मुंबई, एजेंसियां। फिल्मकार इम्तियाज अली की चर्चित फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ आज, 7 अगस्त 2026 से Netflix पर स्ट्रीम हो रही है। शरवरी वाघ और वेदांग रैना अभिनीत यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद अब डिजिटल दर्शकों तक पहुंच गई है। Netflix India ने फिल्म के 7 अगस्त को प्रीमियर की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए साझा की थी।
‘मैं वापस आऊंगा’ की कहानी एक 95 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पाकिस्तान जाने की कोशिश के दौरान स्ट्रोक का शिकार हो जाता है। इसके बाद उसकी यादें कमजोर पड़ती जाती हैं और परिवार उसके अतीत से जुड़े टुकड़ों को समझने की कोशिश करता है।
कहानी के जरिए 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के लंबे समय बाद भी लोगों के जीवन पर बनी सीमाओं और बिछड़ने के दर्द को दिखाने का प्रयास किया गया है।
फिल्म का निर्देशन इम्तियाज अली ने किया है। रोमांस और रिश्तों पर आधारित कहानियों के लिए पहचाने जाने वाले इम्तियाज ने इस बार विभाजन और मानवीय भावनाओं को केंद्र में रखा है।
फिल्म में अतीत और वर्तमान के बीच कहानी आगे बढ़ती है। एक तरफ बुजुर्ग किरदार अपने पुराने समय और यादों से जूझता है, वहीं दूसरी तरफ नई पीढ़ी उसके अतीत को समझने की कोशिश करती है। इसी वजह से फिल्म में परिवार, यादें, पहचान, बिछड़ना और सरहद जैसे विषय एक साथ दिखाई देते हैं।
फिल्म में शरवरी वाघ और वेदांग रैना महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। उनके किरदार नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो परिवार के बुजुर्ग सदस्य के अतीत को समझने और उसकी भावनात्मक यात्रा से जुड़ने की कोशिश करती है। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। उनके अभिनय को कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
‘मैं वापस आऊंगा’ 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। थिएटर रिलीज के बाद अब 7 अगस्त को इसका डिजिटल प्रीमियर Netflix पर हो गया है।
रिपोर्टों के अनुसार फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत में धीमी रफ्तार के बाद अच्छा प्रदर्शन किया और बाद में इसे 2026 की चर्चित हिंदी फिल्मों में गिना गया। OTT रिलीज के बाद अब फिल्म को देश के साथ-साथ विदेशों में भी ज्यादा दर्शक मिलने की संभावना है।
जिन दर्शकों ने फिल्म को सिनेमाघरों में नहीं देखा था, उनके लिए अब इसे देखने का मौका है। ‘मैं वापस आऊंगा’ 7 अगस्त से Netflix पर उपलब्ध है। फिल्म की कहानी का केंद्र किसी बड़े एक्शन या भव्य दृश्य के बजाय मानवीय रिश्ते और विभाजन की पीड़ा है। यही पहलू इसे इम्तियाज अली की पिछली फिल्मों से अलग पहचान देता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी अभिनेत्री शिवांगी जोशी और अभिनेता हर्षद चोपड़ा की जोड़ी लंबे समय से दर्शकों के बीच चर्चा में रही है। दोनों ने साथ काम किया और बाद में रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में भी उनकी नजदीकियों ने रिश्ते को लेकर अटकलों को हवा दी। हालांकि, अब हर्षद चोपड़ा ने इन चर्चाओं पर खुलकर बात करते हुए दोनों के बीच किसी रोमांटिक रिश्ते की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने साफ किया कि शिवांगी के साथ उनका रिश्ता दोस्ती का है। ‘लॉक अप 2’ में बढ़ी दोनों की नजदीकियां शिवांगी जोशी और हर्षद चोपड़ा की दोस्ती ‘लॉक अप 2’ के दौरान लगातार सुर्खियों में रही। शो में दोनों की बॉन्डिंग और एक-दूसरे का समर्थन करने के कारण दर्शकों के बीच उनके अफेयर