बिहार

बांकीपुर में बीजेपी की नई रणनीति, ‘अपनी सरकार-अपना विधायक’ अभियान से मतदाताओं को साधने की कोशिश

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
BJP Bankipur Campaign
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पटना, एजेंसियां। बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव प्रचार को धार देते हुए नया अभियान शुरू किया है। पार्टी अब मतदाताओं के बीच ‘अपनी सरकार-अपना विधायक’ संदेश के साथ पहुंच रही है और विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

 

स्थानीय विकास और सरकार के साथ तालमेल को बनाया मुद्दा

 

बीजेपी का फोकस इस बात पर है कि राज्य और केंद्र में उसकी सरकार होने से क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिल सकती है। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर संपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं को यह संदेश देने में जुटे हैं कि सत्ता पक्ष का विधायक होने से क्षेत्र को योजनाओं और विकास परियोजनाओं का अधिक लाभ मिल सकता है।

 

प्रशांत किशोर की एंट्री से बदला चुनावी माहौल

 

बांकीपुर सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की सक्रियता ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। बीजेपी पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं प्रशांत किशोर नए मतदाताओं और बदलाव की राजनीति के मुद्दे के साथ मैदान में उतर रहे हैं।

 

कायस्थ बहुल सीट पर जातीय समीकरण भी अहम

 

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। यहां शहरी मतदाता, युवा वोटर और जातीय समीकरण चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभाते हैं। बीजेपी जहां अपने पुराने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष नए मुद्दों के जरिए सेंध लगाने की रणनीति में जुटा है।

 

चुनाव प्रचार में रोजगार और विकास पर जोर

 

इस बार बांकीपुर चुनाव में रोजगार, शिक्षा, सड़क, यातायात और शहरी सुविधाएं प्रमुख मुद्दे बन रहे हैं। बीजेपी अपने विकास मॉडल को आगे रख रही है, जबकि विपक्ष सरकार से जुड़े सवालों और स्थानीय समस्याओं को लेकर मतदाताओं के बीच जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बांकीपुर में बीजेपी की नई रणनीति, ‘अपनी सरकार-अपना विधायक’ अभियान से मतदाताओं को साधने की कोशिश

पटना, एजेंसियां। बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव प्रचार को धार देते हुए नया अभियान शुरू किया है। पार्टी अब मतदाताओं के बीच ‘अपनी सरकार-अपना विधायक’ संदेश के साथ पहुंच रही है और विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।   स्थानीय विकास और सरकार के साथ तालमेल को बनाया मुद्दा   बीजेपी का फोकस इस बात पर है कि राज्य और केंद्र में उसकी सरकार होने से क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिल सकती है। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर संपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं को यह संदेश देने में जुटे हैं कि सत्ता पक्ष का विधायक होने से क्षेत्र को योजनाओं और विकास परियोजनाओं का अधिक लाभ मिल सकता है।   प्रशांत किशोर की एंट्री से बदला चुनावी माहौल   बांकीपुर सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की सक्रियता ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। बीजेपी पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं प्रशांत किशोर नए मतदाताओं और बदलाव की राजनीति के मुद्दे के साथ मैदान में उतर रहे हैं।   कायस्थ बहुल सीट पर जातीय समीकरण भी अहम   बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। यहां शहरी मतदाता, युवा वोटर और जातीय समीकरण चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभाते हैं। बीजेपी जहां अपने पुराने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष नए मुद्दों के जरिए सेंध लगाने की रणनीति में जुटा है।   चुनाव प्रचार में रोजगार और विकास पर जोर   इस बार बांकीपुर चुनाव में रोजगार, शिक्षा, सड़क, यातायात और शहरी सुविधाएं प्रमुख मुद्दे बन रहे हैं। बीजेपी अपने विकास मॉडल को आगे रख रही है, जबकि विपक्ष सरकार से जुड़े सवालों और स्थानीय समस्याओं को लेकर मतदाताओं के बीच जा रहा है।

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बांका के अमरपुर में राशन कार्ड की जांच और नोटिस की प्रक्रिया
बांका में राशन कार्ड फर्जीवाड़े पर बड़ी चोट: 4,025 संदिग्धों पर लटकी रद्दीकरण की तलवार

