नई Brezza Facelift में कंपनी ने डिजाइन और फीचर्स के साथ पावरट्रेन लाइनअप में भी बड़ा बदलाव किया है। इसका सबसे चर्चित अपडेट नया टर्बो-पेट्रोल इंजन है। इसके अलावा एसयूवी में 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल और फैक्ट्री-फिटेड एस-सीएनजी विकल्प भी उपलब्ध हैं।
मारुति सुजुकी की बिक्री से जुड़ी जानकारी के मुताबिक नई Brezza Facelift को लॉन्च के बाद से ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। कंपनी के सीनियर मार्केटिंग एंड सेल्स एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी के अनुसार, नई Brezza को रोजाना लगभग 2,000 बुकिंग मिल रही हैं।
यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में Brezza की लोकप्रियता अभी भी मजबूत बनी हुई है। कंपनी के लिए खास बात यह भी है कि ग्राहक सिर्फ एक इंजन विकल्प तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तीनों पावरट्रेन विकल्पों को लगभग समान स्तर पर पसंद कर रहे हैं।
कंपनी के मुताबिक Brezza Facelift की बुकिंग में टर्बो-पेट्रोल वेरिएंट की हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी है। बेहतर परफॉर्मेंस और ज्यादा दमदार ड्राइविंग अनुभव चाहने वाले ग्राहकों के बीच यह विकल्प खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
वहीं, फैक्ट्री-फिटेड एस-सीएनजी वेरिएंट की भी करीब 35 फीसदी हिस्सेदारी बताई गई है। इससे पता चलता है कि कम रनिंग कॉस्ट और ईंधन की बचत चाहने वाले ग्राहक भी इस एसयूवी में मजबूत रुचि दिखा रहे हैं।
इसके अलावा 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन की बुकिंग हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है। यानी तीनों विकल्पों के बीच मांग काफी संतुलित नजर आ रही है।
मारुति सुजुकी ने नई Brezza Facelift की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 7.39 लाख रुपये रखी है। वहीं इसके टॉप वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 13.70 लाख रुपये तक जाती है।
इस प्राइस रेंज में Brezza का मुकाबला भारतीय बाजार की कई लोकप्रिय कॉम्पैक्ट एसयूवी से होता है। ऐसे में कंपनी ने ज्यादा फीचर्स और अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों के जरिए ग्राहकों के लिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है।
नई Brezza Facelift का सबसे बड़ा मैकेनिकल अपडेट इसका टर्बो-पेट्रोल इंजन है। कंपनी ने पहली बार इस एसयूवी को टर्बो-पेट्रोल विकल्प के साथ पेश किया है।
इसके साथ ग्राहकों के पास 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन और फैक्ट्री-फिटेड एस-सीएनजी का विकल्प भी मौजूद है। इस तरह ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार परफॉर्मेंस, माइलेज और रनिंग कॉस्ट को प्राथमिकता देकर विकल्प चुन सकते हैं।
नई Brezza Facelift को सिर्फ इंजन के स्तर पर ही अपडेट नहीं किया गया है। इसके केबिन में भी कई आधुनिक फीचर्स जोड़े गए हैं।
एसयूवी में 360 डिग्री कैमरा दिया गया है, जो खासकर तंग जगहों पर पार्किंग के दौरान उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा बड़े टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ वायरलेस स्मार्टफोन कनेक्टिविटी भी मिलती है।
इसमें Android Auto और Apple CarPlay सपोर्ट, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, इलेक्ट्रिक सनरूफ और प्रीमियम ऑडियो सिस्टम जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। इन फीचर्स का उद्देश्य एसयूवी को ज्यादा प्रीमियम और सुविधाजनक बनाना है।
फीचर्स के साथ सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। नई Brezza Facelift में 6 एयरबैग, ABS के साथ EBD, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और हिल-होल्ड असिस्ट जैसे सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस एसयूवी को भारत-एनकैप से 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग भी मिली है। हालांकि, ग्राहकों को खरीदारी का फैसला करते समय संबंधित सुरक्षा रेटिंग और टेस्ट के आधिकारिक विवरण जरूर जांचने चाहिए।
