पटना: बिहार में नए राशन कार्ड बनाने के बड़े अभियान को लेकर अब विभागीय अधिकारियों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। राज्य में 11,04,425 नए राशन कार्ड जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने इस लक्ष्य और इसे पूरा करने के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों पर सवाल उठाए हैं।
संघ का कहना है कि अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन दिए बिना इतना बड़ा लक्ष्य सौंप दिया गया है। इसी के विरोध में आपूर्ति विभाग से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध करेंगे। अगर मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।
बिहार आपूर्ति सेवा संघ के मुताबिक, पहले चरण में 20 से 26 अगस्त तक अधिकारी और कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इस दौरान विभागीय काम पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा।
अगर सरकार की ओर से मांगों पर कोई समाधान नहीं निकलता है तो संघ सामूहिक अवकाश का कदम उठा सकता है। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो पूर्ण हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
संघ ने आंदोलन की जानकारी खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के साथ मुख्य सचिव और संबंधित मंत्री को भी दी है।
आपूर्ति सेवा संघ के अध्यक्ष श्रीराम मिश्रा ने दावा किया है कि नए राशन कार्ड का लक्ष्य जमीनी सर्वे के बजाय एक गणितीय गणना के आधार पर तय किया गया है।
संघ के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बिहार में लाभुकों की अधिकतम सीमा करीब 8.71 करोड़ है। इनमें लगभग 8.24 करोड़ लोग पहले से योजना के दायरे में हैं। इस हिसाब से करीब 46.93 लाख लाभुकों की जगह बचती है।
इसी संख्या को औसत परिवार के आकार 4.25 से विभाजित करने पर करीब 11.04 लाख नए राशन कार्ड का आंकड़ा निकाला गया है। अधिकारियों का सवाल है कि पुराने जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर तय सीमा को आज की वास्तविक स्थिति से कैसे जोड़ा जा सकता है।
संघ ने राशन कार्ड अभियान के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि कई आपूर्ति कार्यालयों में पर्याप्त कंप्यूटर, स्कैनर और इंटरनेट सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा आवेदनों की जांच और फील्ड वेरिफिकेशन के लिए पर्याप्त सरकारी वाहन नहीं मिलने की बात भी कही गई है।
संघ का दावा है कि दस्तावेजों की जांच, प्रिंटिंग और फील्ड विजिट जैसे कामों में अधिकारियों को अपने स्तर पर खर्च करना पड़ रहा है। इसके लिए प्रति कार्ड करीब 250 से 300 रुपये तक का खर्च आने का दावा किया गया है।
आपूर्ति अधिकारियों ने अधिकारियों की निगरानी को लेकर की गई कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है। संघ के मुताबिक, 17 जुलाई को CUG नंबर पर कॉल रिसीव नहीं होने या GPS की लाइव लोकेशन उपलब्ध नहीं होने के आधार पर कई अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटा गया।
संघ का कहना है कि फील्ड में काम करने के दौरान नेटवर्क और तकनीकी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में पहले पर्याप्त तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए और उसके बाद जवाबदेही तय होनी चाहिए।
फिलहाल 20 से 26 अगस्त तक के काला बिल्ला विरोध के दौरान सामान्य कामकाज जारी रखने की बात कही गई है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि बिहार में राशन कार्ड बनना बंद हो गया है।
हालांकि, अगर आंदोलन आगे बढ़कर सामूहिक अवकाश या पूर्ण हड़ताल में बदलता है तो नए राशन कार्ड के आवेदन, दस्तावेजों की जांच, फील्ड वेरिफिकेशन और मंजूरी की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार और आपूर्ति सेवा संघ के बीच बातचीत से विवाद का समाधान निकलता है या आंदोलन आगे बढ़ता है। फिलहाल 11 लाख से ज्यादा नए राशन कार्ड बनाने के लक्ष्य के बीच अधिकारियों का विरोध सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना: बिहार में किसानों को खाद की उपलब्धता आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने उर्वरक की बिक्री और वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को उर्वरक कंपनियों, एजेंसियों, थोक और खुदरा विक्रेताओं के साथ बैठक कर कई अहम निर्देश जारी किए। नए नियमों के तहत अब खुदरा उर्वरक विक्रेता थोक बिक्री का लाइसेंस और थोक विक्रेता खुदरा बिक्री का लाइसेंस ले सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे खाद की सप्लाई और वितरण व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को निर्धारित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। खुदरा और थोक विक्रेताओं को मिल सकेगा दोनों लाइसेंस मीठापुर स्थित कृषि भवन में हुई बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि अच्छे और सक्रिय उर्वरक विक्रेताओं की पहचान कर उन्हें लाइसेंस प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए कंपनियों से ऐसे