को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। मामला उस समय और चर्चा में आया जब हर्षद ने शो में शिवांगी के लिए बड़ा फैसला लिया। उन्होंने फिनाले की दौड़ में अपनी जगह छोड़कर शिवांगी को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हर्षद ने रोमांटिक रिश्ते से किया इनकार अफेयर की चर्चाओं के बीच हर्षद चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि शिवांगी के साथ उनका रिश्ता रोमांटिक नहीं है। उन्होंने दोनों के बीच बने रिश्ते को दोस्ती के तौर पर बताया। हर्षद का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शो के दौरान उनकी शिवांगी के प्रति करीबी और समर्थन को दर्शकों के एक वर्ग ने प्रेम संबंध से जोड़कर देखना शुरू कर दिया था। अभिनेता ने इन अटकलों को हवा देने के बजाय रिश्ते की वास्तविक स्थिति साफ करने की कोशिश की। बहन भी अफेयर की खबरों से थी नाराज हर्षद ने यह भी बताया कि शिवांगी के साथ उनके रोमांस की खबरों से उनकी बहन नाराज थी। दरअसल, शो में हर्षद के शिवांगी के लिए किए गए फैसलों और दोनों की करीबी के बाद बाहर भी उनके रिश्ते को लेकर चर्चा बढ़ गई थी। हर्षद के मुताबिक, उनकी बहन को भी इस तरह की खबरों और चर्चाओं पर आपत्ति थी। हालांकि, अभिनेता ने अपने और शिवांगी के रिश्ते को लेकर किसी तरह की रोमांटिक पुष्टि नहीं की। दोस्ती और शो के फैसलों ने बढ़ाई चर्चा ‘लॉक अप 2’ में हर्षद ने शिवांगी का लगातार समर्थन किया। एक मौके पर उन्होंने फिनाले में पहुंचने का अपना मौका छोड़ दिया, जिसके बाद दर्शकों के बीच उनकी दोस्ती को लेकर काफी चर्चा हुई। कुछ दर्शकों ने इसे भावनात्मक जुड़ाव माना, जबकि कुछ ने इसे शो की रणनीति के नजरिए से देखा। शो से बाहर आने के बाद भी हर्षद ने शिवांगी के प्रति अपना समर्थन बनाए रखा। ऐसे में दोनों के रिश्ते को लेकर अटकलें जारी रहीं, लेकिन हर्षद के ताजा स्पष्टीकरण से कम से कम उनकी तरफ से स्थिति स्पष्ट हो गई है।
मुंबई, एजेंसियां। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने फिल्म की भव्यता और तकनीकी स्तर की तारीफ करते हुए कहा कि अगर इसे ऑस्कर नहीं मिलता है तो उन्हें अकादमी अवॉर्ड्स की जूरी से निराशा होगी। फडणवीस ने फिल्म को केवल दशक की नहीं, बल्कि “सहस्राब्दी की फिल्म” बताया। Prime Focus Studio के उद्घाटन में की तारीफ फडणवीस ने यह टिप्पणी 6 अगस्त 2026 को मुंबई में Prime Focus Studio के उद्घाटन के दौरान की। यह स्टूडियो फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा से जुड़ा है। कार्यक्रम में फडणवीस ने भारतीय पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक और बड़े स्तर के फिल्म निर्माण के साथ पेश करने के प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने ‘रामायण’ को भारतीय सिनेमा के लिए बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना के तौर पर पेश किया। ‘ऑस्कर नहीं मिला तो जूरी से निराश होऊंगा’ फडणवीस ने फिल्म को लेकर काफी ऊंची उम्मीद जताते हुए कहा कि यदि ‘रामायण’ को ऑस्कर नहीं मिलता है तो वह अकादमी की जूरी से निराश होंगे। उन्होंने फिल्म को “फिल्म ऑफ द मिलेनियम” यानी “सहस्राब्दी की फिल्म” बताया। हालांकि, यह फडणवीस की व्यक्तिगत प्रशंसा और उम्मीद है—इसे ऑस्कर के लिए आधिकारिक नामांकन या पुरस्कार की घोषणा नहीं समझना चाहिए। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म को बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है और इसके दृश्य प्रभाव तथा तकनीकी प्रस्तुति को लेकर काफी चर्चा है। फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा हैं और इसे भारतीय पौराणिक कथा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने वाली बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। 