताकि कथित अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की जांच हो सके।
याचिकाकर्ता ने मौजूदा CID जांच को पर्याप्त नहीं बताते हुए जांच CBI को सौंपने की मांग की है। याचिका में प्रभावशाली लोगों के संभावित संलिप्त होने की आशंका जताई गई है और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की जरूरत बताई गई है।
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के बैनर तले छात्र करीब 20 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार 14वीं JPSC PT परीक्षा, 2023 और 2025 बैकलॉग परीक्षा को रद्द करने पर सहमति जता चुकी है, लेकिन छात्रों की मांग इससे आगे है।
छात्र TDPL के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि CID जांच से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं होगी।
छात्रों के मुताबिक TDPL द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में एक ही अभ्यर्थी के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। 9 अगस्त को सरकार और छात्रों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन इसके बाद अब तक दोनों पक्षों के बीच कोई नई वार्ता नहीं हो पाई है। ऐसे में हाईकोर्ट में दाखिल PIL के बाद JPSC-JSSC विवाद को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चक्रधरपुर: स्वतंत्रता दिवस और उसके आसपास यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए दक्षिण-पूर्व रेलवे ने ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने का फैसला किया है। लंबी वेटिंग लिस्ट और कंफर्म टिकट को लेकर यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए 15 से 21 अगस्त के बीच 10 प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जायेंगे। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को अधिक सीटें उपलब्ध होंगी और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। रेलवे के अनुसार, यात्रियों की मांग और ट्रेनों में बढ़ते दबाव को देखते हुए अलग-अलग तिथियों में अतिरिक्त कोच लगाए जायेंगे। इनमें स्लीपर, एसी स्लीपर और चेयर कार श्रेणी के कोच शामिल हैं। इन ट्रेनों में लगेंगे अतिरिक्त कोच 12837 हावड़ा-पुरी एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त 3-टीयर स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 12883 रूपसी बंगला एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त चेयर कार कोच की सुविधा मिलेगी। 12884 पुरुलिया-हावड़ा रूपसी बंगला एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त चेयर कार कोच लगाया जायेगा। 18030 शालीमार-मुंबई एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त एसी और नॉन-एसी स्लीपर कोच जोड़े जायेंगे। 18039 शालीमार-पुरी एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त नॉन-एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18045 शालीमार-चारलपल्ली एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त स्लीपर कोच की सुविधा दी जायेगी। 18063 येलाहांका एसी एक्सप्रेस: 20 अगस्त को अतिरिक्त एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18107 राउरकेला-जगदलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस: 15 और 16 अगस्त को अतिरिक्त एसी स्लीपर कोच जोड़ा जायेगा। 18603 रांची-गोड्डा एक्सप्रेस: 15, 18 और 20 अगस्त को अतिरिक्त नॉन-एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18641 हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस: 18 अगस्त को अतिरिक्त 3-टीयर स्लीपर कोच की सुविधा मिलेगी। वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा राहत स्वतंत्रता दिवस के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। छुट्टियों और त्योहारों के कारण कई ट्रेनों में पहले से ही लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। ऐसे में अतिरिक्त कोच लगने से ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और अधिक यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सकेगा। रेलवे के इस फैसले से खासकर झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को सलाह दी गयी है कि यात्रा से पहले अपने टिकट और ट्रेन की स्थिति की जानकारी रेलवे के आधिकारिक माध्यम से जरूर जांच लें, क्योंकि अतिरिक्त कोच की तारीख और उपलब्धता ट्रेन के अनुसार अलग-अलग है।
रांची: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को रांची में कई संस्थानों और सेवाओं की व्यवस्था बदली रहेगी। सरकारी कार्यालय और बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, जबकि स्कूलों में नियमित कक्षाएं नहीं होंगी। हालांकि कई स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में झंडोत्तोलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन होंगे। वहीं अस्पताल, पुलिस, फायर ब्रिगेड जैसी जरूरी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह को लेकर शहर में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। खासकर मोरहाबादी मैदान और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक निर्देशों का पालन करना होगा। सरकारी कार्यालयों में नहीं होगा सामान्य कामकाज 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। जिला प्रशासन, सरकारी विभागों और अन्य सरकारी संस्थानों में सामान्य कामकाज नहीं होगा। हालांकि स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित कार्यक्रमों में अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। सरकारी काम से जुड़े लोगों को किसी जरूरी कार्य के लिए अगले कार्यदिवस तक इंतजार करना पड़ सकता है। बैंक शाखाएं भी रहेंगी बंद 15 अगस्त को बैंक शाखाओं में भी सामान्य कामकाज नहीं होगा। ग्राहक बैंक जाकर नकद जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, पासबुक