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BPSC AEDO Admit Card 2026 Released

BPSC AEDO Admit Card 2026: अब एग्जाम सेंटर के पते के साथ डाउनलोड करें प्रवेश पत्र, जानें पूरा शेड्यूल

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Candidate downloading BPSC AEDO Admit Card 2026 showing exam center address on official website
BPSC AEDO Admit Card 2026 Download

पटना: बिहार में सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने BPSC AEDO Admit Card 2026 को अब परीक्षा केंद्र के पूरे पते के साथ उपलब्ध करा दिया है।

पहले जारी एडमिट कार्ड में केवल परीक्षा तिथि, शहर और शिफ्ट की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब उम्मीदवार अपने एग्जाम सेंटर की पूरी डिटेल्स भी देख सकते हैं।

कब से डाउनलोड कर सकते हैं एडमिट कार्ड?

Bihar Public Service Commission द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार:

  • 14–15 अप्रैल परीक्षा: 11 अप्रैल से एड्रेस के साथ एडमिट कार्ड उपलब्ध
  • 17–18 अप्रैल परीक्षा: 14 अप्रैल से उपलब्ध
  • 20–21 अप्रैल परीक्षा: 17 अप्रैल से उपलब्ध

हालांकि ई-एडमिट कार्ड 3 अप्रैल 2026 से ही डाउनलोड के लिए जारी कर दिया गया था।

परीक्षा कब होगी?

BPSC AEDO परीक्षा 14 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 के बीच तीन चरणों में आयोजित की जाएगी।

कैसे करें एडमिट कार्ड डाउनलोड?

उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं:

  1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
  2. अपने अकाउंट में लॉगिन करें
  3. रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड दर्ज करें
  4. “My Account” टैब पर क्लिक करें
  5. “BPSC AEDO Admit Card 2026” लिंक चुनें
  6. View/Download पर क्लिक करें
  7. परीक्षा केंद्र की डिटेल्स देखने के लिए “Exam Centre View” पर क्लिक करें
  8. एडमिट कार्ड डाउनलोड कर प्रिंट आउट निकाल लें

परीक्षा के दिन ध्यान रखें

  • एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट साथ ले जाएं
  • एक वैलिड फोटो आईडी प्रूफ जरूरी है
  • समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें

छात्रों के लिए सलाह

उम्मीदवार अपने एडमिट कार्ड को ध्यान से जांच लें और परीक्षा केंद्र का पता पहले ही देख लें, ताकि परीक्षा के दिन किसी तरह की परेशानी न हो।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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उच्च शिक्षा के अनाथ व निःशक्त छात्रों की सालाना 10 लाख तक की फीस भरेगी सरकार भरेगी, 1 मई से आवेदन

