बिहार

प्रशांत किशोर की जीत के बाद वीणा मानवी का वीडियो वायरल, BJP कार्यालय में फोन कर बोलीं- ‘लड्डू भिजवा दीजिए’

anjali kumari अगस्त 4, 2026 0

पटना, एजेंसियां। बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत के बाद वीणा मानवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वीणा मानवी भाजपा कार्यालय में फोन करती नजर आ रही हैं और वहां से लड्डू भेजने की मांग करती हैं। उन्होंने कहा कि इन लड्डुओं को गरीबों के बीच बांटा जाएगा।

 

बीजेपी कार्यालय में किया फोन

 

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम सामने आने के बाद वीणा मानवी ने भाजपा कार्यालय में फोन किया। वायरल वीडियो में वह भाजपा नेताओं से लड्डू भेजने की बात करती सुनाई दे रही हैं। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे बांकीपुर चुनाव परिणाम से जोड़कर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

 

लड्डू गरीबों में बांटने की बात

 

वीणा मानवी ने कथित तौर पर भाजपा कार्यालय से कहा कि जीत के बाद तैयार किए गए लड्डू उन्हें भिजवा दिए जाएं, ताकि वे उन्हें गरीब लोगों के बीच बांट सकें। उनकी इस अपील ने चुनावी नतीजे के बाद राजनीतिक माहौल में एक अलग चर्चा पैदा कर दी है। वीडियो में उनके बातचीत के अंदाज को लेकर भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

 

बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत

 

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। भाजपा के मजबूत माने जाने वाले इस क्षेत्र में जन सुराज की जीत को महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

 

इस नतीजे के बाद वीणा मानवी का वायरल वीडियो भी चर्चा में आ गया है। चुनाव परिणाम के बाद सामने आए इस वीडियो ने बांकीपुर की राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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समस्तीपुर-सहरसा मेमू ट्रेन में आग की घटना, दो डिब्बे चपेट में; कोई हताहत नहीं

सहरसा, एजेंसियां। बिहार के सहरसा जिले में सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर समस्तीपुर-सहरसा मेमू ट्रेन के दो डिब्बों में आग लगने से अफरातफरी मच गई। आग सोमवार तड़के करीब 3:10 बजे लगी। देखते ही देखते आग एक अन्य डिब्बे तक भी पहुंच गई। राहत की बात रही कि घटना में किसी यात्री के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है।   एक डिब्बे में लगी आग, दूसरे तक पहुंची लपटें   रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर खड़ी थी, तभी उसके एक मोटरकोच में आग लग गई। कुछ ही देर में आग दूसरे कोच तक पहुंच गई। रेलवे कर्मचारियों और आपातकालीन दल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आग को नियंत्रित किया।   आग की वजह से स्टेशन परिसर में कुछ समय के लिए अफरातफरी की स्थिति बन गई। घटना के दौरान यात्रियों को सुरक्षित रखा गया और आग को दूसरे डिब्बों तथा स्टेशन की अन्य संपत्तियों तक फैलने से रोकने के प्रयास किए गए।   यात्रियों की सुरक्षा को लेकर राहत   घटना के वक्त ट्रेन स्टेशन पर थी, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में आसानी हुई। अधिकारियों के अनुसार कोई जनहानि नहीं हुई है। रेलवे कर्मचारियों की तत्परता से आग को नियंत्रित किया गया। हालांकि, आग से प्रभावित कोच को नुकसान पहुंचा है और घटना के कारण रेल परिचालन पर भी असर पड़ा तथा कुछ ट्रेनों में देरी की सूचना सामने आई है।   आग लगने के कारणों की जांच शुरू   फिलहाल आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। रेलवे और संबंधित अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि आग तकनीकी खराबी, विद्युत प्रणाली या किसी अन्य कारण से लगी।   रेल प्रशासन की ओर से प्रभावित कोच की स्थिति और घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।

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Bihar rain alert on August 4 2026 with heavy rainfall, thunderstorms, strong winds and lightning warning
Bihar Rain Alert: आज पूरे बिहार में गरज-चमक के साथ बारिश, 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी

बिहार मौसम अपडेट 4 अगस्त 2026: बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। मंगलवार, 4 अगस्त को मौसम विभाग ने पूरे राज्य के लिए बारिश और खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। राज्य के ज्यादातर जिलों में येलो अलर्ट, जबकि कुछ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर वज्रपात की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मंगलवार को बिहार के पूर्वी चंपारण, वैशाली, समस्तीपुर, अररिया, किशनगंज, कटिहार, सीवान, सारण, भोजपुर और बक्सर में भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में बारिश के साथ तेज हवा और बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है। मौसम में बदलाव से पिछले दिनों महसूस हो रही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आंधी, बिजली और तेज बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी। अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बिहार में अगले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ होने के आसार कम हैं। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश जारी रह सकती है। कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ जिलों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रह सकती हैं। 5 और 6 अगस्त को भी उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों में दिनभर मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। इस दौरान स्थानीय स्तर पर गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी बनी बारिश की वजह मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाएं बिहार की ओर बढ़ रही हैं। वायुमंडल में नमी की मात्रा अधिक होने और स्थानीय स्तर पर तेजी से बादल बनने के कारण राज्य के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखी जा रही हैं। इसी वजह से कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ वज्रपात की स्थिति भी बन रही है। सामान्य से अब भी कम हुई है बारिश बारिश की गतिविधियां बढ़ने के बावजूद बिहार में अब तक कुल बारिश सामान्य से कम रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि तक राज्य में करीब 422 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक लगभग 299 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यानी राज्य में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 29 प्रतिशत कम बताया गया है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज होने पर बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। हाल के दिनों में वज्रपात की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। कई जिलों में ठनका गिरने से करीब 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेना और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना जरूरी है। लोगों के लिए जरूरी सावधानी बारिश और गरज-चमक के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तेज आंधी या वज्रपात की स्थिति में खुले मैदान, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा टालना बेहतर रहेगा। बिहार में फिलहाल मानसून की गतिविधियां बनी हुई हैं और अगले कुछ दिनों तक कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।  

