जानकारी के अनुसार, कई जिलों में आवश्यक दस्तावेज और वेतन संबंधी विपत्र समय पर जमा नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया अटकी हुई है।
इसे गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को अंतिम चेतावनी जारी की है। निर्देश में कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित दस्तावेज जिला कार्यालय में उपलब्ध कराए जाएं।
यदि तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा नहीं किए गए, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने बताया कि मई और जून 2026 में भी सभी प्रखंडों को आवश्यक दस्तावेज भेजने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बावजूद कई स्थानों से अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण हजारों शिक्षकों का वेतन और DA की अंतर राशि लंबित है।
अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, कई प्रखंडों से वेतन स्वीकृति से जुड़े आवश्यक विपत्र और अन्य दस्तावेज समय पर जिला कार्यालय नहीं भेजे गए।
जब तक ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक वेतन और DA भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। इसलिए सभी BEO को समयबद्ध तरीके से आवश्यक कागजात भेजने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से भी अपील की है कि वे बिना आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए सीधे जिला कार्यालय में आवेदन न दें।
पहले संबंधित प्रखंड स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूरी करें, उसके बाद ही मामला जिला कार्यालय भेजें। इससे भुगतान प्रक्रिया में तेजी आएगी और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।
हालांकि फिलहाल कार्रवाई जिला स्तर पर तेज की गई है, लेकिन इसका असर पूरे बिहार में देखने को मिल सकता है।
राज्य के कई जिलों में TRE-1, TRE-2, TRE-3 और विशिष्ट शिक्षकों के वेतन एवं DA भुगतान से जुड़े मामले लंबित हैं। शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद उम्मीद है कि लंबित फाइलों का तेजी से निपटारा होगा और हजारों शिक्षकों के खातों में जल्द वेतन तथा DA की अंतर राशि भेजी जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वेतन भुगतान में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि विभाग ने भुगतान की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन दस्तावेज पूरे होने के बाद भुगतान प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मानसून के सक्रिय रहने के बीच मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए बारिश और आंधी-वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 7 अगस्त के पूर्वानुमान के अनुसार आज और 8 अगस्त को राज्य में गरज-चमक और आंधी की स्थिति बन सकती है। वहीं 9 और 10 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कई दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार बिहार में अगले कई दिनों तक मौसम सक्रिय रहने वाला है। 7 और 8 अगस्त को आंधी-वज्रपात की चेतावनी है, जबकि 9 और 10 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इसके बाद भी 11 से 13 अगस्त तक गरज-चमक और आंधी की स्थिति बनी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के ताजा अलर्ट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। आंधी और बिजली गिरने के दौरान सावधानी जरूरी बारिश के साथ आंधी और बिजली गिरने की स्थिति में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। खेतों में काम करने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तेज हवा के दौरान पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर संरचनाओं के आसपास खड़े होने से बचना भी जरूरी है। किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण मौसम अपडेट मानसून की सक्रियता से राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इससे खरीफ फसलों को फायदा मिल सकता है, लेकिन लगातार तेज बारिश होने पर निचले इलाकों में जलजमाव और खेतों में पानी भरने की समस्या भी पैदा हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
पटना: बिहार के लाखों नियोजित, बीपीएससी चयनित (TRE-1, TRE-2, TRE-3) और विशिष्ट शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से लंबित वेतन और महंगाई भत्ता (DA) की अंतर राशि के भुगतान को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि लंबित मामलों का जल्द निपटारा कर योग्य शिक्षकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। शिक्षा विभाग ने जारी किया अंतिम अल्टीमेटम जानकारी के अनुसार, कई जिलों में आवश्यक दस्तावेज और वेतन संबंधी विपत्र समय पर जमा नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया अटकी हुई है। इसे गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को अंतिम चेतावनी जारी की है। निर्देश में कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित दस्तावेज जिला कार्यालय में उपलब्ध कराए जाएं। यदि तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा नहीं किए गए, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। पहले भी दिए गए थे निर्देश शिक्षा विभाग ने बताया कि मई और जून 2026 में भी सभी प्रखंडों को आवश्यक दस्तावेज भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई स्थानों से अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण हजारों शिक्षकों का वेतन और DA की अंतर राशि लंबित है। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आखिर भुगतान क्यों रुका? विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, कई प्रखंडों से वेतन स्वीकृति से जुड़े आवश्यक विपत्र और अन्य दस्तावेज समय पर जिला कार्यालय नहीं भेजे गए। जब तक ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक वेतन और DA भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। इसलिए सभी BEO को समयबद्ध तरीके से आवश्यक कागजात भेजने का निर्देश दिया गया है। शिक्षकों को भी दी गई अहम सलाह शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से भी अपील की है कि वे बिना आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए सीधे जिला कार्यालय में आवेदन न दें। पहले संबंधित प्रखंड स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूरी करें, उसके बाद ही मामला जिला कार्यालय भेजें। इससे भुगतान प्रक्रिया में तेजी आएगी और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा। पूरे बिहार के शिक्षकों को क्या होगा फायदा? हालांकि फिलहाल कार्रवाई जिला स्तर पर तेज की गई है, लेकिन इसका असर पूरे बिहार में देखने को मिल सकता है। राज्य के कई जिलों में TRE-1, TRE-2, TRE-3 और विशिष्ट शिक्षकों के वेतन एवं DA भुगतान से जुड़े मामले लंबित हैं। शिक्षा विभाग की सख्ती के बाद उम्मीद है कि लंबित फाइलों का तेजी से निपटारा होगा और हजारों शिक्षकों के खातों में जल्द वेतन तथा DA की अंतर राशि भेजी जाएगी। शिक्षा विभाग का साफ संदेश विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वेतन भुगतान में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। हालांकि विभाग ने भुगतान की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन दस्तावेज पूरे होने के बाद भुगतान प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई गई है।
पटना। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला पत्रकार ने उनसे शादी को लेकर सवाल पूछा। सवाल सुनते ही निशांत कुमार मुस्कुरा दिए, लेकिन बिना कोई जवाब दिए आगे बढ़ गए। उनका यही रिएक्शन अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम के दौरान पूछा गया निजी सवाल गुरुवार को निशांत कुमार आईजीआईएमएस में कई आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान एक महिला पत्रकार ने कहा कि वह ऐसा सवाल पूछना चाहती हैं जो सोशल मीडिया पर ट्रेंड करेगा। इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या मार्च महीने में उनकी शादी होने वाली है। मुस्कुराए, लेकिन नहीं दिया कोई जवाब शादी से जुड़ा सवाल सुनते ही स्वास्थ्य मंत्री मुस्कुराए और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए वहां से आगे बढ़ गए। उनके इस अंदाज पर मौके पर मौजूद अधिकारी और पत्रकार भी मुस्कुरा उठे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। मार्च 2026 में रखी थी सक्रिय राजनीति में कदम निशांत कुमार, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश Kumar के बेटे हैं। लंबे समय तक राजनीति से दूर रहने के बाद उन्होंने मार्च 2026 में जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता लेकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया। मई 2026 में बने स्वास्थ्य मंत्री 7 मई 2026 को बिहार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। उस समय उनके उपमुख्यमंत्री बनने की भी चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में उन्होंने यह पद नहीं लिया। वर्तमान में वह राज्य के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। शादी को लेकर लगती रही हैं अटकलें 45 वर्षीय निशांत कुमार अब तक अविवाहित हैं। इसी वजह से समय-समय पर उनकी शादी को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि आईजीआईएमएस में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। केवल उनकी मुस्कान ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।