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‘Lock Upp 2’ की विजेता बनीं श्रेया कालरा, ₹1 करोड़ की इनामी राशि के साथ मनाया जीत का जश्न

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
Lock Upp 2 Winner
Lock Upp 2 Winner

मुंबई, एजेंसियां। रियलिटी शो ‘Lock Upp: Sach Ya Sazaa’ सीजन 2 का ग्रैंड फिनाले खत्म हो चुका है और श्रेया कालरा ने शो की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। फिनाले में उन्होंने शिवांगी जोशी को करीबी मुकाबले में पीछे छोड़ा। जीत के साथ श्रेया को ₹1 करोड़ की पुरस्कार राशि भी मिली।

 

शिवांगी जोशी रहीं फर्स्ट रनर-अप

 

श्रेया कालरा और शिवांगी जोशी के बीच फिनाले में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। आखिरकार श्रेया ने शिवांगी को सिर्फ सात वोटों के अंतर से पीछे छोड़ते हुए विजेता का खिताब हासिल किया। शिवांगी जोशी शो की फर्स्ट रनर-अप रहीं। वहीं योगेश रावत भी शीर्ष दावेदारों में शामिल रहे।

 

छह हफ्तों तक चला मुकाबला

 

‘Lock Upp 2’ में छह सप्ताह तक प्रतियोगियों के बीच टास्क, रणनीति, विवाद और भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिले। श्रेया ने पूरे सीजन में अपनी बेबाक राय और मजबूत गेमप्ले से दर्शकों का ध्यान खींचा।

 

ग्रैंड फिनाले में श्रेया, शिवांगी और योगेश समेत अन्य फाइनलिस्ट को कई चुनौतियों और ‘जनता की जूरी’ के सवालों का सामना करना पड़ा। अंत में श्रेया विजेता बनकर सामने आईं।

 

जीत के बाद शुरू हुआ जश्न

 

ट्रॉफी जीतने के बाद श्रेया कालरा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शो के ग्रैंड फिनाले के बाद फराह खान ने सक्सेस पार्टी आयोजित की, जिसमें शो के कई प्रतियोगी और मनोरंजन जगत से जुड़े लोग शामिल हुए।

 

पार्टी से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में श्रेया समेत पूर्व प्रतियोगियों को जश्न मनाते देखा गया। खास तौर पर श्रेया कालरा और शिवांगी जोशी का साथ में डांस भी चर्चा में रहा।

 

₹1 करोड़ की पुरस्कार राशि से बढ़ी जीत की चमक

 

‘Lock Upp 2’ की ट्रॉफी के साथ श्रेया को ₹1 करोड़ की नकद पुरस्कार राशि मिली है। जीत के बाद श्रेया ने दूसरे प्रतियोगियों की मदद को लेकर भी बात की और कहा कि वह इस राशि का इस्तेमाल अन्य प्रतिभागियों के थेरेपी खर्च में मदद करने के लिए करना चाहती हैं।

श्रेया की जीत के साथ ‘Lock Upp 2’ का सफर खत्म हो गया है, लेकिन फिनाले के बाद उनकी जीत और शो के प्रतियोगियों के बीच रिश्ते लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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माधुरी दीक्षित ने मुंबई की प्रॉपर्टी बेची ₹4.85 करोड़ में, 18 साल में कमाया 824% का शानदार मुनाफा

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित अपना कमर्शियल ऑफिस ₹4.85 करोड़ में बेच दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अभिनेत्री ने यह प्रॉपर्टी करीब 18 साल पहले ₹52.5 लाख में खरीदी थी। इस तरह इस संपत्ति की बिक्री से उन्हें करीब 824 फीसदी का रिटर्न मिला है।   2008 में खरीदा था ऑफिस   रिपोर्ट के अनुसार माधुरी दीक्षित ने करीब 1,593 वर्ग फुट का यह कमर्शियल ऑफिस वर्ष 2008 में खरीदा था। उस समय इसकी कीमत लगभग ₹52.5 लाख थी। करीब 18 साल बाद इसकी बिक्री ₹4.85 करोड़ में हुई है। इस सौदे से मुंबई के प्रीमियम कमर्शियल रियल एस्टेट में लंबे समय तक निवेश के बढ़ते मूल्य का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।   Frames Production Company ने खरीदी प्रॉपर्टी   माधुरी दीक्षित की यह प्रॉपर्टी Frames Production Company Private Limited को बेची गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह सौदा अंधेरी वेस्ट स्थित कमर्शियल प्रॉपर्टी से जुड़ा है। करीब दो दशक पहले किए गए निवेश की तुलना में मौजूदा बिक्री कीमत कई गुना अधिक होने के कारण यह सौदा खासा चर्चा में है।   करीब नौ गुना बढ़ी प्रॉपर्टी की कीमत   माधुरी दीक्षित ने जिस कीमत पर यह ऑफिस खरीदा था, उसके मुकाबले बिक्री मूल्य करीब 9 गुना है। ₹52.5 लाख के शुरुआती निवेश के मुकाबले ₹4.85 करोड़ की बिक्री ने अभिनेत्री को करीब ₹4.32 करोड़ का सकल मूल्य अंतर दिया है। हालांकि, यह गणना केवल खरीद और बिक्री कीमत के अंतर पर आधारित है; इसमें स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, टैक्स और अन्य लेनदेन लागत शामिल नहीं हैं। माधुरी दीक्षित का यह रियल एस्टेट सौदा अब बॉलीवुड से जुड़े सबसे चर्चित सेलिब्रिटी प्रॉपर्टी लेनदेन में शामिल हो गया है।

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मुंबई, एजेंसियां। ‘गजनी’ और ‘लगान’ जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का 4 अगस्त 2026 की शाम 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने निधन की पुष्टि की है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदीप रावत लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और करीब डेढ़ महीने पहले बीमारी दोबारा उभरने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।   ‘महाभारत’ से शुरू हुआ अभिनय का सफर   प्रदीप रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक ‘महाभारत’ से की थी, जिसमें उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया था। इस भूमिका से उन्हें घर-घर में पहचान मिली और आगे चलकर उन्होंने हिंदी के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया।   ‘लगान’ और ‘गजनी’ से मिली खास पहचान   आमिर खान की ‘लगान’ में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। इसके बाद ‘गजनी’ में निभाए गए खलनायक के किरदार ने उन्हें बड़े स्तर पर लोकप्रियता दिलाई। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और निगेटिव किरदारों को अलग अंदाज में निभाने की क्षमता उनकी पहचान बनी। उन्होंने हिंदी के अलावा तेलुगु, तमिल और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी कई यादगार भूमिकाएं निभाईं।   कैंसर से जूझ रहे थे अभिनेता   रिपोर्ट के अनुसार प्रदीप रावत पहले भी कैंसर की बीमारी से उबर चुके थे, लेकिन करीब डेढ़ महीने पहले बीमारी दोबारा सामने आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्लेटलेट्स में गिरावट के बाद उनकी हालत गंभीर होती चली गई और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।   अभिनेता के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। ‘लगान’ और ‘गजनी’ समेत उनकी फिल्मों में काम कर चुके कलाकारों और प्रशंसकों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।

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