6 नवंबर 2026 को रिलीज होगी पहली फिल्म ‘रामायण’ को दो भागों में रिलीज करने की योजना है। इसका पहला भाग 6 नवंबर 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाला है। दूसरा भाग 2027 में रिलीज किए जाने की योजना है। फडणवीस के बयान ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। अब फिल्म की वास्तविक परीक्षा रिलीज के बाद दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रिया के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी स्वीकार्यता से होगी।
मुंबई, एजेंसियां। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण अभियान पर आधारित वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ आज, 7 अगस्त 2026 से Netflix पर स्ट्रीम हो रही है। यह सीरीज 1999 के कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि में भारतीय वायुसेना के उस अभियान को सामने लाती है, जिसने युद्ध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। 1999 के कारगिल युद्ध पर आधारित कहानी ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के अभियान पर केंद्रित है। ऑपरेशन सफेद सागर भारतीय वायुसेना की ओर से कारगिल संघर्ष के दौरान चलाया गया महत्वपूर्ण हवाई अभियान था। सीरीज के जरिए युद्ध के दौरान सामने आई चुनौतियों, रणनीति और वायुसेना के जवानों के साहस को नाटकीय अंदाज में दिखाने की कोशिश की गई है। आज से Netflix पर उपलब्ध सीरीज का डिजिटल प्रीमियर 7 अगस्त 2026 को Netflix पर हुआ है। यानी दर्शक आज से ही इसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं। Netflix की ओर से भी 7 अगस्त की स्ट्रीमिंग को लेकर प्रचार किया गया है। कारगिल युद्ध और भारतीय सशस्त्र बलों की वीरगाथाओं में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज खास आकर्षण बन सकती है। जिमी शेरगिल समेत नजर आएंगे कई कलाकार सीरीज की चर्चा इसके विषय के साथ-साथ कलाकारों को लेकर भी है। इसमें जिमी शेरगिल और सिद्धार्थ जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते हैं। कहानी में वायुसेना के अधिकारियों और जवानों के नजरिए से युद्ध की परिस्थितियों को दिखाने पर जोर दिया गया है। मेकर्स ने युद्ध के दौरान होने वाले हवाई अभियानों, रणनीतिक फैसलों और जवानों की चुनौतियों को मनोरंजक कहानी के साथ जोड़ने की कोशिश की है। देशभक्ति और युद्ध ड्रामा का मेल ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ केवल युद्ध के दृश्यों तक सीमित नहीं है। इसका फोकस उन लोगों की भूमिका और संघर्ष पर भी है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए काम किया। कारगिल युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे सामान्य युद्ध-आधारित मनोरंजन से अलग बनाती है। सीरीज में सैन्य रणनीति, साहस, भावनात्मक संघर्ष और देशभक्ति को कहानी के प्रमुख हिस्से के तौर पर पेश किया गया है। दर्शकों के लिए आज से नई OTT पेशकश अगस्त के पहले सप्ताह में Netflix पर आने वाली प्रमुख रिलीज में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को शामिल किया गया है। 7 अगस्त को इसके साथ कई अन्य फिल्में और सीरीज भी अलग-अलग OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई हैं। ऐसे में इस सप्ताहांत युद्ध, इतिहास और देशभक्ति से जुड़ा कंटेंट देखने वाले दर्शकों के लिए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ प्रमुख विकल्पों में शामिल हो सकती है।