रांची। झारखंड में वाल्मीकि छात्रवृति योजना की शुरुआत होने जा रही है। यह योजना इस शैक्षणिक सत्र में शुरू होगी। इसके तहत वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 से उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे अनाथ व दिव्यांग छात्रों की ट्यूशन फीस राज्य सरकार देगी। इसके लिए एक मई से झारखंड सरकार वाल्मीकि छात्रवृत्ति योजना शुरू कर रही है। छात्र इसके पोर्टल पर जाकर 1 मई से ऑनलाइन आवेदन दे सकेंगे। यह योजना मूलत: उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की है, पर इसमें समाज कल्याण एवं महिला बाल विकास के साथ कल्याण विभाग भी सहयोगी है। 10 लाख तक देगी सरकार इस योजना अंतर्गत एक वर्ष में ट्यूशन फीस के रूप में सरकार अधिकतम 10 लाख रुपए तक देगी। इससे अधिक होने पर छात्रों को खुद वहन करना होगा। हॉस्टल, भोजन और अन्य शुल्क छात्रों को ही देना होगा। शर्तें पूरी करने वाले सभी छात्रों को इसका मिलेगा लाभ।  किस छात्र को अनाथ माना जाएगा? सरकार ने तय किया है कि 18 वर्ष की आयु से पहले जिन छात्रों के माता-पिता का निधन हो चुका है, उसे अनाथ माना जाएगा। इसके लिए सत्यापित दस्तावेज अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। दिव्यांग छात्र की परिभाषा क्या होगी? दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार बेंचमार्क दिव्यांगता होना अनिवार्य है। यानी कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांग की श्रेणी में होना चाहिए। ऐसे छात्रों के पास यूडीआईडी कार्ड अनिवार्य रूप से होना चाहिए। कितने लाभार्थियों को मिलेगा लाभ? छात्रों की कोई अधिकतम संख्या तय नहीं है। जितने भी शर्तें पूरी करेंगे, उन सबको छात्रवृत्ति मिलेगी। एक अनुमान के अनुसार राज्य में दिव्यांग छात्रों की संख्या 45 हजार है। पर, इनमें से कितने उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, इसकी डेटा सरकार के पास नहीं है। अनाथ बच्चों की भी संख्या सरकार के पास नहीं है। कोविड के समय अनाथ हुए बच्चों की संख्या छोड़ दें, तो ऐसा कोई आंकड़ा सरकार के पास नहीं है।   झारखंड से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की हो लाभार्थी को झारखंड का स्थानीय निवासी होना चाहिए या झारखंड के मान्यता प्राप्त संस्थान से 10वीं और 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की हो। वार्षिक नवीनीकरण के अंतर्गत योजना का लाभ प्राप्त करना जारी रखने के लिए छात्रों को पिछले वर्ष की अंक सूची और अगली कक्षा में प्रवेश का प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा।   किस संस्थान में पढ़नेवालों को मिलेगा? छात्रवृत्ति का लाभ लेने के लिए झारखंड में स्थित किसी मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान का छात्र होना चाहिए। पर, राज्य के बाहर वाले संस्थान को देश के ओवरऑल रैंकिंग में टॉप 200 में होना चाहिए। इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, प्रबंधन और फार्मेसी जैसी श्रेणियों में टॉप 100 रैंकिंग के भीतर होना चाहिए।

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सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। Staff Selection Commission (SSC) ने Selection Post Phase 14 Recruitment 2026 के तहत 3003 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह भर्ती खास बात इसलिए भी है क्योंकि इसमें 10वीं पास से लेकर ग्रेजुएट उम्मीदवारों तक सभी के लिए अवसर उपलब्ध है। SSC की यह भर्ती उन लाखों उम्मीदवारों के लिए उम्मीद लेकर आई है जो लंबे समय से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे थे। इच्छुक उम्मीदवार SSC की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 13 अप्रैल 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 04 मई 2026 फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 05 मई 2026 करेक्शन विंडो: 11 मई से 13 मई 2026 कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती में पदों को तीन अलग-अलग शैक्षणिक स्तरों में बांटा गया है: मैट्रिक (10वीं पास) इंटरमीडिएट (12वीं पास) ग्रेजुएशन लेवल यानी अगर आपने सिर्फ 10वीं पास की है, तब भी आप आवेदन कर सकते हैं। वहीं 12वीं और ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए भी कई पद उपलब्ध हैं। आयु सीमा: उम्मीदवारों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए (पोस्ट के अनुसार अलग-अलग हो सकती है)। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट दी जाएगी। ऐसे करें आवेदन SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “Selection Post Phase 14” लिंक पर क्लिक करें नया रजिस्ट्रेशन करें लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें फीस जमा कर फॉर्म सबमिट करें वैकेंसी डिटेल्स जनरल (General): 1534 पद OBC: 667 पद SC: 346 पद EWS: 271 पद ST: 185 पद कुल पद: 3003 क्या है खास? यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए बेहतरीन मौका है जो कम शैक्षणिक योग्यता के बावजूद सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं। 10वीं पास उम्मीदवारों के लिए इतने बड़े स्तर पर भर्ती कम ही देखने को मिलती है।  

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