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BPSC AEDO Admit Card 2026 Released

BPSC AEDO Admit Card 2026: अब एग्जाम सेंटर के पते के साथ डाउनलोड करें प्रवेश पत्र, जानें पूरा शेड्यूल

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Candidate downloading BPSC AEDO Admit Card 2026 showing exam center address on official website
BPSC AEDO Admit Card 2026 Download

पटना: बिहार में सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने BPSC AEDO Admit Card 2026 को अब परीक्षा केंद्र के पूरे पते के साथ उपलब्ध करा दिया है।

पहले जारी एडमिट कार्ड में केवल परीक्षा तिथि, शहर और शिफ्ट की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब उम्मीदवार अपने एग्जाम सेंटर की पूरी डिटेल्स भी देख सकते हैं।

कब से डाउनलोड कर सकते हैं एडमिट कार्ड?

Bihar Public Service Commission द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार:

  • 14–15 अप्रैल परीक्षा: 11 अप्रैल से एड्रेस के साथ एडमिट कार्ड उपलब्ध
  • 17–18 अप्रैल परीक्षा: 14 अप्रैल से उपलब्ध
  • 20–21 अप्रैल परीक्षा: 17 अप्रैल से उपलब्ध

हालांकि ई-एडमिट कार्ड 3 अप्रैल 2026 से ही डाउनलोड के लिए जारी कर दिया गया था।

परीक्षा कब होगी?

BPSC AEDO परीक्षा 14 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 के बीच तीन चरणों में आयोजित की जाएगी।

कैसे करें एडमिट कार्ड डाउनलोड?

उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं:

  1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
  2. अपने अकाउंट में लॉगिन करें
  3. रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड दर्ज करें
  4. “My Account” टैब पर क्लिक करें
  5. “BPSC AEDO Admit Card 2026” लिंक चुनें
  6. View/Download पर क्लिक करें
  7. परीक्षा केंद्र की डिटेल्स देखने के लिए “Exam Centre View” पर क्लिक करें
  8. एडमिट कार्ड डाउनलोड कर प्रिंट आउट निकाल लें

परीक्षा के दिन ध्यान रखें

  • एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट साथ ले जाएं
  • एक वैलिड फोटो आईडी प्रूफ जरूरी है
  • समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें

छात्रों के लिए सलाह

उम्मीदवार अपने एडमिट कार्ड को ध्यान से जांच लें और परीक्षा केंद्र का पता पहले ही देख लें, ताकि परीक्षा के दिन किसी तरह की परेशानी न हो।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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RRB ALP CBT-2 की आंसर की जारी, 11 अगस्त तक आपत्ति दर्ज करने का मौका

नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) भर्ती परीक्षा के CBT-2 की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपनी उत्तर कुंजी और रिस्पॉन्स शीट देखकर संभावित अंकों का अनुमान लगा सकते हैं। अगर किसी प्रश्न या उत्तर को लेकर आपत्ति है तो उम्मीदवार 11 अगस्त 2026 तक आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।   5 अगस्त को जारी हुई आंसर की   RRB ALP CBT-2 की आंसर की 5 अगस्त 2026 को जारी की गई। उम्मीदवारों को अपनी उत्तर कुंजी देखने के लिए संबंधित आरआरबी की वेबसाइट अथवा भर्ती पोर्टल पर लॉगिन करना होगा।   लॉगिन के लिए उम्मीदवारों को अपने पंजीकरण संबंधी विवरण का इस्तेमाल करना होगा। आंसर की के साथ उम्मीदवार अपनी रिस्पॉन्स शीट और प्रश्नपत्र भी देख सकते हैं।   11 अगस्त तक दर्ज कर सकेंगे आपत्ति   उम्मीदवार प्रोविजनल आंसर की में किसी उत्तर को गलत मानते हैं तो निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तारीख 11 अगस्त 2026 है। समय सीमा समाप्त होने के बाद आपत्ति दर्ज करने का अवसर नहीं मिलेगा।   उम्मीदवारों को सलाह है कि आपत्ति दर्ज करने से पहले संबंधित प्रश्न, अपनी रिस्पॉन्स शीट और आधिकारिक उत्तर को ध्यान से जांच लें। आपत्ति के समर्थन में आवश्यक प्रमाण या संदर्भ उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।   ऐसे डाउनलोड करें आंसर की   उम्मीदवार आंसर की देखने के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड के संबंधित पोर्टल पर जाएं। इसके बाद RRB ALP CBT-2 Answer Key लिंक पर क्लिक करके अपने लॉगिन विवरण दर्ज करें। लॉगिन करने के बाद उम्मीदवार अपनी उत्तर कुंजी, रिस्पॉन्स शीट और प्रश्नपत्र देख सकते हैं। इसे डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखना भी बेहतर रहेगा।   आपत्ति के बाद जारी होगी अंतिम उत्तर कुंजी   प्रोविजनल आंसर की पर प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा के बाद रेलवे भर्ती बोर्ड आवश्यक बदलाव कर सकता है। इसके बाद अंतिम उत्तर कुंजी के आधार पर परीक्षा का मूल्यांकन किया जाएगा।   उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे 11 अगस्त की अंतिम समय सीमा का इंतजार न करें और यदि कोई वास्तविक आपत्ति है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय रहते उसे दर्ज कर दें।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सरकार ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 12वीं के विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए मुफ्त JEE और NEET कोचिंग की पहल शुरू की है। इसके तहत चयनित विद्यार्थियों को एक साल की आवासीय कोचिंग दी जाएगी। खास बात यह है कि कोचिंग के साथ विद्यार्थियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी मुफ्त होगी।   डक्षिणा फाउंडेशन के साथ मिलकर चलेगा कार्यक्रम   यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार और Dakshana Foundation के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे मेधावी विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी का अवसर देना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। कोचिंग में JEE और NEET की तैयारी के साथ नियमित मॉक टेस्ट और परीक्षा आधारित अभ्यास भी कराया जाएगा।   चयन परीक्षा के आधार पर होगा चयन   इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों का चयन Joint Dakshana Selection Test (JDST) 2027 के माध्यम से किया जाएगा। दिल्ली के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को कक्षा 12वीं के विज्ञान वर्ग के पात्र विद्यार्थियों तक इस अवसर की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। चयनित छात्रों को एक साल की आवासीय कोचिंग के दौरान पढ़ाई के साथ रहने और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।   आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलेगा फायदा   इस पहल से उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं लेकिन महंगी कोचिंग फीस के कारण तैयारी नहीं कर पाते। सरकार की इस पहल से सरकारी स्कूलों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर संसाधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने का अवसर मिलेगा।

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यूपी के कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद, कांवड़ यात्रा के चलते 12 अगस्त तक रहेगी छुट्टी

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के मद्देनजर कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। मेरठ और गाजियाबाद में सभी स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 12 अगस्त 2026 तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। प्रशासन ने यह फैसला कांवड़ यात्रियों की बढ़ती संख्या, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है।   मेरठ और गाजियाबाद में 12 अगस्त तक बंद रहेंगे संस्थान     मेरठ में स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का आदेश पहले ही लागू हो चुका है, जबकि गाजियाबाद में 4 अगस्त से 12 अगस्त तक शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। इस दौरान सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों पर आदेश लागू रहेगा। हालांकि, पहले से निर्धारित परीक्षाएं अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जा सकती हैं।   प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। इससे प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है और कई मार्गों पर डायवर्जन भी लागू किए जाते हैं।   मुजफ्फरनगर और बागपत में भी छुट्टी     कांवड़ यात्रा को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने के फैसले लिए गए हैं। मुजफ्फरनगर में 3 से 10 अगस्त तक स्कूल-कॉलेज बंद रखने की जानकारी सामने आई है। वहीं मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और बागपत में अलग-अलग प्रशासनिक आदेशों के तहत छुट्टियां घोषित की गई हैं।   जिलों में छुट्टी की अवधि स्थानीय प्रशासन के आदेश के अनुसार अलग-अलग है। इसलिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपने जिले के आधिकारिक आदेश को जरूर देखना चाहिए।   सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को देखते हुए फैसला     कांवड़ यात्रा के दौरान सड़कों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने यातायात और सुरक्षा बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। स्कूल-कॉलेज बंद रखने से विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवाजाही कम होगी और प्रमुख मार्गों पर भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।  

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