पटना। बिहार सरकार ने सोमवार देर रात प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए कई भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों का तबादला और नई पदस्थापना की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इसका आदेश जारी किया गया। इस फेरबदल में अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव समेत कई जिलों के जिलाधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
1996 बैच के IAS अधिकारी एच. आर. श्रीनिवास को समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव पद से स्थानांतरित कर ग्रामीण विकास विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। वह जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में पूर्ववत बने रहेंगे।
1997 बैच के IAS अधिकारी पंकज कुमार को ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पद से हटाकर गृह विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। उन्हें जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
1999 बैच के IAS अधिकारी विनय कुमार को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव पद से स्थानांतरित कर वित्त विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। उन्हें नगर विकास एवं आवास विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
वहीं राजेश कुमार को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के प्रधान सचिव पद से हटाकर पटना प्रमंडल का आयुक्त बनाया गया है। पटना के वर्तमान आयुक्त मयंक वरवड़े को निगरानी विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है।
2007 बैच के IAS अधिकारी संजय कुमार सिंह को वित्त विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वह वाणिज्य कर विभाग, GST और मुख्यमंत्री सचिवालय के अतिरिक्त प्रभार में बने रहेंगे।
वहीं विनोद सिंह गुंजियाल को शिक्षा विभाग के सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर समाज कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
2010 बैच के IAS अधिकारी राजीव रौशन को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है। वह उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और वित्त विभाग में सचिव (संसाधन) का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।
बी. कार्तिकेय धनजी को लघु जल संसाधन विभाग से स्थानांतरित कर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का सचिव बनाया गया है। वह जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में बने रहेंगे।
सरकार ने जिला स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया है। प्रमुख नियुक्तियां इस प्रकार हैं:
मनेश कुमार मीणा को निदेशक, खान पद से स्थानांतरित कर भोजपुर का जिलाधिकारी बनाया गया है।
रिची पाण्डेय को सीतामढ़ी के जिलाधिकारी पद से स्थानांतरित कर बेगूसराय का डीएम बनाया गया है।
विजय प्रकाश मीणा को सीवान का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।
तनय सुल्तानिया को भोजपुर के डीएम पद से हटाकर सीतामढ़ी का जिलाधिकारी बनाया गया है।
सभी संबंधित अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-14 के तहत संबंधित जिले का जिला दंडाधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
सरकार ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। 1995 बैच के IAS अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी, जो मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं, अगले आदेश तक बिपार्ड के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।
वहीं जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह को लघु जल संसाधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। नवदीप शुक्ला को बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के परियोजना निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों और जिलों की प्रशासनिक कमान में बदलाव हुआ है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए आज बड़ा अपडेट सामने आया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का विज्ञापन 18 अगस्त की शाम तक जारी किए जाने की उम्मीद जताई गई है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शिक्षा विभाग की ओर से भेजी गई अधियाचना पर आयोग की तैयारी पूरी हो चुकी है। 32,388 पदों पर होगी भर्ती TRE-4 भर्ती में कुल 32,388 शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा 16,101 पद कक्षा 11वीं और 12वीं के शिक्षकों के लिए हैं। पदों का संभावित ब्योरा इस प्रकार है: कक्षा 1 से 5 — 3,847 पद कक्षा 6 से 8 — 8,563 पद कक्षा 9 से 10 — 3,877 पद कक्षा 11 से 12 — 16,101 पद कुल — 32,388 पद नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थी TRE-4 के विज्ञापन में लगातार देरी को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों में काफी नाराजगी है। छात्र संगठनों ने 18 अगस्त से पटना में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने का ऐलान किया था। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में भर्ती विज्ञापन जारी करना और परीक्षा की स्पष्ट तारीख घोषित करना शामिल है। BPSC की ओर से पहले ही फर्जी शिक्षक भर्ती नोटिस को लेकर अभ्यर्थियों को सावधान किया जा चुका है। आयोग ने कहा है कि भर्ती से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा किया जाए। परीक्षा पैटर्न में बदलाव की भी चर्चा TRE-4 को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक इस बार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा का प्रावधान किया जा सकता है। पिछली TRE परीक्षाओं में एक ही लिखित परीक्षा के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की जाती थी। हालांकि, अंतिम परीक्षा पैटर्न और अन्य शर्तों की पुष्टि आधिकारिक विज्ञापन जारी होने के बाद ही होगी। अब अभ्यर्थियों की नजरें BPSC के आधिकारिक विज्ञापन पर टिकी हैं। यदि आज विज्ञापन जारी होता है तो आवेदन की तारीख, पात्रता, परीक्षा पैटर्न, शुल्क और परीक्षा कार्यक्रम की पूरी जानकारी उसी में स्पष्ट होगी।
