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RBI Repatriates 104 Tonnes of Gold

Gold Back to India: विदेशों से 104 टन सोना वापस, रणनीतिक बदलाव के संकेत – क्या है असली वजह?

surbhi मई 2, 2026 0
RBI gold reserves being transported to India as central bank repatriates 104 tonnes from overseas vaults
RBI Gold Repatriation India 104 Tonnes 2026

भारत ने अपने स्वर्ण भंडार को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। Reserve Bank of India (RBI) ने पिछले छह महीनों में करीब 104 टन सोना विदेशों से वापस देश में मंगाया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है।

कितना सोना भारत में, कितना विदेश में?

RBI की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल 880.52 टन सोने में से अब लगभग 77% यानी करीब 680 टन सोना देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है। वहीं, करीब 197.67 टन सोना अभी भी Bank of England और Bank for International Settlements (BIS) के पास रखा हुआ है।

क्यों बदली रणनीति?

पहले भारत सहित कई देश अपने सोने को लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों में रखते थे। इसके पीछे मुख्य कारण थे:

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की खरीद-फरोख्त में आसानी
  • वैश्विक लेनदेन में सुविधा
  • विदेशी संस्थानों पर भरोसा

लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
Russia-Ukraine War और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसी घटनाओं ने देशों को सतर्क कर दिया है। अब सोने को सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा (Strategic Asset) के रूप में देखा जा रहा है।

क्या हैं प्रमुख जोखिम?

  • विदेशों में रखी संपत्ति राजनीतिक कारणों से फ्रीज हो सकती है
  • संकट के समय तुरंत उपयोग में लाना मुश्किल
  • वैश्विक तनाव के कारण भरोसे में कमी

विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ी हिस्सेदारी

सोने की कीमतों में तेजी के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इसकी अहमियत भी बढ़ी है:

  • सितंबर 2025: 97.4 अरब डॉलर
  • मार्च 2026: 115.4 अरब डॉलर
  • हिस्सेदारी: 13.9% से बढ़कर 16.7%

दुनिया में भी बढ़ रहा ट्रेंड

भारत अकेला नहीं है, कई देश इसी राह पर चल रहे हैं:

  • फ्रांस ने 129 टन सोना वापस मंगाया
  • सर्बिया ने पूरा स्वर्ण भंडार देश में शिफ्ट किया
  • जर्मनी भी अपने विदेशी भंडार की समीक्षा कर रहा है

World Gold Council के अनुसार, 2025 तक 59% केंद्रीय बैंक अपना सोना अपने देश में रखना पसंद कर रहे हैं, जो 2020 में 50% था।

क्या संकेत देता है यह कदम?

भारत का यह कदम साफ तौर पर दर्शाता है कि बदलते वैश्विक माहौल में आर्थिक सुरक्षा और स्वायत्तता को प्राथमिकता दी जा रही है। यह सिर्फ एक वित्तीय निर्णय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का हिस्सा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल 2026 पेश
लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 पेश, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किया। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य देश में निवेश को बढ़ावा देना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए टैक्स नियमों में बदलाव करना है।   टैक्स नियमों में बदलाव का प्रस्ताव     प्रस्तावित विधेयक के जरिए टैक्स व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रावधानों में बदलाव किए जाने हैं। सरकार का लक्ष्य टैक्स कानूनों को अधिक अनुकूल बनाना और कारोबार तथा निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान करना है। सरकार का मानना है कि टैक्स नियमों में सुधार से भारत में निवेश का माहौल बेहतर होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।     विदेशी निवेश और फंड मैनेजमेंट पर फोकस     विधेयक में विदेशी निवेश फंडों से जुड़े टैक्स नियमों में भी राहत देने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट के मुताबिक, Eligible Investment Funds (EIFs) के लिए मौजूदा कुछ पात्रता शर्तों को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इन बदलावों का उद्देश्य भारत को वैश्विक फंड मैनेजमेंट के लिए अधिक आकर्षक केंद्र बनाना और विदेशी पूंजी को देश में लाना है।     मैन्युफैक्चरिंग को मिल सकता है प्रोत्साहन     सरकार प्रस्तावित टैक्स बदलावों के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देना चाहती है। टैक्स प्रोत्साहनों के विस्तार से कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने और नए निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।   विधेयक पर संसद में आगे की प्रक्रिया के दौरान इसके प्रावधानों पर चर्चा होगी। इसके बाद ही प्रस्तावित बदलावों के अंतिम रूप और उनके लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Railway Freight

रेलवे की माल ढुलाई में 9% की बढ़ोतरी, जुलाई में 141.3 मिलियन टन माल की ढुलाई

Share Market

शेयर बाजार में चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 211 अंक टूटा; निफ्टी 24,615 के करीब बंद