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बांका कांवरिया सेवा शिविर इनारावरण
बाबा धाम की राह में सेवा की मिसाल, 15 वर्षों से कांवरियों को नि:शुल्क भोजन, इलाज और विश्राम की सुविधा

बांका। सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा में जहां लाखों शिवभक्त आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं, वहीं बिहार के बांका जिले में मानवता और सेवा की अनूठी मिसाल भी देखने को मिल रही है। इनारावरण स्थित महारानी कांवरिया सेवा संघ पिछले 15 वर्षों से कांवरियों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यहां श्रद्धालुओं को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।   15 वर्षों से लगातार चल रहा सेवा शिविर   सावन के महीने में कांवड़ पथ पर हर साल सेवा शिविर लगाया जाता है। संघ के स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के हजारों शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं, ताकि लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।   एक प्रेरणा से शुरू हुई सेवा   संघ के संस्थापक शशि शंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह के अनुसार, वर्ष 2009 में कांवड़ यात्रा के दौरान एक अजनबी की सलाह ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस व्यक्ति ने कहा कि यदि स्वयं बाबा धाम की यात्रा संभव न हो, तो कांवरियों की सेवा करें, यही भगवान शिव की सच्ची पूजा है। इसी प्रेरणा से वर्ष 2010 में महारानी कांवरिया सेवा संघ की स्थापना हुई।   दिन-रात जुटे रहते हैं स्वयंसेवक   शिविर में स्वयंसेवक भोजन परोसने, पानी पिलाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और विश्राम की व्यवस्था संभालते हैं। यात्रा से थके श्रद्धालु यहां कुछ समय आराम करने के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।   'कांवरियों की सेवा ही भोलेनाथ की पूजा'   संघ के सदस्यों का कहना है कि उनके लिए कांवरियों की सेवा ही भगवान शिव की सबसे बड़ी आराधना है। इसी भावना के चलते हर साल अधिक लोग इस सेवा अभियान से जुड़ते जा रहे हैं और शिवभक्तों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।   बाबा धाम की राह में सेवा की मिसाल, 15 वर्षों से कांवरियों को नि:शुल्क भोजन, इलाज और विश्राम की सुविधा   बांका। सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कांवड़ यात्रा में जहां लाखों शिवभक्त आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं, वहीं बिहार के बांका जिले में मानवता और सेवा की अनूठी मिसाल भी देखने को मिल रही है। इनारावरण स्थित महारानी कांवरिया सेवा संघ पिछले 15 वर्षों से कांवरियों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यहां श्रद्धालुओं को भोजन, पेयजल, चाय, ओआरएस, गर्म पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।   15 वर्षों से लगातार चल रहा सेवा शिविर   सावन के महीने में कांवड़ पथ पर हर साल सेवा शिविर लगाया जाता है। संघ के स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के हजारों शिवभक्तों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं, ताकि लंबी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।   एक प्रेरणा से शुरू हुई सेवा   संघ के संस्थापक शशि शंकर सिंह उर्फ पप्पू सिंह के अनुसार, वर्ष 2009 में कांवड़ यात्रा के दौरान एक अजनबी की सलाह ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस व्यक्ति ने कहा कि यदि स्वयं बाबा धाम की यात्रा संभव न हो, तो कांवरियों की सेवा करें, यही भगवान शिव की सच्ची पूजा है। इसी प्रेरणा से वर्ष 2010 में महारानी कांवरिया सेवा संघ की स्थापना हुई।   दिन-रात जुटे रहते हैं स्वयंसेवक   शिविर में स्वयंसेवक भोजन परोसने, पानी पिलाने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और विश्राम की व्यवस्था संभालते हैं। यात्रा से थके श्रद्धालु यहां कुछ समय आराम करने के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।   'कांवरियों की सेवा ही भोलेनाथ की पूजा'   संघ के सदस्यों का कहना है कि उनके लिए कांवरियों की सेवा ही भगवान शिव की सबसे बड़ी आराधना है। इसी भावना के चलते हर साल अधिक लोग इस सेवा अभियान से जुड़ते जा रहे हैं और शिवभक्तों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।

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