नई Brezza Facelift में टर्बो-पेट्रोल इंजन, एस-सीएनजी और नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल जैसे अलग-अलग विकल्प हैं। साथ ही 360 डिग्री कैमरा, सनरूफ, वेंटिलेटेड सीट्स और प्रीमियम ऑडियो जैसे फीचर्स इसे पहले से ज्यादा आकर्षक बनाते हैं।
अगर आप कॉम्पैक्ट एसयूवी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो Brezza Facelift आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला लेने से पहले कीमत, वेरिएंट, इंजन, माइलेज, फीचर्स और अपने बजट के आधार पर इसकी तुलना दूसरी एसयूवी से करना बेहतर रहेगा।
नई Brezza Facelift में टर्बो-पेट्रोल इंजन और 360 डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स आपको कितने पसंद आए? क्या आप इसे इस सेगमेंट की दूसरी एसयूवी के मुकाबले बेहतर विकल्प मानते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और इस खबर को उन लोगों के साथ शेयर करें जो नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारतीय कॉम्पैक्ट एसयूवी बाजार में मारुति सुजुकी की नई Brezza Facelift को ग्राहकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलता दिख रहा है। 24 जुलाई 2026 को लॉन्च हुई इस अपडेटेड एसयूवी को लेकर कंपनी के मुताबिक रोजाना करीब 2,000 बुकिंग मिल रही हैं। खास बात यह है कि ग्राहक इसके अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। नई Brezza Facelift में कंपनी ने डिजाइन और फीचर्स के साथ पावरट्रेन लाइनअप में भी बड़ा बदलाव किया है। इसका सबसे चर्चित अपडेट नया टर्बो-पेट्रोल इंजन है। इसके अलावा एसयूवी में 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल और फैक्ट्री-फिटेड एस-सीएनजी विकल्प भी उपलब्ध हैं। रोजाना करीब 2,000 बुकिंग का दावा मारुति सुजुकी की बिक्री से जुड़ी जानकारी के मुताबिक नई Brezza Facelift को लॉन्च के बाद से ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। कंपनी के सीनियर मार्केटिंग एंड सेल्स एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी के अनुसार, नई Brezza को रोजाना लगभग 2,000 बुकिंग मिल रही हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में Brezza की लोकप्रियता अभी भी मजबूत बनी हुई है। कंपनी के लिए खास बात यह भी है कि ग्राहक सिर्फ एक इंजन विकल्प तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तीनों पावरट्रेन विकल्पों को लगभग समान स्तर पर पसंद कर रहे हैं। टर्बो-पेट्रोल और एस-सीएनजी की बराबर हिस्सेदारी कंपनी के मुताबिक Brezza Facelift की बुकिंग में टर्बो-पेट्रोल वेरिएंट की हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी है। बेहतर परफॉर्मेंस और ज्यादा दमदार ड्राइविंग अनुभव चाहने वाले ग्राहकों के बीच यह विकल्प खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वहीं, फैक्ट्री-फिटेड एस-सीएनजी वेरिएंट की भी करीब 35 फीसदी हिस्सेदारी बताई गई है। इससे पता चलता है कि कम रनिंग कॉस्ट और ईंधन की बचत चाहने वाले ग्राहक भी इस एसयूवी में मजबूत रुचि दिखा रहे हैं। इसके अलावा 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन की बुकिंग हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है। यानी तीनों विकल्पों के बीच मांग काफी संतुलित नजर आ रही है। Brezza Facelift की कीमत कितनी है? मारुति सुजुकी ने नई Brezza Facelift की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 7.39 लाख रुपये रखी है। वहीं इसके टॉप वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 13.70 लाख रुपये तक जाती है। इस प्राइस रेंज में Brezza का मुकाबला भारतीय बाजार की कई लोकप्रिय कॉम्पैक्ट एसयूवी से होता है। ऐसे में कंपनी ने ज्यादा फीचर्स और अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों के जरिए ग्राहकों के लिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। पहली बार मिला टर्बो-पेट्रोल इंजन नई Brezza Facelift का सबसे बड़ा मैकेनिकल अपडेट इसका टर्बो-पेट्रोल इंजन है। कंपनी ने पहली बार इस एसयूवी को टर्बो-पेट्रोल विकल्प के साथ पेश किया है। इसके साथ ग्राहकों के पास 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन और फैक्ट्री-फिटेड एस-सीएनजी का विकल्प भी मौजूद है। इस तरह ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार परफॉर्मेंस, माइलेज और रनिंग कॉस्ट को प्राथमिकता देकर विकल्प चुन सकते हैं। 