विक्रेताओं की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि बिक्री के दोनों लाइसेंस उपलब्ध होने से उर्वरक की आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी होगी और किसानों को खाद के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा। खाद की टैगिंग पर पूरी तरह रोक सरकार ने उर्वरक कंपनियों को टैगिंग नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यानी किसानों या विक्रेताओं पर किसी दूसरे उत्पाद के साथ खाद खरीदने का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा। मंत्री ने यह भी कहा कि उर्वरक प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस में दर्ज उत्पादों के अलावा जिंक, जाइम जैसे टैग्ड उत्पादों की बिक्री नहीं होनी चाहिए। यदि कोई कंपनी होलसेलर या रिटेलर को टैगिंग वाले उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। निर्धारित कीमत से ज्यादा पर खाद बेचने पर कार्रवाई कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में उर्वरक की कमी नहीं है। उनके अनुसार, बिहार में यूरिया मांग से अधिक मात्रा में उपलब्ध है और दूसरे जरूरी उर्वरक भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। उन्होंने साफ किया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद की बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी विक्रेता द्वारा मनमानी कीमत वसूलने या वितरण में गड़बड़ी करने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही करने वाले विक्रेताओं का लाइसेंस होगा रद्द सरकार ने निष्क्रिय और नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर भी सख्ती का संकेत दिया है। विभाग के अनुसार, यदि कोई विक्रेता लाइसेंस लेने के बाद खाद वितरण में अनियमितता करता है या तय नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इससे खाद की कालाबाजारी और मनमाने तरीके से वितरण पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी। खाद की गुणवत्ता जांच भी होगी मजबूत सरकार ने उर्वरक की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने का फैसला किया है। इसके लिए खाद के नमूनों की जांच व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 5 सितंबर तक 15 दिनों का समय दिया गया है। तय समय के बाद नियमों का उल्लंघन मिलने पर लाइसेंस रद्द करने समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसानों के लिए क्या बदलेगा? खाद की उपलब्धता आसान बनाने की कोशिश होगी। खुदरा और थोक विक्रेताओं को दोनों तरह के लाइसेंस मिल सकेंगे। खाद को दूसरे उत्पादों के साथ खरीदने की बाध्यता पर रोक रहेगी। निर्धारित कीमत से ज्यादा पर उर्वरक बेचने पर कार्रवाई होगी। खाद की गुणवत्ता की जांच को और मजबूत किया जाएगा। नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
पटना/सीवान: बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। राज्य सरकार ने अदालत में दाखिल हलफनामे में माना है कि प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने AK-47 से चार राउंड फायर किए थे। हालांकि सरकार का कहना है कि सभी गोलियां हवा में चलाई गई थीं और इस फायरिंग में किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की जानकारी नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि AK-47 से गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। भीड़ में फंस गया था पुलिसकर्मी, तभी हुई फायरिंग राज्य सरकार के मुताबिक, 25 जुलाई को सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच फंस गया। सरकार का दावा है कि भीड़ से खुद को निकालने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी ने AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए। सरकार के अनुसार, इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। तीन प्रदर्शनकारियों के घायल होने पर सरकार ने क्या कहा? सीवान में प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी। इस पर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन लोगों को AK-47 से चली गोलियों से चोट नहीं लगी थी। सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान एक सहायक उपनिरीक्षक ने 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए थे। इसी दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। इस तरह सरकार ने AK-47 से हुई फायरिंग और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की दोनों घटनाओं को अलग-अलग बताया है। प्रदर्शन में AK-47 के इस्तेमाल पर उठे सवाल राज्य सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति, जैसे प्रदर्शन या आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक, इस संबंध में बिहार के डीजीपी की ओर से भी निर्देश जारी किए गए हैं। फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित करने के साथ उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। गोली किस हथियार से चली, जांच में जुटी एजेंसियां फायरिंग की घटना को लेकर जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गोली किस हथियार से चली, फायरिंग कितनी दूरी से हुई और गोली चलाने का कोण क्या था। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और फायरिंग की परिस्थितियां क्या थीं। कई जिलों में हिंसक हुआ था छात्र आंदोलन बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान पटना, जहानाबाद, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हुए थे। सरकार के मुताबिक, छपरा में शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में भीड़ उग्र हो गई। इस दौरान पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। इसमें दो बीडीओ, तीन पुलिस इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 सिपाहियों के घायल होने की जानकारी दी गई है। सरकार ने यह भी दावा किया कि एक बीडीओ की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा, जबकि दूसरे अधिकारी को भी चोट लगी। बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर भी अपना पक्ष रखा। सरकार के अनुसार, जिन प्रदर्शनकारी छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ दंडात्मक पुलिस कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं, आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए 18 साल से कम उम्र के ऐसे बच्चों, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें साधारण बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया। सीवान में AK-47 से चार राउंड फायरिंग की सरकार की स्वीकारोक्ति के बाद मामला और गंभीर हो गया है। फिलहाल सरकार का दावा है कि फायरिंग हवा में की गई थी और प्रदर्शनकारियों को AK-47 की गोली नहीं लगी। अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
पटना: बुधवार को राजभवन मार्च और प्रदर्शन के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव गुरुवार को फिर सड़क पर नजर आएंगे। 20 अगस्त को उनका पटना से मधुबनी और दरभंगा तक सड़क मार्ग से दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान वे कई परिवारों से मुलाकात करेंगे और शोक संतप्त परिजनों से भी मिलेंगे। जारी कार्यक्रम के मुताबिक तेजस्वी यादव सुबह 10:45 बजे पटना के 1, पोलो रोड स्थित आवास से रवाना होंगे। उनका काफिला हाजीपुर, वैशाली होते हुए मधुबनी और फिर दरभंगा पहुंचेगा। देर रात करीब 10:05 बजे उनके पटना लौटने का कार्यक्रम है। सुबह 10:45 बजे पटना से रवाना होंगे तेजस्वी यादव गुरुवार सुबह अपने पटना स्थित आवास से निकलेंगे। करीब 11:45 बजे हाजीपुर में स्वर्गीय राम नरेश राय के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिवार के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोपहर 12:15 बजे मधुबनी के लिए रवाना होंगे। पूरे दौरे के दौरान वे सड़क मार्ग से यात्रा करेंगे। दोपहर 3:30 बजे मधुबनी पहुंचने का कार्यक्रम तेजस्वी यादव का काफिला करीब 3:30 बजे मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेगा। यहां कुछ समय रुकने के बाद वे अगले कार्यक्रम के लिए निकलेंगे। शाम 4:15 बजे अतिथि गृह से रवाना होकर 4:50 बजे अरैर थाना क्षेत्र में स्वर्गीय रंजन कुमार यादव के आवास पर पहुंचेंगे। यहां वे परिजनों से मुलाकात करेंगे। शाम को दरभंगा जाएंगे तेजस्वी मधुबनी का कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव करीब 5:20 बजे दरभंगा के लिए रवाना होंगे। शाम 6:30 बजे वे दरभंगा के पुरानी मुंसफी, वार्ड नंबर-25 पहुंचेंगे। यहां वे स्वर्गीय मो. फैज के पिता असद अहमद के आवास पर जाकर परिवार से मुलाकात करेंगे। रात 6:55 बजे दरभंगा से पटना के लिए निकलेंगे दरभंगा में कार्यक्रम पूरा करने के बाद तेजस्वी यादव शाम 6:55 बजे पटना के लिए रवाना होंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे रात करीब 10:05 बजे 1, पोलो रोड स्थित अपने आवास पहुंचेंगे। तेजस्वी यादव का आज का पूरा कार्यक्रम समय कार्यक्रम 10:45 AM पटना से प्रस्थान 11:45 AM हाजीपुर में राम नरेश राय के आवास पर मुलाकात 12:15 PM मधुबनी के लिए रवाना 3:30 PM मधुबनी जिला अतिथि गृह पहुंचेंगे 4:15 PM अतिथि गृह से प्रस्थान 4:50 PM अरैर में रंजन कुमार यादव के परिजनों से मुलाकात 5:20 PM मधुबनी से दरभंगा रवाना 6:30 PM दरभंगा में असद अहमद के परिवार से मुलाकात 6:55 PM दरभंगा से पटना के लिए रवाना 10:05 PM पटना स्थित आवास पहुंचने का कार्यक्रम बुधवार के प्रदर्शन के बाद आज अलग-अलग जिलों में रहेंगे तेजस्वी तेजस्वी यादव का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बुधवार को पटना में RJD के राजभवन मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था और तेजस्वी यादव को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके अगले ही दिन तेजस्वी का कई जिलों का दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, जारी कार्यक्रम के मुताबिक गुरुवार की उनकी प्रमुख गतिविधियां लोगों और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात पर केंद्रित रहेंगी। v