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Vaishakh Amavasya 2026 Tarpan Rules

Vaishakh Amavasya 2026: तर्पण करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, पितरों की कृपा पाने के लिए जानें जरूरी नियम

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Tarpan rituals on Vaishakh Amavasya with traditional Hindu offerings and copper vessel
Vaishakh Amavasya Tarpan Rituals 2026

हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, खासकर पितरों की शांति और मोक्ष के लिए। वर्ष 2026 में वैशाख अमावस्या आज यानी 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जा रही है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन किए गए पितृ कर्म सीधे पितरों तक पहुंचते हैं। लेकिन कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे तर्पण का पूरा फल नहीं मिल पाता। ऐसे में जरूरी है कि तर्पण करते समय कुछ खास सावधानियों का पालन किया जाए।

तर्पण करते समय इन बातों का रखें ध्यान

1. सही दिशा का चुनाव करें
तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। अन्य दिशा में किया गया तर्पण निष्फल हो सकता है।

2. काले तिल का प्रयोग जरूरी
तर्पण के जल में काले तिल डालना अनिवार्य माना गया है। बिना तिल के किया गया तर्पण पितरों तक नहीं पहुंचता। ध्यान रखें कि केवल काले तिल का ही उपयोग करें।

3. तांबे के पात्र का उपयोग करें
पितरों को जल अर्पित करने के लिए तांबे के बर्तन का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है। स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन से तर्पण करना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है।

4. शुभ समय का रखें ध्यान
तर्पण का सबसे उपयुक्त समय दोपहर (मध्याह्न) का होता है। सुबह स्नान के बाद मध्याह्न में तर्पण करना शुभ माना जाता है, जबकि सूर्यास्त के बाद तर्पण वर्जित है।

5. संयमित व्यवहार अपनाएं
अमावस्या के दिन क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें। तर्पण करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय

पीपल की पूजा करें
अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मान्यता है कि पीपल में देवताओं और पितरों का वास होता है।

पंचबलि भोग लगाएं
भोजन बनाने के बाद गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और देवताओं के लिए अन्न का अंश निकालना शुभ माना जाता है।

दान का विशेष महत्व
इस दिन तिल, गुड़, अनाज और वस्त्र का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं। इससे वंश वृद्धि, सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

वैशाख अमावस्या का दिन पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर होता है। इस दिन विधि-विधान से तर्पण और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है। ऐसे में शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन कर आप पितरों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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मंगला गौरी व्रत 2026 की पूजा विधि और धार्मिक महत्व
Mangla Gauri Vrat 2026: आज मंगला गौरी व्रत, जानें पूजा विधि और 16 की संख्या का धार्मिक महत्व

रांची। सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए मां गौरी की आराधना करती हैं।   पूजा में 16 की संख्या क्यों है खास?   मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या को शुभ और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से पूजा में कई सामग्री 16 की संख्या में अर्पित करने की परंपरा है। देवी को 16 श्रृंगार की वस्तुएं, 16 लड्डू, 16 फल, 16 पान, 16 सुपारी, 16 लौंग और 16 इलायची चढ़ाने की मान्यता है। इसके अलावा देवी पूजा में षोडशोपचार, यानी 16 प्रकार के पूजा उपचार का भी विशेष महत्व बताया गया है। इसी धार्मिक परंपरा के कारण मंगला गौरी पूजन में 16 संख्या को विशेष माना जाता है।   ऐसे करें मंगला गौरी की पूजा   व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें और मां मंगला गौरी के व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर चौकी पर लाल या लाल-सफेद कपड़ा बिछाएं और मां गौरी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद कलश स्थापित कर मां गौरी का पूजन करें। माता के सामने घी का दीपक जलाएं। परंपरा के अनुसार आटे के दीपक में 16 बत्तियां लगाने का विधान है। मां गौरी को चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद 16 श्रृंगार सामग्री और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। पूजा के दौरान मां गौरी के मंत्र का जाप करें। मंत्र: “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥” अंत में मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें और माता की आरती करके पूजा संपन्न करें।   सुहाग और दांपत्य सुख की कामना से रखा जाता है व्रत   धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगला गौरी व्रत मां गौरी को समर्पित है। विवाहित महिलाएं इस व्रत के माध्यम से पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की इच्छा से यह व्रत रखती हैं। नोट: पूजा की विधि और सामग्री की परंपराएं क्षेत्र और परिवार की मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

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Teej Special Mawa Gujiya: तीज पर घर में बनाएं कुरकुरी मावा गुजिया, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का करेगा मन