360 डिग्री कैमरा से लेकर सनरूफ तक कई प्रीमियम फीचर्स नई Brezza Facelift को सिर्फ इंजन के स्तर पर ही अपडेट नहीं किया गया है। इसके केबिन में भी कई आधुनिक फीचर्स जोड़े गए हैं। एसयूवी में 360 डिग्री कैमरा दिया गया है, जो खासकर तंग जगहों पर पार्किंग के दौरान उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा बड़े टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ वायरलेस स्मार्टफोन कनेक्टिविटी भी मिलती है। इसमें Android Auto और Apple CarPlay सपोर्ट, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, इलेक्ट्रिक सनरूफ और प्रीमियम ऑडियो सिस्टम जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। इन फीचर्स का उद्देश्य एसयूवी को ज्यादा प्रीमियम और सुविधाजनक बनाना है। सेफ्टी के मामले में भी कई फीचर्स फीचर्स के साथ सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। नई Brezza Facelift में 6 एयरबैग, ABS के साथ EBD, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और हिल-होल्ड असिस्ट जैसे सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस एसयूवी को भारत-एनकैप से 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग भी मिली है। हालांकि, ग्राहकों को खरीदारी का फैसला करते समय संबंधित सुरक्षा रेटिंग और टेस्ट के आधिकारिक विवरण जरूर जांचने चाहिए। क्या Brezza Facelift खरीदना फायदे का सौदा है? नई Brezza Facelift में टर्बो-पेट्रोल इंजन, एस-सीएनजी और नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल जैसे अलग-अलग विकल्प हैं। साथ ही 360 डिग्री कैमरा, सनरूफ, वेंटिलेटेड सीट्स और प्रीमियम ऑडियो जैसे फीचर्स इसे पहले से ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। अगर आप कॉम्पैक्ट एसयूवी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो Brezza Facelift आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला लेने से पहले कीमत, वेरिएंट, इंजन, माइलेज, फीचर्स और अपने बजट के आधार पर इसकी तुलना दूसरी एसयूवी से करना बेहतर रहेगा। आपकी राय क्या है? नई Brezza Facelift में टर्बो-पेट्रोल इंजन और 360 डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स आपको कितने पसंद आए? क्या आप इसे इस सेगमेंट की दूसरी एसयूवी के मुकाबले बेहतर विकल्प मानते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और इस खबर को उन लोगों के साथ शेयर करें जो नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं।
नई दिल्ली: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ हाइब्रिड और सीएनजी कारों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इसी बदलते ट्रेंड को देखते हुए Kia India ने भारतीय बाजार के लिए अपनी लॉन्ग-टर्म रणनीति तैयार कर ली है। कंपनी आने वाले वर्षों में सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों के साथ बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी की योजना 2030 तक अपने 10 में से 8 मॉडल को इलेक्ट्रिफाइड करने की है। इस रणनीति में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV के साथ स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड मॉडल भी शामिल होंगे। इसके अलावा किआ पहली बार भारत में फैक्ट्री-फिटेड CNG कारें भी पेश करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में किआ के ग्राहकों को पेट्रोल, CNG, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक जैसे कई विकल्प एक ही ब्रांड के पोर्टफोलियो में मिल सकते हैं। 