Bihar Development Project: बिहार सरकार ने राज्य में खनिज संसाधनों के इस्तेमाल और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक, नवंबर तक राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं, खनन गतिविधियां शुरू होने से सरकार को 6 से 7 हजार करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद जताई गई है। 44 माइनिंग ब्लॉकों में सर्वे, 28 पर काम आगे बढ़ा मुख्यमंत्री के अनुसार बिहार में खनिज संसाधनों की संभावनाओं को लेकर कई ब्लॉकों का अध्ययन कराया गया है। कुल 44 माइनिंग ब्लॉकों में से 28 में सर्वे का काम आगे बढ़ चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि 30 सितंबर से पहले 30 से अधिक माइनिंग ब्लॉकों का आवंटन कर दिया जाए। अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है। 15 अक्टूबर से खनन शुरू करने की तैयारी सरकार 15 अक्टूबर से बिहार में खनन गतिविधियां शुरू करने की दिशा में पहल कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए पत्थर समेत विभिन्न खनिजों की जरूरत है। ऐसे में उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का दावा है कि खनिज संसाधनों से मिलने वाली रॉयल्टी का इस्तेमाल राज्य के विकास और जनता के हित में किया जाएगा। इन जिलों में खनिज संसाधनों की संभावना सरकार के अनुसार, रोहतास में लाइमस्टोन, औरंगाबाद में बड़ा मिनरल बेल्ट, जबकि जहानाबाद और जमुई में मैग्नेट से जुड़े संसाधनों की संभावना है। इसके अलावा गया, बांका और भागलपुर में भी खनिज संसाधनों की उपलब्धता का उल्लेख किया गया है। हालांकि, खनन गतिविधियों के विस्तार के साथ पर्यावरण और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण की चुनौती भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार की ओर से कहा गया है कि विकास परियोजनाओं के दौरान विरासतों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। निवेश से रोजगार और राजस्व बढ़ने की उम्मीद मुख्यमंत्री ने नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य की बात कही है। सरकार का अनुमान है कि खनन और उससे जुड़ी गतिविधियों से 6 से 7 हजार करोड़ रुपये तक राजस्व प्राप्त हो सकता है। अगर निवेश और खनन योजनाएं निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ती हैं, तो इससे बिहार में उद्योग, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। निवेशकों को सरकार का भरोसा मुख्यमंत्री ने निवेशकों से बिहार में उद्योग स्थापित करने की अपील की है। सरकार की ओर से निवेशकों को विभिन्न रियायतें और सहयोग देने का भरोसा दिया गया है।
सीवान हिंसा मामले में बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कई अहम जानकारियां दी हैं। पुलिस के मुताबिक 25 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान पथराव में सीवान एसपी समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालात बिगड़ने पर भीड़ में फंसे DIU के एक कॉन्स्टेबल ने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए। पुलिस का दावा है कि इस फायरिंग से कोई घायल नहीं हुआ। 25 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान बिगड़े थे हालात पुलिस के अनुसार, 25 जुलाई को AISA और RYA से जुड़े प्रदर्शनकारी सीवान के गांधी मैदान में जुटे थे। इसके बाद प्रदर्शनकारी JP चौक की ओर बढ़े। दोपहर करीब 12:30 बजे पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव शुरू हुआ। इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की ओर से आए कुछ अन्य लोगों के भी पत्थरबाजी में शामिल होने की बात कही गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर बुलाया गया। 20 पुलिसकर्मी घायल, पुलिस वाहनों को भी नुकसान बिहार पुलिस के हलफनामे के मुताबिक, पथराव में सीवान के एसपी समेत कुल 20 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें दो एसडीपीओ, दो इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 13 कॉन्स्टेबल शामिल बताए गए हैं। हिंसा के दौरान पुलिस की दो गाड़ियों और कई ट्रैफिक ट्रॉलियों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है। भीड़ में फंसे जवान ने AK-47 से की फायरिंग पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अतिरिक्त बल बुलाए जाने के दौरान DIU में तैनात एक कॉन्स्टेबल JP चौक के पास भीड़ के बीच फंस गया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान उसने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए। पुलिस का दावा है कि इन चार गोलियों से किसी व्यक्ति को चोट नहीं लगी। वहीं, हाथी चौक पर एक अन्य ASI ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अपनी 9mm पिस्तौल से दो राउंड फायर किए। तीन प्रदर्शनकारियों को लगी थी गोली पुलिस के मुताबिक हिंसा के दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आई थीं। उन्हें पहले सीवान सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया। पुलिस का कहना है कि तीनों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन तीनों की चोटें उस AK-47 फायरिंग से नहीं हुईं, जो JP चौक के पास भीड़ में फंसे कॉन्स्टेबल ने की थी। 82 लोगों पर केस, 17 गिरफ्तार बिहार पुलिस के अनुसार, हिंसा के सिलसिले में छह FIR दर्ज की गई हैं और कुल 82 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें से 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की जांच अभी जारी है। AK-47 फायरिंग की बैलिस्टिक जांच फायरिंग की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए बैलिस्टिक जांच कराई जा रही है। इसमें इस्तेमाल हथियार, गोली चलने की दूरी, फायरिंग का कोण और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच शामिल है। AK-47 से फायरिंग करने वाले कॉन्स्टेबल को कथित गलत आचरण के आरोप में निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए। DGP ने जारी किए निर्देश बिहार पुलिस के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक ने 1 अगस्त को कानून-व्यवस्था की स्थिति में AK-47 के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने कहा कि ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को लेकर पहले भी दिशानिर्देश मौजूद रहे हैं।