अपडेट और अन्य शाखा आधारित सेवाओं का लाभ नहीं ले सकेंगे। हालांकि UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है। किसी जरूरी बैंकिंग काम के लिए लोगों को डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करना सुविधाजनक रहेगा। स्कूलों में नहीं होंगी नियमित कक्षाएं स्वतंत्रता दिवस के कारण 15 अगस्त को स्कूलों में नियमित पढ़ाई नहीं होगी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी स्कूल पूरी तरह बंद रहेंगे। अधिकांश शिक्षण संस्थानों में सुबह झंडोत्तोलन, राष्ट्रगान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण और देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किये जा सकते हैं। छात्रों को अपने स्कूल की ओर से जारी सूचना के अनुसार कार्यक्रम में शामिल होना होगा। कॉलेजों में भी हो सकते हैं विशेष कार्यक्रम रांची के कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेष आयोजन किये जा सकते हैं। कई संस्थानों में झंडोत्तोलन के साथ छात्र-छात्राओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इसलिए कॉलेज जाने वाले छात्रों को अपने संस्थान की ओर से जारी कार्यक्रम और समय की जानकारी पहले से देख लेना चाहिए। बाजार और मॉल खुलेंगे या बंद? जानिए स्थिति रांची के बाजारों, दुकानों और मॉल को लेकर पूरे शहर में एक जैसी बंदी का आदेश नहीं है। इसलिए 15 अगस्त को सभी बाजार और मॉल बंद रहेंगे, ऐसा कहना सही नहीं होगा। कई निजी दुकानें और प्रतिष्ठान अपने स्तर पर छुट्टी या अलग समय तय कर सकते हैं। वहीं कुछ बाजार और मॉल सामान्य समय के अनुसार भी संचालित हो सकते हैं। ऐसे में जिस बाजार या मॉल में जाने की योजना है, वहां की स्थानीय जानकारी पहले से ले लेना बेहतर रहेगा। अस्पताल और जरूरी सेवाएं रहेंगी चालू छुट्टी के बावजूद अस्पताल और अन्य आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी। सरकारी और निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा पुलिस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी जरूरत के अनुसार काम करती रहेंगी। किसी आपात स्थिति में लोगों को इन सेवाओं के लिए अगले कार्यदिवस का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मोरहाबादी मैदान के आसपास ट्रैफिक पर नजर 15 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया जायेगा। समारोह में झंडोत्तोलन, परेड और अन्य कार्यक्रम होंगे। इसे देखते हुए मोरहाबादी और आसपास के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किये जा रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल भी किया जा चुका है। JPSC-JSSC की तिरंगा यात्रा से भी बढ़ेगा ट्रैफिक दबाव 15 अगस्त को रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की ओर से तिरंगा यात्रा निकालने का भी प्रस्ताव है। आयोजकों के अनुसार यात्रा सुबह 7 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होकर कचहरी चौक, न्यूक्लियस मॉल, प्लाजा चौक और फिरायालाल चौक होते हुए वापस स्टेडियम पहुंचने की योजना है। हालांकि इस यात्रा के प्रस्तावित रूट को प्रशासन की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। इसलिए 15 अगस्त को शहर में निकलने वाले लोगों को अंतिम ट्रैफिक एडवाइजरी का इंतजार करना चाहिए। घर से निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान 15 अगस्त को रांची में निकलने से पहले संबंधित बाजार, बैंक या संस्थान के खुलने की जानकारी जरूर ले लें। मोरहाबादी और शहर के प्रमुख चौक-चौराहों की ओर जाने वाले लोग ट्रैफिक पुलिस के अंतिम रूट चार्ट और डायवर्जन की जानकारी देखकर ही यात्रा करें। कुल मिलाकर, 15 अगस्त को सरकारी कार्यालय और बैंक बंद रहेंगे, स्कूलों में नियमित कक्षाएं नहीं होंगी, जबकि अस्पताल और जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी। बाजार और मॉल के लिए फिलहाल पूरे शहर में एक समान बंदी का आदेश नहीं है। वहीं स्वतंत्रता दिवस समारोह और तिरंगा यात्रा के कारण शहर के कुछ हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था बदली रह सकती है।
धनबाद। झारखंड के धनबाद में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के कांडालागा गांव में पुलिस ने छापेमारी कर करीब 25 लाख रुपये की नकली अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप बरामद की है। शराब को एक घर के पीछे बने बकरी शेड में छिपाकर रखा गया था। 335 पेटियों में मिली 16,080 बोतलें वरीय पुलिस अधीक्षक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर बरवाअड्डा पुलिस ने बुधवार देर शाम मरिचो पंचायत के कांडालागा गांव में कार्रवाई की। पुलिस टीम ने सुनील रजक के घर के पीछे बने बकरी शेड की तलाशी ली। तलाशी के दौरान पुलिस को 335 पेटियों में पैक कुल 16,080 बोतल नकली अंग्रेजी शराब मिली। पुलिस के अनुसार, जब्त शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 25 लाख रुपये है। बिहार भेजने की थी तैयारी प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शराब की इस खेप को दूसरे राज्य, खासकर बिहार में भेजने की तैयारी थी। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी सुनील रजक मौके से फरार हो गया। पुलिस अब फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां से लाई गई थी और इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच गुरुवार को बरवाअड्डा थाना में मुख्यालय-1 डीएसपी कुमार बिनोद ने प्रेसवार्ता कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बरामद शराब की जांच कराई जा रही है। पुलिस शराब की सप्लाई और तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि मामले में फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद शराब के स्रोत और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।