2030 तक 8 मॉडल होंगे इलेक्ट्रिफाइड किआ इंडिया की योजना 2030 तक अपने कुल 10 मॉडलों में से 8 को इलेक्ट्रिफाइड करने की है। कंपनी के मौजूदा इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो में EV6, EV9, Carens Clavis EV और Syros EV जैसे मॉडल शामिल हैं। कंपनी का फोकस सिर्फ EV तक सीमित नहीं है। किआ का मानना है कि भारतीय बाजार में अलग-अलग ग्राहकों की जरूरत और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए एक ही पावरट्रेन रणनीति पर्याप्त नहीं होगी। इसलिए कंपनी EV के साथ हाइब्रिड और CNG जैसी तकनीकों पर भी निवेश कर रही है। Seltos Hybrid पर काम, 2027 में हो सकती है एंट्री किआ की सबसे लोकप्रिय SUVs में शामिल Seltos को भी स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड पावरट्रेन मिलने की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी Seltos के स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड वर्जन पर काम कर रही है और इसे 2027 के आसपास भारतीय बाजार में लॉन्च किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो Seltos Hybrid सीधे उन ग्राहकों को आकर्षित कर सकती है जो EV की चार्जिंग संबंधी चिंताओं के बिना बेहतर माइलेज और कम ईंधन खपत वाला विकल्प चाहते हैं। Sorento और Carnival को भी मिल सकता है Strong Hybrid किआ की स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड रणनीति केवल Seltos तक सीमित नहीं रहने वाली है। कंपनी की आगामी तीन-रो SUV Sorento भी भारत में स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ आ सकती है। इसके अलावा प्रीमियम MPV Carnival को भी भविष्य में हाइब्रिड पावरट्रेन विकल्प मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि ये मॉडल भारत में आते हैं, तो किआ के पास अलग-अलग सेगमेंट में हाइब्रिड विकल्पों का मजबूत पोर्टफोलियो तैयार हो सकता है। पहली बार Factory-Fitted CNG कार लाएगी Kia किआ के लिए सबसे बड़ा बदलाव CNG सेगमेंट में देखने को मिल सकता है। कंपनी ने भारत में फैक्ट्री-फिटेड CNG मॉडल विकसित करने की दिशा में काम शुरू करने की पुष्टि की है। अब तक किआ भारत में फैक्ट्री से फिट CNG मॉडल के बजाय सीमित रूप से डीलर-इंस्टॉल्ड रेट्रोफिट किट पर निर्भर रही है। लेकिन अब कंपनी CNG को अपनी रणनीति का औपचारिक हिस्सा बनाने की तैयारी में है। खास बात यह है कि कंपनी CNG तकनीक को केवल MPV तक सीमित नहीं रखना चाहती। किआ अपने लाइनअप के कई अन्य मॉडलों के लिए भी CNG पावरट्रेन की संभावना का मूल्यांकन कर रही है। ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा विकल्प किआ की नई रणनीति को भारतीय कार बाजार में बदलती ग्राहक प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। एक तरफ EV की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल की कीमतों और लंबी दूरी की जरूरतों के कारण हाइब्रिड और CNG जैसे विकल्प भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे में किआ का EV, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और CNG को एक साथ आगे बढ़ाना कंपनी को अलग-अलग ग्राहक वर्गों तक पहुंचने में मदद कर सकता है। Kia की रणनीति क्यों है खास? किआ की आगामी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कंपनी किसी एक तकनीक पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहती। EV उन ग्राहकों के लिए विकल्प होगा जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना चाहते हैं, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड उन लोगों के लिए आकर्षक हो सकता है जो बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी के साथ पारंपरिक ईंधन की सुविधा चाहते हैं। वहीं, CNG मॉडल उन ग्राहकों को पसंद आ सकते हैं जो कम रनिंग कॉस्ट चाहते हैं लेकिन