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Nitish’s signals spark BJP pressure buzz in Bihar

क्या सम्राट चौधरी को आगे कर बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं नीतीश? बिहार की राजनीति में नई रणनीति पर चर्चा तेज

surbhi मार्च 20, 2026 0
Nitish Kumar and Samrat Choudhary during a political meeting in Bihar
Nitish Kumar Samrat Choudhary Bihar Politics

बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लगातार सम्राट चौधरी को लेकर दिए जा रहे संकेतों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज राजनीतिक संदेश है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है?

क्या बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के बयान बीजेपी के अंदरूनी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं।

अगर बीजेपी सम्राट चौधरी को आगे नहीं बढ़ाती है, तो इससे कुशवाहा वोट बैंक में नाराजगी की आशंका बन सकती है। वहीं अगर उन्हें आगे किया जाता है, तो इसका श्रेय भी नीतीश कुमार ले सकते हैं। ऐसे में दोनों ही परिस्थितियों में जदयू को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

बीजेपी के लिए ‘धर्मसंकट’ की स्थिति

यह मामला बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी खुलकर यह भी नहीं कह पा रही कि उसका मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है और सही समय का इंतजार कर रही है, ताकि राजनीतिक समीकरणों के अनुसार फैसला लिया जा सके।

‘लव-कुश’ समीकरण साधने की कोशिश?

राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का संदेश देना चाहते हैं।

सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाकर वे यह दिखाना चाहते हैं कि इस सामाजिक एकता में उनकी अहम भूमिका है, जो आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है।

क्या दोहराई जाएगी सुशील कुमार मोदी जैसी कहानी?

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कहीं सम्राट चौधरी की स्थिति भी दिवंगत सुशील कुमार मोदी जैसी न हो जाए।

2005 के बाद जदयू-भाजपा गठबंधन में सुशील मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी काफी मजबूत मानी जाती थी। लेकिन बाद में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ समीकरण बदलने पर सुशील मोदी को राज्य की राजनीति से हटाकर दिल्ली भेज दिया गया था।

गृह मंत्री के तौर पर प्रदर्शन पर भी सवाल

सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर कई बार विपक्ष ने सरकार को घेरा है।

हालांकि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे यह संकेत भी मिलता है कि राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्हें फिलहाल खुला समर्थन दिया जा रहा है।

आगे क्या?

बिहार की राजनीति में यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकता है।

क्या यह रणनीति बीजेपी को दबाव में लाने के लिए है, या फिर गठबंधन की मजबूती दिखाने का प्रयास-इसका जवाब आने वाले दिनों में ही साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है और सभी की नजरें अगले बड़े फैसले पर टिकी हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार बोर्ड ने इंटर कंपार्टमेंट परीक्षा आवेदन की तारीख बढ़ाई, छात्रों को मिला आखिरी मौका

पटना, एजेंसियां। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इंटरमीडिएट यानी 12वीं के छात्रों के लिए बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने कंपार्टमेंटल और विशेष परीक्षा 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दी है। ऐसे छात्र जो एक या दो विषयों में फेल हो गए हैं या अपने अंक सुधारना चाहते हैं, उनके लिए यह अंतिम मौका माना जा रहा है। इस साल बिहार बोर्ड 12वीं की परीक्षा 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में कुल 13.17 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें 6.75 लाख छात्राएं और 6.42 लाख छात्र थे। बोर्ड ने 23 मार्च 2026 को परिणाम जारी किया था, जिसमें कुल 85.19 प्रतिशत छात्र पास हुए थे।   किसके लिए है कंपार्टमेंट और विशेष परीक्षा? कंपार्टमेंटल परीक्षा उन छात्रों के लिए होती है जो एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण हो गए हैं। इस परीक्षा के जरिए छात्र अपना साल बचा सकते हैं। वहीं, विशेष परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है, जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे। दोनों परीक्षाओं का उद्देश्य छात्रों को दूसरा अवसर देना है।   आवेदन शुल्क और प्रक्रिया बोर्ड के अनुसार, सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क 260 रुपये रखा गया है, जबकि कंपार्टमेंटल आवेदन शुल्क 150 रुपये तय किया गया है। आवेदन केवल स्कूल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा।   ऐसे करें आवेदन छात्रों को अपने स्कूल के जरिए intermediate.biharboardonline.com वेबसाइट पर जाना होगा। वहां कंपार्टमेंट परीक्षा लिंक पर क्लिक कर रोल कोड, रोल नंबर और जरूरी जानकारी भरनी होगी। इसके बाद निर्धारित शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करना होगा।

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CM पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार रहेंगे हाई सिक्योरिटी में

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेतों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम अपडेट सामने आया है। खबर है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि उनका सुरक्षा घेरा और मजबूत किया जाएगा। मौजूदा समय में उन्हें मुख्यमंत्री होने के नाते SSG सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन इस्तीफे के बाद उन्हें Z+ श्रेणी की अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जाएगी। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा की ओर से आदेश जारी किए जाने की खबर है।   सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके लिए उनके 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की आधिकारिक तारीख अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बिहार की सियासत में इसे बड़े नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।   MLC पद छोड़ चुके, अब नजर CM कुर्सी पर नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। यह कदम उनके राज्यसभा जाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री आवास छोड़ने के बाद वे किसी दूसरे सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है।   चारों सदनों के सदस्य बनने की ओर बड़ा कदम अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—चारों सदनों का हिस्सा रह चुके हैं। फिलहाल, उनकी सुरक्षा और राजनीतिक भूमिका—दोनों को लेकर बिहार में हलचल तेज है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

पटना/नालंदा, 31 मार्च 2026: बिहार के नालंदा जिले में स्थित Sheetla Temple में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक धार्मिक आयोजन के दौरान भारी भीड़ उमड़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 8 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। क्या हुआ था घटनास्थल पर? मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। भीड़ इतनी अधिक हो गई कि हालात बेकाबू हो गए और अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और दबने से यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ गई। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मौके से सामने आई तस्वीरों में मंदिर परिसर में भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल साफ देखा जा सकता है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पिछले साल Sri Venkateswara Swamy Temple में भी भगदड़ में 9 लोगों की मौत हो गई थी। बड़ा सवाल: सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठ रहे सवाल? यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते।  

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