अमरपुर प्रखंड में खाद्य आपूर्ति विभाग का बड़ा एक्शन, 26 जुलाई तक खुद को सही साबित नहीं करने वालों के कटेंगे नाम   सरकारी योजनाओं का लाभ अक्सर उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि कई अपात्र लोग फर्जी तरीके से सिस्टम में सेंध लगा लेते हैं। राशन वितरण प्रणाली में इसी बड़ी खामी को दूर करने के लिए बिहार के बांका जिले में एक व्यापक शुद्धिकरण अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सस्ते अनाज का हक केवल गरीब और जरूरतमंद परिवारों को ही मिले, न कि साधन संपन्न लोगों को।   खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बांका के अमरपुर प्रखंड में ऐसे लोगों की पहचान के लिए सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में हुई एक विभागीय जांच के बाद पूरे प्रखंड में 4,025 ऐसे राशन कार्डधारक चिह्नित किए गए हैं, जिनकी पात्रता पूरी तरह से संदिग्ध मानी जा रही है। विभाग ने बिना किसी देरी के इन सभी संदिग्ध लाभार्थियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से उन लोगों के बीच हड़कंप का माहौल है, जो लंबे समय से अनुचित तरीके से इस योजना का लाभ ले रहे थे।   इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे अमरपुर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) रविन्द्र शर्मा ने बताया कि सभी चिह्नित लोगों को अपना पक्ष रखने का एक आखिरी मौका दिया जा रहा है। इन सभी 4,025 कार्डधारकों को आगामी रविवार, 26 जुलाई 2026 तक हर हाल में अपनी पात्रता साबित करनी होगी। इसके लिए उन्हें कार्यालय में अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी, योजना के योग्य होने के संबंधित जरूरी दस्तावेज और एक लिखित स्पष्टीकरण जमा करना अनिवार्य किया गया है।   विभाग की ओर से यह चेतावनी स्पष्ट कर दी गई है कि 26 जुलाई की समय सीमा बीत जाने के बाद किसी भी तरह की कोई मोहलत नहीं दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति तय तारीख तक अपने दस्तावेज और स्पष्टीकरण पेश करने में विफल रहता है, तो प्रशासन स्वतः यह मान लेगा कि वह अपात्र है और उसके पास बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे सभी मामलों में बिना किसी अतिरिक्त सूचना के राशन कार्ड को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।   प्रशासन की यह सख्ती सिर्फ कार्ड रद्द करने की एक रूटीन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक कड़ा संदेश है कि जन कल्याणकारी योजनाओं में अब धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि 26 जुलाई के बाद इन हजारों संदिग्ध कार्डों को रद्द किया जाता है, तो सरकारी कोटे का बड़ा हिस्सा बचेगा, जिससे भविष्य में उन वास्तविक और नए गरीब परिवारों को इस योजना से जोड़ने का रास्ता साफ होगा, जो अब तक इसके लाभ से वंचित थे।

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पटना, एजेंसियां। बिहार में गंगा किनारे सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में प्रस्तावित तीन प्रमुख गंगा पथ परियोजनाओं के लिए सर्वे और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इनमें विश्वामित्र पथ, गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य गंगा किनारे बसे शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी देना और व्यापार व पर्यटन को बढ़ावा देना है।   मनेर से बक्सर तक बनेगा विश्वामित्र पथ   सबसे ज्यादा चर्चा विश्वामित्र पथ परियोजना को लेकर है। यह मार्ग मनेर से आरा होते हुए बक्सर तक विकसित किया जाएगा। इस सड़क से पटना क्षेत्र को भोजपुर और बक्सर से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। परियोजना से यात्रा समय कम होने के साथ-साथ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।   गंगा किनारे तीन बड़े कॉरिडोर की योजना   राज्य सरकार गंगा किनारे तीन नए सड़क कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इनमें विश्वामित्र पथ के अलावा गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ शामिल हैं। इन परियोजनाओं को आधुनिक सड़क नेटवर्क के रूप में विकसित करने की तैयारी है।   व्यापार और पर्यटन को मिलेगा फायदा   इन सड़क परियोजनाओं के पूरा होने से बक्सर, आरा, पटना समेत कई इलाकों के बीच आवागमन आसान होगा। इससे कृषि उत्पादों की ढुलाई, स्थानीय व्यापार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विश्वामित्र पथ को बक्सर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जोड़कर भी देखा जा रहा है।   PPP मॉडल पर विकसित करने की तैयारी   इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है। सड़क निर्माण के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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