यानी लंबे समय तक इस प्रॉपर्टी को अपने पास रखने के बाद इसकी कीमत में करीब 824 प्रतिशत का उछाल आया। यह डील ऐसे समय में सामने आई है, जब मुंबई के प्रीमियम इलाकों में कमर्शियल और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में सेलिब्रिटीज की दिलचस्पी लगातार चर्चा में है।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक माधुरी दीक्षित ने यह ऑफिस स्पेस 14 मई 2008 को हुए एग्रीमेंट के जरिए 52.5 लाख रुपये में खरीदा था। अब इसे 4.85 करोड़ रुपये में बेचा गया है।
यह ऑफिस अंधेरी वेस्ट में लिंक रोड के पास ओशिवारा स्थित मोरया लैंडमार्क-II प्रेमिसेस कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड की चौथी मंजिल पर है। इसका कारपेट एरिया करीब 1,594.24 वर्ग फुट है और डील में तीन कार पार्किंग स्पेस भी शामिल हैं।
इस बिक्री के लिए करीब 29.10 लाख रुपये की स्टाम्प ड्यूटी चुकाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक प्रॉपर्टी खरीदने वाली कंपनी फ्रेम्स प्रोडक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड है और इसका एग्रीमेंट 23 जून को रजिस्टर हुआ।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ माधुरी ने अपना पुराना ऑफिस बेचा, तो दूसरी तरफ इसी साल मार्च में उन्होंने मुंबई के लोअर परेल में एक नया ऑफिस स्पेस पांच साल के लिए लीज पर लिया।
करीब 731 वर्ग फुट के इस ऑफिस में एक कार पार्किंग स्पेस भी है। पांच साल के लीज एग्रीमेंट की कुल किराये की राशि करीब 2.81 करोड़ रुपये बताई गई है। पहले साल का किराया 4.25 लाख रुपये और दूसरे साल में 5 प्रतिशत बढ़कर करीब 4.46 लाख रुपये होने की जानकारी सामने आई है।
माधुरी दीक्षित की रियल एस्टेट गतिविधियां सिर्फ ऑफिस स्पेस तक सीमित नहीं हैं। दिसंबर 2025 में उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित अपना एक अपार्टमेंट करीब 3.9 करोड़ रुपये में बेचा था।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अपार्टमेंट को माधुरी और उनके पति ने करीब 1.95 करोड़ रुपये में खरीदा था। यानी इस सौदे में भी संपत्ति की कीमत लगभग दोगुनी हुई।
इसी सोसाइटी में उन्होंने एक अन्य फ्लैट से जुड़ी पार्किंग स्पेस भी करीब 15 लाख रुपये में बेची थी।
माधुरी दीक्षित ने साल 2022 में मुंबई के लोअर परेल इलाके में करीब 48 करोड़ रुपये का एक लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा था। यह डील उनके रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में सबसे बड़ी खरीद में से एक मानी जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक अभिनेत्री के पास मुंबई के अलावा अमेरिका के डेनवर में भी एक लग्जरी बंगला है। इसके अलावा लोखंडवाला, जुहू और मलाड में भी उनकी प्रॉपर्टीज का जिक्र सामने आया है।
माधुरी दीक्षित की कमाई का प्रमुख स्रोत सिर्फ रियल एस्टेट नहीं है। रिपोर्ट में उनकी अनुमानित नेट वर्थ करीब 250 करोड़ रुपये बताई गई है।
फिल्मों के लिए उनकी फीस करीब 4 से 5 करोड़ रुपये बताई जाती है, जबकि ब्रांड एंडोर्समेंट से भी वह अच्छी कमाई करती हैं। वह ऑनलाइन डांस स्कूल के जरिए भी कमाई करती हैं।
रियलिटी शो में जज के तौर पर नजर आने पर उनकी फीस 10 से 20 करोड़ रुपये तक होने का दावा किया गया है। हालांकि सेलिब्रिटी की फीस और नेट वर्थ से जुड़े आंकड़े अक्सर मीडिया रिपोर्टों और अनुमान पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
माधुरी दीक्षित अकेली बॉलीवुड हस्ती नहीं हैं, जिन्होंने प्रॉपर्टी को निवेश के तौर पर इस्तेमाल किया है। ऋतिक रोशन, कार्तिक आर्यन और सैफ अली खान जैसे सितारे भी ऑफिस और अन्य रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेश को लेकर चर्चा में रहे हैं।
माधुरी की हालिया डील खास इसलिए है क्योंकि 2008 में खरीदी गई 52.5 लाख रुपये की कमर्शियल प्रॉपर्टी करीब 18 साल बाद 4.85 करोड़ रुपये में बिकी। यह सौदा मुंबई के प्रीमियम रियल एस्टेट बाजार में लंबी अवधि के निवेश की संभावनाओं को भी सामने रखता है।
हालांकि, किसी भी प्रॉपर्टी निवेश से मिलने वाला रिटर्न इलाके, संपत्ति की स्थिति, बाजार की परिस्थितियों, टैक्स और अन्य खर्चों पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ किसी सेलिब्रिटी की डील देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'आवारापन 2' की रिलीज डेट को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। फिल्म के निर्माता विशेश भट्ट ने स्पष्ट किया है कि फिल्म 14 अगस्त 2026 को तय समय पर ही सिनेमाघरों में रिलीज होगी। उन्होंने बताया कि फिल्म की रिलीज कभी टाली नहीं गई थी। बड़े पैमाने पर फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस को अंतिम रूप देने और शूटिंग के दौरान इमरान हाशमी के घायल होने के कारण पोस्ट-प्रोडक्शन में थोड़ा अतिरिक्त समय लगा, लेकिन इससे रिलीज डेट पर कोई असर नहीं पड़ा। निर्माता ने यह भी जानकारी दी कि फिल्म का ट्रेलर इसी सप्ताह जारी किया जाएगा। 