तीज के त्योहार पर पूजा-पाठ और व्रत के साथ घर में तरह-तरह के पकवान बनाने की परंपरा है। अगर इस बार आप भी तीज पर कुछ खास मीठा बनाने की तैयारी कर रही हैं, तो मावा वाली गुजिया बेहतरीन विकल्प हो सकती है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से ड्राई फ्रूट्स से भरपूर मावे की फिलिंग वाली गुजिया घर में आसानी से तैयार की जा सकती है।   मावा गुजिया बनाने के लिए क्या चाहिए?   गुजिया के लिए आपको 2 कप मैदा, 4 बड़े चम्मच घी, 250 ग्राम मावा, आधा कप पिसी चीनी, काजू-बादाम, किशमिश और इलायची पाउडर चाहिए। स्वाद बढ़ाने के लिए नारियल का बुरादा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गुजिया तलने के लिए तेल या घी की जरूरत होगी।   सबसे पहले तैयार करें गुजिया का आटा   एक बड़े बर्तन में मैदा छानकर उसमें घी डालें और अच्छी तरह मिलाएं। थोड़ा मैदा हथेली पर लेकर दबाएं। अगर यह आसानी से बंध जाए तो समझें कि मोयन सही है। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथें। आटा रोटी के आटे की तरह नरम नहीं होना चाहिए। इसे गीले कपड़े से ढककर करीब 20 मिनट के लिए रख दें।   ऐसे तैयार करें मावे की स्वादिष्ट फिलिंग   कड़ाही में मावा डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। जब मावा हल्का सुनहरा हो जाए और उसकी नमी कम हो जाए तो गैस बंद कर दें। मावे को पूरी तरह ठंडा होने के बाद इसमें पिसी चीनी, बारीक कटे काजू-बादाम, किशमिश और इलायची पाउडर मिलाएं। चाहें तो थोड़ा नारियल भी डाल सकती हैं। ध्यान रखें कि गर्म मावे में चीनी न मिलाएं, वरना फिलिंग पतली हो सकती है।   गुजिया में भरें मावे की फिलिंग   आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें पूरी के आकार में बेल लें। बीच में करीब एक से डेढ़ चम्मच मावे की फिलिंग रखें और पूरी को आधा मोड़ दें। किनारों को उंगलियों से अच्छी तरह दबाकर बंद करें। चाहें तो पारंपरिक डिजाइन बना सकती हैं या गुजिया के सांचे का इस्तेमाल कर सकती हैं। किनारे ठीक से बंद करना जरूरी है, ताकि तलते समय फिलिंग बाहर न निकले।   धीमी आंच पर तलने से बनेगी कुरकुरी गुजिया   कड़ाही में तेल या घी गर्म करें। गुजिया डालने से पहले आंच को मध्यम से धीमा रखें। एक साथ बहुत ज्यादा गुजिया न डालें। गुजिया को धीरे-धीरे पलटते हुए दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। तैयार गुजिया को पेपर टॉवल पर निकाल लें।   चाय या दूध के साथ करें सर्व   मावा गुजिया को हल्का गर्म या ठंडा करके परोसा जा सकता है। ऊपर से कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर इसे सजाया भी जा सकता है। तीज के मौके पर परिवार और मेहमानों के लिए घर की बनी ताजी मावा गुजिया चाय या दूध के साथ स्वादिष्ट मिठाई का विकल्प बन सकती है।

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सावन अमावस्या 12 अगस्त 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण
सावन अमावस्या पर साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखाई देगा

नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के दिन आज, 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह खगोलीय घटना पूर्ण सूर्य ग्रहण होगी, लेकिन भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार ग्रहण की दृश्यता पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड और अटलांटिक-प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में रहेगी।   12 अगस्त को लग रहा पूर्ण सूर्य ग्रहण   यह सूर्य ग्रहण बुधवार, 12 अगस्त को हो रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ समय के लिए ढक देता है। इस बार ग्रहण की अधिकतम अवस्था भारतीय समयानुसार रात में होगी। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट रहेगी और पूर्ण ग्रहण की अवधि करीब 1 घंटे 32 मिनट होगी।   भारत में नहीं होगी ग्रहण की दृश्यता   भारत के लिए इस ग्रहण की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के किसी भी हिस्से से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में इसे देखने के लिए विशेष इंतजाम करने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय मौसम विभाग ने भी इसे स्पष्ट रूप से ‘Not Visible in India’ बताया है।   सावन अमावस्या के साथ बना खास संयोग   12 अगस्त को श्रावण अमावस्या/हरियाली अमावस्या भी मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या को पूजा-पाठ, पितरों के तर्पण और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन सूर्य ग्रहण पड़ने के कारण धार्मिक दृष्टि से भी इसे विशेष संयोग माना जा रहा है।   2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण   साल 2026 में कुल दो सूर्य ग्रहण हैं। पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में हुआ था, जबकि 12 अगस्त का ग्रहण साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण है। हालांकि खगोलीय घटना होने के बावजूद भारत में इसकी दृश्यता नहीं होने के कारण यहां इसका प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा।

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