अभी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन पर शिफ्ट नहीं होना चाहते। आगे क्या? अगर किआ अपनी योजना के मुताबिक 2030 तक 10 में से 8 मॉडलों को इलेक्ट्रिफाइड करने और फैक्ट्री-फिटेड CNG विकल्पों का विस्तार करने में सफल रहती है, तो भारतीय बाजार में कंपनी का पोर्टफोलियो काफी व्यापक हो जाएगा। Seltos Hybrid, Sorento Hybrid, Carnival Hybrid और नई CNG कारों के आने से किआ के पास अलग-अलग बजट और जरूरत वाले ग्राहकों के लिए ज्यादा विकल्प होंगे। आने वाले वर्षों में यह रणनीति किआ को भारतीय ऑटो बाजार में मारुति सुजुकी, हुंडई और टोयोटा जैसी कंपनियों के साथ मुकाबले में और मजबूत कर सकती है।
नई दिल्ली: भारतीय प्रीमियम मोटरसाइकिल बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। इसी बीच Honda Motorcycle & Scooter India ने अपनी नई Honda CB500 से पर्दा उठाया है। यह 500cc सेगमेंट की नई नियो-रेट्रो मोटरसाइकिल है, जिसे क्लासिक डिजाइन पसंद करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि लॉन्च के बाद इसका मुकाबला सीधे Royal Enfield Classic 650 से होगा। हालांकि, Honda ने अभी तक CB500 की कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन डिजाइन, फीचर्स और इंजन के आधार पर यह रॉयल एनफील्ड की लोकप्रिय Classic 650 के लिए चुनौती बन सकती है। आइए जानते हैं दोनों बाइकों के बीच क्या हैं बड़े अंतर। डिजाइन: Neo-Retro बनाम Classic Retro Honda CB500 का डिजाइन कंपनी की मशहूर CB सीरीज से प्रेरित है। इसमें गोल LED हेडलाइट, बड़ा टियरड्रॉप फ्यूल टैंक, रिब्ड सिंगल-पीस सीट और मिनिमलिस्ट बॉडीवर्क दिया गया है। यह बाइक क्लासिक स्टाइल के साथ आधुनिक डिजाइन का बेहतरीन मिश्रण पेश करती है। कंपनी इसे तीन वेरिएंट्स में पेश करेगी, जिनमें स्टैंडर्ड अलॉय व्हील्स, क्रॉस-स्पोक ट्यूबलेस और टॉप-स्पेक क्रॉस-स्पोक ट्यूबलेस वेरिएंट शामिल होंगे। वहीं, Royal Enfield Classic 650 अपने पारंपरिक रेट्रो लुक को बरकरार रखती है। इसमें टियरड्रॉप फ्यूल टैंक, राउंड मडगार्ड, ट्विन पी-शूटर एग्जॉस्ट, सिग्नेचर टाइगर लैंप और भरपूर क्रोम फिनिश देखने को मिलती है। Classic 350 जैसी पहचान के साथ बड़ा इंजन और मजबूत चेसिस इसे दमदार रोड प्रेजेंस देता है। इंजन और परफॉर्मेंस Honda CB500 में नया 501cc ऑयल-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन दिया गया है, जो 27 हॉर्सपावर और 43.3Nm टॉर्क पैदा करता है। इसके साथ 5-स्पीड गियरबॉक्स मिलता है। कंपनी का दावा है कि इस बाइक का विकास और निर्माण भारत में किया जाएगा। दूसरी ओर, Royal Enfield Classic 650 में 648cc पैरेलल-ट्विन इंजन दिया गया है, जो 46.4bhp की पावर और 52.3Nm टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 6-स्पीड गियरबॉक्स और स्लिप एवं असिस्ट क्लच दिया गया है, जिससे हाईवे और लंबी दूरी की राइडिंग अधिक आरामदायक बनती है। फीचर्स में कौन आगे? Honda CB500 में आधुनिक तकनीक से जुड़े कई फीचर्स मिलने वाले हैं, जिनमें शामिल हैं: राउंड LED हेडलाइट एनालॉग-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर Honda Selectable Torque Control (HSTC) स्लिपर क्लच सभी वेरिएंट्स में ट्यूबलेस व्हील विकल्प वहीं Royal Enfield Classic 650 में मिलते हैं: LED हेडलाइट और टेललाइट सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर ट्रिपर नेविगेशन USB Type-C चार्जिंग पोर्ट एडजस्टेबल क्लच और ब्रेक लीवर डुअल-चैनल ABS कौन-सी बाइक किसके लिए बेहतर? अगर आप मॉडर्न टेक्नोलॉजी, हल्की राइडिंग और नियो-रेट्रो डिजाइन पसंद करते हैं, तो Honda CB500 एक आकर्षक विकल्प साबित हो सकती है। वहीं, यदि आपकी प्राथमिकता ज्यादा पावर, दमदार हाईवे परफॉर्मेंस, प्रीमियम रेट्रो लुक और Royal Enfield की पहचान है, तो Classic 650 अभी भी इस सेगमेंट की मजबूत दावेदार बनी हुई है। Honda CB500 की वास्तविक चुनौती तब सामने आएगी जब कंपनी इसकी आधिकारिक कीमत और विस्तृत स्पेसिफिकेशन का खुलासा करेगी।