EPFO वेतन सीमा बढ़ाने से जुड़ी जानकारी

EPFO की बेसिक सैलरी सीमा बढ़ाने की तैयारी, ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो सकती है सीमा

LIC OFS में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से जुड़ी जानकारी
LIC OFS: सरकार बेचेगी 6.5% तक हिस्सेदारी, ₹382 प्रति शेयर तय फ्लोर प्राइस

मुंबई, एजेंसिया। केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए आज, 4 अगस्त 2026, ऑफर फॉर सेल (OFS) शुरू किया है। सरकार शुरुआती तौर पर 2% हिस्सेदारी बेच रही है और मांग के आधार पर अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा गया है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है.   6.5% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी     पूरी तरह सब्सक्राइब होने पर सरकार 6.5% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इस बिक्री से करीब ₹31,410 करोड़ जुटने का अनुमान है। यह LIC की 2022 में शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद सरकार की पहली बड़ी हिस्सेदारी बिक्री होगी.     पहले संस्थागत, फिर खुदरा निवेशकों के लिए मौका     OFS का गैर-खुदरा हिस्सा 4 अगस्त को खुला है, जबकि खुदरा निवेशकों के लिए 5 अगस्त को बोली लगाने का अवसर रहेगा। सरकार का यह कदम LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के नियामकीय लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है.     OFS की खबर से LIC शेयर में गिरावट     सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद LIC के शेयर पर दबाव देखने को मिला। आज शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 8.9% तक गिरकर लगभग चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। सुबह 9:41 बजे तक शेयर करीब 7.28% नीचे ₹397.30 के आसपास कारोबार कर रहा था.   सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से LIC में सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग 3.5% से बढ़कर 10% तक पहुंच सकती है। यह बिक्री बाजार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार को मई 2027 तक न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी संबंधी नियामकीय आवश्यकता पूरी करनी है.

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
NSE क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम

NSE ट्रेडिंग टाइमिंग्स में नया सिस्टम, क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके में बड़ा बदलाव

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी

भारतीय बाजार में FIIs की मजबूत वापसी, जुलाई में विदेशी निवेशकों ने जमकर खरीदे शेयर

उत्तर प्रदेश में नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी सेंचुरी प्लाईबोर्ड्स

यूपी में नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी सेंचुरी प्लाईबोर्ड्स, विस्तार पर कंपनी का बड़ा दांव

त्योहारी सीजन से पहले चीनी और चावल की बढ़ती कीमतें
त्योहारों से पहले महंगाई का झटका, चीनी-चावल की कीमतों में तेज उछाल

नई दिल्ली, एजेंसियां। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले आम लोगों को महंगाई का झटका लगा है। देशभर में चीनी और चावल की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर मानसून, अल-नीनो का असर, जमाखोरी, वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती उत्पादन लागत इसके प्रमुख कारण हैं।   चीनी की कीमतों में 5% से अधिक उछाल     उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चीनी की थोक कीमतें पिछले एक महीने में 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर औसतन 4,593 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई हैं। वहीं खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 47.11 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 49.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। सालाना आधार पर भी चीनी की कीमतों में 7.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।     चावल भी हुआ महंगा     चावल की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत एक महीने में 44.13 रुपये से बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में चावल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे घरेलू बजट और मासिक राशन का खर्च बढ़ गया है।     क्यों बढ़ रहे हैं दाम?     विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक का कम होना तथा गन्ने का इथेनॉल उत्पादन की ओर अधिक उपयोग है। वहीं क्षेत्रीय आपूर्ति में असंतुलन और जमाखोरी ने भी कीमतों को बढ़ावा दिया है。   चावल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, कम वर्षा, उत्पादन प्रभावित होने की आशंका और जमाखोरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इससे खुले बाजार में आपूर्ति कम होने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है।   50% तक महंगा हो सकता है चावल     प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय की एक नीति रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि अल-नीनो के कारण उत्पादन में गिरावट जारी रही और बड़े पैमाने पर भंडारण (स्टॉकिंग) बढ़ा, तो वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।     वैश्विक संकट का भी असर     विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और उर्वरकों की बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन, प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में मौसम संबंधी चुनौतियां और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव भी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।     इलेक्ट्रॉनिक सामान भी हो सकते हैं महंगे     इस बीच, वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। चिली में बाढ़, बर्फबारी और खदानों में उत्पादन प्रभावित होने से तांबे की आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसका असर आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, ऑटोमोबाइल और घरेलू उपकरणों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।   त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य पदार्थों और उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
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सोना-चांदी की कीमतों में उछाल, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से चमकीमती धातुओं में तेजी

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kalpana जुलाई 30, 2026 0

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