'आवारापन 2' में मिलेगा अधूरी कहानी का जवाब, सनी देओल की फिल्म से होगी सीधी टक्कर विशेश फिल्म्स के इंस्टाग्राम लाइव सेशन में इमरान हाशमी ने भी फिल्म से जुड़ी अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर लोग बिना पुष्टि के कुछ भी कह देते हैं। उन्होंने बताया कि 'आवारापन 2' की कहानी पहली फिल्म के अंत से आगे बढ़ेगी और दर्शकों को यह भी पता चलेगा कि उनका किरदार शिवम पंडित आखिर कैसे बच गया था। 14 अगस्त को रिलीज होने वाली इस फिल्म की सीधी टक्कर सनी देओल की 'बंटवारा 1947' से होगी। हालांकि, निर्माता विशेश भट्ट ने कहा कि वे इस क्लैश को सकारात्मक रूप से देखते हैं और सनी देओल जैसे बड़े अभिनेता की फिल्म के साथ रिलीज होना उनके लिए सम्मान की बात है।
मुंबई, एजेंसियां। हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता प्रदीप रावत का कैंसर से लंबी जंग के बाद 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रदीप रावत ने अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में दमदार अभिनय किया। उनके परिवार में पत्नी कल्याणी रावत और बेटे विक्रमादित्य रावत हैं। रावत के मैनेजर सिद्धार्थ आर. तिवारी के अनुसार, अभिनेता का पिछले करीब एक महीने से कैंसर का इलाज चल रहा था। पहले उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बाद में उन्हें भिवंडी के कैंसर अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। परिवार ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार बुधवार को मुंबई में किया जाएगा, जिसमें परिवार, करीबी मित्र और फिल्म जगत की कई हस्तियां शामिल होंगी। 'महाभारत' से 'गजनी' तक बनाई अलग पहचान प्रदीप रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के चर्चित टीवी धारावाहिक 'महाभारत' में अश्वत्थामा की भूमिका से की थी। इसके बाद उन्होंने 1985 में फिल्म 'मेरी जंग' से बॉलीवुड में कदम रखा और 'सरफरोश', 'लगान', 'गजनी', 'अग्निपथ' और 'छावा' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। खासकर आमिर खान अभिनीत 'गजनी' में उनके निभाए गए खलनायक के किरदार ने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई। उनके निधन पर अभिनेता यशपाल शर्मा, गजेंद्र चौहान और ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) समेत कई फिल्मी हस्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उन्हें एक बेहतरीन अभिनेता, अनुशासित कलाकार और सहृदय इंसान बताते हुए भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया।
मुंबई, एजेंसियां। साउथ सिनेमा की स्पोर्ट्स कॉमेडी फिल्म ‘गट्टा कुश्ती 2’ ने ओटीटी पर रिलीज होते ही जबरदस्त धमाका कर दिया है। विष्णु विशाल और ऐश्वर्या लक्ष्मी की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर भारत में सबसे ज्यादा ट्रेंड करने वाली फिल्मों की सूची में नंबर-1 पर पहुंच गई है। खास बात यह है कि फिल्म ने राम चरण और जाह्नवी कपूर की ‘पेद्दी’ को पीछे छोड़कर यह मुकाम हासिल किया है। ‘पेद्दी’ को पछाड़कर हासिल किया नंबर-1 स्थान नेटफ्लिक्स की मौजूदा भारत टॉप-10 फिल्मों की सूची में ‘गट्टा कुश्ती 2’ सबसे ऊपर है, जबकि ‘पेद्दी’ दूसरे स्थान पर दिखाई दे रही है। ‘पेद्दी’ ने दुनियाभर में करीब 350 करोड़ रुपये का कारोबार किया है और सिनेमाघरों में भी इसे अच्छी सफलता मिली थी। ऐसे में ओटीटी पर एक अपेक्षाकृत कम बजट की फिल्म का उसे पीछे छोड़ना खासा चर्चा में है। क्या है ‘गट्टा कुश्ती 2’ की कहानी? ‘गट्टा कुश्ती 2’ की कहानी पहले भाग के आगे बढ़ती है। फिल्म में वीरा और कीर्ति अब अपनी बेटी माती की परवरिश कर रहे हैं। कहानी में इस बार दोनों की जिंदगी और जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। कीर्ति जहां कुश्ती में अपना करियर आगे बढ़ाने पर ध्यान देती हैं, वहीं वीरा घर और परिवार की जिम्मेदारियां संभालता है। इसी बीच दोनों के रिश्ते में नई चुनौतियां आती हैं और एक कोच उनकी शादीशुदा जिंदगी में परेशानी खड़ी करने की कोशिश करता है। फिल्म में पारिवारिक रिश्तों के साथ कॉमेडी और स्पोर्ट्स का तड़का लगाया गया है। थिएटर के बाद ओटीटी पर भी जबरदस्त प्रदर्शन ‘गट्टा कुश्ती 2’ का बजट करीब 27 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि फिल्म ने दुनियाभर में लगभग 60 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। थिएटर में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद अब फिल्म को नेटफ्लिक्स पर भी दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म तमिल, तेलुगु, हिंदी, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में उपलब्ध है। चेल्ला अय्यावु के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विष्णु विशाल और ऐश्वर्या लक्ष्मी के अलावा कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। नेटफ्लिक्स पर नंबर-1 पहुंचने के बाद फिल्म एक बार फिर दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।